Monday, December 29, 2025
दिल्ली का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें, अरावली की लड़ाई जारी रहने की संभावना
श्रीगंगानगर। भारत गण राज्य की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है। वहीं दिसंबर माह के आखिरी दिनों में शीतलहर और कोहरे ने दिल्ली वासियों की मुश्किलों में इजाफा कर दिया है।
नई दिल्ली और उत्तर भारत के अनेक राज्यों में इस समय कोहरे के कारण स्थिति खराब है और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।
दिल्ली का एक्यूआई लेवल अर्थात वायु प्रदूषण खतरनाक स्थिति में है और उसको 300 से ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा था।
श्रीगंगानगर में भी वायु प्रदूषण को कम नहीं आंका जा सकता है।
अरावली को लेकर चिंता बरकरार
राजस्थान, गुजरात और हरियाणा सहित अनेक राज्यों को अपने आगोश में रखने वाली अरावली पर्वतमाला की चिंता लोगों को सता रही है।
राजस्थान में आंदोलन की रुपरेखा तैयार हो गयी थी किंतु उसी समय सरकार ने अपने नियमों में बदलाव कर दिया। अरावली की चिंता इसलिए हो रही है क्योंकि इसमें खनन करने वालों को पट्टेधारी बड़े राजनीतिक नेता है। उन्होंने अपने या अपने मित्रों के नाम पर पट्टे लिये हुए हैं।
अरावली को लेकर एक मंत्री तो अदालत में पेश हो चुका है किंतु उसके बाद सुनवाई तक नहीं हुई। इसलिए अरावली की चिंता सभी लोगों को है।
Sunday, December 28, 2025
पुलिस थाना में पोस्टिंग के बदले अस्मत!
श्रीगंगानगर। पुलिस थाना में पोस्टिंग के बदले अस्मत की मांग किया जाना क्या न्यायोचित है। बीकानेर रेंज में यह सवाल बड़ी शिद्धत के साथ उठाया जा रहा है लेकिन जवाब पीएचक्यू नहीं दे पाया है।
बात पुरानी है लेकिन अब ताजी हो गयी है। एक पुलिस निरीक्षक का कहना है कि उनके एक अधिकारी ने एक महिला को पोस्टिंग देने के बदले में उससे अस्मत की मांग कर ली। इस मामले को लेकर शोर मच गया और अधिकारी ट्रांसफर के साथ अमेरिका चला गया।
वहां पर समय बीताने के बाद अब फिर लौटा तो पुलिस विभाग में सुगमगाहट आरंभ हो गयी है। विभाग में इस तरह से इज्जत की मांग करना बताता है कि बैल्ट की इस नौकरी में कुछ भी सुरक्षित नहीं है और आवाज उठाना भी मुश्किल है।
दो साल से ज्यादा समय के बावजूद अधिकारियों का तबादला नहीं
पुलिस विभाग में एक जिला या एक थाना में नियुक्ति का कार्यकाल 2 साल निर्धारित किया हुआ है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद नियम बनाये गये थे।
अब भी श्रीगंगानगर जिले में अनेक ऐसे अधिकारी हैं जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है लेकिन दबाव की राजनीति के चलते उनका तबादला नहीं हो रहा है।
कई अधिकारी तो पांच-पांच साल जिले में बिता चुके हैं।
ट्रम्प के प्रयास रंग ला रहे हैं, जेलेंस्की के साथ 95 प्रतिशत मसौदे पर सहमति
वाशिंगटन। अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मार ए लागो रिसोर्ट में रविवार दोपहर (लॉकल टाइम) को यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादीमिर जेलेंस्की पहुंचे और ट्रम्प ने उनका स्वागत किया। वार्ता करीबन दो घंटे चली और इसके बाद संयुक्त बयान जारी किया गया।
ट्रम्प और जेलेंस्की दोनों ही इस बात पर सहमत थे कि 95 प्रतिशत मसौदे पर सहमति हो गयी है। पांच प्रतिश क्षेत्र ऐसा है, जिस पर बात को अमल नहीं किया जा सका।
जेलेंस्की से वार्ता करने से पहले ट्रम्प ने क्रेमलिन में राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन से वार्ता की। दोनों नेताओं की बात सवा घंटा या इससे भी अधिक समय तक चली और इसके बाद जेलेंस्की के साथ ट्रम्प रूबरू हुए।
पुतिन और ट्रम्प इस बात पर भी सहमत हुए कि दोनों नेता भविष्य में भी वार्ता को जारी रखेंगे। वहीं मार ए लागो में वार्ता समाप्त होने के बाद कीव और वाशिंगटन का कहना था कि डोनबास को लेकर सहमति नहीं बन पायी है। राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना था कि जितना जल्दी हो सके, समझौता हो जाना चाहिये। हजारों लोग मारे जा चुके हैं। ट्रम्प ने इससे पहले यूएन को भी लपेटे में लिया था और कहा था कि संयुक्त राष्ट्र का अर्थ संयुक्त राज्य अमेरिका हो गया है क्योंकि उन्होंने दुनिया भर में 8युद्ध को समाप्त करवाया है।
ट्रम्प के पास समय देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं?
कीव और क्रेमलिन दोनों ही सीधी बातचीत करने के इच्छुक नहीं थे और दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष पिछले पांच सालों से सीधी बात नहीं कर पाये हैं। राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन का कहना है कि जेलेंस्की को पहले चुनाव करवाने चाहिये क्योंकि उनका राष्ट्रपति पद का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
वहीं डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बनने के बाद 11 माह में लगभग 9 बार पुतिन को फोन कर चुके हैं और एक बार सीधी वार्ता भी कर चुके हैं। बैठकों का दौर चलने के बाद भी कोई खास नतीजा नहीं निकल पाया तो अब ट्रम्प ने यूक्रेन को 20 सूत्री कार्यक्रम दिया था, जिस पर यूरोप और नाटो के अन्य देश भी शामिल थे।
यूरोप को रूस से बड़ा खतरा : अमेरिका
अमेरिका के एक थिंक टैंक की रिपोर्ट और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की माने तो यूरोप को खतरा बढ़ता जा रहा है। हाल फिलहाल कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जा रहा है।
थिंकटैंक का कहना है कि यूरोप यूक्रेन को मदद कर रहा है और इस कारण रूस के साथ उसके संबंध बिगड़ते जा रहे हैं। यूरोप की रक्षा के लिए अमेरिका ने जर्मनी में अपने 18 हजार सैनिक तैनात किये हुए थे जिनको अब अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
दूसरी ओर वेनेजुएला को लेकर भी थिंकटैंक का मानना है कि जिस तरह से यूएसए में तस्करी के लिए वेनेजुएला को जिम्मेदार माना जा रहा है, उसके लिए आवश्यक हो गया है कि ट्रम्प प्रशासन अब अगला कदम उठाया।
दूसरी ओर न्यूयार्क की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प अगले कदम की ओर बढ़ चुके हैं और किसी भी समय जमीनी युद्ध के लिए सेना को भेजा जा सकता है।
पाकिस्तान को अमेरिका देगा आधुनिक रेल इंजन
भारत को जापान ने बुलेट ट्रेन देने का समझौता करीबन 10 साल पहले किया था और अभी तक अहमदाबाद से मुम्बई के लिए इस स्पैशल ट्रेन का संचालन नहीं हो पाया है। वहीं अमेरिका ने पाकिस्तान की मांग पर कहा है कि वह उसको एक आधुनिक बुलेट ट्रेन इंजन देगा। इससे पाकिस्तान में रेल सेवाओं की रफ्तार में वृद्धि होगी।
अंत में एक छोटी कहानी...
एक बार एक राज्य का राजा बीमार हो गया। वह बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था और लम्बी अवधि के लिए वह बिस्तर पर रह गया। इस दौरान उसके सेनापति आदि ने विद्रोह करते हुए राज्य को अपने कब्जे में ले लिया और जब राजा स्वस्थ हुआ तो सेनापति ने राज्य को वापिस देने से इन्कार कर दिया। हालांकि वह जनता में कह रहा था कि जिस दिन राज्य का राजा स्वस्थ होगा, वह अपनी झोली उठाकर चला जायेगा।
इस तरह से कहानी का सांराक्ष यही है कि हमें अपने आप पर यकीन रखना चाहिये और किसी अन्य पर भरोसा कभी भी राजा की तरह भारी पड़ सकता है। किरायेदार मकान मालिक बनने की कोशिश में जुट जाते हैं।
पत्रकार सतीश बेरी का जीवन और आजादी संकट में
इस समय दुनिया भर में इस बात पर चर्चा हो रही है कि आखिर पत्रकार सतीश बेरी का जीवन कितनी अवधि के लिए रह गया है। शिव भक्त और सर्वधर्म का सम्मान करने वाले पत्रकार के खिलाफ इस समय दुनिया के धनाढ्य लोग जिनको हम बिलियनर्स या ट्रिलियनर्स की सम्पत्ति का मालिक कहते हैं, वे गंगानगर में हर रोज कई सौ करोड़ रुपये पहुंचा रहे हैं।
पुतिन-ट्रम्प की वार्ता में क्या रहा, जेलेंस्की मार ए लागो पहुंचे
वाशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सरकारी अवकाश के बीच मास्को के ब्लादीमिर पुतिन से वार्ता की। दोनों शिखर नेताओं के बीच वार्ता में क्या रहा, अभी इसकी जानकारी औपचारिक रूप से नहीं दी गयी है और संभवत: सोमवार शाम तक इस संबंध में यूएसए बयान जारी कर सकता है।
राष्ट्रपति ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच फ्लोरिडा स्थित मार ए लागो में दोनों नेता मिलेंगे। अमेरिका ने यूक्रेन को शांति प्रस्ताव का मसौदा दिया था, जिसमें 90 प्रतिशत मामलों पर दोनों सहमत हो गये थे। 11 माह के बीच दोनों नेता अमेरिका में तीसरी बार मिल रहे हैं।
अमेरिका ने वहीं यह बयान भी जारी किया है कि यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष से मुलाकात से पूर्व ट्रम्प ने मास्को में ब्लादीमिर पुतिन से फोन पर वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच बात रचनात्मक हुई और इससे ट्रम्प काफी अच्छे मूड में नजर आ रहे थे।
रूसी विदेश मंत्री का नया बयान
मास्को के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि रूस किसी भी हमले का विनाशकारी जवाब देगा। वहीं उन्होंने कहा, रूस-युक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए जिस तरह से ट्रम्प प्रयास कर रहे हैं, वह सराहनीय है।
पाक को यूएई से मिला झटका
यूएई के राष्ट्राध्यक्ष दो दिन पहले पाकिस्तान आये थे। प्रोटोकॉल के विपरीत प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि इस्लामाबाद में यूएई के किंग का स्वागत करने के लिए जगह-जगह होर्डिंग्स लगाये गये थे और सडक़ों का नवीनीकरण, सौंदर्यकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये किंतु अरबी नेता ने एयरपोर्ट पर वार्ता के तुरंत बाद ही वापसी कर ली और सारे इंतजाम धरे रह गये। बताया गया है कि सउदी अरब की रणनीति और विदेश नीति उस समय भी काम कर रही थी।
अमेरिका ही अब असली संयुक्त राष्ट्र
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि इस समय जो हालात हैं, उसके अनुसार संयुक्त राष्ट्र का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि उन्होंने दुनिया भर में चल रहे 8 युद्ध को रुकवाया है और यूएन की भूमिका न के बराबर रही।
वहीं उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र को इस समय अपने अस्तित्व और नीतियों पर विचार करना चाहिये।
Saturday, December 27, 2025
डेयरी और कृषि उद्योग स्वदेशी ही रहना चाहिये? फिर किसानों के आंदोलन क्यों, मिलावटी खाद्य पदार्थ कहां तैयार हो रहे हैं?
