यूरोप की ना के बाद भी गोल्डन डोम का सपना सच हो रहा है!



श्रीगंगानगर। मोहरा बनकर खेलते हैं सब, पर बादशाह तो वक्त होता है दोस्त! यह शब्द शायद संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए ही लिखे गये हैं। उन्होंने गोल्डन डोम का सपना देखा था, यूरोप ने सहयोग नहीं किया, अकेले रह गये थे ट्रम्प, लेकिन शेर तो राजा होता है और वह अकेला ही होता है। 

क्या ख़ूब लिखा है वक्त ने, कि जो हँसते थे कल, आज रो रहे हैं। यह वह पंक्तियां हैं जब 2024 के चुनाव में राष्ट्रपति ट्रम्प चुनाव प्रचार कर रहे थे और उनको निशाना बनाते हुए सार्वजनिक मंच पर गोलियां चलायी गयीं। गोलियां किसने चलायीं, किसके इशारे पर चलाई गईं?

तेहरान या उसके मित्र यह नहीं कह सकते कि उनको घटना का इल्म नहीं था। चुनावों से पहले ही तय हो गया था कि राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प वापसी कर रहे हैं। अनेक राजनेता उनके पास परिणाम आने से पहले ही मिलने के लिए पहुंचने लगे थे। 

..और जो नहीं  पहुंचे थे, वे आज रो रहे हैं। दोस्ती का लिबास पहनकर पीठ में छुरा घोंपने की तैयारी में थे, लेकिन यह तैयारी अधूरी रह गयी। 

रही बात गोल्डन डोम की तो वो सपना हकीकत बनने के लिए तैयार है। जापानी पीएम सानाए ताकाईची ने कहा है कि अमेरिका के लिए टोक्यो मिसाइलों का निर्माण कर सकता है। यह बहुत बड़ा बयान है। 19 मार्च को वह दिन होगा जब ताकाईची वाशिंगटन में ट्रम्प से पहली बार पीएम के रूप में मिल रही होंगी। 

राष्ट्रपति को भी इस बात का पता है कि जापान वाशिंगटन का पुराना सहयोगी है और दोनों देश गोल्डन डोम की परिकल्पना को हकीकत में बदल सकते हैं। 

अमेरिका अब पश्चिम की जगह पूर्व की तरफ देख रहा है। राष्ट्रपति की प्राथमिकता भी अब बदल गयी हैं और ब्रिटिश पीएम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां और जर्मन के चांसलर के साथ उन्होंने जैसे को तैसा व्यवहार किया। 

पोप का बयान भी राजनीति से प्रेरित नजर आया। इस तरह से पश्चिम चारों तरफ से जब चित्त हो गया तो उस समय गोल्डन डोम अपने कदम आगे की ओर बढ़ा रहा है।  

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