Tuesday, December 23, 2025
ट्रम्प की नीति में फिर से बदलाव-ग्रीनलैण्ड की 10 माह बाद मांग, बांग्लादेश में हिंसा-पश्चिम बंगाल में चुनावी मुद्दा
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीति में एक बार पुन: बदलाव देखने को मिला है और मंगलवार को अचानक ही उन्होंने 10 माह बाद ग्रीनलैण्ड का मुद्दा फिर से दुनिया के सामने पेश कर दिया। वहीं बांग्लादेश में हो रही हिंसा का लाभ सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को मिलने की संभावना बन गयी है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने 21 जनवरी 2025 को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही ग्रीनलैण्ड का मुद्दा दुनिया के सामने पेश कर दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने टैरिफ को अपना हथियार बनाया और यूरोप, भारत, जापान, चीन सहित कई देशों पर टैरिफ लगा दिया। यूरोप, जापान, चीन आदि के साथ समझौते हो गये हैं।
भारत के साथ ट्रेड डील पर वार्ता रूकी हुई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दावा कर रहे थे कि नवंबर तक दोनों देश आपसी ट्रेड को फिर से बिना टैरिफ के आरंभ कर सकेंगे। नवंबर माह चला गया। दिसंबर माह भी जाने वाला है और 23 तारीख हो चुकी है, लेकिन कहीं भी ट्रेड डील नजर नहीं आयी।
यूएसए इस समय भारत से आयात किये जाने वाले सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रहा है और इस कारण रुपये की कीमत भी कमजोर हो रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया 90 रुपये के आसपास बना हुआ है। वस्त्र और गहने अमेरिकी-भारतीय मांग करते थे और अब इस पर टैक्स लगने के कारण निर्यातक अन्य रिसोर्स देख रहे हैं।
टैरिफ के बाद अब अचानक ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने फिर से ग्रीनलैण्ड का मुद्दा उठा दिया है और कहा है कि वह इस भूमि को प्राप्त करना चाहता है। हालांकि ट्रम्प ने अभी तक भूमि प्राप्ति के लिए सैन्य बल का जिक्र नहीं किया है।
इससे पहले वे मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर यूएसए की खाड़ी कर चुके हैं। ट्रम्प का कहना था कि वह पहले यूएसए का ही भाग था और इसे पुन: प्राप्त कर लिया गया है।
आरबीआई क्यों कहता है, रुपये की कमजोरी से चिंता नहीं
भारत सरकार ने हाल ही में संसद में कहा है कि वह कुछ अनुपूरक मांगों को पूरा करवाना चाहता है अर्थात निर्धारित बजट में बदलाव हुआ है। संसद से इसको पारित कर दिया गया। सरकार को बजट घाटा पूरा करने के लिए अतिरिक्त नोट की आवश्यकता होगी, वह नोट छापेगा। हाल ही में रुपया 91 रुपये को पार कर गया और इसको वापिस 90 या इसे नीचे लाने के लिए अतिरिक्त डॉलर को बाजार में उतारा गया।
भारत में अमेरिकी आईटी सैक्टर की कंपनियों ने नये निवेश का एलान तो किया है किंतु अभी वह हकीकत नहीं बन पाया है। इस तरह से डॉलर मांग के अनुरूप उपलब्ध नहीं हो रहा और रुपया इसके मुकाबले कमजोर होता जा रहा है।
बांग्लादेश की हिंसा से मोदी की भाजपा को लाभ?
बांग्लादेश में एक बार पुन: हिंसा हो रही है। दो आंदोलनकारी नेताओं की गोली मारकर हत्या कर दी गयी है। इसके बाद माहौल वहां पर खतरनाक हो गया है। भारतीय मीडिया का दावा है कि बांग्लादेश में हिंसा के कारण हिन्दुओं को कत्ल किया जा रहा है और उनको भगाया जा रहा है।
भारत के पूर्वी दिशा के पड़ोसी देश में हिंसा के कारण मंगलवार को आरएसएस की विभिन्न शाखाओं वीएचपी, बजरंग दल आदि ने देश भर के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन किये और आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। इससे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक बार पुन: तनाव की चरम सीमा पर पहुंच गये हैं। दोनों देश एक-दूसरे के राजदूत को बुलाकर अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं।
वहीं बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बांग्लादेश में हिंसा के बाद भारतीय जनता पार्टी की शक्ति वहां पर मजबूत होने की संभावना जतायी जा रही है। बंगाल में घुसपैठ को मुद्दा बनाया जा रहा है और इस तरह से चुनाव से पूर्व का माहौल गर्म बना हुआ है।
गंगनहर में पानी दिया जाये
राजस्थान के गंगानगर जिले की जीवनदायनी कहलाने वाली गंगनहर में पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है और किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि एक हफ्ते के भीतर पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाया जा सके। पानी की कमी के कारण बाग उजड़ रहे हैं। किसान नेता राजेन्द्र सिंह राजू, संतवीर सिंह आदि ने गत दिवस एक व्हाइट पेपर दिया था जिसमें लिखा कि किसान मर रहा है।
निकोलस मादुरो को कहा गया, वे सत्ता से हटा जायें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने निकोलस मादुरो के वेनेजुएला को लेकर फिर से बयान जारी किया है। मादुरो को चेतावनी दी गयी है कि वह सत्ता से हट जाये और नये सिरे से चुनाव करवाये जाएं।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने मार ए लागो रिजोर्ट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि मादुरो को सत्ता से हट जाना चाहिये। राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर नेवी ने चारों दिशाओं से वेनेजुएला को घेरा हुआ है और वहां पर किसी भी मालवाहक जहाज को तेल लेकर नहीं जाने दिया जा रहा है।
भारत सरकार भी वेनेजुएला से ऑयल खरीदती आयी है। इससे भारत को भी सस्ता तेल अब शायद उपलब्ध नहीं हो पाये। इससे पहले अमेरिका ने रूस पर भी प्रतिबंध लगाये थे और भारत-चीन को तेल नहीं देने के लिए कहा था।
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