जापान की पीएम को ट्रम्प ने अंदर तक हिला दिया, आबे की छाया नहीं बन पाये ताकाईची
श्रीगंगानगर। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे एक अच्छे इंसान के रूप में सदैव जाने जाते रहे हैं। अब सनाए ताकाईची ने उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लेकर चुनाव लड़ा था और दो तिहाई बहुमत हासिल किया। वे आज व्हाइट हाउस में थी। वाशिंगटन के साथ दुलर्भ खनिज पर वार्ता चल रही थी कि इस दौरान पर्ल हॉर्बर का राष्ट्रपति ने जिक्र करके ताकाईची को अंदर से हिला दिया। उनकी कुर्सी को ऐसा लगा जैसे भूकम्प के कारण हिचकोले ले रहे है। 1941 को हवाई क्षेत्र पर हमला कर ही जापान ने अमेरिका को दूसरे विश्व युद्ध में घसीटा था।
दुर्लभ खनिज को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व सनाए ताकाईची के बीच व्हाइट हाउस में पहली मुलाकात थी। ट्रम्प ने उनको चुनावों के समय पूर्ण समर्थन दिया था और जब उन्होंने अपने पुराने सहयोगी जापान को हर्मूज जल डमरू मध्य के लिए आवाज लगायी तो ताकाईची ने इस आवाज को अनसुना कर दिया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज गुरुवार, 19 मार्च 2026 को ताकाईची को राष्ट्रपति से व्हाइट हाउस में मुलाकात करनी थी और इस दौरान उन्होंने पर्ल हार्बर पर हमले का जिक्र कर दिया।
जो लोग ट्रम्प को अच्छी तरह से जानते हैं, उनको पता था कि ट्रम्प अपनी अनदेखी को कभी भूलते नहीं है। वे जितना समर्थन करते हैं और उतना ही वे कड़वी बात को भी सहज तरीके से सामने बैठे शख्स के समक्ष पेश कर देते है। ऐसा ही आज देखने को मिला।
ताकाईची तीन दिन के दौरे पर थीं और उनको आज पहले ही दिन व्हाइट हाउस में मुलाकात करनी थी। अगर शिंजो आबे की बात की जाये तो वे प्रधानमंत्री के रूप में व्हाइट हाउस की अनेक बार यात्रा कर चुके थे और उनको डोनाल्ड ट्रम्प के साथ 2016 से 2020 के बीच किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। कोरोना काल के बाद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और फिर एक दिन गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गयी।
एक साल के भीतर इंड्सइंड बैंक सीइओ के बाद एचडीएफसी के अध्यक्ष का इस्तीफा
श्रीगंगानगर। साल भी तो नहीं हुआ इंड्सइंड बैंक के सीइओ सुमन काठपालिया और उनके नायब ने इस्तीफा देकर भारतीय बैंकिंग बाजार में हलचल पैदा कर दी थी। अब एचडीएफसी बैंक के अध्यक्ष अतनू चक्रवर्ती ने रिजाइन किया तो बैंक को एक ही दिन में एक लाख करोड़ का झटका लगा है।
भारत में कुछ बैंक ऐसे हैं जो काला धन को अपने बैंकों में इस तरह छुपाते हैं कि उसकी तलाश करना आसान नहीं है और रिजर्व बैंक पर सरकार का दबाव रहता है क्योंकि यह कालाधन उनके नजदीकियों का ही होता है। हवाला के जरिये धन को बाहर भेजना, यह भी बैंकों का ही कार्य है। दो नंबर का काम एक नंबर में किया जाता है और फिर यह धन घूमकर एक नंबर में विदेशी निवेश के रूप में वापिस आ जाता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि एचडीएफसी और इंड्सइंड बैंक इस तरह के काले कारनामों में लिप्त हैं।
बैैंकों की ऑडिट का कार्य अधिकारियों को खुश कर उनको वापिस भेजना रह गया है। ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम होने के बावजूद बहुत सी कमजोरियां अधिकारी अपने पास छुपाये रखते हैं और यह सिस्टम ऐसा नहीं होता कि चोरी पकड़े जाने पर कम्प्यूटर को काम करने से रोक सके। ब्रांच को काम करने से रोक सके।
रही बात एचडीएफसी की बात यह बैंक अमेरिका में भी आईसीआईसीआई की तरह सूचीबद्ध है औरवहां पर भी बुधवार रात को भारतीय समयानुसार इसको भारी नुकसान हुआ था और भारतीय शेयर बाजार में तो एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
भाजपा, कांग्रेस, सरकारी अधिकारियों का कालाधन विदेश से विदेशी निवेश के रूप में किस रूट से आता है, इसकी जानकारी संबंधित देश से आने वाले निवेश से ही पता चल पाती है।
मॉरिशस, सिंगापुर, यूएसए, यूके क्रमश: भारत में टॉपर देश हैं। मलेशिया भी इसमें शामिल है जिसने पांच सालों में करीबन 8 हजार करोड़ रुपये निवेश किये हैं। जर्मनी का अर्थ हो जाता है भारतीय कार्पोरेटस इन्वेस्ट कर रहे हैं।
बाकी सभी का अलग-अलग कोड है। एफडीआई आता कितना है और जाता कितना है, इसका आकलन भी किया जाना आवश्यक हो जाता है।
निवेशकों ने एचडीएफसी के भीतर एक लाख करोड़ रुपये एक दिन में गंवा दिये। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि गेम कितना बड़ा चल रहा है। अभी आईसीआईसीआई का सच भी सामने आने वाला है।
बहुत से बैंकों की जांच हो तो सुबह ही उनको लाइसेंस निलम्बित हो सकते हैं लेकिन इनकी जांच करने वाले स्वयं ऐसी सीट पर बैठे हैं, जहां पर उनकी फाइलें सरकार के पास हैं।
