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अब खेल खत्म : ट्रम्प, मध्यपूर्व पहुंच रहे हैं 82वीं एयरबोर्न के ट्रूप्स, हजारों थल सैनिकों को तैनात करने की तैयारी

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श्रीगंगानगर। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट में लिखा है, नो मोर गेम। इस चेतावनी के बाद वैश्विक हलचल तेज हो गयी है। हजारों नये सैनिकों को तैनात किया जा रहा है, इससे आशंका है कि समझौते की जो संभावना थी, वह खत्म हो चुकी है।  मंगलवार को प्राप्त समाचारों में बताया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात में खड़े एक तेल टैंकर पर ईरान ने हमला किया और इस हमले से आग लग गयी। भयंकर आग।  इस घटना के उपरांत राष्ट्रपति का नया बयान सामने आया और उन्होंने ईरान को नयी चेतावनी जारी कर दी। हालांकि समझौता के लिए पहले 6 अप्रेल तक की तारीख निर्धारित थी।  ट्रम्प का कहना है कि अब ईरान के तेल के कुओं को सूखा दिया जायेगा और ईरान के भीतर जो समुन्द्र खारे पानी को मीठा करने का संयंत्र है, बिजली ग्रिड सबको नष्ट कर दिया जायेगा। हमारे पास दुनिया की सबसे बहादुर सेना है।  इस चेतावनी के बाद वैश्विक हलचल काफी बढ़ गयी है।  वहीं 82वीं एयरबोर्न के हजारों एयर ट्रूप्स मध्य पूर्व एशिया पहुंच गये हैं। वहीं सेना की तैनाती को लेकर भी तैयारी चल रही है। इस...

क्रूड के दाम बढ़े, शेयर बाजार और रुपया गिरा-जयशंकर और रूबियो फ्रांस में, क्या प्रशांत महासागर की स्वतंत्रता पर होगी चर्चा

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श्रीगंगानगर। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री जी-7 और सहयोगियों की बैठक में शामिल होने के लिए आज पेरिस में है। इस दौरान शेयर बाजार में फिर से भूचाल आ गया और शेयर बाजार तीन दिन की तेजी के बाद शुक्रवार को 15 सौ से ज्यादा अंकों की गिरावट को देखा जा रहा था और निवेशकों के लिए यह चिंता का कारण बन गया था। रुपया भी 94 की दशा को एक बार पुन: पार कर गया और दोपहर 1 बजे तक वह निम्रस्तरीय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा था। वहीं कच्चे तेल में आज तेजी का दौर देखने को मिला।  पश्चिम एशिया में ईरान ने नयी धमकी अमेरिका को दी है कि उसके पार्क और पर्यटन स्थल अब सुरक्षित नहीं है। इस चेतावनी के बाद अमेरिका में सतर्कता को बढ़ा दिया गया है।  दूसरी तरफ पेरिस में जी-7 के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है, इसमें यूएसए, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, कनाडा और सहयोगी देश के रूप में भारत शामिल हो रहा है।  मार्को रूबियो और एस जयशंकर के बीच एक बार अमेरिका प्रवास के दौरान बातचीत हुई है। रूबियो विदेश सचिव/मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद एक बार भी नई दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम नहीं बनाया।...

किसानों को खाद के भी पड़ सकते हैं लाले, ट्रम्प और हजारों सैनिकों को खाड़ी भेज रहे हैं

