बाशिंदों को नसीहत देकर मोदी पांच दिन के लिए विदेश भ्रमण पर, ट्रम्प शी से मुलाकात करेंगे
श्रीगंगानगर। विदेश यात्रा से बचने की नसीहत देने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं पांच दिनों 15 से 20 मई तक विदेश यात्रा पर यूरोप जा रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तीन दिन के लिए चीन के प्रवास पर रहेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से विदेश यात्रा से बचने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि विदेश भ्रमण से विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर दिखाई देता है। पीएम की अपील को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी बन रहे हैं।
खैर, पीएम की इस अपील का कितना असर होगा यह अगले सप्ताह चल जायेगा जब विद्यालयों में गर्मियों के अवकाश का काल आरंभ होगा।
वहीं खुद मोदी पांच देशों की यात्रा पर जा रहे हैं। वे सबसे पहले यूएई की यात्रा करेंगे। इसके बाद स्वीडन, नार्वे, इटली की यात्रा पर होंगे।
मोदी की यात्रा का ध्यान रखना होगा। इस समय दुनिया के टॉप 100 गर्म शहरों में 90 से ज्यादा भारतीय हैं अर्थात उत्तरी भारत जिसमें दिल्ली भी शामिल है, पूरी तरह से लू के थपेड़ों का सामना कर रहे हैं।
भारतीय शहरों में हरियाली की कमी के कारण गर्मी ज्यादा होती है और दूसरी तरफ सडक़ों को सीसी बनाये जाने का कार्य भी किया जा रहा है। इससे तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।
ध्यान यह भी रखना होगा कि अगले माह 15 से 17 जून तक जी-7 समूह का सम्मेलन फ्रांस में आयोजित हो रहा है। भारत को इसमें आमंत्रित किया गया है। जून के गर्म माह में भी भारत के पीएम विदेश यात्रा पर होंगे। उस समय यूरोप का पेरिस उनका आगुवानी करेगा।
ट्रम्प चीन के लिए रवाना हो रहे हैं
एयरफोर्स वन के विमान से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन जा रहे हैं। व्हाइट हाउस ने अधिकारिक घोषणा की है कि ट्रम्प आज रात को चीन के लिए रवाना हो रहे हैं और बुधवार को वे बीजिंग में समकक्ष शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे।
उन्होंने आशा जतायी है कि चीन की यात्रा जिस मकसद से वह कर रहे हैं, शायद वह पूरा होगा।
आसियान देशों की यात्रा का उनका यह दूसरा चरण होगा हालांकि वे इस बार सिर्फ बीजिंग की ही यात्रा कर रहे हैं। इससे पहले वे जापान, दक्षिण कोरिया की यात्रा कर चुके हैं और आसियान सम्मेलन से इतर उन्होंने शी से भी मुलाकात की थी और उस दौरान ही उनको जिनपिंग ने आमंत्रित किया था।
नेपाल महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा
भारत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने सर्बियो गोर को मध्य एवं दक्षिण एशिया के लिए अपना विशेष दूत नियुक्त किया हुआ है।
अब अमेरिका नेपाल के साथ भी राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहा है। वाशिंगटन की तरफ से विशेष प्रतिनिधि ने विगत दिवस ही काठमांडू की यात्रा की थी और हिमालयी देश को आश्वस्त किया था कि वह अब दो देशों की धूरी नहीं है बल्कि वाशिंगटन उसको एक विशेष देश के रूप में देख रहा है।
उल्लेखनीय है कि नेपाल में अब तक कांग्रेस अथवा वामपंथी की सरकार बनती रही थी और भारत व चीन अपने-अपने नजदीकी नेताओं को राजगद्दी पर देखना चाहते थे। जैनरेशन जैड के आंदोलन के उपरांत बालेन शाह पीएम बने हैं और उनको स्पष्ट ही नहीं बल्कि ऐसा समर्थन मिला है जो कभी किसी पार्टी या नेता को नहीं मिला था।
शाह के साथ अब अमेरिका अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है।