श्रीगंगानगर। भारत सरकार अमेरिका के साथ कृषि और डेयरी सैक्टर में कोई समझौता नहीं करना चाहता है। इसका एक कारण भी बताया जा रहा है कि नई दिल्ली अपने देश के किसानों की हितों की सुरक्षा करना चाहती है। एक सच यह भी है कि सरकार अनेक फसलों का समर्थन मूल्य तो घोषित करती है किंतु इसमें आधी फसलों की भी खरीद नहीं होती और किसानों को समर्थन मूल्य से कम में फसल का बेचान करना होता है।
चीन और भारत की आबादी लगभग बराबर है। उसकी जीडीपी भारत से ज्यादा है और वहां पर भी खेती के लिए भारत जीतनी ही जमीन है।
भारत सरकार ने 80 से ज्यादा देशों के साथ कृषि क्षेत्र में समझौते किये हैं। इनमें इजरायल, चीन और न्यूजीलैण्ड सहित कई देश शामिल हैं। कीवी न्यूजीलैण्ड का सदाबहार फल है जो भारत के गांव और हर शहर में बिक रहा है। चीन के बीज से तैयार किया गया खीरा भी आम बाजार में आसानी से उपलब्ध है।
नई दिल्ली में मोदी सरकार इससे पहले भी आसियान देशों के साथ कृषि समझौता करने से इंकार कर दिया था। चीन सरकार ने आग्रह भी किया था किंतु सरकार ने इसके बावजूद समझौते में शामिल होने से इंकार कर दिया था। इस तरह से एक बड़े गु्रप के साथ भारत ने कृषि समझौता नहीं किया।
चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा हर साल कई हजार करोड़ रुपये होता है, इसके बावजूद भी वह चीन से आयात करता है। इसी तरह से किसानों को सब्सिडी देकर भी उनको मजबूत किया जा सकता है। अमेरिका और अन्य देश आज भी डब्ल्यूटीओ के बावजूद किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं।
सबसे ज्यादा आंदोलन, समस्या फिर भी कम नहीं होती
दुनिया में सबसे ज्यादा आंदोलन किसानों को करने पड़ते हैं। हाल ही में बैल्जियम, फ्रांस आदि अनेक देशों में आंदोलन हुए। बैल्जियम में तो किसान भारत की तरह ट्रैक्टर लेकर मैदान में आ गये और रास्तों को जाम कर दिया। हजारों लोग सडक़ों पर थे और इनमें महिलाओं की संख्या भी पुरुषों के मुकाबले कम नहीं थी।
इसी तरह से भारत में अनेक आंदोलन दशकों से चल रहे हैं। सूरतगढ़ के टिब्बा क्षेत्र कहे जाने वाले इलाके में सिंगरासर-पल्लू के बीच नहर के निर्माण की मांग की जा रही है और किसानों के साथ घरेलू महिलाएं भी बाजार में लाठियां लेकर आ गयीं। हजारों महिलाओं ने इस आंदोलन में भाग लिया। घड़साना-रावला आंदोलन करीबन पांच साल तक बड़े स्तर पर चला। इस दौरान गोलियों से कम से कम पांच किसानों की मौत हो गयी।
पंजाब के किसान दो साल तक एमएसपी की मांग करते हुए दिल्ली की सर्दी में डेरा जमाकर बैठे रहे। इसके उपरांत एक साल तक हरियाणा सीमा पर आंदोलन किया जिसको शंभू बॉर्डर का आंदोलन कहा जाता है।
अमेरिका से अखरोट आने से भावों पर नियंत्रण होगा
इस समय अनेक कृषि उत्पाद अरब से आ रहे हैं। अरब के देशों के साथ खजूर सहित अनेक उत्पादों के लिए समझौता हुआ है। उस समय भारत के किसान का होने वाला घाटा मोदी सरकार शायद नहीं देख पायी।
अमेरिकी अखरोट जिसको ‘ड्राई फू्रट’ कहा जाता है इसके साथ बादाम आदि भी भारी संख्या में उत्पादित होते हैं और यह उत्पाद पूरे भारत में उत्पादित नहीं होते, इनको विदेशों से भी आयात किया जाता है यहां तक कि पूर्व में पाकिस्तान के कश्मीर से भी लाया जाता था।
जब पाकिस्तान के साथ ड्राई फू्रट पर समझौता हो सकता है तो अमेरिका के साथ किसी बात को लेकर एतराज है।
भारत में मांग के अनुरूप उपलब्ध नहीं है दूध
हर दिन समाचार पत्रों में इस तरह की खबरें प्रकाशित होती हैं कि नकली और रसायनयुक्त दूध बरामद किया गया है। क्रीम, घी, मक्खन, दही और अन्य सामान बरामद किया जाता है। इसका अर्थ साफ है कि मांग के अनुरूप दूध उपलब्ध नहीं है। लोग नकली और जहरीला पदार्थ बनाकर बेच रहे हैं और कमजोर कानून के कारण इस पर कार्यवाही भी नहीं हो पाती। अमेरिका से पूर्व में भी गायों का आयात किया गया था और अमेरिकी गायों का दूध भारतीय गायों से ज्यादा उपलब्ध होता था। इस तरह से डेयरी उद्योग को खोले जाने की मांग सांध्यदीप नहीं बल्कि वक्त कर रहा है। ताकि लोगों को आसानी से घी और दूध जैसे विशेष पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो सकें।
ट्रम्प क्या चीन की यात्रा से पहले भारत आयेंगे, क्वाड की होनी है बैठक, यूएई चीफ शरीफ को कोडिन या शहद पिलाकर गये?
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले माह चीन की यात्रा करेंगे। यह उनकी कुछ ही महीनों में दूसरी एशिया यात्रा होगी। इससे पहले वे यूरोप, मध्य एशिया की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन सवाल यह है कि चीन यात्रा के दौरान वे भारत आयेंगे? क्वाड की बैठक की मेजबानी भारत के पास है। वहीं यूएई के शहंशाह या राष्ट्राध्यक्ष इस्लामाबाद की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ या सेनाध्यक्ष आसिफ मुनीर को कौनसा मंत्र देकर गये हैं।
ट्रम्प ने अनेक बार अपने भाषण में कहा है कि वे चीन की यात्रा जनवरी में करेंगे, हालांकि उनकी यात्रा को लेकर तारीखों का एलान नहीं हो पाया है। दूसरी ओर भारत के पास क्वाड की मेजबानी का अधिकार है। इसमें जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका भी शामिल है।
कैनबरा तो भारत आ सकता है टोक्यो और वाशिंगटन का क्या रुख रहेगा, यह अभी पता नहीं चल पाया है क्योंकि इस समय टोक्यो में नयी सरकार का गठन हुआ है।
ट्रम्प अगर एक बार चीन की यात्रा पूर्ण कर वापिस स्वदेश चले जाते हैं तो अर्थ साफ होगा कि वे नई दिल्ली की यात्रा के इच्छुक नहीं है। ट्रम्प और मोदी के बीच फरवरी-मार्च में ही मुलाकात हुई थी और इसके बाद दोनों राष्ट्राध्यक्ष ने एक-दूसरे से सीधी बात नहीं की है।
जी-20 की बैठक कनाडा में हुई थी, जहां पर ट्रम्प अपना भाषण देते ही निकल गये थे और मोदी उसके बाद आये थे। इसी तरह का दृश्य आसियान देशों के शिखर सम्मेलन में देखने को मिला। अगर क्वाड की बैठक नहीं हो पाती है तो इसका अर्थ यही होगा कि हिन्द-प्रशांत महासागर को लेकर अमेरिका नयी रणनीति बना रहा है या बन चुकी है।
वाशिंगटन अभी अनेक मुद्दों को दुनिया के सामने नहीं ला रहा है। आज रात करीबन वे 1 बजे यूरोप नेताओं की मौजूदगी में यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष ब्लादीमिर जेलेंस्की से फोन पर वार्ता करेंगे और इसके बाद उनका अपने आवास पर जेलेंस्की से सीधी वार्ता का आयोजन है। यह कार्यक्रम रविवार को होगा।
आसिफ मुनीर क्या शाहबाज की बातों से सहमत होंगे?
पाकिस्तान ऐसा देश है, जहां पर सेना का महत्व सबसे ज्यादा है। जो नेता पसंद नहीं आया, उसको जेल भी भेज दिया जाता है। इसी तरह से मुनीर इस समय सबसे ज्यादा प्रभावशाली व्यक्तित्व पाकिस्तान में बन चुके हैं क्योंकि उनको नये नयी शक्तियां सरकार ने प्रदान की हैं।
मुनीर इस समय यूरोप और अमेरिकी देशों के सम्पर्क में हैं। वाशिंगटन भी उनकी तारीफ कर रहा है। इस बीच नया ट्वीस्ट आया जब यूएई के राष्ट्राध्यक्ष इस्लामाबाद की पहली औपचारिक वार्ता पर पहुंच गये। शाहबाज शरीफ को तो वे अपनी बातों में ला सकते हैं किंतु सैनिक नेता आसिफ मुनीर को शाहबाज शरीफ अपनी शर्तों के आधार पर मना सकेंगे। इस तरह से यह चर्चा चल रही है कि इस समय कोडिन या शहद मिला है पाकिस्तान को।
Friday, December 26, 2025
दिल्ली फिर से दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी, सउदी के बाद अमीरात क्यों दिखा रहा है पाक में रुचि, ट्रम्प ने कहा-पुतिन से जल्द करेंगे बात, भारत नहीं खोलेगा डेयरी सैक्टर यूएस के लिए
श्रीगंगानगर। दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी का तगमा अगर दिया जाना है तो वह दिल्ली है। शुक्रवार 27 दिसंबर 2025 को उसका एक्यूआई लेवल 600 को पार कर गया था। ओटीओ सहित कई इलाके ज्यादा प्रभावित थे। वहीं श्रीगंगानगर व जालंधर में आईक्यू लेवल में ज्यादा अंतर नहीं था। दूसरी ओर सउदी के राष्ट्राध्यक्ष की पाकिस्तान यात्रा क्या कहती है, इस पर भी दुनिया की नजर है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर कहा है कि वह यूक्रेन में शांति बनाने के लिए रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन से फिर से वार्ता कर सकते हैं। इस समय यूएसए में नये साल का जश्र मनाया जा रहा है किंतु ट्रम्प रविवार को अवकाश के दिन भी यूक्रेन के व्लादीमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। मीडिया से बातचीत में राष्ट्रपति जेलेंस्की का कहना था कि अमेरिका ने जो प्रस्ताव दिया था, 90 प्रतिशत उस पर सहमति बन चुकी है।
वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, जो भी निर्णय होगा, उसका फैसला वे करेंगे न कि कीव। पिछले चार सालों से यूक्रेन और रूस का युद्ध चल रहा है और अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार हर दिन अनेक लोग मर रहे हैं। जिस दिन युद्ध आरंभ हुआ था, उस दिन पाक प्रधानमंत्री इमरान खान रूस में थे और उन्होंने इस युद्ध की प्रशंसा की थी और कुछ ही दिनों के भीतर उनको अपदस्थ कर जेल भेज दिया गया।
राजधानी दिल्ली का एक्यूआई 600 के पार, श्रीगंगानगर में ओरेंज अलर्ट
राजधानी नई दिल्ली का एक्यूआई इस समय 600 को पार कर गया है और जो बताता है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर कहां तक पहुंच गया है। इतने प्रदूषण में सांस लेना भी दूभर हो रहा है। दिल्ली प्रदूषण पर स्थानीय उच्च न्यायालय ने जीएसटी परिषद को आदेश दिया था कि वह जल्द ही बैठक कर एयर प्यूरीफायर को सस्ता करे। हालांकि हाइकोर्ट के आदेशों के बाद भी अभी तक बैठक निर्धारित नहीं हो पायी है।
दिल्ली इस समय दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बन चुकी है। एक्यूआई का लेवल 600 को पार कर जाने के कारण लोगों को चिंता हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राजधानी के वायु गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील पर नहीं बन रही बात
संयुक्त राज्य और भारत सरकार के बीच ट्रेड डील को लेकर बात नहीं बन पा रही है। यूएसए ने जो प्रतिबंध लगा रखे हैं उसका असर सीधा रुपये की कीमत पर पड़ रहा है जो 90 के आसपास अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है।
अगर मीडिया रिपोर्ट पर यकीन किया जाये तो सामने आ जाता है कि भारत अपने डेयरी उद्योग को अमेरिका के लिए नहीं खोलना चाहता है। इससे दुधारू पशुओं और दूध का व्यापार दोनों देशों के बीच नहीं हो पा रहा है। अमेरिका ने ट्रेड डील नहीं होने के कारण भारत पर 50 प्रतिशत आयात टैक्स लगाया हुआ है जो भारत के निर्यातकों के लिए परेशानी का एक कारण बना हुआ है।
अमीरात के किंग पाकिस्तान पहुंचे
संयुक्त अरब अमीरात के किंग गुरुवार को एक दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंच गये। हालांकि औपचारिक रूप से उनकी यह पहली पाक यात्रा है किंतु अनौपचारिक रूप से वे 2025 में ही दो बार इस्लामाबाद की यात्रा कर चुके हैं।
यूएई और सउदी अरब के बीच रिश्तों को मजबूत नहीं माना जाता है। अरब ने इस साल पाक के साथ नाटो जैसा समझौता किया था जिसमें दोनों देश एक देश पर हुए आक्रमण को दूसरे देश पर मानेंगे।
