विवेचना : युद्ध ईरान में चल रहा है, पेंटागन के अधिकारी रक्षा मंत्रालय के साथ क्या मंत्रणा करेंगे? मोदी ने ट्रम्प के साथ बात कर भी अपने अहंकार का त्याग नहीं किया!



श्रीगंगानगर। पेंटागन के अधिकारी  ने भारत को रणनीतिक मित्र माना लेकिन मतभेद उससे भी बड़े माने और इसी कारण भारत में होने वाली क्वाड शिखर वार्ता का जिक्र नहीं किया। वहीं नरेन्द्र मोदी अपने एक्स एकाउंट में यह कहना नहीं भूले कि फोन अमेरिकी राष्ट्रपति का आया था। वह भी उस समय अहंकार प्रदर्शित किया गया जब पीएम के सिर्फ अहंकार के कारण ही भारतीय अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है। 

बहुत सी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र  नहीं किया गया कि सोने और चांदी के भावों में आई मंदी के कारण 180 लाख करोड़ का  नुकसान निवेशकों को हुआ। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत में ब्लैकमनी कितनी है। पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सोने में गिरावट को लेकर भारत गणराज्य के चुनिंदा अधिकारियों को चिंता में डाल रखा है। 

अब मंगलवार 24 मार्च 2026 की मुख्य खबर पर नजर डालते हैं तो सबसे पहले भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का जिक्र आवश्यक है। 

प्रधानमंत्री ने एक्स एकाउंट में लिखा कि प्रेजीडेंट ट्रम्प का फोन आया। दोनों देशों ने विश्व शांति और अन्य मुद्दों पर सार्थक बातचीत की। इसके कुछ समय बाद ही मीडिया में यह रिपोर्ट सामने आयी कि  पेंटागन के अंडर सैक्रट्री एलब्रिज कोल्बी नई दिल्ली में हैं और 25 मार्च 2026 को वे रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। 

बैठक होगी। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि युद्ध ईरान में चल रहा है और एलब्रिज कोल्बी भारतीय अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। इस संकेत को धीरे से समझना बहुत आवश्यक है, क्योंकि इसको ही कूटनीति, रणनीति और न जाने क्या-क्या शब्द दिया जाता है। एलब्रिज ने भारत को अपना मित्र माना और साथ ही बता दिया कि मतभेद काफी बड़े हैं। 

एलब्रिज का बयान ट्रम्प के फोन के बाद आया। इसको भी समझिये। यह भी ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिस दिन ट्रम्प और मोदी की बातचीत होती है, उसी दिन अंडर सैक्रेट्री का बयान आता है और इसमें क्वाड का जिक्र तक नहीं होता। क्वाड प्रशांत महासागर के चार देशों भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान का संगठन है। यह यूसएस के प्रभुत्व,नेतृत्व में काम करता है और वह इसका मुख्य सदस्य भी है। 


ईरान युद्ध अभी थमने वाला नहीं है!

भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बयान दे रहों कि ईरान के पास नेवी, वायु और थलसेना समाप्त हो गयी है। ट्रम्प के बयान के अर्थ को समझने के लिए यह भी जानना जरूरी है कि वे स्वयं कहते हैं कि वे पॉलिटिक्ल पर्सन नहीं है बल्कि लीडर हैं जो आगे बढक़र निर्णय लेना जानता है। 

ट्रम्प की एक चेतावनी से धातू बाजार में हलचल मच गयी और पांच दिनों के लिए ट्रम्प से ईरान पर युद्ध विराम का दबाव डलवाया गया। वे सेना को आदेश दे चुके थे कि ईरान के बिजली संयंत्रों को नष्ट कर दें। उन्होंने आदेश को अगले सोमवार तक मुल्तवी कर दिया। 

ईरान साफ कह चुका है कि वह हरमूझ जल डमरू मध्य को आजाद नहीं करेगा और वहां पर अपना कब्जा जमाया रखेगा। इस तरह से युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है। स्ट्रेट ऑफ हर्मूझ जब तक आजाद नहीं होगा, युद्ध रूकने वाला नहीं है। 


एमबीएस को बीच में लाया जा रहा है

अब एक वर्ग मोहम्मद बिन सलमान को बीच में लाने का प्रयास कर रहा है और उन पर दबाव बना रहा है कि वह अमेरिका से सीजफायर करने के लिए कहें। इसके लिए सउदी अरब प्रिंस सोशल मीडिया पर उनको टारगेट भी किया जा रहा है। 


एलब्रिज कोल्बी का एशियाई दौरा महत्वपूर्ण

रक्षा विभाग के उप मंत्री एलब्रिज कोल्बी का एशिया दौरा महत्वपूर्ण हो गया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आगे की रणनीति उनकी रिपोर्ट पर तय करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलायी है। पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच जो वार्ता पहले हो जानी चाहिये थी, वह नहीं हो पायी, उस देरी का खामियाजा अब पश्चिम एशिया नहीं दक्षिण एशिया भुगत रहा है। पाकिस्तान ने तो कुछ पेट्रोलियम पदार्थ के दाम 55 प्रति लीटर तक बढ़ा दिये हैं। 

पीएम मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति से वार्ता कर रहे थे और इसका अर्थ है कि वे कांग्रेस को पूरा समर्थन चाहते हैं। रणनीति में श्रीलंका का मतलब कांग्रेस से हो जाता है। 

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