मोदी जी : पाकिस्तान का रुपया 2, चाइना का येन 3 पैसे और भारतीय रुपया चार रुपये गिर गया, क्यों?
श्रीगंगानगर। देश को बिकने नहीं दूंगा, झुकने नहीं दूंगा और मिटने नहीं दूंगा। न खाउंगा और न खाने दूंगा। यही नारे थे, देश के भीतर 2014 के लोकसभा चुनावों के। 12 वर्षों के उपरांत पहली परीक्षा हुई तो यह सब नारे धरे के धरे रह गये।
पहले ईरान के युद्ध के बाद भारत के आसपास की स्थिति क्या है। पाकिस्तान जिसको कंगाल देश कहा जाता है उसने 28 फरवरी के बाद मात्र 2 रुपये अपनी मुद्रा की कीमत खोई है। युद्ध के दिन शनिवार को 277.69 रुपये का था और 28 मार्च 2026 को भी इसकी कीमत 279 रुपये के आसपास बनी थी। चीन के येन की बात की जाये तो वह 2 मार्च को 6.88 येन प्रति डॉलर था और आज उसकी कीमत 6.91 येन है। सिर्फ तीन पैसे का अंतर आया है।
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री के काल में युद्ध की अवधि के दौरान करीबन 4 रुपये की बढ़ोतरी आयी है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था कहा जा रहा था, वह किस तरह से कमजोर धरातल पर खड़ी थी और जैसे ही परीक्षा का समय आया, वह जमीन पर आ गयी।
पेट्रोल-डीजल के दाम पर एक्साइज ड्यूटी कम करके यह कह रही थी कि वह उपभोक्ताओं का ख्याल रख रही है किंतु जिस तरह से रुपया धरातल में धंसता जा रहा है, उसका आने वाले दिनों में परिणाम क्या होंगे, यह देखने वाला होगा।
तमिलनाडू, केरल से तो भाजपा को ज्यादा उम्मीद नहीं है पश्चिम बंगाल चुनाव से नरेन्द्र मोदी यह मान रहे हैं कि वह सत्ता के रास्ते पर चल सकती है। उस दिन तक पेट्रोल-डीजल के दाम सार्वजनिक तौर पर नहीं बढ़ाये जायेंगे। चुनाव के अगले ही दिन महंगाई का बम फटने की पूरी आशंका है।
नरेन्द्र मोदी के वादों का क्या हुआ?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने यह कसम खाई थी कि न खाउंगा न खाने दूंगा। देश को झुकने नहीं दूंगा। बिकने नहीं दूंगा। कसम है माटी की, देश को मिटने नहीं दूंगा।
यह कविता पूरी तरह से राजनीतिक श£ोक बनकर रह गये। देश पर सीधा हमला हुआ लाल किले पर आतंकवादियों ने हमला किया। आतंकवाद के खिलाफ नीति भी यहां खत्म हो गयी, कारण था साउदी अरब। सउदी अरब और पाकिस्तान ने आपसी समझौता किया था और एक-दूसरे की सुरक्षा का संकल्प लिया। इस कारण भारत के सामने पाकिस्तान कमजोर नहीं रहा और बुरे वक्त में भी अपनी अर्थव्यवस्था को संभाले हुए है। चुनाव नहीं होने के बावजूद शाहबाज शरीफ ने तेल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है।
अधिकारियों को मालामाल कर दिया
नरेन्द्र मोदी ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए सब नियमों को परे रख दिया। कैग, चुनाव आयोग, सेबी जैसे पदों पर अपने नजदीकी लोगों को नियुक्त किया। इन लोगों ने वही रिपोर्ट को तैयार किया जो सरकार चाहती थी। एलआईसी के अधिकारियों को सेबी में जिम्मेदारी दी गयी।
विदेश नीति में सीधे तौर पर अमेरिका को अपना दुश्मन बना लिया। डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स मुद्रा की वकालत की और ब्राजील व चाइना के साथ गठजोड़ करने का प्रयास किया। ब्रिक्स देशों ने डॉलर के स्थान पर सोने की भारी खरीद की गयी और सोने के भाव भारत में देखते ही देखते डेढ़ लाख को पार कर गये। एक साल के भीतर सोना लाख रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया और मीडिल क्लास के हाथों से निकल गया।
