साधु-संतों के लिए आसान नहीं है अपनी पूजास्थली को कायम रखना!
श्रीगंगानगर। भारत में बाबा फरीद का नाम काफी सम्मान के साथ लिया जाता है और जब उनके दोहों को पढ़ा जाता है तो सामने आता है कि उनके आवास के नजदीक कसाइयों ने डेरा डाल लिया था और उस समय उनके पास आने वाले श्रद्धालुओं ने इस पर चिंता जतायी तो उन्होंने इस पर भी एक दोहे की रचना कर दी। बाबा फरीद ने लिखा, फरीदा तेरी झोपड़ी गल कट्यिन के पास, जो करेंगे सो भरेंगे तूं क्यों भयो उदास। अर्थात जो व्यक्ति कर्म कर रहा है, जीवों को मार रहा है, उसके कर्म का फल उसको उसी अनुसार उचित समय पर मिल जायेगा। इसी तरह से जब क्रिश्चियन धर्म के सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं तो प्रभु यीशू को इस कारण सूली पर चढ़ा दिया गया था क्योंकि वे लोगों को बुरे कर्म से दूर रखने के लिए आग्रह करते थे। उन्होंने उस समय भी अपने आखिरी पलों में कहा था, यह लोग नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। हे परमपिता इनको माफ कर देना। अहिंसा का पाठ समय-समय पर दिया गया है। सम्राट अशोक को भी यह ज्ञात हुआ कि भगवान गौतम बुद्ध के सिद्धांतों में आनंद है तो उन्होंने युद्धकाल को समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसी तरह से त्रेता युग में महान ऋ...