ईरान युद्ध लम्बा चला तो 100 को पार कर सकता है रुपया
श्रीगंगानगर। ईरान-इजरायल और अमेरिका के युद्ध को अभी 15 दिन ही हुए हैं। अगर युद्ध लम्बा चला,जिस तरह का संकेत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू दे रहे हैं, उससे भारतीय अर्थव्यवस्था भारी दबाव में आ जायेगी।
ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण शेयर बाजार भारी दबाव में रहा था और एक माह के भीतर करीबन 9 हजार अंकों का भारी नुकसान हुआ है। वहीं पिछले सप्ताह पांच में से चार दिन शेयर बाजार में गिरावट को दर्ज किया गया। हालांकि इसको वैश्विक कारण माना जा रहा है क्योंकि स्वयं संयुक्त राज्य के शेयर बाजार में भी गिरावट आयी।
चिंता का सबसे बड़ा कारण है भारतीय मुद्रा। रुपया 92.50 प्रति डॉलर को पार कर गया है। तेहरान के साथ वाशिंगटन का तनाव इसी तरह से बना रहा तो रुपया शतक के करीब पहुंच सकता है और उस समय महंगाई का ऐसा दौर आरंभ होगा, जिसका अनुमान लगाने से सिरहन दौड़ जाती है। रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
यह उस नरेन्द्र मोदी के दौर में हो रहा है जो गुजरात के सीएम के रूप में कहते थे कि रुपया नहीं सरकार गिर रही है। रुपये की चिंता सरकार को नहीं है और वह अपनी कुर्सी को येन-केन प्रकारेण बनाये रखना चाहती है।
मोदी की एक साल पहले तक अरब के देशों में अच्छी पैठ थी और जो कहा जाता था, वह हो जाता था किंतु ऐसा नहीं हो रहा है। रियाद यात्रा के दौरान एकाएक वापिस आना पड़ा क्योंकि देश के दिल लाल किले पर आतंकवादी आक्रमण हो गया था। अब वे यहूदी देश इजरायल गये तो वहां से लौटते ही समाचार आया कि दोनोंदेश 28 फरवरी से युद्ध में हैं। 15 दिन हो गये हैं।
बुलेट का सपना, सपना ही रह सकता है
जापान से कर्जा लेकर भारत सरकार अहमदाबाद से मुम्बई तक बुलेट ट्रेन चलाने का प्रस्ताव तैयार किये हुए है और इस प्रस्ताव को लगभग एक दशक हो गया है और अभी तक इसकी लाइनिंग का काम पूरा नहीं हो पाया है।
लाइनिंग और स्टेशन भवन का निर्माण होने के उपरांत जापान अपनी पुरानी ई-3 आदि का कोच भारत को ट्रॉयल के रूप में देगा, इस तरह का सौदा हुआ था। उस समय प्रधानमंत्री शिंजो आबे थे, जो अब इस दुनिया में नहीं है। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर सनाए ताकाईची हैं जिनके पास दो तिहाई बहुमत है। वे 19 मार्च को वाशिंगटन जा रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनकी मेजबानी करेंगे। व्हाइट हाउस में दोनों शिखर नेता मुलाकात करेंगे। विश्व के अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारत के साथ इस समय संबंध मधुर नहीं है। 36 का आकड़ा नहीं कहा जा सकता, किंतु मधुर भी कहा नहीं कहा जा सकता। इस तरह से ट्रम्प भारत सरकार पर दबाव बनाने के लिए कुछ आग्रह ताकाईची के समक्ष करते हैं तो वे मना नहीं कर सकेंगी क्योंकि ट्रम्प ने उनको चुनावों के समय खुला समर्थन दिया था और वे दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने वाली पहली नेत्री बन गयी। इस तरह का भारत क सपना, सपना नहीं रह जाये।