इसके बाद ही सेना प्रमुख आसिफ मुनीर को बड़ा पद दिया गया है और उनको फील्ड मार्शल सहित अनेक शक्तियां प्रदान कर दी गयी हैं। इसके लिए शरीफ सरकार ने संविधान में भी संशोधन कर दिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी पाक सेना प्रमुख की काफी तारीख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर की है। इस तरह के दृश्यों के बीच में यूएई के राष्ट्राध्यक्ष का इस्लामाबाद आना इस बात का संकेत देता है कि वह अमेरिका और सउदी का प्रभाव कम करना चाहता है।
भारत और यूएई के बीच रिश्ते काफी मजबूत हैं। जबकि अमेरिका के साथ इस तरह का रिश्ता नहीं है। भारत के प्रमुख व्यापारी यूएई में ही है और वहां पर प्रवीण अडाणी भारत को अनेक सामान निर्यात करते हैं। दुबई में चलने वाले डिब्बा ट्रेडिंग में भी उनकी भागीदारी मानी जाती है।
Thursday, December 25, 2025
ट्रम्प का नाइजरिया पर हमला, नेतनयाहू ट्रम्प से 29 का मिलेंगे
श्रीगंगानगर। इजरायल के प्रधानमंत्री को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार पुन: याद किया है। दोनों नेता 29 दिसंबर को व्हाइट हाउस में मुलाकात कर सकते हैं। वहीं ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेट फार्म पर बताया है कि उनके आदेश पर सेना ने उत्तर पूर्व नाइजरिया पर हमला किया है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर लिखा है कि चीफ कमांडर के रूप में उन्होंने सेना को नाइजरिया के उत्तरपूर्व पर हमला करने का आदेश दिया था क्योंकि वहां पर अमेरिकंस या ईसाई समुदाय के लोगों का नरसंहार हो रहा था। उन्होंने कहा कि कार्यवाही काफी बड़ी थी और अनेक लोग मारे गये हैं।
वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू आगामी 29 दिसंबर को अमेरिका जा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनको याद किया है।
दूसरी ओर अमेरिका के आईसीई एजेंसी ने अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेना आरंभ कर दिया है और यह कार्यवाही बड़े स्तर पर हो रही है। सैकड़ों अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिये जाने की जानकारी दी गयी है।
Wednesday, December 24, 2025
डेनमार्क क्यों नहीं बेचना चाहता ग्रीनलैण्ड, अब अडाणी समूह में निवेशकों का विश्वास कम
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति चाहते हैं कि डेनमार्क अपना ग्रीनलैण्ड द्वीप संयुक्त राज्य को सौंप दे क्योंकि यूएसए को अपनी सुरक्षा को मजबूती प्रदान करने के लिए इस टापू की आवश्यकता है। वहीं अन्य समाचारों में सामने आ रहा है कि अडाणी समूह अब उतना लोकप्रिय नहीं रहा, जो 2024 में निवेशकों के लिए था।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने अलास्का स्टेट को रूस से खरीद लिया था और इस तरह से इसमें 50 राज्य हो गये थे। अलास्का मास्को की सीमा से चिता हुआ इलाका है। हाल ही में जब राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने अमेरिका की यात्रा की थी तो वे अलास्का ही पहुंचे थे, जहां उनकी मेजबानी डोनाल्ड ट्रम्प ने की थी।
अपने दूसरे टर्म का कार्यकाल 21 जनवरी को संभालते ही ट्रम्प ने ग्रीनलैण्ड के प्रति अपनी रुचि को प्रदर्शित किया था। कुछ समय के लिए उन्होंने इस टापू के लिए कोई बयान नहीं दिया किंतु करीबन 10 माह बाद उन्होंने ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करने के लिए अपना एक विशेष प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया है जो संबंधित पक्षों से वार्ता कर इस मामले का हल निकालेंगे।
अडाणी समूह के प्रति विश्वास कमजोर हुआ
एक वर्ष पहले तक गौतम अडाणी समूह निवेशकों के लिए पंसदीदा था। सरकारी कंपनियां भी पीएमओ से मिलने वाले इशारों के आधार पर इन कंपनियों में निवेश करती थीं। अपोलो हॉस्पीटल, अडाणी इंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों के शेयरों में वह तेजी अब नहीं रही है।
अमेरिका में मुकदमा दर्ज होने और इसके बाद विदेशी वित्तीय एजेंसियों ने अडाणी समूह को नये ऋण देने के लिए रुचि नहीं दिखायी थी।
दूसरी ओर एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथम 1000 शेयर्स वाली कंपनियों में वह तेजी नहीं रही। वहीं स्मॉल कैप वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट को दर्ज किया गया है। वहीं बीएसई का सूचकांक 85 हजार के अंकों को छू चुका है। दूसरी ओर रुपया 90 रुपये के आसपास बना हुआ है।
सूचकांक में बढ़ोतरी के बावजूद अगर स्मॉल कैप और अन्य समूह के शेयर्स में तेजी नहीं आयी तो इसका कारण क्या रहा? यह जांच का विषय बनता जा रहा है।
पांच हजार करोड़ की जीडीपी वाला वेनेजुएला कब तक अमेरिका का सामना कर पायेगा? अरावली को संरक्षित के आदेश जारी
श्रीगंगानगर। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था अर्थात जीडीपी की वैल्यू एज पर गूगल 5 हजार करोड़ डॉलर की है। वहीं अमेरिका रक्षा या युद्ध बजट पर ही हर साल एक ट्रिलियन डॉलर खर्च करता है जो भारत जैसे विशाल देश के लिए भी दो साल के कुल बजट के बराबर है।
वेनेजुएला ने मधुमक्खी के घर को छेड़ दिया है। उसी तरह से जैसे यूक्रेन ने नाटो सदस्य बनने के लिए प्रयास किये और आज उसकी हालत यह है कि वह न तो खुदा मिला और न मि
साले सनम, जैसी स्थिति का सामना कर रहा है।
निकोलस मादुरो के साथ ट्रम्प के पहले कार्यकाल में भी नहीं बन पायी थी और इस साल भी यही हाल रहा। वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगे हुए हैं।
अरावली के खिलाफ आंदोलन आरंभ होने से पहले सरकार बैकफीट पर
राजस्थान में अरावली पर्वतमाला में खनन को लेकर चल रही कोशिशों के बीच केन्द्र सरकार ने एक आदेश जारी कर नये पट्टे जारी करने पर सभी राज्य सरकारों को रोक लगाने के लिए कहा है।
अरावली पर्वतमाला हरियाणा, राजस्थान और गुजरात राज्य तक है। इस तरह से राजस्थान में इसका बड़ा भूभाग है। राजस्थान में अरावली बचाओ आंदोलन आरंभ हो गया था और लोग पैदल ही दिल्ली की ओर कूच करने के लिए घरों से निकल पड़े थे।
अब शांत होने की उम्मीद है।
आईएसआईएस अब एक आतंकवादी संगठन बनकर रह गया
आईएसआईएस जो इस्लामिक राज्य की स्थापना के इरादे से सीरिया और इराक में सक्रिय था। इस आतंकवादी संगठन की जड़े अब समाप्त हो रही हैं और यह अफगानिस्तान व इराक के रेगिस्तान तक ही सीमित होकर रह गया है। काबुल में आईएसआईएस और तालिबान के बीच भी हिंसक घटनाओं के समाचार आते रहते हैं। अमेरिका सरकार का कहना है कि इस आतंकवादी संगठन की जड़ों को हटा दिया गया है।
अमेरिका ने मिसाइल दागी, भारत ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया
लाल सागर में स्थित ओमान स्टेट की रणनीति किसी को समझ नहीं आयी है। हाल ही में पीएम नरेन्द्र मोदी ने ओमान की यात्रा की। भारत गणराज्य की सरकार और ओमान दोनों ही आपसी विश्वास को मजबूत करने पर सहमत हो गये।
दूसरी ओर यह भी याद रखना होगा कि 21 जनवरी को कार्यभार संभालने के बाद ही हिजबुल्लाह को समाप्त करने के लिए अमेरिकी सेना ने ओमान पर हमला कर दिया था। इससे काफी नुकसान होने के समाचार सामने आये थे।
जापान भारत को क्यों नहीं दे रहा बुलेट ट्रेन?
भारत गणराज्य की सरकार ने करीबन 10 साल पहले अहमदाबाद से मुम्बई तक बुलेट टे्रन के लिए जापान सरकार के साथ समझौता किया था। संबंधित रेल मार्ग पर ट्रैक तैयार हो चुका है लेकिन अभी तक जापान से बुलेट ट्रेन नहीं आ पायी है। अहमदाबाद से मुम्बई तक करीबन 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यह ट्रेन सफर करेगी।
जापान ने जिस समय समझौता किया था उस समय शिंजो आबे प्रधानमंत्री थे और उनकी हत्या भी हो चुकी है। इसके बाद अनेक सरकार के मुखिया बदल गये। मौजूदा महिला प्रधानमंत्री अभी तक भारत यात्रा पर नहीं आयी हैं। पीएम मोदी ने जब इसी साल जापान में प्रवास किया था, उस समय भी प्रधानमंत्री भी अब पूर्व हो चुके हैं।
Tuesday, December 23, 2025
ट्रम्प की नीति में फिर से बदलाव-ग्रीनलैण्ड की 10 माह बाद मांग, बांग्लादेश में हिंसा-पश्चिम बंगाल में चुनावी मुद्दा
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीति में एक बार पुन: बदलाव देखने को मिला है और मंगलवार को अचानक ही उन्होंने 10 माह बाद ग्रीनलैण्ड का मुद्दा फिर से दुनिया के सामने पेश कर दिया। वहीं बांग्लादेश में हो रही हिंसा का लाभ सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को मिलने की संभावना बन गयी है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने 21 जनवरी 2025 को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही ग्रीनलैण्ड का मुद्दा दुनिया के सामने पेश कर दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने टैरिफ को अपना हथियार बनाया और यूरोप, भारत, जापान, चीन सहित कई देशों पर टैरिफ लगा दिया। यूरोप, जापान, चीन आदि के साथ समझौते हो गये हैं।
भारत के साथ ट्रेड डील पर वार्ता रूकी हुई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दावा कर रहे थे कि नवंबर तक दोनों देश आपसी ट्रेड को फिर से बिना टैरिफ के आरंभ कर सकेंगे। नवंबर माह चला गया। दिसंबर माह भी जाने वाला है और 23 तारीख हो चुकी है, लेकिन कहीं भी ट्रेड डील नजर नहीं आयी।
यूएसए इस समय भारत से आयात किये जाने वाले सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रहा है और इस कारण रुपये की कीमत भी कमजोर हो रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया 90 रुपये के आसपास बना हुआ है। वस्त्र और गहने अमेरिकी-भारतीय मांग करते थे और अब इस पर टैक्स लगने के कारण निर्यातक अन्य रिसोर्स देख रहे हैं।
टैरिफ के बाद अब अचानक ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने फिर से ग्रीनलैण्ड का मुद्दा उठा दिया है और कहा है कि वह इस भूमि को प्राप्त करना चाहता है। हालांकि ट्रम्प ने अभी तक भूमि प्राप्ति के लिए सैन्य बल का जिक्र नहीं किया है।
इससे पहले वे मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर यूएसए की खाड़ी कर चुके हैं। ट्रम्प का कहना था कि वह पहले यूएसए का ही भाग था और इसे पुन: प्राप्त कर लिया गया है।
आरबीआई क्यों कहता है, रुपये की कमजोरी से चिंता नहीं
भारत सरकार ने हाल ही में संसद में कहा है कि वह कुछ अनुपूरक मांगों को पूरा करवाना चाहता है अर्थात निर्धारित बजट में बदलाव हुआ है। संसद से इसको पारित कर दिया गया। सरकार को बजट घाटा पूरा करने के लिए अतिरिक्त नोट की आवश्यकता होगी, वह नोट छापेगा। हाल ही में रुपया 91 रुपये को पार कर गया और इसको वापिस 90 या इसे नीचे लाने के लिए अतिरिक्त डॉलर को बाजार में उतारा गया।
भारत में अमेरिकी आईटी सैक्टर की कंपनियों ने नये निवेश का एलान तो किया है किंतु अभी वह हकीकत नहीं बन पाया है। इस तरह से डॉलर मांग के अनुरूप उपलब्ध नहीं हो रहा और रुपया इसके मुकाबले कमजोर होता जा रहा है।
बांग्लादेश की हिंसा से मोदी की भाजपा को लाभ?
