Sunday, December 21, 2025

 

महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना अब नहीं रही!




श्रीगंगानगर। ग्रामीण क्षेत्र से पलायन रोकने और घर पर ही रोटी-माटी का रिश्ता तय करन के लिए आरंभ की गयी महात्मा गांधी नरेगा योजना का अंत हो गया है। अब उस दिन इसका 13वां भी हो जायेगा, जिस दिन राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर लोकसभा-राज्यसभा  से पारित विधेयक को मंजूरी प्रदान कर देंगे। 

बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिसा सहित कई ऐसे राज्य थे, जहां पर ग्रामीणों के पास रोजगार नहीं होने के कारण उनको पलायन कर शहरों अथवा अन्य राज्यों में जाना पड़ता था। मजबूरी में उनको इस तरह की बस्तियों में रहना पड़ रहा था, जहां स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु आदि उपलब्ध नहीं होती थी, किंतु उनकी मजबूरी थी, उनको वहां रहना पड़ रहा था। 

कुछ जिलों में तो हालात यह थे कि मनरेगा योजना के तहत एक-एक लाख रोजगार पर ग्रामीण होते थे। इस तरह से सरकार से प्राप्त होने वाले मानदेय से वे शहरी क्षेत्र में बूम ला रहे थे। 

2014 में सत्ता आने के बाद बड़ी-बड़ी कंपनियों को रिटेल सैक्टर में उतरने के लिए लाइसेंस प्रदान किया। वहीं मनरेगा योजना कांग्रेस की एक बड़ी उपलब्धि बतायी जा रही थी तो सरकार ने उसके लिए बजट में कटौती तो नहीं की किंतु इसको विस्तार का रूप भी नहीं दिया। 

फिर से पलायन का दौर आरंभ हो गया और आज हालात यह है कि देश के वे राज्य जो विकसित हो रहे हैं अथवा जहां पर नये रोजगार का सृजन विभिन्न कारखानों में हो रहा है, वहां पर मजदूरी का काम करने वाले अधिकांश लोग बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से हैं। 

अब इस योजना को ही खत्म किया जा रहा है। इस तरह से नयी रोजगार योजना को लाया जा रहा है। सरकार की विभिन्न नीतियों का आलोचना करने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजने की भी तैयारी की जा रही है। राजनीतिक दल विरोध तो कर रहे हैं, लेकिन उनके स्वर कमजोर हैं क्योंकि दोनों सदनों में भाजपा बहुमत में है। 






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