भाजपा में सिद्धांत नहीं, मोदी के मंत्र! पाकिस्तान बार-बार नीति में क्यों ला रहा बदलाव
श्रीगंगानगर। भारतीय जनता पार्टी के बारे में जब 1990 के दशक में प्रचार किया गया तो उसको सिद्धांतवादी पार्टी बताया गया। अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में एक वोट से सरकार ‘गिरना’ मंजूर कर लिया किंतु किसी आजाद या अन्य पार्टी से ‘मदद’ नहीं ली। इस तरह से उन्होंने दुनिया को सिद्धांतवादी होने का प्रमाण दिया। 2010-20 नरेन्द्र मोदी-अमित शाह का बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 के बाद से देश को मंत्र दे रहे हैं। 2022 तक सभी लोगों को घर, 2047 तक विकसित भारत आदि का वे मंत्र दे रहे हैं और वहीं गौतम अडाणी एक विशालकाय ‘सौदागर’ बन गये हैं। अजीत पंवार की बातों पर यकीन किया जाये तो वे महाराष्ट्र में सरकार गिराने या बनाने में भी भूमिका निभा चुके हैं। पार्टी में सिद्धांत कहां गुम हो गये, इसका पता नहीं चल पाया है लेकिन एलजी वाशिंग मशीन की तरह दागदार नेता भाजपा में आते ही राष्ट्रवादी बन जाता है। एक व्यक्ति-एक पद सिद्धांत समाप्त, 75 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट का सिद्धांत समाप्त, पाकिस्तान-सउदी अरब की मित्रता के बाद आतंकवाद को समाप्त करने का सिद्धांत लापता। पार्टी के रा...