Saturday, December 13, 2025

 

अमेरिका पाकिस्तान की मदद क्यों कर रहा है?



वाशिंगटन। अमेरिका पाकिस्तान की मदद कर रहा है यह विचार यूरोप से लेकर एशिया तक हर व्यक्ति की जुबान पर है। नाटो या जी-7 देशों के बीच जो असहमति सामने आ रही है, उससे यह लग रहा है कि संयुक्त राज्य अब अकेला चलो की नीति को अपना रहा है। 

यूरोप को देखा जाये तो वहां पर यूक्रेन को लेकर अलग नीति है और अमेरिका यह मान रहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादीमोर जेलेंस्की नहीं चाहते कि युद्ध समाप्त हो, क्योंकि उसको पर्याप्त सहायता मिल रही है। 

इस कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व मास्को के ब्लादीमिर पुतिन के बीच डॉयलोग हो चुका है। आगे भी यह सोच जारी रहने की संभावना है। सबसे बड़ा कारण यही माना जा रहा है कि युक्रेन युद्ध के कारण अन्य कार्य जो विश्व शांति के लिए आवश्यक हैं, वह नहीं हो पा रहे हैं। 

जेलेंस्की अभी तक यह नहीं सोच पा रहे हैं कि ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ अर्थात अगर अब ट्रम्प के प्रस्तावों पर युक्रेन राजी नहीं होता है तो फिर कभी यह युद्ध समाप्त नहीं किया जा सकेगा और गाजा की तरह युक्रेन भी मिसाइलों से होने वाले हमलों के लिए एक प्रमुख क्षेत्र बन जायेगा। 


नाटो का कोई औचित्य शायद नहीं रहा

फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां का मानना है कि 2030 तक नाटो का अस्तित्व खत्म हो सकता है। वहीं मौजूदा हालात जो बन चुके हैं, उनमें अभी नहीं तो कभी नहीं, यह सच सामने आने लगा है। अभीव्यक्ति की आजादी को मौजूद करने के लिए यह अन्तिम अवसर हो सकता है क्यों अगले कुछ समय के भीतर अनेक देशों में चुनाव होने वाले हैं और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया अगर हुई तो फिर इस मसले को समझने और उसको सम्पन्न करने में ही समय लग जायेगा। 

अभी तक अमेरिका के नेतृत्व में नाटो ने इराक, सोमालिया और अफगानिस्तान में ऑपरेशन किये हैं। लेकिन इस समय नाटो के अनेक देश अलग-अलग मत लेकर चल रहे हैं। अनेक बार व्लर्ड वॉर-3 को टालने के लिए नेताओं ने एक-दूसरे देश के लिए दौड़ लगायी है। अब मतविभाजन होने के कारण नाटो अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। 

दूसरी ओर अमेरिका ने जी-7 या नाटो से अलग एक नया मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया है और इसमें जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, सउदी अरब जैसे देशों को शामिल किया जा रहा है। 

इस तरह से 2030 से पहले ही नाटो अपना अस्तित्व समाप्त कर सकता है। 


क्या चाहते हैं ट्रम्प?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक मसौदा युक्रेन को भेजा था किंतु अभी तक उस पर सहमति जेलेंस्की ने नहीं दी है। रूस अनेक शर्तों को मानने को तैयार है। इस तरह से जेलेंस्की यूरोप की ओर मुख कर रहे हैं। इसी सप्ताह लंदन में अनेक अंतरराष्ट्रीय नेता बैठक कर चुके हैं और ट्रम्प को भी आनलाइन बात की गयी। 

राष्ट्रपति ट्रम्प मानते हैं कि युके्रन ऐसा युद्ध नहीं है जिसको समाप्त करने के लिए इतना समय लगाया जाये। वे बार-बार होने वाली बैठकों से भी तंग आ चुके हैं। 


फ्रांस की नीति किसी को समझ नहीं आ रही?

ब्रिटेन और फ्रांस नाटो में किसी मसौदे पर सहमत होते नहीं दिख रहे हैं और इसी कारण हर दिन टलता जा रहा है लेकिन यह विचार नहीं किया जा रहा कि हर दिन कितने लोगों को अपनी जिंदगी को गंवाना पड़ रहा है। लाखों लोग मारे जा चुके हैं। 

ट्रम्प को हाल ही में फीफा ने शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है और ट्रम्प प्रशासन का भी मानना है कि वे 8 युद्ध को समाप्त करवा चुके हैं और युक्रेन युद्ध भी उनके प्रस्तावों के तहत समाप्त हो सकता है किंतु इसके लिए एकता आवश्यक है। पहले यह भी चर्चा थी कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो नाटो या जी-7 की बैठक से स्वयं को बाहर रखकर अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं। 

बहुत कुछ गुजर रहा है। हर पल लाखों या करोड़ों डॉलर की सम्पन्न नष्ट हो रही है। इसके बावजूद अगर पश्चिमी देश समझौते पर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो इससे अनुमान लगाया जा सकता कि रोज होने वाली मौतों के प्रति वे संवेदनशील नहीं हैं। 






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