Monday, December 22, 2025
यह समाचार नहीं, हकीकत है-हिजबुल्लाह के पास है आपके बच्चों की तकदीर व्लादीमिर पुतिन, ओबामा, क्लिंटन, मोदी, यूरोपीय नेता कर रहे हैं आर्थिक मदद
स्पष्टीकरण : एपस्टीन की फाइलों से कुछ नहीं मिलने वाला था, वह मुख्य मुद्दों से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए एक सरकारी कला थी और आखिर में हो हल्ला के बाद भी कुछ सामने नहीं आया। जबकि यह एक सच्चा समाचार है जो पूरी दुनिया को हिलाकर रख देगा।
सतीश बेरी
श्रीगंगानगर। हिजब्बुलाह नामक अंतरराष्ट्रीय संगठन, जिसका मुख्यालय अमेरिका में स्थापित है और वह दुनिया का सबसे अमीर संगठन है। हमास और न जाने कितने आतंकी संगठनों को वह आर्थिक सुविधा प्रदान कर रहा है। हैरानीजनक बात यह भी है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जापान की सरकार, रूस के व्लादीमिर पुतिन, अमेरिका के बराक ओबामा, स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क और यूरोप के अनेक नेता इस पूरे योजनाबद्ध तरीके से आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।
कुछ वर्ष पूर्व एक हिन्दी सिनेमा में फिल्म आयी थी, जिसमें सदाशिव अमरापुकर एक विलेन की भूमिका में थे और उनका एक डॉयलोग बहुत सालों तक याद रहा था। उसके बोल थे, ‘अमेरिका-रूस ने मांगा मेरा भेजा, जापान ने कहा दूंगा पौने तीन करोड़ देदे तेरा भेजा, मैंने कहा, नहीं दूंगा मेरा भेजा। बहुत कीमती है मेरा भेजा।’
परदेशी के जीवन को बनाया गया टारगेट
भारत देश में एक परदेसी भी है जो तीसरी दुनिया से आया है जिसको एलियन कहा जा रहा है। परदेसी को लेकर कई फिल्मों का निर्माण हुआ। एक गीत भी काफी ख्याति प्राप्त करने वाला रहा, तुम तो ठहरे परदेसी, सुबह वाली गाड़ी से अपने घर को लौट जाओगे...।
हमारी इस दुनिया में एक परदेसी भी है, यह खुलासा डोनाल्ड ट्रम्प की सलाहकार इवांका ट्रम्प ने 2019 में किया। इसकी जानकारी धीरे-धीरे पूरी दुनिया तक पहुंच रही है। बैल्जियम, फ्रांस सहित कई देशों में तो हालात यह है कि ट्रैक्टर लेकर किसान मुख्य मार्गों को बंद कर आंदोलन कर रहे हैं। भारत में भी अनेक राज्यों में किसान आंदोलन के समाचार आ रहे हैं।
इस परदेसी के जीवन को टारगेट किया गया। शुरुआत जो हुई, वह 1998 से थी। अमेरिका, रूस और जी-7 के सदस्य देश जिसमें जापान भी शामिल है, ने एक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया। कुछ ही समय में स्पेस एक्स सहित कई कंपनियों को सहयोगी के रूप में शामिल कर लिया गया।
इस तरह से अंतरिक्ष एजेंसियों के माध्यम से राजनेताओं ने अपनी कमाई आरंभ कर दी। यह इस तरह का खेल था, जैसे स्पा सेंटर के नाम पर वेश्यावृत्ति का खुला होने के समाचार आते हैं। होटल्स में गैम्बलिंग का धंधा चलने की खबरें आती हैं। उसी तरह से इस सरकारी कार्यक्रम को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया और इसके साथ ही सूर्यवंशी अथवा आईवीएफ संतानों के बारे में प्रचार आरंभ हो गया और लोग विभिन्न संस्थानों की ओर भागने लगे। किसी को 170 आईक्यू लेवल का बच्चा मिला तो किसी को 70 आईक्यू वाला।
