अमेरिका की समय सीमा 6 अप्रेल है!




श्रीगंगानगर। अगर अमेरिका 6 अप्रेल को अपनी तय समय सीमा के बाद आक्रमण करता है और इसके बाद युद्ध का विस्तृत रूप सामने आता है तो ऊर्जा संकट का सामना कर रहे देशों के पास क्या विकल्प रहेंगे, यह देखने वाला होगा। मास्को या कनाडा कितने देशों की मांग को पूरा कर पायेगा। रूस ने पहले ही से गेसोलीन के निर्यात पर चार माह के लिए प्रतिबंध लगा दिया है और संकेत दे दिया है कि यह संकट एक-दो दिन का नहीं है। 

यूएसए और तेहरान के बीच वार्ता को समझौता पर नहीं पहुंचाया जा सका है और साफ तौर पर संकेत दिया है कि ईरान अपनी शर्तों पर समझौता चाहता है। अमेरिका को यह मंजूर नहीं है। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि पहले ईरान देश में पहले पुलों को निशाना बनाया जायेगा, फिर बिजली संंयंत्र को टारगेट किया जायेगा। उन्होंने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में भी कहा था कि ईरान को पाषाण युग में पहुंचा दिया जायेगा। स्टोन ऐज का अर्थ हो जाता है वह आदिवासी काल जब पत्थर से लोग आग जलाया करते थे। इसका उल्लेख भारतीय स्कूली किताबों और धार्मिक ग्रंथों में भी है। 

वहीं यह हैरानी करने वाला तथ्य है कि तेहरान खाड़ी के देशों को निशाना बना रहा है और किसी भी देश ने इसका जवाब नहीं दिया है और दुनिया इसको इन देशों का संयम का नाम दे रही है। यह देश गरीब नहीं है। इनके पास भी हथियारों की आधुनिक तकनीक उपलब्ध है। 

दुनिया का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो वल्र्ड वॉर 3 का रूप सामने आ सकता है जब कोई न कोई देश किसी के समर्थन के लिए लड़ रहा होगा। 

रूस अभी यूक्रेन युद्ध में व्यस्त है और वह ईरान का साथ देता हुआ नजर आ रहा है। 

Popular posts from this blog

ईरान परमाणु हथियारों पर समझौता करेगा, ट्रम्प इस्लामाबाद जायेंगे!

कमर्शियल गैस सिलेंडर की दरों में बदलाव किसी धमाके से कम नहीं

ट्रम्प से मुलाकात : सनाए ताकाईची आज व्हाइट हाउस में