बांग्लादेश में एक बार पुन: हिंसा हो रही है। दो आंदोलनकारी नेताओं की गोली मारकर हत्या कर दी गयी है। इसके बाद माहौल वहां पर खतरनाक हो गया है। भारतीय मीडिया का दावा है कि बांग्लादेश में हिंसा के कारण हिन्दुओं को कत्ल किया जा रहा है और उनको भगाया जा रहा है।
भारत के पूर्वी दिशा के पड़ोसी देश में हिंसा के कारण मंगलवार को आरएसएस की विभिन्न शाखाओं वीएचपी, बजरंग दल आदि ने देश भर के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन किये और आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। इससे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक बार पुन: तनाव की चरम सीमा पर पहुंच गये हैं। दोनों देश एक-दूसरे के राजदूत को बुलाकर अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं।
वहीं बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बांग्लादेश में हिंसा के बाद भारतीय जनता पार्टी की शक्ति वहां पर मजबूत होने की संभावना जतायी जा रही है। बंगाल में घुसपैठ को मुद्दा बनाया जा रहा है और इस तरह से चुनाव से पूर्व का माहौल गर्म बना हुआ है।
गंगनहर में पानी दिया जाये
राजस्थान के गंगानगर जिले की जीवनदायनी कहलाने वाली गंगनहर में पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है और किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि एक हफ्ते के भीतर पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाया जा सके। पानी की कमी के कारण बाग उजड़ रहे हैं। किसान नेता राजेन्द्र सिंह राजू, संतवीर सिंह आदि ने गत दिवस एक व्हाइट पेपर दिया था जिसमें लिखा कि किसान मर रहा है।
निकोलस मादुरो को कहा गया, वे सत्ता से हटा जायें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने निकोलस मादुरो के वेनेजुएला को लेकर फिर से बयान जारी किया है। मादुरो को चेतावनी दी गयी है कि वह सत्ता से हट जाये और नये सिरे से चुनाव करवाये जाएं।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने मार ए लागो रिजोर्ट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि मादुरो को सत्ता से हट जाना चाहिये। राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर नेवी ने चारों दिशाओं से वेनेजुएला को घेरा हुआ है और वहां पर किसी भी मालवाहक जहाज को तेल लेकर नहीं जाने दिया जा रहा है।
भारत सरकार भी वेनेजुएला से ऑयल खरीदती आयी है। इससे भारत को भी सस्ता तेल अब शायद उपलब्ध नहीं हो पाये। इससे पहले अमेरिका ने रूस पर भी प्रतिबंध लगाये थे और भारत-चीन को तेल नहीं देने के लिए कहा था।
Monday, December 22, 2025
ट्रम्प ने नये युद्धपोत निर्माण को दी मंजूरी, पाकिस्तान की सेना को बॉर्डर पर तैनाती के इशारे, फील्ड मार्शल चेयर ऑफ चीफ की कुर्सी पर, पीएम शाहबाज शरीफ साइडलाइन
श्रीगंगानगर। उदारवाद या आर्थिक दौर से बाहर आकर दुनिया अब वल्र्ड वॉर 3 की ओर बढ़ रही है? हर देश नये हथियार खरीद के लिए प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान ने लेबनान को हथियार देने का निर्णय लिया है तो भारत गणराज्य की सरकार ने श्रीलंका को 45 मिलियन डॉलर की सहायता देने का एलान मंगलवार को किया है।
अमेरिका अब नये युद्धपोत को तैयार कर रहा है। इस युद्धपोत को निर्धारित सीमा में सेना को सौंपने के लिए अधिकारियों को चेतावनी दी है। साफ कहा गया कि अगर देरी होती है तो अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार माना जायेगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘ट्रम्प क्लॉस’ को संबोधित करने वाले युद्धपोत का नामकरण किया है। इससे पहले वे दुनिया को बता चुके हैं कि अमेरिका छठी पीढ़ी के विमान को तैयार कर चुका है जो अभी तक दुनिया के समक्ष पेश नहीं किया है। यह सरप्राइज है जो समय आने पर दुनिया के सामने प्रकट होगा।
राष्ट्रपति को पीस प्रेजीडेंट के नाम से दुनिया में संबोधित किया जा रहा है और उन्होंने 70 बार या इससे भी कहीं ज्यादा बार भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा करते हुए शाबाशी ली है।
वहीं पाक के फील्ड मार्शल आसिफ आमीर की फोटाज और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें एक बैठक की अध्यक्षता वे कर रहे हैं और प्रधानमंत्री ऐसे स्थान पर बैठे हैं, जहां वे किसी को दिखाई नहीं दे रहे हैं।
वहीं पाक आर्मी ने लेबनान को हथियार देने की घोषणा की है। यह हथियार आर्मी अपने कारखानों में निर्माण करती है।
जिस तरह से बैठक में जनरल दिखाई दे रहे थे, उससे साफ था कि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ युद्ध के लिए स्वयं को तैयार कर रही है और मनोबल बढ़ाने के लिए दावा किया गया कि भारत के हथियारों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था।
भारत की सेना भी तैयार
भारतीय सेना के सीडीएस का कहना है कि भारत दीर्घावधि व छोटी अवधि के दोनों तरह के युद्ध के लिए स्वयं को तैयार कर चुका है।
उल्लेखनीय है कि मई माह में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित युद्ध हुआ था और दोनों देशों ने एक दूसरे के विमान को गिराने का दावा किया था।
दिल्ली से भी खराब गंगानगर का मौसम, स्मॉग से बुरा हाल
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर का मौसम दिल्ली से भी ज्यादा खराब बताया जा रहा है। दिल्ली में एक्यूआई का लेवल 351 है तो जिला मुख्यालय पर इसका स्कोर 354 है। शासन, प्रशासन, पुलिस और अन्य वर्ग सभी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार श्रीगंगानगर को आज प्रात: काल से ही काली घटाओं, स्मॉग ने घेरा हुआ था। शीतलहर के कारण लोगों का बुरा हाल है। दो दिनों से मौसम बहुत ज्यादा खराब होने के कारण लोग घरों से भी कम निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
वायु प्रदूषण के कारण हैल्थ डिपार्टमेंट भी लोगों को सावधान रहने के लिए कह रहा है।
वहीं समाचारों में जानकारी दी गयी है कि उत्तर भारत में चल रही ठण्डी हवाओं से पूरा इलाका प्रभावित हो रहा है।
यह समाचार नहीं, हकीकत है-हिजबुल्लाह के पास है आपके बच्चों की तकदीर व्लादीमिर पुतिन, ओबामा, क्लिंटन, मोदी, यूरोपीय नेता कर रहे हैं आर्थिक मदद
स्पष्टीकरण : एपस्टीन की फाइलों से कुछ नहीं मिलने वाला था, वह मुख्य मुद्दों से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए एक सरकारी कला थी और आखिर में हो हल्ला के बाद भी कुछ सामने नहीं आया। जबकि यह एक सच्चा समाचार है जो पूरी दुनिया को हिलाकर रख देगा।
सतीश बेरी
श्रीगंगानगर। हिजब्बुलाह नामक अंतरराष्ट्रीय संगठन, जिसका मुख्यालय अमेरिका में स्थापित है और वह दुनिया का सबसे अमीर संगठन है। हमास और न जाने कितने आतंकी संगठनों को वह आर्थिक सुविधा प्रदान कर रहा है। हैरानीजनक बात यह भी है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जापान की सरकार, रूस के व्लादीमिर पुतिन, अमेरिका के बराक ओबामा, स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क और यूरोप के अनेक नेता इस पूरे योजनाबद्ध तरीके से आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।
कुछ वर्ष पूर्व एक हिन्दी सिनेमा में फिल्म आयी थी, जिसमें सदाशिव अमरापुकर एक विलेन की भूमिका में थे और उनका एक डॉयलोग बहुत सालों तक याद रहा था। उसके बोल थे, ‘अमेरिका-रूस ने मांगा मेरा भेजा, जापान ने कहा दूंगा पौने तीन करोड़ देदे तेरा भेजा, मैंने कहा, नहीं दूंगा मेरा भेजा। बहुत कीमती है मेरा भेजा।’
परदेशी के जीवन को बनाया गया टारगेट
भारत देश में एक परदेसी भी है जो तीसरी दुनिया से आया है जिसको एलियन कहा जा रहा है। परदेसी को लेकर कई फिल्मों का निर्माण हुआ। एक गीत भी काफी ख्याति प्राप्त करने वाला रहा, तुम तो ठहरे परदेसी, सुबह वाली गाड़ी से अपने घर को लौट जाओगे...।
हमारी इस दुनिया में एक परदेसी भी है, यह खुलासा डोनाल्ड ट्रम्प की सलाहकार इवांका ट्रम्प ने 2019 में किया। इसकी जानकारी धीरे-धीरे पूरी दुनिया तक पहुंच रही है। बैल्जियम, फ्रांस सहित कई देशों में तो हालात यह है कि ट्रैक्टर लेकर किसान मुख्य मार्गों को बंद कर आंदोलन कर रहे हैं। भारत में भी अनेक राज्यों में किसान आंदोलन के समाचार आ रहे हैं।
इस परदेसी के जीवन को टारगेट किया गया। शुरुआत जो हुई, वह 1998 से थी। अमेरिका, रूस और जी-7 के सदस्य देश जिसमें जापान भी शामिल है, ने एक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया। कुछ ही समय में स्पेस एक्स सहित कई कंपनियों को सहयोगी के रूप में शामिल कर लिया गया।
इस तरह से अंतरिक्ष एजेंसियों के माध्यम से राजनेताओं ने अपनी कमाई आरंभ कर दी। यह इस तरह का खेल था, जैसे स्पा सेंटर के नाम पर वेश्यावृत्ति का खुला होने के समाचार आते हैं। होटल्स में गैम्बलिंग का धंधा चलने की खबरें आती हैं। उसी तरह से इस सरकारी कार्यक्रम को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया और इसके साथ ही सूर्यवंशी अथवा आईवीएफ संतानों के बारे में प्रचार आरंभ हो गया और लोग विभिन्न संस्थानों की ओर भागने लगे। किसी को 170 आईक्यू लेवल का बच्चा मिला तो किसी को 70 आईक्यू वाला।
किसी को पुत्र मिला तो किसी को पुत्री। इस तरह से यह धंधा चल रहा था और आज भी चल रहा है। जो राजनेता या बड़े व्यापारी हैं, उन्होंने बच्चों के नाम का भी पैंटेंट करवाना आरंभ कर दिया।
यह शायद आदि दुनिया को मालूम नहीं होगा कि इस समय पैटेंट का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है और बच्चों के नाम का भी इसी तरह का धंधा चल रहा है। कई लोगों ने डर कर अपने बच्चों का नाम अरबी में दे दिया।
किस क्षेत्र में कैसा मौसम रहेगा, यह भी स्पेस स्टेशन में बैठे लोग तय कर रहे हैं। हालांकि इसका कमांडिंग कंट्रोल जमीन पर विभिन्न स्थानों पर है।
आप क्या कर रहे हैं। आप क्या खा रहे हैं। आपका मूड स्विंग कैसे किया जाना है। कैसे आपको अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट्स तक लेकर जाना है। यह सब तय किया जाता है।
परदेसी और उसका जीवन
परदेसी का जीवन तो स्ट्रगल में ही बीतता चला गया। विभिन्न सरकारें उस परदेसी की सम्पत्ति का दोहन तो कर रहे हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापारियोंं के दबाव में उसको वह मान-सम्मान, प्रतिष्ठा हासिल नहीं हो पायी, जो हासिल की जानी चाहिये थी।
अब बड़ा सवाल सामने आता है कि जिन लोगों ने आईवीएफ तकनीक से संतान को प्राप्त किया, अब उनके जीवन पर भी संकट गहरा रहा है। जिन लोगों ने अपने बच्चों का नाम पैटेंट करवाया हुआ है, वे निरोगी और अधिक कुशल होंगे किंतु जिनका पैटेंट नहीं हुआ, उनके जीवन से रक्त का संचार का रुख अपनी तरफ किया जा सकता है।
मोदी सरकार-2.0 में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने लोकसभा में खुलासा किया था कि राजस्थान में खून की खेती हुई है। एक केबिनेट मंत्री के बयान को हटा दिया गया क्योंकि यह सीधे तौर पर उस समय सभापति और पीएम नरेन्द्र मोदी सहित अनेक नेताओं को घेर रहा था।
उनके बयानों के साथ-साथ हमें कई ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों या फोरम के जारी बयानों को भी पढ़ा, जिसमें यह साफ कहा गया है कि जिनके ब्लड में हेमोग्लोबिन के साथ सी का मॉड्यूल होगा, उनके रक्त का इस्तेमाल आगामी अवसरों पर इस्तेमाल किया जायेगा। विश्व स्तर पर जो पेरिस समझौता हुआ, उसमें भी एक घोटाले वाले संकेत मिले हैं।
एलन मस्क सबसे बड़ा व्यापारी
इस समय दुनिया में एलन मस्क, जेफ बेजोस आदि की सम्पत्ति को लेकर चर्चा हो रही है। एलन मस्क के नेतृत्व वाले समूह ने इस पूरी कमान को संभाला हुआ है और हिजबुल्लाह नामक संगठन को अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।
इसी कारण हमास और लश्करे तैयबा जैसे संगठन सामने आये हैं। अमेरिका के भीतर ही आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया और कोई सरकारी कार्यवाही नहीं हुई तो इसका एक कारण यह भी था कि भारत सरकार के प्रधानमंत्री, रूस के राष्ट्रपति, अमेरिका में 2024 से पूर्व के राष्ट्रपति, जी-7 के अनेक नेताओं को इसके बदले में बड़ी रकम प्राप्त हो रही है। बिल गेटस का भी नाम एड किया जा सकता है। भारत में तो गौतम अडाणी, मुकेश अम्बानी और टाटा जैसे समूह पर पूर्व में संदेह जताया जाता रहा है कि वे लीक से हटकर काम कर रहे हैं।
Sunday, December 21, 2025
यूरोप में क्यों नहीं मनाया जा रहा क्रिसमिस, ऑस्ट्रेलियाई पीएम का विरोध क्यों हुआ? रेड फोर्ट पर हमले पर चुप्पी क्यों?
श्रीगंगानगर। क्रिसमिस का पर्व अब चार दिनों की दूरी पर है किंतु यूरोप और ऑस्ट्रेलिया इस त्योहार को सरकारी तौर पर नहीं मना रहा है। सभी कार्यक्रम रद्द किये जा रहे हैं। वहीं कंगारू पीएम को अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ा। वे बांडी बीच के पीडि़तों के लिए आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। दूसरी ओर भारत सरकार की आर्थिक नीतियों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
पश्चिमी देशों में क्रिसमिस का पर्व 25 दिसंबर को हर साल मनाया जाता है। इन देशों में सरकारें अपने देश के लोगों के लिए सरकारी स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित करती हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन सहित अवकाश भी घोषित करती हैं। इस तरह से दुनिया भर में 250 करोड़ या इससे भी अधिक लोग पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं। सांता क्लॉज के लिए भारत में भी स्कूली बच्चों का चयन किया जाता है। वैश्विक स्तर पर सभी धर्मों का आदर करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया, जर्मन और फ्रांस ने अपने स्टेट में सरकारी कार्यक्रमों को निरस्त कर दिया है। यह संभवत: पहला मौका है जब इस तरह का निर्णय लिया गया है। यूरोप के अन्य देशों में इस तरह के निर्णय लेने पर विचार किया जा रहा है।
पश्चिमी राज्यों में इस समय ‘मानवाधिकार और किसान’ समर्थक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया में यहूदी लोगों पर गोलियां बरसाकर की गयी जघन्य हत्याओं के लिए भी लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस आतंकवादी हमले में 12 लोगों की मौत होने की जानकारी मीडिया रिपोर्ट में दी गयी थी।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बोनीज आज रविवार को ऑस्ट्रेलिया की बॉण्डी बीच पर हुए आतंकवादी हमलास्थल पर शोक व्यक्त करने के लिए गये थे कि वहां पर मौजूद भीड़ में प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं विपक्षी नेता के समर्थन में नारे लगाये गये। विपक्षी नेता का कहना था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो निश्चित रूप से दो राज्यों के आदेश को पलट देंगे।
यूरोप के अनेक देशों में मानवाधिकार और किसान समर्थक आंदोलन हो रहे हैं। हजारों नहीं बल्कि लाखों या इससे भी कहीं ज्यादा लोग सडक़ों पर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
पूरी दुनिया में एक आवाज सुनाई दे रही है। अगर भारत की चर्चा की जाये तो यहां पर भी पंजाबी लोग आंदोलन कर रहे हैं। इनमें अधिकांश या यूं कहें कि 90 प्रतिशत पगड़ीधारी आंदोलन में शामिल हैं।
सहजधारी देश भर में इससे अलग हैं। दुनिया में सिखों ने जस्ट्सि फॉर सिख, बंदी छोड़ो आंदोलन किये हैं, लेकिन हिन्दू वर्ग में उस तरह का उत्साह नहीं देखा गया।
लाल किले पर हमले पर चुप्पी क्यों?
