रूस-अमेरिका ने एनर्जी नहीं दी तो...?
श्रीगंगानगर। एलपीजी की मांग और सप्लाई में भारी अंतर आने के कारण सरकार ने जहां शह
री क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग की अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है तो ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता 45 दिन बाद सिलेंडर बुक करवा सकते हैं। सब्सिडी खत्म होने के बाद कालाबाजारी पर एक बार अंकुश लगा था जो अब कई गुणा बढ़ गया है। लोग लाइनों में लगकर अधिक कीमत चुका रहे हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर भारत पर कहीं अधिक दिखाई दे रहा है। चीन जहां अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अधिकतम अमेरिका से एलपीजी की खरीद करता है और इसके बाद रूस, यूएआई से भी खरीद करता है किंतु उसका बड़ा स्रोत अमेरिका है।
वहीं भारत को देखा जाये तो वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 60 प्रतिशत आयात करता है। इसका अधिकतर खरीददारी अरब के देशों से होती है। मास्को को जहां दिल्ली अपना मित्र मानता है, उसी देश से खरीद बहुत कम की जाती है। अमेरिका से खरीद का स्रोत अब बनाया गया है।
जो एक रिपोर्ट सामने आयी है 50 लाख उपभोक्ताओं को सप्लाई की जा रही है तो दूसरी ओर सच्चाई यह है कि बुकिंग 75 लाख उपभोक्ता कर रहे हैँ। इस तरह से मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर है और इस अंतर को कम करने के लिए सरकार ने बुकिंग की अवधि को बढ़ा दिया है।
मध्यपूर्व के संकट से अर्थव्यवस्था को झटका
पश्चिम एशिया में अगर युद्ध को नहीं रोका गया तो भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे अधिक प्रभावित हो सकती है और एलपीजी, सीएनजी जैसी मांग की पूर्ति करना भी आसान नहीं होगा। 19 कार्गो में से एक 1 कार्गो आज हरमूझ जलडमरूमध्य से रवाना हो रहा है। 18 अभी भी फंसे हुए हैं और उनको दूसरे रास्तों से लाये जाने के प्रयास नहीं किये जा रहे हैं।
शेयर बाजार पिछले एक सप्ताह में 8 हजार प्वांइट गिर चुका है। यह एक बड़ा झटका है और विदेशी निवेशक अब अपनी निकासी पर जोर दे रहे हैं। जो विश्वास भारतीय शेयर बाजार की तरफ बना था, उसको बड़ा झटका लगा है तो दूसरी ओर रुपया 92.50 प्रति डॉलर को पार कर गया है। यह युद्ध आरंभ होने के बाद से 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
भारत का ऊर्जा उद्योग अब अमेरिका-रूस पर निर्भर
भारत सरकार पश्चिम एशिया में छाये संकट के बादलों का विचार जानने में कामयाब ही नहीं हो सकी और होर्मूज जलडमरूमध्य के अलावा अन्य रास्तों से एनर्जी की खरीद बारे विचार तक नहीं किया गया।
पश्चिम एशिया या मध्यपूर्व के संकट के कारण तेल आपूर्ति के रास्ते बंद हो रहे हैं तो निर्भरता रूस, अमेरिका आदि पर निर्भर हो गयी है। अगर यह दोनों देश मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं करते अथवा अपने दाम को बढ़ा देते हैं तो भारत के सामने संकट गहरा जायेगा।
कालाबाजारी और मुनाफाखोरी आरंभ
युद्ध के बादल जैसे जैसे गहरा रहे हैं लोग मुनाफाखोरी और कालाबाजारी पर उतर आये हैं। खाद्य तेलों के दामों में ही 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गयी है। इस तरह से अन्य खाद्य पदार्थों पर असर नहीं होगा, यह नहीं कहा जा सकता। हालात काफी विकट हैं।
