Friday, December 19, 2025
मन की बात : दिल्ली में वायु प्रदूषण कभी कम होगा?
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की राजधानी दिल्ली जिसे नई दिल्ली के नाम से भी संबोधित किया जाता है क्योंकि पीएम सहित अनेक उच्चाधिकारियों के आवास, कार्यालय इसी इलाके में हैं।
आज की चर्चा का विषय दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर है। भारत 2001 से आरंभ की जाये जब इस पर चर्चा आरंभ हुई थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार थी, इसमें कई समाजवादी चेहरे भी शामिल थे। 2004 से लेकर 2014 तक मनमोहनसिंह प्रधानमंत्री रहे और फिर नरेन्द्र मोदी का काल आरंभ हो गया।
वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा 2001 में आरंभ हुई और उस दौरान सरकार ने मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए वाहनों में बीएस-2 आरंभ करने का एलान किया। इसके बाद बीएस-6 आ गया और करीबन 25 सालों में वायु प्रदूषण कम नहीं हो पाया। समाजवादी, उदारीकरण, वैश्विकरण आदि बड़े चेहरे आये और उन्होंने कभी भी यह प्रयास नहीं किया कि ईमानदारी बरती जाये और प्रदूषण को कम किया जाये।
सरकार सदैव ही वाहनों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही और लोगों को मजबूरन नये वाहन खरीदने के लिए कुप्रेरित किया गया। ‘धूल चेहरे पर थी और हम आइना साफ करते रहे!’ यह कहावत शत प्रतिशत भारत गणराज्य की सरकार पर अक्षरश: सही है।
अगर मन की बात को आगे बढ़ाया जाये तो सामने आता है कि डीजल, पेट्रोल और सीएनजी जैसे टोटके और 1, 3, 5, 7, 9 और 2, 4, 6,8 जैसे नंबरों वाली कारों के लिए दिन भी तय कर दिये। सरकार ने अपना बचाव करने के लिए पंजाब को ब्लेम किया।
पंजाब सरकार पर आरोप लगाया गया कि वह पराली जलाती है और उसका असर दिल्ली में दिखाई देता है। हरियाणा या अन्य स्थानों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है।
जैसा दिल्ली में मौसम है, वैसा ही मौसम श्रीगंगानगर में भी है। अर्थात दोनों ही स्थानों पर एक जैसा वायु प्रदूषण विस्तार कर रहा है और कई बार तो पूरी दुनिया में सबसे प्रदूषित शहरों में श्रीगंगानगर भी शामिल रहा है।
भारत स्टेज-2 से 6 तक का सफर 25 साल में पूरा हो गया। कारों को नयी लुक और नये तकनीक के साथ बाजार में उतारा गया। वाहनों में नयेपन के लिए गियर्स की सैटिंग को बदला गया और अनेक कंपनियों ने गियर वाली प्रथा को समाप्त कर महिला ग्राहकों को आकर्षित किया।
दिल्ली के अंदर इस समय भूमाफिया भी पूरी तरह से सक्रिय है। यह कई सालों से कार्यरत है। दिल्ली में वायु प्रदूषण ही नहीं है बल्कि समाज का एक ऐसा चेहरा भी सामने आता है जो गरीब देशों के लिए तैयार किया गया होता है। जीबी रोड भी कहा जाता है, वहां पर हालात क्या हैं, यह सबको मालूम है। पहाडग़ंज क्षेत्र का विस्तार किया गया। इस तरह से अनेक नहीं हजारों परिवार वहां से पलायन कर गये। इस तरह से अकेला यूपी से ही कुछ साल पहले पलायन नहीं हुआ था बल्कि दिल्ली में भी माफिया के साथ मिलकर बड़ा घोटाला किया गया था।
सरकार जो भी नीतियां बना रही है, एक्यूआई लेवल को प्रभावित किया जा रहा है। सच्चाई को सामने आने से रोका जा रहा है, लेकिन इससे वायु प्रदूषण कम नहीं हुआ है।
कच्ची बस्तियों और झुग्गी-बस्तियों के निवास करने वाले लोगों को भी अन्यत्र स्थानांतरित कर दिल्ली को स्वच्छ बनाने का प्रयास नहीं किया गया।
स्वच्छता की बात करते हैं तो यह अकेला दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। गंगा स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। मजहबी लोगों ने गंगा-यमुना की तहजीब को सदियों पुरानी बताया लेकिन दोनों की हालत देखी जाये तो यह सत्य है कि गंगा न यमुना दोनों ही स्वच्छ नहीं हो पायी।
Subscribe to Comments [Atom]