लाल किले पर 10 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले में पाकिस्तान की भूमिका को जांच एजेंसी एनआईए और सरकार ने स्वीकार किया था। इससे पहले उड़ी, पहलगाम और पुलवामा में हुए आतंकवादियों के हमले उपरांत सरकार ने जीरो टॉलरेंस का नारा देते हुए पाकिस्तान पर स्ट्राइक करने का दावा किया था।
लाल किले पर हमले को 40 दिन से ज्यादा हो गये हैं। 12 लोगों की मौत हो गयी थी और इस प्रकरण में एनआईए ने अनेक आतंकवादियों और एक मेडिकल कॉलेज के डीन को गिरफ्तार किया था।
सरकार का कहना था उचित समय पर उचित कार्यवाही होगी। लाल किले पर पूर्व में भी हमले होते रहे हैं। एक बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने सीमा के पास सेना को नियुक्त किया था। इस बार माहौल बदला हुआ है क्योंकि पाकिस्तान ने सउदी अरब के साथ नाटो जैसा समझौता किया हुआ है। इस कारण सरकार ने आतंकवाद का आरोप लगाते हुए इन दिनों एक बार भी सर्जिकल स्ट्राइक आदि के बारे में जानकारी नहीं दी।
क्या सरकार सउदी अरब के भय से पाकिस्तान के खिलाफ बोलने से बच रही है। सवाल बड़ा है लेकिन इसका उत्तर कभी नहीं मिल पायेगा। हालांकि रूस की सेना को भारत में स्थापित कर दिया गया है। यह क्या माजरा है, यह भी किसी आम आदमी की समझ में नहीं आया। भारत की सेना दुनिया में टॉप 5 में है फिर इस तरह का निर्णय क्यों लिया गया।
दूसरी ओर अफगानिस्तान को चेतावनी दी है कि वह पीटीपी का साथ नहीं दे। उसे पीटीपी या पाकिस्तान में से एक का चुनाव करना होगा। हालांकि अफगानिस्तान में जो लोग काम करने के लिए पाकिस्तान जाते हैं वह पाक की रट लगाये हुए हैं।
महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना अब नहीं रही!
श्रीगंगानगर। ग्रामीण क्षेत्र से पलायन रोकने और घर पर ही रोटी-माटी का रिश्ता तय करन के लिए आरंभ की गयी महात्मा गांधी नरेगा योजना का अंत हो गया है। अब उस दिन इसका 13वां भी हो जायेगा, जिस दिन राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर लोकसभा-राज्यसभा से पारित विधेयक को मंजूरी प्रदान कर देंगे।
बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिसा सहित कई ऐसे राज्य थे, जहां पर ग्रामीणों के पास रोजगार नहीं होने के कारण उनको पलायन कर शहरों अथवा अन्य राज्यों में जाना पड़ता था। मजबूरी में उनको इस तरह की बस्तियों में रहना पड़ रहा था, जहां स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु आदि उपलब्ध नहीं होती थी, किंतु उनकी मजबूरी थी, उनको वहां रहना पड़ रहा था।
कुछ जिलों में तो हालात यह थे कि मनरेगा योजना के तहत एक-एक लाख रोजगार पर ग्रामीण होते थे। इस तरह से सरकार से प्राप्त होने वाले मानदेय से वे शहरी क्षेत्र में बूम ला रहे थे।
2014 में सत्ता आने के बाद बड़ी-बड़ी कंपनियों को रिटेल सैक्टर में उतरने के लिए लाइसेंस प्रदान किया। वहीं मनरेगा योजना कांग्रेस की एक बड़ी उपलब्धि बतायी जा रही थी तो सरकार ने उसके लिए बजट में कटौती तो नहीं की किंतु इसको विस्तार का रूप भी नहीं दिया।
फिर से पलायन का दौर आरंभ हो गया और आज हालात यह है कि देश के वे राज्य जो विकसित हो रहे हैं अथवा जहां पर नये रोजगार का सृजन विभिन्न कारखानों में हो रहा है, वहां पर मजदूरी का काम करने वाले अधिकांश लोग बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से हैं।
अब इस योजना को ही खत्म किया जा रहा है। इस तरह से नयी रोजगार योजना को लाया जा रहा है। सरकार की विभिन्न नीतियों का आलोचना करने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजने की भी तैयारी की जा रही है। राजनीतिक दल विरोध तो कर रहे हैं, लेकिन उनके स्वर कमजोर हैं क्योंकि दोनों सदनों में भाजपा बहुमत में है।
नरेन्द्र मोदी के राज में किसान आंदोलन क्यों? ‘विश्व भर में किसानों के प्रदर्शन पर चुप्पी,’ अब परमाणु ऊर्जा के मालिक बन सकते हैं अडाणी, अमेरिकी स्पेस फोर्स एजेंसी एक्टिव
को लेकर सक्रिय हैं।
सबसे पहले बात भारत गणराज्य की सरकार की करनी होगी। मोदी है तो मुमकिन है और आपदा में अवसर जैसे जुमले देने वाली सरकार भले ही बिहार जीत लिया हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत देश और दुनिया में इंडिया की छवि मजबूत हुई हो
बिहार में पिछले दिनों कई हजार किसान एकजुट होकर आंदोलन पर उतर आये। अब एक नयी रिपोर्ट पर विवाद सामने आ रहा है। ताजा मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अडाणी को राज्य सरकारें परमाणु रिएक्टर स्थापित करने के लिए जमीन दे रही हैं। पानी दे रही हैं।
मोदी सरकार ने हाल ही में परमाणु ऊर्जा को प्राइवेट सैक्टर को देने के लिए शांति विधेयक को लेकर आयी है। इस विधेयक के माध्यम से यह किया गया है अगर रिएक्टर में तकनीकी खराबी से कोई हादसा होता है तो उसके लिए कंपनी को मात्र तीन हजार करोड़ की देयगी शामिल होगी।
अमेरिका ने इस विधेयक के पारित होने के बाद कानून बनने से पहले ही प्रतिक्रिया दी है और विदेश मंत्री मार्को रूबियो को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत सरकार से वार्ता करने के लिए कहा है।
अडाणी को पहले ही भारत सरकार जयपुर, अहमदाबाद एयरपोर्ट, नवी मुम्बई एयरपोर्ट को लीज पर दे चुकी है। इसी तरह से वायु क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर अडाणी का कब्जा हो गया है। वायु से पूर्व थर्मल प्लांट के लिए जमीन दी गयी। झारखण्ड, पंजाब, गुजरात आदि राज्यों में भूमि दी गयी है।
इस तरह से कहा जा सकता है कि थल और नभ दोनों ही क्षेत्रों को अडाणी के सुपुर्द कर दिया गया था और अब जल व परम अणु ऊर्जा भी गुजरात के व्यापारी को दी जा रही है। उस अडाणी को जिसके खिलाफ अब गुजरात के कच्छ इलाके के किसान भी आंदोलन पर उतर आये हैं, जहां पर अडाणी का खुद को हवाई अड्डा है। थर्मल प्लांट हैं।
गुजरात, बिहार और देश के अन्य इलाकों में आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन अभी तक इस मामले को मैन स्ट्रीम मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया है। महाराष्ट्रा में किसान के आंदोलन को देखा गया, लेकिन वह अब भी चल रहा है या नहीं, इस संबंध में ताजा रिपोर्ट नहीं मिल पायी है।
भारत ही नहीं अपितु फ्रांस में भी किसान आंदोलन कर रहे हैं। लंपी स्किन रोग के कारण गायों की मौत हो रही है। इस तरह से विश्व के अन्य भागों में भी लाखों लोग एकजुट हो रहे हैं। जेन जैड जैसे विरोध प्रदर्शन अब दुनिया भर में हो रहे हैं।
खोदा पहाड़ और निकला चूहा!
वेश्यावृत्ति के व्यवसाय से अमेरिका में जुड़े एपस्टीन को लेकर काफी चर्चा दुनिया भर में हो रही थी क्योंकि अनेक टॉप लीडर्स जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, उनके सम्पर्क होने की जानकारी दी जा रही थी। एक बड़ा विस्फोट होने की आशंका जतायी जा रही थी और जब यूएसए के न्याय विभाग ने रिपोर्ट को जारी किया तो वही सामने आया, खोदा पहाड़ और निकली चूहिया।
ब्रिटेन-फ्रांस की सरकारें नहीं चाहतीं यूक्रेन संकट का हल?
चार साल होने वाले हैं और यूक्रेन-रूस युद्ध को आरंभ हुए और अभी तक दोनों देश किसी भी मुद्दे पर सहमत नहीं हो पाये हैं। अमेरिका का पूर्व में दिया गया प्रस्ताव शांति नहीं ला सका। अब ट्रम्प प्रशासन ने नया मसौदा दोनों देशों को भेजा है।
दूसरी ओर फ्रांस में किसान आंदोलन सहित पूरे पश्चिमी देशों में आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन अभी तक फ्रांस-ब्रिटेन, अमेरिका के साथ सहमति नहीं बना पाये हैं। अलग-अलग राग होने के कारण यह मामला सामने आ रहा है।
अमेरिका ने स्पेस फोर्स को किया एक्टिव?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने निकोलस मादुरो के वेनेजुएला को लेकर अपनी स्पेस फोर्स एजेंसी को हाई अलर्ट पर रखा है। सर्द मौसम में भी गर्मी बनी हुई है और राष्ट्रपति देर रात को व्हाइट हाउस से बाहर निकलकर एयरफोर्स वन में जा रहे हैं। वहीं मध्यावधि चुनाव प्रचार भी आरंभ हो गया है। इस तरह से विश्व में शांति और मध्यावधि चुनावों के प्रचार के लिए वे 18 घंटे का समय निकाल रहे हैं जो लगभग 80 साल के किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होते हैं। लेकिन वे ऐसा कर रहे हैं। ट्रम्प को भले ही विश्व शांति पुरस्कार का नोबल पुरस्कार नहीं मिला हो, लेकिन इस पुरस्कार के पात्र लोगों की समीक्षा करने वाली अर्थात इस पुरस्कार को प्रदान करने वाले मुखिया ने आज इस्तीफा दे दिया। उनके स्थान पर एक महिला को प्रधान बनाये जाने की जानकारी सामने आ रही है।
Saturday, December 20, 2025
हिजुबल्लाह और हमास एक मंच पर, क्या करेंगे अमेरिका और इजरायल?
वाशिंगटन। दुनिया के सबसे ताकतवार और धनाढय़ आतंकवादी संगठन जिसे अमेरिका सहित अनेक देशों ने प्रतिबंधित किया हुआ है, उस संगठन की हमास के साथ संबंध और मजबूत हो गये हैं।
इजरायल को गाजा में हमास को लेकर पहले ही आशंका थी कि वह कभी भी हथियारों को सरेंडर नहीं करेगा। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का भी यही मानना था।
अब हालात उसी तरफ जा रहे हैं। लेबनान में इजरायल लगातार मिसाइलों से हमला कर रहा है। हमास को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिका भी लगातार प्रयास कर रहा है और कुछ समय पहले ओमान में उनके ठिकानों पर हमले भी किये गये थे।
हमास+ हिजुब्बलाह दोनों का एक ही मंच पर आना गाजा में साफ दिखाई दे रहा है। पट्टी क्षेत्र में यह गठजोड़ किसी भी सूरत में पट्टी को खाली करने के पक्ष में नहीं है।
इजरायल की सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू 29 दिसंबर को अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं। समाचार संवाद सेवा के अनुसार दोनों शिखर नेता मिलेंगे। डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में 11 माह के भीतर नेतनयाहू की यह चौथी यात्रा होगी।
मोदी सरकार संतों की सुरक्षा से चूक क्यों जाती है?
