ये नया ठाकुर कौन है रे कालिया!

 





श्रीगंगानगर। जय-वीरू की दोस्ती और रामगढ़ (रामनगर) गांव   के ठाकुर पर बनी फिल्म शोले को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सरकार का समर्थन प्राप्त था। इस कारण फिल्म को इतना भयावह बनाया गया कि यह दशकों बाद भी लोगों को याद है। इसमें गब्बरसिंह, ठाकुर (संजीव कुमार), धर्मेन्द्र-अमिताभ बच्चन, असरानी (जेलर) और रहमान चाचा, हेमा मालिनी जो बसंती का रोल निभाती हैं और अमिताभ की  पत्नी जया बच्चन भी इस फिल्म में शामिल थे। उस समय के दो सबसे बड़े स्टेट पंजाब, उत्तर प्रदेश के कलाकारों को मुख्य भूमिका दी गयी थी। ठाकुर को भी दिखाया गया था, जिसके दोनों हाथ को काट दिया जाता है। 

उसी दौरान राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर फायर ब्रिगेड के सामने और केन्द्रीय जेल-कलेक्ट्रेट के निकट सर्किल पर एक मूर्ति को स्थापित किया गया। 

इस मूर्ति को भगत सिंह की प्रतिमा बताया जा रहा है। प्रतिमा में भगतसिंह के सिर पर पगड़ी, हाथों में किताब नहीं है। यह भगत सिंह की शहादत को चोट पहुंचाने वाला लेख नहीं है बल्कि लेखक का मत है कि यह महान देश भक्त के साथ मजाक बनाया गया। सिर पर पगड़ी नहीं होने के साथ उनके दो हाथ या पैर भी नहीं है, उनको सिटिंग वाली प्रतिमा के रूप में प्रदर्शित किया गया। राष्ट्रीय पर्व और भगतसिंह की जयंती पर प्रतिमा की सफाई होती है और लाइटिंग की जाती है। इसके बाद कोई पूछ नहीं होती। 

श्रीगंगानगर के लोगों का ध्यान शायद ही इस और गया हो कि भगतसिंह के हाथ क्यों नहीं है। हालांकि उनको शोले के ठाकुर याद नहीं आते। गब्बरसिंह भी नहीं आते क्योंकि उनको कभी लगा ही नहीं कि यह एक साजिश के तहत प्रतिमा स्थापित है। अन्यथा कोई पार्टी तो आंदोलन करती। जय-वीरू से पिटकर जब डकैत वापिस अपने ठिकाने जाते हैं तो वहां पर सरदार गब्बर सिंह पूछता है कितने आदमी थे कालिया?

हाल ही में शोले के जेलर, वीरू का निधन हो गया जबकि ठाकुर को कई वर्ष पहले मृत बताया गया था और सरदार भी अल्पकाल में चल बसे। 

रावलपिंडी एक्सप्रेस ने सन्यास क्यों लिया

पाकिस्तान के टेस्ट गेंदबाज शोएब अख्तर ने 1997 में सनसनीखेज शुरुआत की थी जब उन्होंने दो गेंदों पर संजय मांजरेकर और सचिन तेंदुलकर को वापिस  पैवेलियन भेज दिया था और रावलपिंडी एक्सप्रेस के रूप में ख्याति प्राप्त की क्योंकि वह पंजाब के इलाके के थे किंतु 2011 में उन्होंने मात्र 34 साल की आयु में संन्यास ले लिया। 

हाल ही में अख्तर ने बताया था कि वह अपनी फिटनेस के आधार पर कम से कम पांच साल और क्रिकेट खेल सकते थे किंतु उनको भारतीय धर्म के बारे में ऐसी जानकारी मिली कि उन्होंने उस काल के कारण संन्यास ले लिया था। 

दो घटनाओं का जिक्र किया गया है तो यह दोनों ही आपस में सम्बद्ध हैं। इनको गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। 

ट्रम्प ने 50 साल पुराने अंधेरे का राज खोला

वर्ष 1971 में पाकिस्तान का बंटवारा हुआ और बांग्लादेश का सृजन हुआ। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन तत्काल समय पर अपने मित्र पाकिस्तान को सहायता नहीं पहुंचा पाये थे और भारतीय सेना ने युद्ध को अल्प समय में ही जीत लिया था और 90 हजार सैनिकों को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया था। 

वर्ष 1972 तक मीडिया ने इसकी जांच की और वाटरगेट के रूप में इसको दुनिया के सामने पेश किया। निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा। 

