चाइना की तीन दिवसीय यात्रा : दक्षिण एशिया आकर क्या देखते डोनाल्ड ट्रम्प
श्रीगंगानगर। मोबाइल, कार, विद्युत और इस्पात के उत्पादन में चाइना का कोई भी देश मुकाबला नहीं कर पा रहा है। भारत के पास यह क्षमता थी किंतु वह जातिवाद के दशकों पुराने झगड़ों में ही फंसा हुआ है और उसके पास ऐसी कोई नीति नहीं है कि वह बिजली क्षेत्र में ही देश को आत्मनिर्भर बना दे। भारत का पैसा बांग्लादेश और अन्य देशों में बिजली सप्लाई के लिए उपयोग हो रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने चाइना के शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा का इंतजार नहीं करते हुए आसियान देशों की दूसरी यात्रा में बीजिंग को अपना पड़ाव बनाया है और दक्षिण एशिया की तरफ उन्होंने देखा भी नहीं। क्यों?
भारत का प्रचार तंत्र भले ही भारत-चाइना की तुलना करता हो, लेकिन सच्चाई यह है कि नई दिल्ली उसके कहीं भी आसपास नहीं है।
चाइना जहां हर साल दुनिया भर में 3 करोड़ कारों की बिक्री करता है। इसका अर्थ यह हुआ हुआ कि हर माह वह 25 लाख कार बेचता है। वहीं भारत को देखा जाये तो वह मात्र 40-45 लाख की बिक्री पूरे साल में कर पाता है।
मोबाइल को लेकर भी इसी तरह की स्थिति है। भारत ने हाल ही में सैमसंग और एप्पल जैसी कंपनियों का संयंत्र स्थापित किया है किंतु पूरे साल में 15 करोड़ मोबाइल की बिक्री हो पाती है जबकि देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है। वहीं चीन 30 करोड़ मोबाइल बेचता है। इसका अर्थ साफ है कि भारत की परचेज पॉवर चीन के मुकाबले कहीं कम है। चाहे वह कार का बाजार हो या मोबाइल का क्षेत्र, बीजिंग नई दिल्ली को हर जगह मात दे रहा है। इसी तरह से इस्पात की बात करें तो चाइना 1 अरब टन उत्पादन करता है और भारत मात्र 15 मैट्रिक ट्रन ही उत्पादन करता है और वह काफी हद तक चीन के बाजार पर निर्भर है।
बिजली के मामले में हम आत्मनिर्भर नहीं हो पाये हैं लेकिन बांग्लादेश सहित कई देशों को बिजली बेच रहे हैं। किसान हो या गांव, दोनों ही स्थानों पर हम 24 घंटे की बिजली सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पाते। गांव में बिजली गयी है तो वह कब लौटेगी, यह भी निश्चित नहीं होता। कई गांवों में तो पूरे गर्मी के सीजन में एक या दो सप्ताह ही बिजली उपलब्ध हो पाती है। बीजिंग 100 खरब किलोवॉट प्रति घंटे बिजली का उत्पादन करता है और उसका बिजली उत्पादन ट्रिलियन किलोवॉट में हैं जबकि भारत अभी बिलियन में ही अटका है। इस तरह से विकास की दृष्टि, क्रय शक्ति हम साफ रूप से बहुत कमजोर हैं। 2047 में विकसित भारत का सपना दिखाया जा रहा है तब तक एक पीढ़ी खत्म हो चुकी होगी और दूसरी बुढ़ापे की स्थिति में होगी।
ईस्टर्न कैनाल के जरिये सीकर, झुंझुनूं सहित कई जिलों का यमुना का पानी दिया जाना है लेकिन इसका लक्ष्य रखा गया है 2050 के बाद।
उस स्थिति में ट्रम्प दक्षिण एशिया के सबसे बड़े विकासशील देश में आकर भी क्या करेंगे? पिछली बार जब वे भारत भ्रमण पर थे तो उस समय दिल्ली में ही हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो रहे थे।
हमने बुलंद भारत की वह तस्वीर अमेरिका के राष्ट्रपति को दिखायी थी।
डोनाल्ड ट्रम्प अब चाइना की यात्रा पर आयेंगे और वहीं से ही वापिस लौट जायेंगे। यह भारत की विदेश, कूटनीति और अन्य नीतियों के लिए एक बड़ा झटका होगा।
चाइना के टिक टॉक एप को भारत में बैन किया हुआ है लेकिन अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे बैन से बचाने के लिए स्वयं प्रयास किये थे और आज भी यह उत्तरी अमेरिका का सबसे लोकप्रिय एप बना हुआ है।