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य में सुरक्षा के लिए विभिन्न तरह की कैटगिरियां तैयार की गयी हैं और इन कैटगिरियों में सरकार के उच्चाधिकारियों तथा राजनेताओं को सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसी तरह से विभिन्न राज्यों में भी पुलिसकर्मियों को नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया जाता है।
मोदी सरकार ने संतों के लिए ऐसी कैटगिरी नहीं बनायी है, जिससे उनको स्थायी सुरक्षा प्राप्त हो सके। ऐसा नहीं है कि संतों का जीवन संकट में नहीं है। अनेक कट्टरपंथी ताकतें सक्रिय हैं।
भारत सरकार यह स्वयं मानती है कि अनेक ऐसे लोग हैं, जो अध्यात्म से जुड़े हैं, उनके जीवन को खतरा है। खतरा हर दिन बढ़ता जाता है लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किये जाते। बात पुरानी नहीं है, अनेक मंदिरों को निशाना बनाया गया है और कट्टरपंथी ताकतें वहां पर विस्फोट करने में भी कामयाब हो गयी।
स्वामी आत्मानंद बेपरवाह का कहना है कि उनके जीवन को अनेक बार ऐसी ताकतों का सामना करना पड़ा। वे बताते हैं कि उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार, जो हिन्दुत्व के मामलों पर राजनीति करते हुए सत्ता में आयी है, ने उनको तहसीलदार के रूप में संबोधित किया और सुरक्षा के मामले में हाथ पीछे खींच लिये।
इस तरह से उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। यह सत्य घटना बताती है कि सुरक्षा सिर्फ राजनेताओं के लिए ही है।
Friday, December 19, 2025
दुनिया के सबसे अमीर आतंकवादी संगठन हिजुब्बलाह पर कार्यवाही जारी, ट्रम्प आज फिर से देश को संबोधित करेंगे
वाशिंगटन डीसी। दुनिया के सबसे अमीर संगठन हिजुब्बलाह पर इजरायल की सैन्य कार्यवाही जारी है। लेबनान में मिसाइल से हमलों को अंजाम दिया गया। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज फिर से देश को संबोधित करने वाले हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समय टॉप फॉर्म में है और वे लगातार फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। निकोलस मादुरो के देश वेनेजुएला पर दबाव बनाये हुए हैं। संभव है कि शुक्रवार दोपहर को 1 बजे जबकि भारतीय समयानुसार रात के करीबन 12 बजे देश को संबोधित करेंगे।
युक्रेन और रूस के युद्ध को लेकर जहां यूरोपीयन देश का मानना है कि राष्ट्रपति व्लादोमीर जेलेंस्की को 90 अरब यूरो का लोन दिया जायेगा, जिससे वह हथियार और अन्य तरह के विकास कार्य को पूरा कर पायेगा। यूरोप यह राशि शीघ्र ही जारी कर सकता है।
इस तरह से दुनिया भर में आर्थिक दौर से ज्यादा शांति बहाली के लिए युद्ध चल रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि उनके देश में फेंटानिल नाम का नशा वह तस्करी कर रहा है, जो बहुत ही खतरनाक नशा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गत दिवस ही राष्ट्र के नाम संदेश दिया था और आज पुन: 1 बजे दोपहर को फिर से देश को संबोधित करने वाले हैं।
करीबन 3 से चार घंटे के बाद वे देश को संबोधित करते हुए दिखाई देंगे और उनके निशाने पर वेनेजुएला हो सकता है। कारण यह है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने वेनेजुएला को पानी की चारों दिशाओं से घेरा हुआ है।
इसके उपरांत भी वेनेजुएला ने दो सुपर कार्गो जहाज को रवाना किया है जो किसी स्थान पर तेल का परिवहन करेंगे।
अपने सैनिकों में जोश भरने के लिए ट्रम्प ने सभी सैनिकों जिनकी संख्या करीबन 15 लाख है, को 1776 डॉलर देने का एलान किया है। इस तरह से वे क्रिसमिस पर अधिक खरीददारी कर सकेंगे। यह वैसे ही निर्णय लिया गया है जिस तरह से सरकारी कर्मचारियों को दीपावली पर भारत में बोनस दिया जाता है।
ट्रम्प ने आंतरिक सुरक्षा और बॉर्डर को सिक्योर करने के लिए नैशनल गार्ड की नियुक्ति की हुई है। ट्रम्प प्रशासन दावा करता है कि पिछले 11 महीनों में बॉर्डर क्रासिंग की एक भी घटना नहीं हुई। ध्यान रहे कि ट्रम्प ने 21 जनवरी 2025 को दूसरे कार्यकाल के लिए ज्वाइन किया था।
इवांका कहां है?
एक तरफ जहां अमेरिका में जश्र जैसा माहौल है, क्योंकि इस समय 100 प्रतिशत रोजगार के अवसर बढ़े हैं और महंगाई पिछले करीबन 50 सालों में सबसे कम है। इस बीच यह जानकारी सामने नहीं आ रही है कि इवांका ट्रम्प, जो पिछले कार्यकाल में एडवाइजर थीं, अब कहां हैं। अब वे राजनीति से दूर हैं किंतु वे ट्रम्प के साथ मौजूदा समय में नजर नहीं आ रही है। माना जा रहा है कि वे किसी खुफिया कार्य में सक्रिय हैं।
मन की बात : दिल्ली में वायु प्रदूषण कभी कम होगा?
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की राजधानी दिल्ली जिसे नई दिल्ली के नाम से भी संबोधित किया जाता है क्योंकि पीएम सहित अनेक उच्चाधिकारियों के आवास, कार्यालय इसी इलाके में हैं।
आज की चर्चा का विषय दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर है। भारत 2001 से आरंभ की जाये जब इस पर चर्चा आरंभ हुई थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार थी, इसमें कई समाजवादी चेहरे भी शामिल थे। 2004 से लेकर 2014 तक मनमोहनसिंह प्रधानमंत्री रहे और फिर नरेन्द्र मोदी का काल आरंभ हो गया।
वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा 2001 में आरंभ हुई और उस दौरान सरकार ने मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए वाहनों में बीएस-2 आरंभ करने का एलान किया। इसके बाद बीएस-6 आ गया और करीबन 25 सालों में वायु प्रदूषण कम नहीं हो पाया। समाजवादी, उदारीकरण, वैश्विकरण आदि बड़े चेहरे आये और उन्होंने कभी भी यह प्रयास नहीं किया कि ईमानदारी बरती जाये और प्रदूषण को कम किया जाये।
सरकार सदैव ही वाहनों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही और लोगों को मजबूरन नये वाहन खरीदने के लिए कुप्रेरित किया गया। ‘धूल चेहरे पर थी और हम आइना साफ करते रहे!’ यह कहावत शत प्रतिशत भारत गणराज्य की सरकार पर अक्षरश: सही है।
अगर मन की बात को आगे बढ़ाया जाये तो सामने आता है कि डीजल, पेट्रोल और सीएनजी जैसे टोटके और 1, 3, 5, 7, 9 और 2, 4, 6,8 जैसे नंबरों वाली कारों के लिए दिन भी तय कर दिये। सरकार ने अपना बचाव करने के लिए पंजाब को ब्लेम किया।
पंजाब सरकार पर आरोप लगाया गया कि वह पराली जलाती है और उसका असर दिल्ली में दिखाई देता है। हरियाणा या अन्य स्थानों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है।
जैसा दिल्ली में मौसम है, वैसा ही मौसम श्रीगंगानगर में भी है। अर्थात दोनों ही स्थानों पर एक जैसा वायु प्रदूषण विस्तार कर रहा है और कई बार तो पूरी दुनिया में सबसे प्रदूषित शहरों में श्रीगंगानगर भी शामिल रहा है।
भारत स्टेज-2 से 6 तक का सफर 25 साल में पूरा हो गया। कारों को नयी लुक और नये तकनीक के साथ बाजार में उतारा गया। वाहनों में नयेपन के लिए गियर्स की सैटिंग को बदला गया और अनेक कंपनियों ने गियर वाली प्रथा को समाप्त कर महिला ग्राहकों को आकर्षित किया।
दिल्ली के अंदर इस समय भूमाफिया भी पूरी तरह से सक्रिय है। यह कई सालों से कार्यरत है। दिल्ली में वायु प्रदूषण ही नहीं है बल्कि समाज का एक ऐसा चेहरा भी सामने आता है जो गरीब देशों के लिए तैयार किया गया होता है। जीबी रोड भी कहा जाता है, वहां पर हालात क्या हैं, यह सबको मालूम है। पहाडग़ंज क्षेत्र का विस्तार किया गया। इस तरह से अनेक नहीं हजारों परिवार वहां से पलायन कर गये। इस तरह से अकेला यूपी से ही कुछ साल पहले पलायन नहीं हुआ था बल्कि दिल्ली में भी माफिया के साथ मिलकर बड़ा घोटाला किया गया था।
सरकार जो भी नीतियां बना रही है, एक्यूआई लेवल को प्रभावित किया जा रहा है। सच्चाई को सामने आने से रोका जा रहा है, लेकिन इससे वायु प्रदूषण कम नहीं हुआ है।
कच्ची बस्तियों और झुग्गी-बस्तियों के निवास करने वाले लोगों को भी अन्यत्र स्थानांतरित कर दिल्ली को स्वच्छ बनाने का प्रयास नहीं किया गया।
स्वच्छता की बात करते हैं तो यह अकेला दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। गंगा स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। मजहबी लोगों ने गंगा-यमुना की तहजीब को सदियों पुरानी बताया लेकिन दोनों की हालत देखी जाये तो यह सत्य है कि गंगा न यमुना दोनों ही स्वच्छ नहीं हो पायी।
Thursday, December 18, 2025
मोदी सरकार की मदद कर पायेगा ड्रैगन, ट्रम्प ने अमेरिकंस से कहा, ईश्वर हमारे साथ है!
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की सरकार के मुखिया और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच आपसी खींचतान के चलते रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर होता हुआ 91 रुपये के आकड़े को पार कर गया। हालांकि नरेन्द्र मोदी की सरकार इसके बाद भी अमेरिकी ट्रेड डील पर कोई निर्णय नहीं कर पायी है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रुपया और नीचे जा सकता है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश को संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियों और विदेश, युद्ध और आर्थिक नीतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा, ईश्वर हमें आशीर्वाद दे रहे हैं क्योंकि वो हमारे पास हैं। हमारे साथ हैं।
अमेरिका और भारत के बीच पिछले तीन दशक में संबंध सबसे कमजोर हो चुके हैं। दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को अपना मित्र बता रहे हैं, लेकिन ट्रेड डील नहीं हो पा रही है।
भारत गणराज्य की सरकार अपने ऊपर बढ़ रहे दबाव को ध्यान में रखते हुए चीन के साथ संबंध बनाने के लिए फिर से जुटा है। मोदी सरकार ने चीनी इंजीनियर्स को भारत में आने और काम करने के लिए अपने वीजा नियमों में बदलाव करने की जानकारी दी है। द हिंदू ने इस संबंध में रिपोर्ट का प्रकाशन किया है।
इससे पहले रूस, चीन और भारत ने आईआरसी योजना के तहत एक-दूसरे देश का दौरा किया है। भारत अमेरिकी दबाव को कम करने के लिए रुपया कमजोर होता देख रहा है, चीन के साथ संबंध को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति ने भी भारत की यात्रा की।
वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने राष्ट्र के नाम संदेश में आर्थिक, युद्ध और विदेश नीतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा, महंगाई कमजोर हो रही है। रोजगार के अवसर ज्यादा पैदा हो रहे हैं। 100 प्रतिशत तक रोजगार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका इज बैक। ईश्वर हमें आशीर्वाद दे रहे हैं।
Wednesday, December 17, 2025
ट्रम्प देश को संबोधित करेंगे, वेनेजुएला के मादुरो की सरकार को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन करार दिया, रूस ने कहा, हम नये उन्नत हथियार को शामिल कर रहे हैं, यूरोप को सीधी चेतावनी
वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी समयानुसार बुधवार रात 9 बजे देश को संबोधित करेंगे। वेनेजुएला के साथ टकराव बढ़ता जा रहा है और कभी भी जमीनी हमला किया जा सकता है। वहीं अंतराष्ट्रीय समाचारों के अन्य संकल्र में मास्को ने यूरोप को सीधी चेतावनी दी है। पाकिस्तान अपने कदम पीछे खींच रहा है, गाजा को लेकर ट्रम्प ने सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस तलब किया।
फेंटानिल नशीले पदार्थ को लेकर अमेरिका और वेनेजुएला के बीच विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर बताया कि बुधवार रात 9 बजे वे देश को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी बड़ी घोषणा करने के लिए टीवी चैनल पर रात 9 बजे प्रकट होते रहे हैं और अब उनके मित्र ट्रम्प भी उसी तरह का कदम उठा रहे हैं।
वेनेजुएला के लिए ट्रम्प ने एक संदेश में साफ कहा है कि वे मादुरो को सबक देने के लिए जमीनी सेना का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रम्प ने कहा, वेनेजुएला ने हमारी जमीन, हमारा तेल हमसे छीन लिया था, उसको वापिस लाया जायेगा।
निकोल्स मादुरो के निर्वाचन को भी अमेरिका ने नहीं मानते हुए उनकी सरकार को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए नये प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया।
दूसरी ओर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों पर हमलों को लेकर ट्रम्प का कहना था कि पश्चिम को रेडिक्ल इस्लामिक आतंकवाद को रोकने के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल करना होगा। पश्चिम में अप्रवासियों के लिए आतंकवादियों के पनाह को रोकने के लिए नये कानून और वीजा संबंधों नियमों में भी परिवर्तन रोकने के लिए आह्वान किया।
दूसरी ओर यूरोपीय देशों की बैठक में यूक्रेन संकट को लेकर चर्चा हुई। इसमें अमेरिकी नेता शामिल नहीं थे।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने बॉर्डर सिक्योरिटी को देश की सिक्योरिटी के रूप में संबोधित करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किये।
गाजा शांति के लिए मुनीर को ट्रम्प ने किया तलब
पाकिस्तान में हालात किस तरह के हों, लेकिन अमेरिका चाहता है कि मुस्लिम बहुल इलाके, जो गाजा का क्षेत्र कहलाता है, वहां पर बहुराष्ट्रीय सेना के साथ सहयोग के लिए पाक अपनी सेना को तैयार करे। इसके लिए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को बुलाया गया है।
व्हाइट हाउस की तरफ से सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी गयी है कि मुनीर शीघ्र ही वाशिंगटन डीसी की यात्रा पर होंगे। उल्लेखनीय है कि इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहे पाक को अमेरिका की सहायता की आवश्यकता है और इसी कारण 1.3 बिलियन डॉलर का नया कर्ज दिलाया गया है। इसके साथ ही उसके हथियारों को भी उन्नत किया जा रहा है।
पुतिन ने यूरोप को दी चेतावनी
रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने यूरोप को चेतावनी दी है कि वह युद्ध के लिए तैयार है। रूस वार्ता से कभी पीछे नहीं हटा। अगर यूरोप उनके साथ युद्ध चाहता है तो वे तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय नेताओं ने युक्रेन के समर्थन में एक बड़ी बैठक की थी, इसमें ब्रिटिश पीएम स्टार कीरमर्र, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां, यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष, जर्मन के चांसलर आदि नेता मौजूद थे।
रुपया 91 का हुआ
हाल ही में रुपये ने 90 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के अंक को पार किया था और अब 91 रुपये को भी पार कर लिया। भारत का आईएसडी कोड भी 91 है। इस साल रुपये ने 6 प्रतिशत की कमजोरी को बर्दाश्त किया। एक मीडिया रिपोर्ट में रॉयटर्स का कहना है कि अमेरिका के साथ आर्थिक तनाव के बीच विदेशी निवेशकों ने करीबन 18 अरब डॉलर की राशि को निकाल लिया है।
वहीं अभी तक अमेरिका और नई दिल्ली के बीच व्यापारिक समझौता नहीं हो पाया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आशा जतायी थी कि नवंबर में यह समझौता हो जायेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
Saturday, December 13, 2025
कभी भी वेनेजुएला पर हो सकता है हमला, ट्रम्प ने 15 हजार सैनिक लगाये-मोदी सरकार ने अडाणी को परमाणु तकनीक देने के लिए किये परिवर्तन?
