वैंस इस्लामाबाद में, ईरान के साथ वार्ता शनिवार को
श्रीगंगानगर। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वाशिंगटन डीसी से रवाना हो गये हैं। वे कल ईरानी वार्ताकारों के साथ बैठक करेंगे। तेहरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बैठक से पहले ही तनाव साफ देखने को मिल रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है, अगर वार्ता सफल नहीं होती है तो हम ईरान पर नये हमले करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने चिरपरिचिति अंदाज का सहारा लेते हुए कहा, इस बार जहाजों में वह गोला बारूद और हथियार भरा जा रहा है जो पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ। उस समय भी जब तेहरान पर भारी हमले किये गये।
उपराष्ट्रपति वेंस ने रवाना होने से पहले पत्रकारों को कहा, हम पूरी ईमानदारी के साथ इस्लामाबाद जा रहे हैं। अगर तेहरान हमें उलझाने की कोशिश करता है तो हम बिलकुल सहयोग नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें खास दिशा-निर्देश दिये हैं, जिनका पालन बैठक के दौरान किया जायेगा।
दूसरी ओर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को सुरक्षा दस्तों ने अपने घेरे में ले लिया है। वार्तास्थल के आसपास किसी को नहीं आने की अनुमति दी गयी है। वैंस ने पाकिस्तान आने के लिए कोई वीजा नहीं लिया है और न ही उनके सहयोगियों जैरेड कुशनर व स्टीव विटकॉफ ने लिया है।
वार्ता विफल हुई तो क्या होगा?
पाकिस्तान सेना के मुख्यालय रावलपिंडी में 11 अप्रेल तक आपात सेवाओं के अलावा अन्य सभी सेवाओं को स्थगित कर दिया गया है। अस्पताल, पुलिस आदि कार्यालय ही खुले रहेंगे।
पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में है और लेबनान को लेकर ईरान अपनी चिंता जता रहा है। वह हिज्बुलाह नामक आतंकवादी संगठन की पैरवी कर रहा है जो ईरान समथर््िात संगठन है। वहीं अमेरिका का कहना है कि 9 और 10 अप्रेल के बीच सिर्फ 14 जहाजों ने ही होर्मूझ जलडमरूमध्य से आवागमन किया है जो बहुत कम है। दूसरी ओर इजरायल की खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने आरोप लगाया है कि टैंकरों और मालवाहक जहाजों से ईरान आवागमन के बदले में टोल मांग रहा है।
अगर वार्ता सिरे नहीं चढ़ती है तो अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से युद्ध आरंभ हो सकता है। ट्रम्प ने कहा है कि वार्ता का नतीजा अगले 24 घंटों के भीतर आने की संभावना है।
पुन: जंग आरंभ होती है तो इस बार यह दृश्य और भी भयावह होगा। राष्ट्रपति ट्रम्प बार-बार तेहरान को चेता रहे हैं कि वह जल डमरू मध्य को स्वतंत्र करे। वार्ता पर दुनिया भर की नजरें लगी हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्रमर्र तीन दिवसीय खाड़ी यात्रा पूरी कर वापस जा रहे थे तो उनका कहना था कि हालात को देखते हुए उन्हें अपनी नीतियों में बदलाव लाना पड़ सकता है।
यूरोपीय देश भी मान रहे हैं कि ईरान का जो हठ है, उससे पश्चिम एशिया में तनाव बना रह सकता है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी युद्धपोत और उनके सहयोगी दर्जनों जहाज ईरान को चारों तरफ से घेरने के लिए अभी भी पानी में मौजूद हें और सैकड़ों विमान उड़ाने भर रहे हैं और उनमें अनेक आधुनिक जहाजों को शामिल किया गया है। इस तरह से ईरान के चारों तरफ जंग की पूरी तैयारी है और हालात विस्फोटक बने हुए हैं। हजारों मरीन सैनिक, सैकड़ों एयर ट्रूपर्स और अनंत अन्य सैनिक विभिन्न स्थानों पर डेरा डाले हुए हैं। इस तरह के हालात में अगर फिर से युद्ध आरंभ हो जाता है तो हालात विकट हो सकते हें और ऊर्जा संकट बढ़ सकता है।
