नैतिकता शब्द को जिंदा कर गये उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने अपने पद से इस्तीफा देकर नैतिकता को एक बार पुन: जीवित कर दिया। राजनीति में नैतिकता कई सालों से गुम हो गयी थी। उनके इस्तीफा के उपरांत अनेक सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े पद से धनकड़ का मोह कैसे भंग हो गया। कुछ माह पूर्व एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान धनकड़ ने शिवराज सिंह चौहान को संबोधित करते हुए सवाल किया था कि किसान आंदोलन पिछले साल भी चल रहा था, इस साल भी चल रहा है। इसका क्या कारण हैं? इस अशांत माहौल को शांत किया जाये। उपराष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह ही एक बार फिर सनसनी फैला दी थी कि देश में माहौल लोकतंत्र के लायक नहीं रहा है। यह चंद शब्द ने पूरी दुनिया का ध्यान उनकी ओर खींचा था। उन्होंने इस तरह का बयान देकर नरेन्द्र मोदी की सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। इस बीच ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की विमान हादसे में मौत हो गयी। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने 6 महीने के कार्यकाल पूरा होने पर जश्र मना रहे थे और इसके कुछ घंटों उपरांत ही समाचार आ गया कि उपराष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आसीन ...