श्रीगंगानगर। दुनिया भर में इस समय जिस राष्ट्रपति की चर्चा हो रही है वह हैं डोनाल्ड ट्रम्प। ट्रम्प ने वेनेजुएला को चारों दिशाओं से घेर लिया है और अमेरिकी लैटिन देश ने कहा है कि वह यूएसए के हथियारों का सामना नहीं कर सकता किंतु वह गौरिला युद्ध की तरह निशाना साधेगा।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह नेवी और थल सेना के माध्यम से मादुरो को अपदस्थ करने के लिए जल्द ही कार्यवाही करने जा रहे हैं। मादुरो के इलेक्शंस को अमेरिका सहित अनेक देश मान्यता नहीं दे रहेे हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रम्प प्रशासन की वापसी के बाद से ही नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच भी उसी तरह का रिश्ता बना हुआ है। हालांकि हाल ही में दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष ने फोन पर बात की है किंतु सच यह है कि ट्रेड डील नहीं होने के कारण ट्रम्प लगातार हो रही बैठकों को अब गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और उनका मानना है कि समय खराब हो रहा है।
पाकिस्तान पर उमड़ रहा है प्यार
दक्षिण ग्लोब के देश पाकिस्तान के साथ अमेरिका के रिश्ते हर दिन के साथ मजबूत होते जा रहे हैं। आईएमएफ भी अब दिल खोलकर पाकिस्तान को ऋण दे रहा है हालांकि पाकिस्तान को अभी प्रतिबंधित देशों से बाहर नहीं निकाला गया है। वह कार्य भी जल्द ही ट्रम्प प्रशासन कर सकता है क्योंकि पाकिस्तान अमेरिका के लिए दक्षिण एशिया में एक नया केन्द्र उभर कर सामने आया है। इस कारण ट्रम्प एफ 16 को उन्नत करने और नये हथियार देकर उसकी सुरक्षा की गारंटी भी दे रहे हैं।
शाहबाज शरीफ की वीडियो को आरटी ने किया डिलीट
रूस की समाचार एजेंसी आरटी हिंदी ने मध्य एशिया के एक सम्मेलन में प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन का 40 मिनिट्स तक इंतजार करने का एक वीडियो जारी किया था। हालांकि पाकिस्तान ने भी एक वीडियो जारी किया जिसमें शरीफ ने पुतिन से पहले किसी अन्य देश के नेता से हाथ मिलाने का कार्य किया। पुतिन ने हैंडशेक के लिए आगे हाथ किया था किंतु शरीफ ने उनको अनदेखा कर दिया। वहीं आरटी ने शनिवार को उस वीडियो को सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया है।
भारत में लगातार आंदोलन का राज क्या है?
किसान आंदोलन एक बार फिर से जोर पकड़ते जा रहे हैं। देश की चारों दिशाओं में आंदोलन हो रहे हैं। मामला मूल रूप से एमएसपी सहित कई अन्य मांगों को लेकर है।
किसानों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार व्यापारिक हितों को प्राथमिकता देकर किसानों के साथ छल कर रहे हैं।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस समय भारत सरकार अपनी परमाणु नीति को बदल रही है और प्राइवेट सैक्टर तथा विदेशी लोगों को इस क्षेत्र में काम करने के लिए कह रही है।
दूसरी बात यह भी है कि भारत में भ्रष्टाचार और अडाणी-अम्बानी-टाटा का सीधा सरकार में दखल होने के बाद यह माना जा सकता है कि इन तीनों कंपनियों को ट्रिलियंस डॉलर की बनाने के लिए यह प्रयास किये जा रहे हैं।
अडाणी, अम्बानी और टाटा परिवार तीनों ही शुद्ध व्यापारी हैं। तीनों ही अपने व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। परमाणु तकनीक अगर प्राइवेट कंपनी को मिल जाती है तो परमाणु हथियार बनाने की तकनीक हासिल करना भी उन स्टेट के लिए आसान हो जायेगा, जो अभी तक तकनीक के अभाव में परमाणु हथियार नहीं बना पा रही हैं। अगर यही तकनीक नाइजरिया, लेबनान और अन्य पेट्रोलियम पदार्थ देशों के पास पहुंच गयी तो यह एक हाथ से दे ओर एक हाथ से ले, वाली नीति के तहत घर-घर पहुंच जायेगी।
अमेरिका ने भारत सरकार की नयी नीति पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है। रूस सरकार भी भारत सरकार के साथ मिल्ट्री सौदा करने से बचने का प्रयास कर रही है। क्रेमलिन का कहना है कि वह निजी संबंधों को व्यापार से ज्यादा महत्व देते हैं। इस तरह से उन्होंने मोदी के बजाय किसी अन्य नेता को अपना निजी और निकटतम बताया है।
हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण में गडकरी का नाम
श्रीगंगानगर। भारत देश पिछले पांच या इससे भी अधिक समय से दुनिया में संभवत: सबसे महंगा पेट्रोलियम पदार्थ बेच रहा है। उसमें 20 प्रतिशत तक एथेनॉल की मिलावट भी की जा रही है।
परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने 2019 के लोकसभा चुनावों से कुछ दिन पहले कहा था कि इस बार कोई जूते नहीं मारे, यही हमारी उपलब्धि होगी। 2014-2019 की अवधि के बीच मोदी सरकार ने नोटबंदी और न जाने कितने ऐसे निर्णय लिये थे जो आपदा का कारण बन गये।
वही गडकरी इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं, इसका कारण है कि मीडिया में गडकरी के परिवार का नाम सामने आ रहा है कि वह एथेनॉल का निर्माण करवा रहा है। इसी तरह से हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी इलाके के राठी खेड़ा गांव में भी निर्माणाधीन एथेनॉल फैक्ट्री में गडकरी का नाम सामने आ रहा है और किसान सरेआम उन पर आरोप लगा रहे हैं। सभाओं में भी संबोधित किया जा रहा है।
17 को हनुमानगढ़ में महापंचायत
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर 17 दिसंबर को महापंचायत का आयोजन किसान संगठन कर रहे हैं। इसमें हनुमानगढ़ के अतिरिक्त राजस्थान के बड़े किसान नेता और उत्तरप्रदेश, पंजाब आदि राज्यों से भी लोग आ रहे हैं।
किसान नेताओं का आरोप है कि एथेनॉल कारखाना निर्माण के कारण नहरों में टेल के किसानों की बारियां तक पिट जायेंगी और पर्याप्त पानी के अभाव में फसल उत्पादन भी प्रभावित होगा क्योंकि एथेनॉल फैक्ट्री के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना से पानी लिया जाना प्रस्तावित है।
क्या हुआ था हनुमानगढ़ में
हनुमानगढ़ जिला इस समय दुनिया भर में सुर्खियों का केन्द्र बना हुआ है क्योंकि किसानों ने एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण को ध्वस्त कर दिया था और अधिकारियों के वाहनों में भी आग लगा दी थी।
बहुत से लोगों को ध्यान होगा कि पश्चिम बंगाल में भी टाटा नैणो कार निर्माण कारखाने का विरोध इसी तरह से ममता बनर्जी ने किया था और उनके समर्थकों ने आमरण अनशन सहित कई प्रकार से वामपंथी पार्टी का विरोध किया था। बनर्जी इसके बाद बड़े नेता के रूप में सामने आयी और इसके बाद से सत्ता की चाबी उनके पास ही है। उनको पश्चिम बंगाल में सीधा मुकाबला भाजपा से होने के बावजूद हराया नहीं जा सका है।
टाटा ने उस कारखाने के लिए मिली जमीन को वापिस कर दिया था। इसको किसानों की बड़ी जीत का दावा किया गया। इसी तरह से हनुमानगढ़ के टिब्बी इलाके में भी किसान एकजुट हैं और 17 दिसंबर को होने वाली पंचायत में आगामी नीतियों और रीतियों के बारे किसान नेता बयान जारी करेंगे।
ऑस्ट्रेलिया-फ्रांस से भी ज्यादा अरबपति भारत में, क्यों? पूरी कहानी
श्रीगंगानगर। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बारे में यह बात कही जाती है कि वहां पर आवासीय भवनों के दाम ज्यादा होने के कारण खुद का घर बनाना आसान नहीं होता, हालांकि आवासीय ऋण आवश्यकता कुछ ही मिनिट्स में पूरी हो जाती है।
ऑस्ट्रेलिया में 6 हजार, कनाडा और फ्रांस में पांच हजार डॉलर से ज्यादा की आम व्यक्ति की आय है जिसको देश का प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है। भारत की बात करें तो औसत आय 15 हजार से अधिक आंकी जाती है।
भारत दुनिया की पांचवीं जीडीपी कहलाता है जो चार ट्रिलियन डॉलर के आसपास होने का दावा किया जाता है हालांकि भारत सरकार का मानना था कि 2022 तक देश की अर्थव्यवस्था पांच लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो जायेगी, लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद नहीं हो पाया और रुपया भी स्थायीत्व स्थापित नहीं कर पाया।
अगर हम अमेरिका की बात करते हैं तो वहां के कैलीफोर्निया की जीडीपी ही भारत सरकार के दावों से ज्यादा है। एक अमेरिकन राज्य भारत देश की जीडीपी से ज्यादा अंशदान रखता है। इसी राज्य में सैलीकॉन वैली, हॉलीवुड और भी बहुत कुछ है।
मुख्य बात यह है कि भारत के भीतर ही असमानता बढ़ती जा रही है। अगर हम फोब्र्स की सूची को देखें तो विश्व के प्रथम 200 अरबपति की सूची को देखते हैं तो कम से कम 13 भारतीय इसमें शामिल है। गौतम अडाणी, मुकेश अम्बानी, एयरटेल सहित अनेक कंपनी अधिकारी शामिल हैं।
वहीं ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के मात्र 3-3 ही अरबपति ऐसे हैं जो टॉप 200 में शामिल हैं। फ्रांस के 6 अरबपति इस सूची में शामिल है। वहीं अमेरिका के 14 अरबपति ही टॉप-15 में शामिल हैं। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि किस तरह के हालात हैं।
भारत में असमानता का स्तर बहुत अधिक होने का कारण है। देश में प्रति व्यक्ति आय 1.8 लाख रुपये है जबकि फ्रांस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा भारत से कहीं आगे प्रति व्यक्ति आय के मामले में आगे हैं। हम अपनी पीठ इसलिए थपथपा देते हैं कि हम विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था है जो ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ चुकी है और जब आम आदमी की आय का विश£ेषण किया जाता है तो वह इतनी कम है कि विश्वास ही नहीं होता कि भारत आर्थिक स्तर पर सौपान तय कर रहा है।
अमेरिका पाकिस्तान की मदद क्यों कर रहा है?
वाशिंगटन। अमेरिका पाकिस्तान की मदद कर रहा है यह विचार यूरोप से लेकर एशिया तक हर व्यक्ति की जुबान पर है। नाटो या जी-7 देशों के बीच जो असहमति सामने आ रही है, उससे यह लग रहा है कि संयुक्त राज्य अब अकेला चलो की नीति को अपना रहा है।
यूरोप को देखा जाये तो वहां पर यूक्रेन को लेकर अलग नीति है और अमेरिका यह मान रहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादीमोर जेलेंस्की नहीं चाहते कि युद्ध समाप्त हो, क्योंकि उसको पर्याप्त सहायता मिल रही है।
इस कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व मास्को के ब्लादीमिर पुतिन के बीच डॉयलोग हो चुका है। आगे भी यह सोच जारी रहने की संभावना है। सबसे बड़ा कारण यही माना जा रहा है कि युक्रेन युद्ध के कारण अन्य कार्य जो विश्व शांति के लिए आवश्यक हैं, वह नहीं हो पा रहे हैं।
जेलेंस्की अभी तक यह नहीं सोच पा रहे हैं कि ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ अर्थात अगर अब ट्रम्प के प्रस्तावों पर युक्रेन राजी नहीं होता है तो फिर कभी यह युद्ध समाप्त नहीं किया जा सकेगा और गाजा की तरह युक्रेन भी मिसाइलों से होने वाले हमलों के लिए एक प्रमुख क्षेत्र बन जायेगा।
नाटो का कोई औचित्य शायद नहीं रहा
फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां का मानना है कि 2030 तक नाटो का अस्तित्व खत्म हो सकता है। वहीं मौजूदा हालात जो बन चुके हैं, उनमें अभी नहीं तो कभी नहीं, यह सच सामने आने लगा है। अभीव्यक्ति की आजादी को मौजूद करने के लिए यह अन्तिम अवसर हो सकता है क्यों अगले कुछ समय के भीतर अनेक देशों में चुनाव होने वाले हैं और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया अगर हुई तो फिर इस मसले को समझने और उसको सम्पन्न करने में ही समय लग जायेगा।
अभी तक अमेरिका के नेतृत्व में नाटो ने इराक, सोमालिया और अफगानिस्तान में ऑपरेशन किये हैं। लेकिन इस समय नाटो के अनेक देश अलग-अलग मत लेकर चल रहे हैं। अनेक बार व्लर्ड वॉर-3 को टालने के लिए नेताओं ने एक-दूसरे देश के लिए दौड़ लगायी है। अब मतविभाजन होने के कारण नाटो अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
दूसरी ओर अमेरिका ने जी-7 या नाटो से अलग एक नया मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया है और इसमें जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, सउदी अरब जैसे देशों को शामिल किया जा रहा है।
इस तरह से 2030 से पहले ही नाटो अपना अस्तित्व समाप्त कर सकता है।
क्या चाहते हैं ट्रम्प?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक मसौदा युक्रेन को भेजा था किंतु अभी तक उस पर सहमति जेलेंस्की ने नहीं दी है। रूस अनेक शर्तों को मानने को तैयार है। इस तरह से जेलेंस्की यूरोप की ओर मुख कर रहे हैं। इसी सप्ताह लंदन में अनेक अंतरराष्ट्रीय नेता बैठक कर चुके हैं और ट्रम्प को भी आनलाइन बात की गयी।
राष्ट्रपति ट्रम्प मानते हैं कि युके्रन ऐसा युद्ध नहीं है जिसको समाप्त करने के लिए इतना समय लगाया जाये। वे बार-बार होने वाली बैठकों से भी तंग आ चुके हैं।
फ्रांस की नीति किसी को समझ नहीं आ रही?