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  श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमांडर इन चीफ के रूप में सेना के हजारों और जवानों को खाड़ी के लिए रवाना कर रहे हैं क्योंकि इरान के साथ युद्ध को चार सप्ताह हो गये हैं। मध्यावधि चुनाव भी आने वाले हैं और उससे पहले तेहरान में शासन व्यवस्था बदलवाना उनके लिए चुनौति है।  तेहरान युद्ध अगर लम्बा चलता है तो भारत में निश्चित रूप से सभी व्यवस्थाओं पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। खाद/फर्टिलाइजर का भारत आयात करता है लगभग 70 प्रतिशत। 30 प्रतिशत ही देश में उत्पादन हो रहा है। किसानों को अगर आगामी सीजन में खाद नहीं मिली तो उनको सडक़ों पर प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है।  तेल और गैस की आपूर्ति हार्मूज जल डमरू मध्य से कितने समय तक हो पाती है, यह भी समझने वाली स्थिति है।  दूसरी ओर यूएसए ने अपनी 82वीं रेजीमेंट से हजारों सैनिकों को खाड़ी देशों की ओर रवाना कर दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी सेना यूएसए के पास है और उसने अपने हजारों सैनिकों को ईरान के भीतर घुसकर युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है।  वाशिंगटन इस समय कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहता और बकाया काम ...

जल डमरू मध्य स्वतंत्र रहे : नाटो; ट्रम्प की धमकी से क्रूड ऑयल के बाजार में आज लग सकती है आग

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श्रीगंगानगर। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो को कायर कहा तो इसके बाद हलचल तेज हो गयी और 20 से ज्यादा देश ट्रम्प की योजना में शामिल होने के लिए तैयार हो गये हैं। इनमें यूएई और अन्य सहयोगी देश भी शामिल है। नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने एक बयान में कहा है कि हरमूझ जल डमरू मध्य को स्वतंत्र रहना चाहिये और कनाडा, यूएई, नाटो के अधिकांश सदस्य देश इस स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल हो रहे हैं।  जापान जो अब तक निष्पक्ष बना हुआ था अब वह भी इस बात के लिए सहमत हो गया है कि जल डमरू मध्य को स्वतंत्र रहना चाहिये।  अनेके देशाय अमेरिकादेशे शरणम् याचन्ते हरमूझ जल डमरू मध्य पर ईरान का कब्जा हो चुका है और इस कब्जे को हटाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 48 घंटे की तस्वीर खींच दी है और कहा है कि अगर तेहरान अपना कब्जा नहीं हटाता है तो उनके पास ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाना के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। यह एक बयान ही बाजार में हलचल तैयार करने के लिए काफी है। दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि वह खाड़ी के देशों में बिजली, पानी संयंत्रों को निशाना बनाने से बाज नहीं आयेगा।  एलपीजी, एनपीजी औ...

चाइना की तीन दिवसीय यात्रा : दक्षिण एशिया आकर क्या देखते डोनाल्ड ट्रम्प

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श्रीगंगानगर। मोबाइल, कार, विद्युत और इस्पात के उत्पादन में चाइना का कोई भी देश मुकाबला नहीं कर पा रहा है। भारत के पास यह क्षमता थी किंतु वह जातिवाद के दशकों पुराने झगड़ों में ही फंसा हुआ है और उसके पास ऐसी कोई नीति नहीं है कि वह बिजली क्षेत्र में ही देश को आत्मनिर्भर बना दे। भारत का पैसा बांग्लादेश और अन्य देशों में बिजली सप्लाई के लिए उपयोग हो रहा है।  अमेरिका के राष्ट्रपति ने चाइना के शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा का इंतजार नहीं करते हुए आसियान देशों की दूसरी यात्रा में बीजिंग को अपना पड़ाव बनाया है और दक्षिण एशिया की तरफ उन्होंने देखा भी नहीं। क्यों? भारत का प्रचार तंत्र भले ही भारत-चाइना की तुलना करता हो, लेकिन सच्चाई यह है कि  नई दिल्ली उसके कहीं भी आसपास नहीं है।  चाइना जहां हर साल दुनिया भर में 3 करोड़ कारों की बिक्री करता है। इसका अर्थ यह हुआ हुआ कि हर माह वह 25 लाख कार बेचता है। वहीं भारत को देखा जाये तो वह मात्र 40-45 लाख की बिक्री पूरे साल में कर पाता है।  मोबाइल को लेकर भी इसी तरह की स्थिति है। भारत ने हाल ही में सैमसंग और एप्पल जैसी कंपनियों का संयंत्र स...