ट्रम्प की चीन यात्रा से पहले मोदी बीजिंग के साथ रिश्ता सुधारने में जुटे



श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आगामी 31 मार्च से 2 अप्रेल तक चीन की यात्रा करने वाले हैं और उससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन के साथ रिश्तों को मजबूत करने के प्रयासों में जुट गये हैं। 

जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार संयुक्त राज्य इस समय नाटो के साथ अपने सबसे बुरे संबंधों के दौर से गुजरते हुए नये सहयोगी तैयार कर रहा है ताकि यूरोप को उसके भरोसे ही छोड़ा जा सके। हाल ही में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मन एकजुट हो गये थे और नाटो के रूप में ईरान के खिलाफ स्ट्राइक में शामिल होने से इन्कार कर दिया था। यही वह समय था जब अमेरिका नये सदस्यों की तलाश करता हुआ शील्ड ऑफ द अमेरिकाज नामक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कैरेबियन और लैटिन अमेरिकी राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया। 

इसी तरह से अब डोनाल्ड ट्रम्प इस टर्म में अपनी पहली चीन यात्रा पर जा रहे हैं। यह पहली बार होगा जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने यूरोप से ज्यादा एशिया की यात्रा की हो। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रम्प पश्चिमी एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया की यात्रा कर चुके हैं। 

अब वे 31 मार्च से 2 अप्रेल तक बिजिंग की यात्रा पर रहेंगे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी पहले ही मुलाकात हो चुकी है जो काफी सौहार्दपूर्ण रही थी। 

चीन की यात्रा के बाद उनका स्वदेश लौटने का कार्यक्रम है। वे पड़ोसी देश भारत की यात्रा पर नहीं आयेंगे। इससे अमेरिका और भारत के बीच चल रही कॉल्ड वॉर की खबरों को बल मिलता है। 

हाल ही अमेरिका ने गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के लिए एक भारतीय अधिकारी को जिम्मेदार माना है। रिश्वत के मामले में गौतम अडाणी के खिलाफ भी सम्मन को जारी किया गया था। इस तरह से साफ संकेत है कि भारत-अमेरिका के बीच जो खाई है वह पाट नहीं रही है और वह गहराती जा रही है। 

वहीं मंगलवार को चीन को अपने पाले में करने की कोशिशें भी तेज हो गयीं। इससे पहले भारत चीनी निवेश, चीनी एप्स आदि को प्रतिबंधित कर चुका था। सीधी हवाई सेवा भी बंद कर दी गयी थी किंतु व्यापार जारी था। 

अब हालात यह देखिये कि भारत में कम्प्यूटर पार्टस के दाम कई गुणा बढ़ चुके हैं। दक्षिण पूर्व एशियाई देश जिसमें चीन भी शामिल है, वह भारत को कम और महंगी दरों पर माल सप्लाई कर रहे हैं। 

दूसरी ओर पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों में आग लगी हुई है। शेयर बाजार गिर रहे है। भारतीय रुपया रोजाना गोता लगा रहा है। उसको समर्थन दिया जाता है किंतु दूसरेदिन फिर से वही स्थिति पैदा हो जाती है। स्थिरता नहीं आने के कारण महंगाई बढ़ रही है और इससे बेरोजगारी में भी इजाफा होगा। हालात चारों तरफ विकट हैं और अब चीन का सहारा नजर आ रहा है तो भारत सरकार ने बिजिंग के लिए कई रियायतों का एलान किया है लेकिन इससे ज्यादा असर दिखाई देगा, यह कहना मुश्किल है। 

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