भारतीय शेयर बाजार का हाल आज कैसा रहेगा?
श्रीगंगानगर। जो मीडिया रिपोर्ट दे रहा है, उसके अनुसार शेयर बाजार में आशिंक तेजी देखने को मिल सकती है। ईरान के खिलाफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नयी बमबारी को लेकर पांच दिनों का समय दे दिया है इस तरह से एक सप्ताह आराम से गुजर जायेगा और हरमूझ जल डमरू मध्य इलाके से दो भारतीय जहाज आ गये हैं, जिनके पास तेल और गैस है।
पेपर आउटलेट के अनुसार दो भारतीय जहाजों को कल सोमवार 23 मार्च 2026 को जल डमरू मध्य इलाके से निकलते हुए देखा गया है। यह खबर आशिंक रूप से भारतीय शेयर बाजार को राहत पहुंचाने वाली होगी।
हालांकि एशिया के प्रमुख बाजार जापान ओर चीन को देखा जाये तो दोनों में ही गिरावट को दर्ज किया गया है। अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी बनी हुई थी।
2 ट्रिलियन डॉलर का सोना-चांदी का भाव गिरा
सोमवार को अकेले शेयर बाजार में ही भूचाल नहीं आया था बल्कि धातु बाजार में भी भारी गिरावट बनी हुई देखी गयी थी। शेयर बाजार 1800 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ था इससे 15 लाख करोड़ रुपये की सम्पत्ति निवेशकों की कम हो गयी। विश्व में सबसे ज्यादा घाटा गौतम अडाणी को 2.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का हुआ था। दूसरे नंबर पर सावित्री जिंदल रहीं जो जिंदल स्टील उद्योग परिवार से संबंध रखती हैं।
वहीं शेयर बाजार के अतिरिक्त धातू बाजार में गिरावट को देखा गया और दो ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। यह नुकसान कम नहीं था।
भारतीय अर्थव्यवस्था से दो ट्रिलियन डॉलर निकल गये और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं हुई। इसका असर आने वाले दिनों में मंदी के रूप में देखने को मिल सकता है।
कोयला आधारित जीवन पुन: लौट सकता है
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 करोड़ परिवारों को गैस सिलेंडर मुफ्त दिये थे ताकि चूल्हे और धुएं के बीच में कोई मां भोजन नहीं बना सके। हालांकि इसके बाद गैस के दामों को 11 सौ रुपये प्रति सिलेंडर तक महीनों तक बनाये रखा।
अब इजरायल और अमेरिका का ईरान के साथ युद्ध चल रहा है। अगर ट्रम्प अपनी योजना या घोषणा पर अमल करते हैं तो भारत में कोयला आधारित जीवन पुन: लौट आयेगा। मांग के मुकाबले अभी भी आपूर्ति में भारी कमी है। सिलेंडर की बुकिंग दिवस 25 कर दिये गये हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिवस कर दिये गये हैं। इस तरह से पेट्रोलियम और गैस दोनों की कमी को भारत देश महसूस कर रहा है।
हालांकि राष्ट्र को पीएम ने पूरी सच्चाई जानकारी नहीं दी है लेकिन उनका संसद में कहना है कि कोयला के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं। नरेन्द्र मोदी के मनोबल को इस समय सबसे गहरा झटका लगा है।
