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पाकिस्तान अब फिर से मध्यस्थता के प्रयासों में जुटा, चार प्रमुख मुस्लिम राष्ट्र कर रहे हैं बैठक

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श्रीगंगानगर। पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों में अब सउदी अरब, तुर्कीये भी शामिल हो गये हैं। पाकिस्तान में इस संबंध में एक बैठक का आयोजन किया जा रहा है जिसमें चौथा देश मिस्र शामिल होगा। तीन देशों के विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुंच गये हैं। भारत सरकार ने पहले इसे ‘दलाली’ करार दिया था।  सउदी अरब, मिस्र, तुर्कीये और पाकिस्तान दो दिवसीय बैठक के लिए एकजुट हो गये हैं। वे पश्चिम एशिया में शांति किस तरह से बहाल की जाये, इस पर चर्चा करेंगे।  इस्लामाबाद में बैठक होने के कारण नई दिल्ली के कान खड़े हो गये हैं।  आज और कल दो दिन बैठक होनी है। हालांकि युद्ध के विस्तार होने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है। पेंटागन ने अपने 2500 मरीन पश्चिम एशिया में नियुक्त कर दिये हैं, यह जापान की सुरक्षा के लिए तैनात युद्धपोत पर सवार थे।  अमेरिका से आ रही खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि जमीनी लड़ाई जो लम्बी चल सकती है, उसके लिए भी सेना को तैयार रहने के लिए कहा गया है और ऐसे हजारों सैनिक इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं।  भारत के लिए हर पल बढ़ रहा खतरा चार इस्लामिक राष्ट्र एकजुट हो गये हैं। पाकि...

क्रूड के दाम बढ़े, शेयर बाजार और रुपया गिरा-जयशंकर और रूबियो फ्रांस में, क्या प्रशांत महासागर की स्वतंत्रता पर होगी चर्चा

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श्रीगंगानगर। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री जी-7 और सहयोगियों की बैठक में शामिल होने के लिए आज पेरिस में है। इस दौरान शेयर बाजार में फिर से भूचाल आ गया और शेयर बाजार तीन दिन की तेजी के बाद शुक्रवार को 15 सौ से ज्यादा अंकों की गिरावट को देखा जा रहा था और निवेशकों के लिए यह चिंता का कारण बन गया था। रुपया भी 94 की दशा को एक बार पुन: पार कर गया और दोपहर 1 बजे तक वह निम्रस्तरीय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा था। वहीं कच्चे तेल में आज तेजी का दौर देखने को मिला।  पश्चिम एशिया में ईरान ने नयी धमकी अमेरिका को दी है कि उसके पार्क और पर्यटन स्थल अब सुरक्षित नहीं है। इस चेतावनी के बाद अमेरिका में सतर्कता को बढ़ा दिया गया है।  दूसरी तरफ पेरिस में जी-7 के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है, इसमें यूएसए, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, कनाडा और सहयोगी देश के रूप में भारत शामिल हो रहा है।  मार्को रूबियो और एस जयशंकर के बीच एक बार अमेरिका प्रवास के दौरान बातचीत हुई है। रूबियो विदेश सचिव/मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद एक बार भी नई दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम नहीं बनाया।...

विवेचना : युद्ध ईरान में चल रहा है, पेंटागन के अधिकारी रक्षा मंत्रालय के साथ क्या मंत्रणा करेंगे? मोदी ने ट्रम्प के साथ बात कर भी अपने अहंकार का त्याग नहीं किया!

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श्रीगंगानगर। पेंटागन के अधिकारी  ने भारत को रणनीतिक मित्र माना लेकिन मतभेद उससे भी बड़े माने और इसी कारण भारत में होने वाली क्वाड शिखर वार्ता का जिक्र नहीं किया। वहीं नरेन्द्र मोदी अपने एक्स एकाउंट में यह कहना नहीं भूले कि फोन अमेरिकी राष्ट्रपति का आया था। वह भी उस समय अहंकार प्रदर्शित किया गया जब पीएम के सिर्फ अहंकार के कारण ही भारतीय अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है।  बहुत सी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र  नहीं किया गया कि सोने और चांदी के भावों में आई मंदी के कारण 180 लाख करोड़ का  नुकसान निवेशकों को हुआ। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत में ब्लैकमनी कितनी है। पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सोने में गिरावट को लेकर भारत गणराज्य के चुनिंदा अधिकारियों को चिंता में डाल रखा है।  अब मंगलवार 24 मार्च 2026 की मुख्य खबर पर नजर डालते हैं तो सबसे पहले भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का जिक्र आवश्यक है।  प्रधानमंत्री ने एक्स एकाउंट में लिखा कि प्रेजीडेंट ट्रम्प का फोन आया। दोनों देशों ने विश्व शांति और अन्य मुद्दो...

जल डमरू मध्य स्वतंत्र रहे : नाटो; ट्रम्प की धमकी से क्रूड ऑयल के बाजार में आज लग सकती है आग

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श्रीगंगानगर। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो को कायर कहा तो इसके बाद हलचल तेज हो गयी और 20 से ज्यादा देश ट्रम्प की योजना में शामिल होने के लिए तैयार हो गये हैं। इनमें यूएई और अन्य सहयोगी देश भी शामिल है। नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने एक बयान में कहा है कि हरमूझ जल डमरू मध्य को स्वतंत्र रहना चाहिये और कनाडा, यूएई, नाटो के अधिकांश सदस्य देश इस स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल हो रहे हैं।  जापान जो अब तक निष्पक्ष बना हुआ था अब वह भी इस बात के लिए सहमत हो गया है कि जल डमरू मध्य को स्वतंत्र रहना चाहिये।  अनेके देशाय अमेरिकादेशे शरणम् याचन्ते हरमूझ जल डमरू मध्य पर ईरान का कब्जा हो चुका है और इस कब्जे को हटाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 48 घंटे की तस्वीर खींच दी है और कहा है कि अगर तेहरान अपना कब्जा नहीं हटाता है तो उनके पास ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाना के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। यह एक बयान ही बाजार में हलचल तैयार करने के लिए काफी है। दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि वह खाड़ी के देशों में बिजली, पानी संयंत्रों को निशाना बनाने से बाज नहीं आयेगा।  एलपीजी, एनपीजी औ...