ब्रिटेन और फ्रांस नाटो में किसी मसौदे पर सहमत होते नहीं दिख रहे हैं और इसी कारण हर दिन टलता जा रहा है लेकिन यह विचार नहीं किया जा रहा कि हर दिन कितने लोगों को अपनी जिंदगी को गंवाना पड़ रहा है। लाखों लोग मारे जा चुके हैं।
ट्रम्प को हाल ही में फीफा ने शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है और ट्रम्प प्रशासन का भी मानना है कि वे 8 युद्ध को समाप्त करवा चुके हैं और युक्रेन युद्ध भी उनके प्रस्तावों के तहत समाप्त हो सकता है किंतु इसके लिए एकता आवश्यक है। पहले यह भी चर्चा थी कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो नाटो या जी-7 की बैठक से स्वयं को बाहर रखकर अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं।
बहुत कुछ गुजर रहा है। हर पल लाखों या करोड़ों डॉलर की सम्पन्न नष्ट हो रही है। इसके बावजूद अगर पश्चिमी देश समझौते पर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो इससे अनुमान लगाया जा सकता कि रोज होने वाली मौतों के प्रति वे संवेदनशील नहीं हैं।
Friday, December 12, 2025
शनिवार को दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित श्रीगंगानगर
श्रीगंगानगर। शनिवार 13 दिसंबर 2025 के समाचारों को देखा जाये तो सामने आता है कि प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है और यह अत्यधिक गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी का ‘खिताब’ हासिल करने वाली नई दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषण श्रीगंगानगर में दर्ज किया गया।
सर्दी के मौसम में प्रदूषण इतना ज्यादा हो जाता है कि सांस लेना भी दूभर हो जाता है। शनिवार को जब लोग उठे तो उनको दमा के मरीज की तरह की हालत का सामना करना पड़ा।
वहीं श्रीगंगानगर में दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषण को दर्ज किया गया है और एक्यूआई 501 या इससे अधिक बताया गया।
मैस्सी कोलकाता पहुंचे, दर्शकों में हुजूम
फुटबॉल के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ी मैस्सी कोलकाता पहुंचे हैं। देर रात को उनका निजी विमान कोलकाता के हवाई अड्डे पर उतरा। अगले तीन दिनों में वे देश के महानगरों का भ्रमण करते हुए फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने में अपना योगदान देंगे।
मैस्सी का विमान जैसे ही कोलकाता पहुंचा, भारी भीड़ जुट गयी और लोग अपने हीरो की एक झलक देखने को तरस गये।
नाटो से नाखुश हैं राष्ट्रपति
युक्रेन युद्ध को लेकर नाटो में अलग-अलग रणनीति होने के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अनेक सदस्यों से खुश नहीं हैं। वहीं अमेरिकी विदेश विभाग अब नया गठबंधन भी तैयार कर रहा है। इसमें सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान, यूनाइटेड किंगडम, सउदी अरब, ऑस्ट्रेलिया को शामिल किया जा रहा है। क्वाड के तीन देशों ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका इसमें शामिल हो रहे हैं तो भारत को इसमें सदस्य नहीं बनाये जाने से अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर चल रहा तनाव बढऩे का साफ संकेत है।
भारत में एक थिंकटैक का मानना है कि अमेरिका जिस तरह से पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक सहायता उपलब्ध करवा रहा है, उससे भारत सरकार का एक वर्ग अपने लिये चुनौति मान रहा है।
वाशिंगटन डीसी ने हाल ही में पाक को 600 मिलियन से ज्यादा की सैन्य सहायता का एलान करते हुए 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा का लोन भी दिलाया था। पाकिस्तान पहले ही युद्धाभ्यास कर रहा है और सेना के पदों में भी आमूलचूल परिवर्तन किया जा चुका है।
पाक के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का पुतिन के साथ मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर देर रात को वायरल कर दिया गया, इससे पहले समाचारों में कहा जा रहा था कि शरीफ के साथ पुतिन ने मुलाकात नहीं करने की इच्छा जतायी है।
एमइए के साथ सम्पर्क टूटा, फिलीस्तान में बाढ़ का खतरा
संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) के प्रवक्ता का कहना है कि एमईए के साथ सम्पर्क नहीं बन पाने के कारण गाजा में सहायता पहुंचाने में परेशानी हो रही है। यूएन का कहना है कि वहां पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। हालांकि अनेक देश हालात पर नजर रखे हुए हैं।
शाहबाज शरीफ पुतिन से क्यों मिलना चाहते थे?
वाशिंगटन। एक बड़ा सवाल दुनिया के सामने है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ करीबन 40 मिनिट तक एक कुर्सी पर बैठे रहे और उनके साथ वाली कुर्सी जो रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के लिए खाली थी, पुतिन के साथ आपसी बातचीत होनी थी।
दुनिया में इस समय वल्र्ड वॉर 3 की झलक मिल रही है। सभी देश हथियारों की खरीद को बढ़ावा दे रहे हैं। यूरोपीय देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक फटकार के बाद ही अपने रक्षा बजट को जीडीपी का पांच प्रतिशत तक ले जाने में कामयाब हो गये। सउदी अरब में हथियारों के जखीरे का बड़ा कार्यक्रम हो रहा है। क्राउन प्रिंस ने अमेरिका से नये आधुनिक हथियार और विमान खरीद के लिए भी समझोता किया है।
यह तथ्य बता रहे हैं कि कुछ तो गड़बड़ है दया! एसीपी प्रदूमण का यह श£ोक यहां उचित हो जाता है।
सवाल यह है कि तुर्कमेनिस्तान के अशगाबात में भारत गणराज्य की सरकार को आमंत्रित क्यों नहीं किया गया? पाकिस्तान था, रूस था, तुर्की और अन्य देश थे किंतु भारत नहीं था जबकि दुनिया में दूसरी मुस्लिम आबादी भारत में ही निवास करती है।
2027 तक की जनगणना में यह भी संभव है कि इंडोनेशिया से भारत के मुसलमान भाई यह खिताब अपने नाम कर लें। भारत में जनसंख्या नियंत्रण अधिनियम नहीं है जबकि चीन में है।
पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को पुतिन से ऐसी क्या बात करनी थी जो वे 40 मिनिट्स तक इंतजार करते रहे और पुतिन नहीं आये। अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की बातों पर यकीन किया जाये तो पाकिस्तान चुपके-चुपके भारत के साथ युद्ध की तैयारी कर रहा है जबकि भारत का भी कहना है कि हमने सिंदूर 2.0 को आरंभ करने के लिए तैयारी की हुई है। ध्यान रहे कि पुतिन पिछले दिनों ही दिल्ली की यात्रा पर थे।
क्रेमलिन और दिल्ली का राजभवन मिल्ट्री हथियारों की खरीद या तकनीक हस्तांतरण पर समझौता नहीं कर पाया। जिसकी चर्चा जोरों पर थी।
इसी कारण शाहबाज शरीफ को लग रहा था कि रूस को अपने पक्ष में करने का यह उचित अवसर है। वो कहावत है कि यही समय है, सही समय है। इस मंत्र को देखकर ही वे पुतिन से मिलना चाहते हों। बैठक पूर्व में निर्धारित थी।
पाकिस्तान इस बात के लिए पहले ही आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान के माध्यम से भारत की एजेंसियां उनके देश में आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं। दूसरी ओर वह कश्मीर की स्थिति में धारा 370ए हटाये जाने के बाद से ही उसकी स्वायत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सवाल उठाता रहा है। पाक में कभी भी एक सरकार दूसरा कार्यकाल नहीं ला पायी है। शाहबाज को लग रहा है कि वे यह कर सकते हैं अगर भारत के साथ युद्ध किया जाये। उन्होंने सेना का नियंत्रण भी राष्ट्रपति से छीनकर आसिफ मुनीर को दे दिया है।
किसान एकजुट रहे तो मोदी-शाह टिब्बी भी आयेंगे!
श्रीगंगानगर। हरियाणा से चिपते राजस्थान के टिब्बी कस्बा, जो हनुमानगढ़ जिले का भाग है, वहां पर किसान आंदोलन डेढ़ साल से चल रहा है और अब इसमें आग लग गयी है। अनेक वाहन जल चुके हैं और फैक्ट्री को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।
टिब्बी के राठी खेड़ा गांव में एक एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्री लगायी जा रही है। वहां पर मक्का से इस पदार्थ को बनाया जायेगा।
राठी गायं राजस्थान की सबसे प्रिय गाय है और यह कम पानी में भी अपने जीवन को सहज बनाने में शक्ति प्राप्त हैं। वहीं भगवान महेश की संतान के रूप में माहेश्वरी जाति में भी राठी गौत्र है।
इस तरह से राठी खेड़ा गांव शब्दों के अनुसार सीधे महाकाल अर्थात भगवान शिव के साथ अटैच हो जाता है।
उसी गांव में मक्का का उत्पादन होगा। फिर उससे एथेनॉल बनाया जायेगा।
अब इस समाचार के फैक्ट को देखें तो हजारों किसानों ने पिछले दिनों जनसभा के दौरान फैक्ट्री की दीवार को गिरा दिया था और अनेक वाहनों में आग लगा दी थी। इस मामले में संगरिया के विधायक, कामरेड नेता बलवान पूनिया, सांसद कुलदीप इंदौरा आदि को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है।
किसानों का आंदोलन
पिछले 10 सालों से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान आदि स्थानों पर किसानों के बड़े आंदोलन हो रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक में तीन लाख से भी अधिक किसान एकजुट हो गये और गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसी तरह से महाराष्ट्रा में प्याज के मूल्य से रूष्ट किसानों ने आंदोलन किया।
राजस्थान के घड़साना-रावला क्षेत्रों में बड़ा आंदोलन हुआ और पांच किसानों की पुलिस की गोली से मौत हो चुकी है।
सवाल यह है कि किसान देश के अन्नदाता ही नहीं बल्कि जीडीपी का आधार पर भी हैं। उन किसानों को बार-बार आंदोलन करना है तो इससे सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े हो जाते हैं। अनेक ऐसी फसलें हैं जिनका समर्थन मूल्य तो घोषित होता है किंतु उसकी खरीद नहीं होती और बाजार में वह कहीं कम कीमतों में बेची जाती है।
1975 में जेपी आंदोलन हुआ और इंदिरा गांधी की सरकार चली गयी। 2010 के दशक में अन्ना हजारे का आंदोलन हुआ तो फिर से कांग्रेस की सरकार को जाना पड़ा, यह अलग बात है कि सशक्त लोकपाल अधिनियम उस आंदोलन में गुम हो गया और आंदोलन के नायक राजनेता बन गये।
टिब्बी ही क्यों?
एथेनॉल के लिए टिब्बी ही क्यों चुनी गयी। यह भौगोलिक ही नहीं बल्कि सामाजिक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़ा सवाल है। टिब्बी संगरिया से 30 किमी की दूरी पर है। वहां पर कोई नैशनल हाइवे भी नहीं है जबकि हनुमानगढ़ में है। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय के आसपास इस उद्योग स्थापित किया जाता तो समझ भी आती कि यह लोगों को रोजगार और किसानों के उत्पादों के लिए मददगार होगा।
अब किसान एकजुट हो रहे हैं। हनुमान बेनीवाल संसद में भी इस सवाल को उठा चुके हैं। अब कुछ बड़े किसान नेता भी हनुमानगढ़ जिले में आ रहे हैं। इस तरह से यह आंदोलन एक व्यापक रूप ले रहा है।
किसानों ने दो साल तक दिल्ली और फिर एक साल तक अम्बाला में रास्ता जाम रखा था।
भारत की कृषि नितियों की नजर रखने वाले एक ज्ञाता बताते हैं कि अगर किसान एकजुट रहते हैं तो निश्चित रूप से उनसे वार्ता करने के लिए टिब्बी भी आयेगी। सवाल आंदोलन को मजबूती के साथ चलाने को है।
भले ही किसानों को दिल्ली से एमएसपी का बिल नहीं मिला, लेकिन इससे निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उस आंदोलन ने ही देश में किसानों को एकजुट होने का अवसर दिया। अब किसानों को टिब्बी आंदोलन को मजबूत करते हुए केन्द्र तक अपनी आवाज को पहुंचाने का उचित अवसर है।
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