Wednesday, December 24, 2025

 

डेनमार्क क्यों नहीं बेचना चाहता ग्रीनलैण्ड, अब अडाणी समूह में निवेशकों का विश्वास कम



श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति चाहते हैं कि डेनमार्क अपना ग्रीनलैण्ड द्वीप संयुक्त राज्य को सौंप दे क्योंकि यूएसए को अपनी सुरक्षा को मजबूती प्रदान करने के लिए इस टापू की आवश्यकता है। वहीं अन्य समाचारों में सामने आ रहा है कि अडाणी समूह अब उतना लोकप्रिय नहीं रहा, जो 2024 में निवेशकों के लिए था। 

संयुक्त राज्य अमेरिका ने अलास्का स्टेट को रूस से खरीद लिया था और इस तरह से इसमें 50 राज्य हो गये थे। अलास्का मास्को की सीमा से चिता हुआ इलाका है। हाल ही में जब राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने अमेरिका की यात्रा की थी तो वे अलास्का ही पहुंचे थे, जहां उनकी मेजबानी डोनाल्ड ट्रम्प ने की थी। 

अपने दूसरे टर्म का कार्यकाल 21 जनवरी को संभालते ही ट्रम्प ने ग्रीनलैण्ड के प्रति अपनी रुचि को प्रदर्शित किया था। कुछ समय के लिए उन्होंने इस टापू के लिए कोई बयान नहीं दिया किंतु करीबन 10 माह बाद उन्होंने ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करने के लिए अपना एक विशेष प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया है जो संबंधित पक्षों से वार्ता कर इस मामले का हल निकालेंगे। 


अडाणी समूह के प्रति विश्वास कमजोर हुआ

एक वर्ष पहले तक गौतम अडाणी समूह निवेशकों के लिए पंसदीदा था। सरकारी कंपनियां भी पीएमओ से मिलने वाले इशारों के आधार पर इन कंपनियों में निवेश करती थीं। अपोलो हॉस्पीटल, अडाणी इंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों के शेयरों में वह तेजी अब नहीं रही है। 

अमेरिका में मुकदमा दर्ज होने और इसके बाद विदेशी वित्तीय एजेंसियों ने अडाणी समूह को नये ऋण देने के लिए रुचि नहीं दिखायी थी। 

दूसरी ओर एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथम 1000 शेयर्स वाली कंपनियों में वह तेजी नहीं रही। वहीं स्मॉल कैप वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट को दर्ज किया गया है। वहीं बीएसई का सूचकांक 85 हजार के अंकों को छू चुका है। दूसरी ओर रुपया 90 रुपये के आसपास बना हुआ है। 

सूचकांक में बढ़ोतरी के बावजूद अगर स्मॉल कैप और अन्य समूह के शेयर्स में तेजी नहीं आयी तो इसका कारण क्या रहा? यह जांच का विषय बनता जा रहा है। 






<< Home

This page is powered by Blogger. Isn't yours?

Subscribe to Comments [Atom]