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ट्रम्प आज रात 9 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे

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श्रीगंगानगर। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 नवंबर 2016 को राष्ट्र को संबोधित किया था। समय था रात 9 बजे। विषय था नोटबंदी। खैर उस बात को भुला दिया गया, अब समय वही है। इस बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वाशिंगटन डीसी के समयानुसार  रात 9 बजे ही राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं और इसको लेकर हलचल तेज हो गयी है। यूरोपीय देशों में इसको ज्यादा गंभीरता से लिया जा रहा है।  जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान पर सीधे तौर पर राष्ट्र को अपडेट करने वाले हैं और इसके लिए उन्होंने देश को संबोधित करने का निर्णय लिया है।  यह जानकारी स्वयं व्हाइट हाउस ने दी है।  समय रात 9 बजे ही क्यों? इस बात को लेकर चर्चा ज्यादा आरंभ हो गयी है कि एक दशक बाद 1 अप्रेल 2026 को जब नया वित्त वर्ष आरंभ हो रहा है, उस समय ट्रम्प ने रात 9 बजे का समय ही क्यों चुना। भारत में उस समय लगभग साढे सात बजे होंगे। देश से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए नोटबंदी का निर्णय लिया जाना बताया गया था और उसे एक दशक बीत गया है लेकिन यह समस्या शीर्षस्तर पर आज भी कायम है।  दूसरी ओर डोना...

अब खेल खत्म : ट्रम्प, मध्यपूर्व पहुंच रहे हैं 82वीं एयरबोर्न के ट्रूप्स, हजारों थल सैनिकों को तैनात करने की तैयारी

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श्रीगंगानगर। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट में लिखा है, नो मोर गेम। इस चेतावनी के बाद वैश्विक हलचल तेज हो गयी है। हजारों नये सैनिकों को तैनात किया जा रहा है, इससे आशंका है कि समझौते की जो संभावना थी, वह खत्म हो चुकी है।  मंगलवार को प्राप्त समाचारों में बताया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात में खड़े एक तेल टैंकर पर ईरान ने हमला किया और इस हमले से आग लग गयी। भयंकर आग।  इस घटना के उपरांत राष्ट्रपति का नया बयान सामने आया और उन्होंने ईरान को नयी चेतावनी जारी कर दी। हालांकि समझौता के लिए पहले 6 अप्रेल तक की तारीख निर्धारित थी।  ट्रम्प का कहना है कि अब ईरान के तेल के कुओं को सूखा दिया जायेगा और ईरान के भीतर जो समुन्द्र खारे पानी को मीठा करने का संयंत्र है, बिजली ग्रिड सबको नष्ट कर दिया जायेगा। हमारे पास दुनिया की सबसे बहादुर सेना है।  इस चेतावनी के बाद वैश्विक हलचल काफी बढ़ गयी है।  वहीं 82वीं एयरबोर्न के हजारों एयर ट्रूप्स मध्य पूर्व एशिया पहुंच गये हैं। वहीं सेना की तैनाती को लेकर भी तैयारी चल रही है। इस...

पाकिस्तान ने सम्मेलन का नाम चतुर्भुज क्यों रखा? रुपये, शेयर बाजार में गिरावट, कू्रड में तेजी

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श्रीगंगानगर। पाकिस्तान ने तेजी के साथ चार राष्ट्रों की एक बैठक आयोजित की और इसका नाम चतुरभुज रखा गया। इस बैठक में प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी शामिल हो गये थे, इस कारण इस्लामाबाद में हलचल को काफी तेज देखा गया। वहीं भारत में रुपये, शेयर बाजार में गिरावट को पुन: दर्ज किया गया। रुपया 94.99 के शिखर को छू गया।  बड़ा सवाल यह है कि पाक ने अपने देश में आयोजित सम्मेलन का नाम चतुर भुज क्यों रखा? रविवार को जैसे ही बैठक आरंभ हुई भारत सरकार ने आपातकालीन योजनाओं को आगे बढ़ाना आरंभ कर दिया।  हालांकि ज्वाइंट स्टेटमेंट के बारे में जानकारी हासिल नहीं हो पायी है लेकिन यह तय है कि शाहबाज ने अपनी रणनीति से आर्थिक रूप से मजबूत देशों को अपने साथ जोड़ लिया है।  एक समय था जब पीएम रहे इमरान खान के पास अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सउदी अरब का विमान लेना पड़ा था और इमरान खां  अमेरिका में लेट हो गये तो खाली विमान को क्राउंन प्रिंस ने वापिस बुला लिया था।  वही सउदी अरब अब पाकिस्तान के साथ हर मोर्चे पर खड़ा हुआ नजर आ रहा है। यही नई दिल्ली की चिंता का का...

