पश्चिम बंगाल : वोटिंग पर सवाल खड़े होते रहेंगे
श्रीगंगानगर। पश्चिम बंगाल में 90 प्रतिशत से ज्यादा जब पोलिंग का दावा किया गया था, उसी समय तय हो गया था कि कहीं न कहीं वोट प्रतिशत को प्रभावित किया गया है।
कश्मीर के भीतर यह आरोप लगते रहे हैं कि सुरक्षा बल लोगों को पोलिंग बूथ तक लाते हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ जीतने का लक्ष्य रखा हुआ था।
चुनाव से पहले सर नामक प्रक्रिया की शुरुआत की गयी और 90 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम को हटा दिया गया। इस फिगर को ध्यान से देखने की आवश्यकता है।
90 लाख से ज्यादा लोगों के नाम हटाये गये और अधिकांश इसमें मुसलमान थे।
इसके बाद विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होता है तो 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई। भवानीपुर विधानसभा सीट पर स्वयं ममता बनर्जी हार गयीं।
आज तक के इतिहास में विधानसभा चुनावों में बड़े राज्यों में 90 प्रतिशत पोलिंग नहीं हुई। दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी 70 प्रतिशत या इससे कम मतदान हुआ जबकि वह अधिकांश शहरी क्षेत्र है।
पांडूचेरी और त्रिपुरा छोटे राज्य हैं, वहां पर अवश्य 85-90 प्रतिशत पोलिंग होती रही है।
कर्मचारी किस तरह से अपने पद का लाभ उठा सकते हैं, यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में देखने को मिला।
विधानसभा चुनावों के प्रचार के समय यह समाचार कहीं नहीं आया कि केन्द्रीय कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगायी गयी है।
बंगाल का सशक्त मीडिया भी दुनिया तक यह खबर नहीं पहुंचा पाया।
खैर अब चर्चा हो सकती है और जमकर चर्चा हो रही है। लगभग 7 करोड़ वोटर्स में 6 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालने के लिए पहुंचे। यह हैरानीवाला तथ्य है और ‘मोदी है तो मुमकिन है।’
