परमाणु ऊर्जा में भारत ने प्राइवेट सैक्टर के लिए खोला दरवाजा उचित है? राष्ट्रीय जनगणना को भी मंजूरी, लेकिन अनेक सवाल?
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की सरकार ने मंत्रीपरिषद की बैठक उपरांत परमाणु ऊर्जा को प्राइवेट सैक्टर के लिए खोल दिया है। इससे सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं। क्योंकि बिजली या जिसको ऊर्जा के रूप में भी संबोधित किया जाता है अब निजीकरण हो रही है साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल हमेशा के लिए बने रहेंगे। वहीं जनगणना और जातिगत सांख्यिकी को भी मंजूरी दे दी गयी है।
भारतीयों ने हाल ही चाइना को पराजित करते हुए विश्व जनसंख्या का रिकॉर्ड देश के नाम कर दिया था। अब तक लगभग 1.5 बिलियन भारतीयों की संख्या होने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर एक और आकड़े पर भी नजर डालना आवश्यक है, भ्रष्टाचार निरोधात्मक कार्यवाही में हम 95वें स्थान पर हैं।
भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण और रखरखाव के लिए विदेशियों को आमंत्रित करने का निर्णय लेते हुए इसको प्राइवेट सैक्टर के लिए खोल दिया है। विदेशी भी इसमें निवेश कर सकते हैं।
भारत सरकार ने प्राइवेट सैक्टर को अपने देश में खोलने के स्थान पर बांग्लादेश में एक प्राइवेट कंपनी जिसको ५६+२+२ फार्मूले के तहत स्थापित किया जा रहा था। इसकी जानकारी सभी भारतीयों के पास नहीं थी। वे लोग भी अनजान थे जो लाइन में लगकर वोटिंग करते हैं।
खैर वहां पर सत्ता को उखाड़ दिया गया। प्राइवेट सैक्टर का अर्थ समझा जा सकता है कि इसमें सरकार के साथ कौन-कौन शामिल होगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज को पहले देश में पेट्रोलियम पदार्थों का बादशाह बनाया गया और अब परमाणु ऊर्जा में भी लाया जा सकता है। परमाणु ऊर्जा तकनीक अगर ऐसे लोगों के हाथों में पहुंच जाती है तो यह अनुमान लगाना आसान होगा कि आतंकवादी संगठन ज्यादा मजबूत हो जायेंगे।
अगर मंत्रीपरिषद की बैठक में लिये गये अन्य नियमों को देखें तो जातिगत व जनगणना को मंजूरी प्रदान की गयी है और इसको 11 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि जारी की गयी है। जनगणना 2027 डिजीटली होगी।
भारत में 2026, 2027, 2028 में अनेक राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उसी समय इनके आकड़े जारी किये जायेंगे। सरकार के पास एडवांटेज होगा। वहीं 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं और 2027 में देश में लोकसभा व विधानसभा सीटों का नया परिसीमन होगा।
इस तरह से सरकारी कर्मचारी जो हजारों की संख्या में नियुक्त किये जायेंगे, उनके पास अपने कार्यालयों में काम करने के लिए अतिरिक्त समय लगाना होगा अथवा तीन साल या इससे भी अधिक अवधि के लिए जनगणना कार्य एकजुट करने के लिए कार्यकर्ता बनना होगा। बीएलओ का भी कार्य और उसके बाद परीसिमन के लिए भी आकड़े जुटाकर उसको सरकार तक पहुंचाना होगा। फिलहाल सरकार शांति अधिनियम के तहत परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में सक्रिय है।