पाक में इस्लामिक चतुर्भुजीय बैठक, भारत में केरोसीन के नियम बदले-अब पेट्रोल पम्प पर भी मिलेगा केरोसीन क्या भारत-पाकिस्तान युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं? आरबीआई ने रुपये की गिरती कीमतों को रोकने के लिए सटोरियों के अधिकारों को सीमित किया

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श्रीगंगानगर। पाकिस्तान में चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक जिसे चतुर्भुजीय सम्मेलन कहा जा रहा है, में पाकिस्तान की ओर से पेश किये गये ‘शांति प्रस्तावों’ पर चर्चा हुई। यह सम्मेलन आज सोमवार 30 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा। वहीं इस सम्मेलन के बीच में ही राज्य सरकार ने रसोई ईंधन और ‘रोशनी’ के लिए केरोसीन वितरण का निर्णय लिया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित अनेक जिले पहले केरोसीन मुक्त करार दिये गये थे और अब उचित मूल्य दुकानों पर 3 लीटर केरोसीन उपलब्ध करवाया जायेगा। इसके लिए अतिरिक्त आवंटन भी केन्द्र की ओर से किया जायेगा। यह संकेत है कि जंग नजदीक है।  पाकिस्तान में चल रहा ‘सम्मेलन’ दक्षिण एशिया में जंग की सूरत में इस्लामाबाद को सहायता पहुंचाने का हो गया है। चार देशों सउदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्कीये के विदेश मंत्री कई मुद्दों पर सहमत हैं और सोमवार को भी चर्चा होगी। यह सम्मेलन इस्लामाबाद के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रोटोकॉल के विपरीत प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ स्वयं इन नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं।  इससे पहले भी पाकिस्तान, सउदी अरब के साथ समझ...

पाकिस्तान अब फिर से मध्यस्थता के प्रयासों में जुटा, चार प्रमुख मुस्लिम राष्ट्र कर रहे हैं बैठक

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श्रीगंगानगर। पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों में अब सउदी अरब, तुर्कीये भी शामिल हो गये हैं। पाकिस्तान में इस संबंध में एक बैठक का आयोजन किया जा रहा है जिसमें चौथा देश मिस्र शामिल होगा। तीन देशों के विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुंच गये हैं। भारत सरकार ने पहले इसे ‘दलाली’ करार दिया था।  सउदी अरब, मिस्र, तुर्कीये और पाकिस्तान दो दिवसीय बैठक के लिए एकजुट हो गये हैं। वे पश्चिम एशिया में शांति किस तरह से बहाल की जाये, इस पर चर्चा करेंगे।  इस्लामाबाद में बैठक होने के कारण नई दिल्ली के कान खड़े हो गये हैं।  आज और कल दो दिन बैठक होनी है। हालांकि युद्ध के विस्तार होने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है। पेंटागन ने अपने 2500 मरीन पश्चिम एशिया में नियुक्त कर दिये हैं, यह जापान की सुरक्षा के लिए तैनात युद्धपोत पर सवार थे।  अमेरिका से आ रही खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि जमीनी लड़ाई जो लम्बी चल सकती है, उसके लिए भी सेना को तैयार रहने के लिए कहा गया है और ऐसे हजारों सैनिक इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं।  भारत के लिए हर पल बढ़ रहा खतरा चार इस्लामिक राष्ट्र एकजुट हो गये हैं। पाकि...

भारत में गौ सुरक्षा राष्ट्रीय अधिनियम क्यों नहीं बन पाया?

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श्रीगंगानगर। भारत देश में आरएसएस समर्थित भाजपा सरकार होने के बावजूद 12 सालों में गायों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गौ सुरक्षा अधिनियम नहीं बन पाया है।  राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब सहित 20 राज्यों में गायों की हत्या किये जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है और यह 5 से लेकर 10 साल तक की सजा का भी प्रावधान है। गाय की तस्करी भी नहीं की जा सकती।  गौवंश की सुरक्षा के लिए भारत सरकार अधिनियम नहीं बना पायी। हिन्दू धर्म के लिए यह तो पूजनीय है। फिर क्या कारण रहे कि एक यर्थाथवादी सरकार इस तरह का कानून नहीं बना पायी। यह सवाल अवश्य किया जाना चाहिये। 

मोदी जी : पाकिस्तान का रुपया 2, चाइना का येन 3 पैसे और भारतीय रुपया चार रुपये गिर गया, क्यों?

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श्रीगंगानगर। देश को बिकने नहीं दूंगा, झुकने नहीं दूंगा और मिटने नहीं दूंगा। न खाउंगा और न खाने दूंगा। यही नारे थे, देश के भीतर 2014 के लोकसभा चुनावों के। 12 वर्षों के उपरांत पहली परीक्षा हुई तो यह सब नारे धरे के धरे रह गये।  पहले ईरान के युद्ध के बाद भारत के आसपास की स्थिति क्या है। पाकिस्तान जिसको कंगाल देश कहा जाता है उसने 28 फरवरी के बाद मात्र 2 रुपये अपनी मुद्रा की कीमत खोई है। युद्ध के दिन शनिवार को 277.69 रुपये का था और 28 मार्च 2026 को भी इसकी कीमत 279 रुपये के आसपास बनी थी। चीन के येन की बात की जाये तो वह 2 मार्च को 6.88 येन प्रति डॉलर था और आज उसकी कीमत 6.91 येन है। सिर्फ तीन पैसे का अंतर आया है।  भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री के काल में युद्ध की अवधि के दौरान करीबन 4 रुपये की बढ़ोतरी आयी है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था कहा जा रहा था, वह किस तरह से कमजोर धरातल पर खड़ी थी और जैसे ही परीक्षा का समय आया, वह जमीन पर आ गयी।  पेट्रोल-डीजल के दाम पर एक्साइज ड्यूटी कम करके यह कह रही थी कि वह उपभोक्ताओं का ख्याल र...