कमर्शियल गैस सिलेंडर की दरों में बदलाव किसी धमाके से कम नहीं

 


श्रीगंगानगर। भारत सरकार ने 1 मई को कमर्शियल गैस की दरों में बदलाव किया और यह बदलाव किसी धमाके से कम नहीं है। एक बार में ही 993 रुपये दाम बढ़ा दिये गये। इसका काफी असर एलपीजी घरेलू गैस की कालाबाजारी पर भी पड़ेगा। 

कमर्शियल गैस की दरों में बदलाव करने से पूर्व पेट्रोलियम मंत्रालय ने शायद मेहनत करना ठीक नहीं समझा। मंत्रालय भूल गया कि इस सिलेंडर का प्रयोग स्ट्रीट वैंडर भी करते हैं, जो पहले ही मीटर ब्याज वसूल करने वाले फायनेंसरों के चक्कर में फंसे हुए हैं। 

अब उन पर एक साथ 993 रुपये की मार डाली गयी है। अगर सरकार कुछ बोझ अपने कंधों पर उठाती, कुछ बोझ एयरलाइंस पर डालती तो शायद लाखों स्ट्रीट वैंडर्स को इस प्रकार चिंता में नहीं देखा जाता। 

इस समय पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व कहें तो वहां पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के कारण पेट्रोलियम व गैस की सप्लाई नहीं हो रही है। सरकार पीएनजी की सप्लाई प्रत्येक घर में  नहीं पहुंचा पायी है और इसी कारण एलपीजी का प्रयोग घरों तथा व्यवसायिक स्थानों पर किया जाता है। 


लाखों होंगे बेरोजगार

एकाएक ही सरकार ने लगभग एक हजार रुपये कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ा दिये। दामों को लेकर सरकार  ने होमवर्क करना ठीक नहीं समझा। मुश्किल वक्त में सरकार को कुछ बोझ अपने कंधों पर भी उठाना चाहिये था। महंगाई की मार दोनों तरफ से होनी थी किंतु यह प्रत्यक्ष मार ज्यादा असर डालेगी। लाखों लोग बेरोजगार हो जायेंगे। 


एलपीजी की होगी कालाबाजारी

अब क्या होगा? होगा यह कि कालाबाजारी का धंधा एक बार फिर से बाजार में आयेगा। पूर्व में सब्सिडी को समाप्त किया गया तो सरकार दावा करती थी कि हमने कालाबाजारी को खत्म कर दिया है। अब घरेलू गैस को कमर्शियल गैस में भरने के लिए फिर से बांसुरी का खेला होगा। यह बांसुरी घरेलू गैस को देखते ही देखते कमर्शियल गैस सिलेंडर में बदल देगी। 

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