1975 में इंदिरा गांधी को आपातकाल लागू करना पड़ा और दो साल तक यह कालखण्ड रहा। इसके उपरांत 1977 में आपातकाल को हटाया गया। आधी रात को आपातकाल लागू करने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी और मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया। इस तरह से वह घटना दुनिया के सामने नहीं आ सकी, जिसके बारे में आपातकाल का सहारा लेना पड़ा। 

इसके बाद 1980 में इंदिरा गांधी सरकार की सत्ता में वापसी हुई तो उन्होंने कहा, जो देश के लिए हम नहीं कर सके, वह विपक्षी दल भी नहीं कर पाया। इंदिरा गांधी की देश के नाम संबोधन था और उनके इस बयान को हैडलाइन नहीं बनाया गया कि क्या ऐसा था जो वह सामने नहीं ला सकीं और इसके बाद विपक्षी लोग भी ऐसा नहीं कर पाये।

यह 50 साल तक छुपा रहा। अब गत दिवस अर्थात 8 दिसंबर 2025 को अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जिनको पे्रेजीडेंट 47 के  नाम से भी जाना जाता है और दुनिया उनको डोनाल्ड ट्रम्प के नाम से पुकारती और जानती है। 

उन्होंने गत दिवस ऐसा बयान जारी किया जो इन तीनों घटनाओं को आपस में जोड़ देता है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा, 

President Trump CONFIRMS Barack Obama’s LOOMING PROSECUTION RELATED TO OBAMAGATE/RUSSIAGATE: “It’s a disgrace that it happened. And if you look at what’s gone on and if you look at now all of this information that’s being released (by DNI Tulsi Gabbard) and from what I understand that’s only the beginning. Some terrible things happened and it should never be allowed to happen in our country again. And you’ll be seeing what’s going on (with respect to Obama’s criminal prosecution) over the coming weeks.” It appears that there is credibility to the reports that Barack Obama is going to be indicted in the southern district of Florida’s MASSIVE DEEP STATE CONSPIRACY GRAND JURY INVESTIGATION related to his role in Russiagate at the beginning of the new year. Better start fitting an orange jumpsuit for Barry… This is an ABSOLUTE BOMBSHELL from President Trump. Buckle up, patriots… JUSTICE IS FINALLY ON THE HORIZON!

अगर इसका हिन्दी में रुपांतरण किया जाये तो सामने आता है, 

प्रेसिडेंट ट्रंप ने ओबामागेट/रशियागेट से जुड़े बराक ओबामा पर केस चलने की बात कन्फर्म की। यह शर्म की बात है कि ऐसा हुआ। और अगर आप देखें कि क्या हुआ है और अगर आप अब यह सारी जानकारी देखें जो (खुफिया एजेंसियों की निदेशक तुलसी गबार्ड द्वारा) जारी की जा रही है और जहाँ तक मैं समझता हूँ, यह तो बस शुरुआत है। कुछ भयानक चीजें हुईं और हमारे देश में ऐसा दोबारा कभी नहीं होना चाहिए। और आप आने वाले हफ्तों में देखेंगे कि (ओबामा के क्रिमिनल केस के संबंध में) क्या हो रहा है। ऐसा लगता है कि इन खबरों में दम है कि नए साल की शुरुआत में बराक ओबामा पर फ्लोरिडा के दक्षिणी जिले के बड़े डीप स्टेट कॉन्सपिरेसी ग्रैंड जूरी इन्वेस्टिगेशन में रशियागेट में उनकी भूमिका के लिए आरोप लगाया जाएगा। बेहतर होगा कि बैरी के लिए ऑरेंज जंपसूट पहनना शुरू कर देंज् यह प्रेसिडेंट ट्रंप की तरफ से एक पूरी तरह से बड़ा धमाका है। तैयार हो जाओ, देशभक्तों आखिरकार न्याय मिलने वाला है!

इस तरह से उन्होंने 1975 के कालखण्ड का वह सच भी उजागर कर दिया। इसको समझने के लिए गहराई की आवश्यकता होगी। 


ट्रम्प टावर्स और स्टैचयू ऑफ यूनिटी

आपको याद होगा होगा कि देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की स्थापना करते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा की स्थापना की थी। इस दौरान उन्होंने गुजरात में महाराष्ट्रा मार्ग पर एक नये सिटी का भी शुभारंभ किया जिसको ‘धोलेरा सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके लिए 928 वर्ग किमी भूमि का अधिग्रहण किया गया। 

वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल को स्थापित करने और आसपास का इलाका टूरिस्ट स्थल बनाने के लिए तीन हजार करोड़ रुपये के कार्य करवाये गये। वहीं धोलेरा को भी शहर बनाने के लिए कई हजार करोड़ की योजना बनायी गयी और जब वे 56 ईंच के सीने के साथ चुनाव मैदान में उतरे तो भारी विजय हासिल हुई। 

