Sunday, December 21, 2025
नरेन्द्र मोदी के राज में किसान आंदोलन क्यों? ‘विश्व भर में किसानों के प्रदर्शन पर चुप्पी,’ अब परमाणु ऊर्जा के मालिक बन सकते हैं अडाणी, अमेरिकी स्पेस फोर्स एजेंसी एक्टिव
को लेकर सक्रिय हैं।
सबसे पहले बात भारत गणराज्य की सरकार की करनी होगी। मोदी है तो मुमकिन है और आपदा में अवसर जैसे जुमले देने वाली सरकार भले ही बिहार जीत लिया हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत देश और दुनिया में इंडिया की छवि मजबूत हुई हो
बिहार में पिछले दिनों कई हजार किसान एकजुट होकर आंदोलन पर उतर आये। अब एक नयी रिपोर्ट पर विवाद सामने आ रहा है। ताजा मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अडाणी को राज्य सरकारें परमाणु रिएक्टर स्थापित करने के लिए जमीन दे रही हैं। पानी दे रही हैं।
मोदी सरकार ने हाल ही में परमाणु ऊर्जा को प्राइवेट सैक्टर को देने के लिए शांति विधेयक को लेकर आयी है। इस विधेयक के माध्यम से यह किया गया है अगर रिएक्टर में तकनीकी खराबी से कोई हादसा होता है तो उसके लिए कंपनी को मात्र तीन हजार करोड़ की देयगी शामिल होगी।
अमेरिका ने इस विधेयक के पारित होने के बाद कानून बनने से पहले ही प्रतिक्रिया दी है और विदेश मंत्री मार्को रूबियो को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत सरकार से वार्ता करने के लिए कहा है।
अडाणी को पहले ही भारत सरकार जयपुर, अहमदाबाद एयरपोर्ट, नवी मुम्बई एयरपोर्ट को लीज पर दे चुकी है। इसी तरह से वायु क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर अडाणी का कब्जा हो गया है। वायु से पूर्व थर्मल प्लांट के लिए जमीन दी गयी। झारखण्ड, पंजाब, गुजरात आदि राज्यों में भूमि दी गयी है।
इस तरह से कहा जा सकता है कि थल और नभ दोनों ही क्षेत्रों को अडाणी के सुपुर्द कर दिया गया था और अब जल व परम अणु ऊर्जा भी गुजरात के व्यापारी को दी जा रही है। उस अडाणी को जिसके खिलाफ अब गुजरात के कच्छ इलाके के किसान भी आंदोलन पर उतर आये हैं, जहां पर अडाणी का खुद को हवाई अड्डा है। थर्मल प्लांट हैं।
गुजरात, बिहार और देश के अन्य इलाकों में आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन अभी तक इस मामले को मैन स्ट्रीम मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया है। महाराष्ट्रा में किसान के आंदोलन को देखा गया, लेकिन वह अब भी चल रहा है या नहीं, इस संबंध में ताजा रिपोर्ट नहीं मिल पायी है।
भारत ही नहीं अपितु फ्रांस में भी किसान आंदोलन कर रहे हैं। लंपी स्किन रोग के कारण गायों की मौत हो रही है। इस तरह से विश्व के अन्य भागों में भी लाखों लोग एकजुट हो रहे हैं। जेन जैड जैसे विरोध प्रदर्शन अब दुनिया भर में हो रहे हैं।
खोदा पहाड़ और निकला चूहा!
वेश्यावृत्ति के व्यवसाय से अमेरिका में जुड़े एपस्टीन को लेकर काफी चर्चा दुनिया भर में हो रही थी क्योंकि अनेक टॉप लीडर्स जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, उनके सम्पर्क होने की जानकारी दी जा रही थी। एक बड़ा विस्फोट होने की आशंका जतायी जा रही थी और जब यूएसए के न्याय विभाग ने रिपोर्ट को जारी किया तो वही सामने आया, खोदा पहाड़ और निकली चूहिया।
ब्रिटेन-फ्रांस की सरकारें नहीं चाहतीं यूक्रेन संकट का हल?
चार साल होने वाले हैं और यूक्रेन-रूस युद्ध को आरंभ हुए और अभी तक दोनों देश किसी भी मुद्दे पर सहमत नहीं हो पाये हैं। अमेरिका का पूर्व में दिया गया प्रस्ताव शांति नहीं ला सका। अब ट्रम्प प्रशासन ने नया मसौदा दोनों देशों को भेजा है।
दूसरी ओर फ्रांस में किसान आंदोलन सहित पूरे पश्चिमी देशों में आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन अभी तक फ्रांस-ब्रिटेन, अमेरिका के साथ सहमति नहीं बना पाये हैं। अलग-अलग राग होने के कारण यह मामला सामने आ रहा है।
अमेरिका ने स्पेस फोर्स को किया एक्टिव?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने निकोलस मादुरो के वेनेजुएला को लेकर अपनी स्पेस फोर्स एजेंसी को हाई अलर्ट पर रखा है। सर्द मौसम में भी गर्मी बनी हुई है और राष्ट्रपति देर रात को व्हाइट हाउस से बाहर निकलकर एयरफोर्स वन में जा रहे हैं। वहीं मध्यावधि चुनाव प्रचार भी आरंभ हो गया है। इस तरह से विश्व में शांति और मध्यावधि चुनावों के प्रचार के लिए वे 18 घंटे का समय निकाल रहे हैं जो लगभग 80 साल के किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होते हैं। लेकिन वे ऐसा कर रहे हैं। ट्रम्प को भले ही विश्व शांति पुरस्कार का नोबल पुरस्कार नहीं मिला हो, लेकिन इस पुरस्कार के पात्र लोगों की समीक्षा करने वाली अर्थात इस पुरस्कार को प्रदान करने वाले मुखिया ने आज इस्तीफा दे दिया। उनके स्थान पर एक महिला को प्रधान बनाये जाने की जानकारी सामने आ रही है।
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