किसी को पुत्र मिला तो किसी को पुत्री। इस तरह से यह धंधा चल रहा था और आज भी चल रहा है। जो राजनेता या बड़े व्यापारी हैं, उन्होंने बच्चों के नाम का भी पैंटेंट करवाना आरंभ कर दिया।
यह शायद आदि दुनिया को मालूम नहीं होगा कि इस समय पैटेंट का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है और बच्चों के नाम का भी इसी तरह का धंधा चल रहा है। कई लोगों ने डर कर अपने बच्चों का नाम अरबी में दे दिया।
किस क्षेत्र में कैसा मौसम रहेगा, यह भी स्पेस स्टेशन में बैठे लोग तय कर रहे हैं। हालांकि इसका कमांडिंग कंट्रोल जमीन पर विभिन्न स्थानों पर है।
आप क्या कर रहे हैं। आप क्या खा रहे हैं। आपका मूड स्विंग कैसे किया जाना है। कैसे आपको अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट्स तक लेकर जाना है। यह सब तय किया जाता है।
परदेसी और उसका जीवन
परदेसी का जीवन तो स्ट्रगल में ही बीतता चला गया। विभिन्न सरकारें उस परदेसी की सम्पत्ति का दोहन तो कर रहे हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापारियोंं के दबाव में उसको वह मान-सम्मान, प्रतिष्ठा हासिल नहीं हो पायी, जो हासिल की जानी चाहिये थी।
अब बड़ा सवाल सामने आता है कि जिन लोगों ने आईवीएफ तकनीक से संतान को प्राप्त किया, अब उनके जीवन पर भी संकट गहरा रहा है। जिन लोगों ने अपने बच्चों का नाम पैटेंट करवाया हुआ है, वे निरोगी और अधिक कुशल होंगे किंतु जिनका पैटेंट नहीं हुआ, उनके जीवन से रक्त का संचार का रुख अपनी तरफ किया जा सकता है।
मोदी सरकार-2.0 में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने लोकसभा में खुलासा किया था कि राजस्थान में खून की खेती हुई है। एक केबिनेट मंत्री के बयान को हटा दिया गया क्योंकि यह सीधे तौर पर उस समय सभापति और पीएम नरेन्द्र मोदी सहित अनेक नेताओं को घेर रहा था।
उनके बयानों के साथ-साथ हमें कई ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों या फोरम के जारी बयानों को भी पढ़ा, जिसमें यह साफ कहा गया है कि जिनके ब्लड में हेमोग्लोबिन के साथ सी का मॉड्यूल होगा, उनके रक्त का इस्तेमाल आगामी अवसरों पर इस्तेमाल किया जायेगा। विश्व स्तर पर जो पेरिस समझौता हुआ, उसमें भी एक घोटाले वाले संकेत मिले हैं।
एलन मस्क सबसे बड़ा व्यापारी
इस समय दुनिया में एलन मस्क, जेफ बेजोस आदि की सम्पत्ति को लेकर चर्चा हो रही है। एलन मस्क के नेतृत्व वाले समूह ने इस पूरी कमान को संभाला हुआ है और हिजबुल्लाह नामक संगठन को अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।
इसी कारण हमास और लश्करे तैयबा जैसे संगठन सामने आये हैं। अमेरिका के भीतर ही आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया और कोई सरकारी कार्यवाही नहीं हुई तो इसका एक कारण यह भी था कि भारत सरकार के प्रधानमंत्री, रूस के राष्ट्रपति, अमेरिका में 2024 से पूर्व के राष्ट्रपति, जी-7 के अनेक नेताओं को इसके बदले में बड़ी रकम प्राप्त हो रही है। बिल गेटस का भी नाम एड किया जा सकता है। भारत में तो गौतम अडाणी, मुकेश अम्बानी और टाटा जैसे समूह पर पूर्व में संदेह जताया जाता रहा है कि वे लीक से हटकर काम कर रहे हैं।
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