उन्होंने अपना कद पहले ही चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया। 

अब धोलेरा शब्द को डिकोड किया जाये तो यह ढोल+ऐरा के रूप में सामने आता है। ढोल बजाते हुए वह कई बार विदेशों में कैप्चर भी हुए हैं। अब ऐरा का हिन्दी में अर्थ होता है युग। उन्होंने इसे ढोल युग के रूप में स्थापित कर दिया। उन्होंने सनातन धर्म के नाम पर प्रचार आरंभ कर दिया। स्वयं को शिव और मां दुर्गा का भक्त बताया। इस तरह से नये युग की शुरुआत की और धोलेरा को अब राष्ट्रीय दर्जा दे दिया गया है। 

हालांकि पीएम के समर्थक उनको नॉन बायोलॉजिकल भी मानने लगे और विश्व गुरु के रूप में स्थापित किया। 

इस तरह से नरेन्द्र मोदी ने पहले देश और फिर विदेश में नेता के रूप में जो लैण्ड बैंक की स्थापना की, उससे वे लोकप्रिय नेता कम से कम 2024 तक बने रहे थे। अब रुपया कमजोर हो रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है। अमेरिका ने प्रतिबंध लगाये हुए हैं। 

अब कुछ लोगों को यह अनुभव हो सकता है कि यह एक काल्पनिक कहानियां हैं। इसको स्थापित करने के लिए कम से कम दो और उदाहरण सामने हैं। 

अब महात्मा गांधी जी तो देश को आजादी दिलाते ही दिवंगत हो गये थे। फिर भी गांधी नाम आज भी देश भर में चर्चित है तो इसका एक कारण यह है कि नेहरू-गांधी परिवार का राज देश पर 50 से अधिक वर्षों तक रहा। उस समय गांधी परिवार को खुश करने के लिए विदेशी नेता महात्मा गांधी की मूर्तियां अपने देश में स्थापित कर देते थे। गांधी परिवार के सदस्य इन मूर्तियों का अनावरण करते। 

अगर मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाया जाये तो 80 से अधिक देशों में महात्मा गांधी की मूर्तियां स्थापित हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूके, यूरोपीय और अफ्रीकन व लैटिन अमेरिकी देश शामिल हैं। इन देशों में रहने वाले अधिकांश लोगों को मालूम नहीं है कि यह प्रतिमा किसकी है, किंतु लगी है। उस समय की सरकारों ने भव्य कार्यक्रम आयोजित किये थे। 

अगर भारत देश में ही मार्टिन लूथर जूनियर, नेल्सन मंडेला, अब्राहम लिंकन की मूर्तियां स्थापित कर दी जाये तो उस समय तक यह नहीं पता चलेगा कि जब तक उनकी जीवनी को वहां पर प्रदर्शित नहीं किया जायेगा। म्यूजिम में उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गयी हो। 

अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बारे में आम स्टूडेंट नहीं जानता और जब वह एक सभ्य नागरिक होता है तो उस समय भी उसके पास पूरी जानकारी नहीं होती है। 

अब गांधी की मूर्तियां स्थापित हैं और उनकी एनर्जी जो है गांधी परिवार को मजबूत बनाती चली गयी। 

अगर मौजूदा ही उदाहरण देखा जाये तो अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले कभी विदेश, रक्षा मंत्री नहीं रहे। वे शुद्ध व्यापारी थे। मोदी की जीत के बाद रिलायंस के मालिक मुकेश अम्बानी के साथ उनकी मित्रता हुई और इसके बाद ट्रम्प ने अमेरिका के बड़े शहरों तथा दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में ट्रम्प टावर्स की स्थापना कर दी। 

देखते ही देखते वे 45वें राष्ट्रपति के रूप में विजय हासिल करने में कामयाब हो गये और उन्होंने बराक ओबामा की लोकप्रियता को खत्म करते हुए उनकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को पराजित कर दिया। हिलेरी पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हैं। क्लिंटन वही राष्ट्रपति हैं जिनको अपने कार्यालय में मानिका नामक महिला के साथ संबंध बनाने के मामले में प्रचारित किया गया था। 

इस तरह से जीवन में अगर कुछ बड़ा करना है तो सबसे बड़ा बनना होगा। मुकेश अम्बानी ने मुम्बई में सबसे बड़ी आवासीय योजना को बनाया। वे दुनिया के टॉप 10 में शामिल हो गये। मुकेश अम्बानी ने एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर दांव लगाया और वे दुनिया के दूसरे अमीर आदमी बनने में भी कामयाब हो गये थे। 

यह तंत्र-मंत्र की वह दुनिया है जिसको धीरज और धैर्य के साथ समझने की आवश्यकता है। 

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