यूएस-भारत ट्रेड डील को लेकर सवाल उठे?



श्रीगंगानगर। संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत सरकार के बीच व्यापारिक समझौते की अभी तक रूपरेखा तय नहीं होने के कारण ट्रम्प प्रशासन नाराज दिखाई दे रहा है और सोमवार को राष्ट्रपति ने चावल का अमेरिका में डंपिंग सेंटर बनाये जाने पर भी नाराजगी जाहिर की। राष्ट्रपति किसानों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। 

भारत गणराज्य के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया था कि नवंबर माह में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने की संभावना है। माह बीत जाने के बाद दिसंबर माह का भी एक तिहाई समय बीत गया है। 

हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत के नेतृत्व में एक टीम 10 दिसंबर 2025 को भारत यात्रा पर होगी। इसमें ट्रेड डील को लेकर रचनात्मक चर्चा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं होने वाला है क्योंकि विशेष दूत पहली बार भारत आ रहे हैं और उन्हें भारत सरकार के मन में क्या चल रहा है, यह नहीं पता। 

डील नहीं होने के कारण अमेरिका के नये राजदूत सर्बियो गोर ने अभी तक कार्यभार भी ग्रहण नहीं किया। वे एक बार भारत सरकार की यात्रा पर आये थे और पीएम व एमईए से मुलाकात कर वापिस यूएस चले गये थे। 


समय पर काम नहीं होना, इतिहास

व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता का कहना था कि भारत सरकार ट्रेड डील को लेकर गंभीरता प्रदर्शित नहीं कर रही है। उधर राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रम्प को यह जानकारी सोमवार को मिली कि भारत के साथ डील नहीं होने के बावजूद भारत, व आसियान के देश चावल का भंडारण अमेरिका में कर रहे हैं। इसको राष्ट्रपति ने गंभीरता से लिया। 

राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना था कि वे अतिरिक्त टेरिफ लगा सकते हैं। उन्होंने किसान हितों के लिए 12 अरब डॉलर की योजनाओं को मंजूरी देने के साथ कृषि यंत्रों पर टैक्स व नियमों में शिथिलता का भी आश्वासन दिया। 

भारतीय व्यापारिक मंडल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि बार-बार वार्ता रूक जाती है और इसका कारण भारत सरकार का नजरिया स्पष्ट नहीं होना है। दिसंबर माह में भी ट्रेड डील होने की संभावना न के बराबर है। 

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