भारत सरकार का अर्थ सबकुछ अडाणी समूह का
श्रीगंगानगर। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं। जिस महिला ने 15 साल से ज्यादा समय तक अपने देश में हुकूमत की, वह महिला एक दिन शरण या सहायता के लिए दुनिया के सामने झोली फैलायेंगी, यह किसी ने नहीं सोचा था किंतु वक्त ने ऐसा कर दिखाया, क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण वहां की जनता त्रस्त हो गयी थी। अब भारत की बात की जाये तो यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी एक दिन ऐसे ही हालात का सामना करना पड़े, जब उनको निर्वासन के लिए किसी देश की शरण मांगनी पड़े।
इसका कारण भी मजबूत है। मजबूत कारण इसलिए क्योंकि कोरोना काल हो या मौजूदा समय में युद्ध संकट, दोनों ही वक्त में जब दुनिया में त्राही-त्राही मची हुई है, उस समय नरेन्द्र मोदी के खास मित्र गौतम अडाणी की आय में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। इसका कारण भारत सरकार की अडाणी समूह को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां।
अडाणी समूह उन्हीं सैक्टर में काम करता है जो सीधे सरकार को सप्लाई किया जा सके और सीधा लाभ प्राप्त किया जा सके। बिजली, एयरपोर्ट, बंदरगाह, सीमेंट, सरकारी कॉलोनियों को विकसित करना आदि-आदि।
अडाणी पॉवर अब देश में लगभग सभी राज्यों को विद्युत सप्लाई कर रही है। मनमाने दाम वसूले जाते हैं और आखिर में बोझ उपभोक्ता पर डाल दिया जाता है। एयरपोर्ट क्षेत्र में जयपुर, नवीं मुम्बई, अहमदाबाद, भुज सहित अनेक एयरपोर्ट का इलाका अडाणी समूह के पास है। इसी तरह से बंदरगाह विकसित करने की जिम्मेदारी अडाणी समूह संभाल रहा है। देश में कोयला सप्लाई का कार्य भी इसी गु्रप के पास है। सीमेंट की अनेक फैक्ट्रीज हैं जो सरकार को पुलों के निर्माण के लिए सप्लाई किया जाता है। विदेशी कंपनी अम्बुजा पर भी कब्जा कर लिया गया। उसी तरह से जैसे एनडीटीवी इंडिया पर हुआ।
धारावी कच्ची बस्ती एरिया जो मुम्बई में स्थित है और दुनिया की सबसे बड़ी बस्ती है। अब सरकार की मदद से एक दिवालिया कंपनी का मालिकाना हक भी अडाणी समूह को हासिल हो गया है। इसमें दिल्ली का बुद्ध सर्किट भी शामिल है।
वेदांता समूह अडाणी समूह को यह मालिकाना हक दिये जाने के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत भी गया। वहां क्या फैसला आना था। वही हुआ अदालत ने भी अडाणी समूह को ही स्वामीत्व का अधिकार दे दिया और इस तरह से अदालत की भी मुहर लग गयी।
इस समय सरकार नई दिल्ली से चल रही है या नागपुर से। कोई नहीं कह सकता।
भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि एक दिन मोदी को सत्ता परिवर्तन के बाद देश छोडऩा पड़ सकता है और अडाणी भी उनके साथ होंगे।
फ्रांस-जर्मन को साथ रखा है
मोदी सरकार ने जर्मनी और फ्रांस को अपने साथ जोड़े रखने का प्रयास किया है। पेरिस के साथ राफेल जेट खरीद के लिए समझौता हुआ है तो दूसरी ओर जर्मनी के साथ परमाणु पनडुब्बी खरीद के लिए एग्रीमेंट किया गया है। दोनों ही सौदे बहुत बड़े हैं। दोनों ही देश पनाह भी दे सकते हैं।
