मोदी के लिए ट्रम्प का क्या संदेश लेकर रूबियो भारत आ रहे हैं?



श्रीगंगानगर। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो तीन दिनों की यात्रा पर दिल्ली आ रहे हैं और उनके पास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए एक पैगाम भी होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पैगाम लेकर ही रूबियो भारत की यात्रा पर होंगे और क्वाड को लेकर भी चर्चा होगी। 

भारत में अमेरिका के विशेष दूत सर्बियो गोर ने इस संबंध में जानकारी दी है कि रूबियो की भारत यात्रा जल्द हो रही है और संभवत: 26 से 29 मई तक वे दिल्ली प्रवास पर रहेंगे। 

रूबियो की अब तक की उपलब्धियों को देखा जाये तो सामने आता है कि वे आक्रामक रूख अपनाते हैं। वे ट्रम्प का सीधा संदेश संबंधित राष्ट्राध्यक्ष तक साफ शब्दों में पहुंचाने की खासियत रखते हैं। ट्रम्प को उनका यही अंदाज सबसे ज्यादा पसंद आता है। 


क्वाड की बैठक में भी करेंगे शिरकत

रूबियो इस दौरान क्वाड की बैठक में भी भाग लेंगे। इस बार यह आयोजन की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास है। अगर रूबियो का संदेश नई दिल्ली को पसंद आता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आगामी दिनों में भारत की यात्रा कर सकते हैं। 

इस समय भारत और अमेरिका के संबंधों को देखा जाये तो दो दशक में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका सरकार ने भारतीयों को जारी किये गये करीब एक लाख वीजा को निरस्त कर दिया है और एच 1 बी वीजा  प्रणाली को भी कठिन बना दिया है। इससे भारतीयों के अमेरिका जाकर कार्य करने के सपने अब कल की बात हो गयी है। 

क्वाड में भारत-यूएसए के अतिरिक्त जापान और ऑस्ट्रेलिया भी सदस्य हैं। 

वाशिंगटन और दिल्ली के बीच ट्रेड डील होनी थी जो नवंबर में हस्ताक्षरित होने थे वह अब तक नहीं हो पाये हैं और इसी कारण दोनों देशों के बीच संबंध अब मधुर नहीं कहे जा सकते। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भले ही ट्रम्प को अपना मित्र कहकर संबोधित करें लेकिन राष्ट्रपति अपने गुस्से को छुपाते नहीं है और इस समय सबसे ज्यादा गुस्सा उनको फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां पर आता है और वे समय-समय पर उस घटना की नकल करते हैं जब मैक्रां की पत्नी ने सरेआम उनको चीन यात्रा के दौरान पीट दिया था। 


ट्रम्प का क्या होगा संदेश?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मार्को को अगर दिल्ली भेज रहे हैं तो इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है। ट्रम्प 14 से 16 मई तक बीजिंग की यात्रा पर होंगे और उसके बाद उनका नई दिल्ली आने का फिलहाल कार्यक्रम नहीं है। वे वहां से वापिस लौट जायेंगे। सितंबर से नवंबर तक मध्यावधि चुनावों के प्रचार का जोर रहेगा और उस बीच ट्रम्प के लिए भारत की यात्रा के लिए समय निकालना आसान नहीं होगा। 

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