होरमूज जल डमरू मध्य की ईरान से आजादी जरूरी!
श्रीगंगानगर। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के विस्फोटों के बीच हरमूज जल डमरूमध्य पर कब्जा कर लिया है और इस कब्जे के कारण कमर्शियल जहाज जो तेल टैंकर हैं, वह नहीं निकल पा रहे हैं और दुनिया भर में पेट्रोलियम पदार्थ का एक संकट पैदा हो गया है।
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि हमने युद्ध को जीत लिया है। हम अभी वहां से नहीं आने वाले हैं और अमेरिका अपना काम पूरा करके आयेगा।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू का कहना है कि हमने अयातुल्ला अली खामनेयी को मार गिराया है और अब उनके उत्तराधिकारी की बारी है। इस तरह से युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। एक निंदा प्रस्ताव भी ईरान के खिलाफ पास किया गया जिसमें खाड़ी के देशों पर हमला एक कारण था।
अब जल डमरू मध्य एक ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां से कमर्शियल जहाज पेट्रोलियम पदार्थ लेकर निकलते हैं और इन जहाजों के नहीं निकल पाने के कारण दुनिया भर में पेट्रोलियम पदार्थ का संकट पैदा हो रहा है।
हालांकि दुनिया के पास कनाडा, अमेरिका, रूस, वेनेजुएला जैसे कई अन्य विकल्प हैं जहां से उन्हें जल डमरू मध्य से नहीं गुजरना होगा।
वहीं जो जहाज फंस गये हैं, उनको निकालने के लिए जल डमरू मध्य का स्वतंत्र होना जरूरी हो गया है। जब तक वह स्वतंत्र नहीं होगा, जहाज नहीं निकल पायेंगे। अमेरिका ने दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर इस मार्ग को स्वतंत्र करवाने का प्रस्ताव दिया है।
भारत में हा-हाकार मचा है
28 फरवरी को इजरायल ने जब हमला बोला उससे कुछ घंटे पहले ही भारत के प्रधानमंत्री येरूशलम की यात्रा कर दिल्ली पहुंचे थे। वहां से उनको एक तगमा मिला था, जो पहले दुनिया के किसी भी नेता को नहीं मिल पाया था और 26-27 फरवरी की उनकी यात्रा सम्पन्न हो गयी थी। अब ईरान इसी कारण भारत से नाराज है तो दूसरी ओर सउदी अरब ने पाकिस्तान के साथ टाइअप कर लिया है। भारत चारों तरफ से घिर गया है और पेट्रोलियम पदार्थों के टैंकर या जहाज जल डमरू मध्य से गुजर नहीं पा रहे हैं। ईरान ने वहां पर बारूदी सुरंग बिछा दी है। समुन्द्र सुरंग जहाज को सुरक्षित निकलने नहीं दे सकती है।
एलपीजी और पेट्रोलियम पदार्थ को लेकर हा-हाकार मच गया है। मंत्री को लोकसभा में बयान देने के लिए आना पड़ा। जो वीडियो सामने आ रहे थे, उसमें लोग लाइनों में लगे हुए नजर आ रहे हैं।
