नार्थ-ईस्ट हजारों साल की भारतीय संस्कृति की धरोहर रही और वहां से थाई के लिए रास्ता बनाया जाने की मंजूरी क्यों दी गयी?



श्रीगंगानगर। वर्ष 2019 का साल था और भारत में शिंजो आबे के आने के जश्र की तैयारी चल रही थी। उनको गुवाहटी में आमंत्रित किया जा रहा था और इसी तरह का माहौल बनाया गया था। गुवाहटी में मां कामख्या का विराट मंदिर है। 51 शक्तिपीठ में से एक माना जाता है। वहां जापानी पीएम को आना था, किंतु उन्होंने अपने आने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। कुछ समय बाद ही उन्होंने 2020 में इस्तीफा दे दिया। इसके उपरांत जापान को अनेक पीएम मिले। आबे अब इस दुनिया में नहीं है। 

इन पंक्तियों का उल्लेख करने का कारण यह था कि पूर्वोत्तर पूर्वोत्तर भारत के लिए कितना अहम है, इसका प्रमाण मिलता है।  चाइना भी कई बार सिक्कम और अरुचाचल को अपना क्षेत्र बताकर नक्शा दुनिया के सामने पेश कर देता है। 

इनमें मणिपुर तो और भी संवेदनशील इलाका है। इसका प्रमाण यह है कि वहां पर हिंसा के कारण भारतीय जनता पार्टी को अपनी ही सरकार को बर्खास्त करना पड़ा। नरेन्द्र मोदी के 12 साल के प्रधानमंत्री काल में यह एकमात्र प्रमाण है कि उन्होंने अपनी ही सरकार को बर्खास्त किया। हालांकि कश्मीर में भी राष्ट्रपति शासन लगाया गया किंतु वह सरकार महबूबा मुफ्ती की सरकार कहलाती थी। भाजपा उसमें सहयोगी थी। 

उसी मणिपुर से रास्ता बनाया जा रहा है थाईलैण्ड के लिए। कारण यह है कि सैक्स का बाजार सडक़ मार्ग से खुल जाये किंतु भारत सरकार की यह मुराद म्यांमार ने पूरी नहीं होने दी। म्यांमार सरकार ने सडक़ मार्ग को बीच में ही लटकाया हुआ है और आईएमटी का यह प्रोजेक्ट कई सालों से अटका हुआ है। 

थाई का सैक्स बाजार भारत में काफी लोकप्रिय है और छोटे शहरों से लेकर मैट्रो सीटिज तक लोग वहां की यात्रा कर रहे हैं। रंगीन मिजाजी को वहीं पर छुपाकर वे वापिस लौट आते हैं। मसाज सैंटर की ओट में यह धंधा वहां पर खूब चल रहा है। 

पूर्वोत्तर का हृदय मणिपुर को माना जाता है और इस हार्ट स्टेट को थाई के साथ जोड़ा जा रहा था। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार कितना ‘बड़ा’ प्रोजेक्ट ला रही थी। 

हालांकि आबे के न आने के बाद से अभी तक भारत सरकार को बुलेट ट्रेन नहीं मिली है। उसके रैक का इंतजार किया जा रहा है। अब वहां पर नयी सरकार का गठन हो चुका है, लेकिन लिब्रल पार्टी की ही सरकार होने के बाद भी बुलेट ट्रेन मिलेगी या नहीं, यह भविष्य पर निर्भर करेगा। 

सानाए ताकाईची ने वहां पर नये जनादेश के साथ सरकार संभाली है और लग रहा है कि वे अपनी नयी नीतियां लेकर आना चाहती हैं। ताकाईची के चुनाव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना समर्थन दिया था और अब उसी तरह का समर्थन हंगरी की सरकार को भी दिया जा रहा है। हंगरी में अगले तीन महीने में चुनाव होने हैं। 


मैक्रां से पहले अनेक नेताओं का गले लगाकर स्वागत किया गया है

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैकां की यात्रा को टीवी कवरेज पर काफी स्लाट दिया गया है, हालांकि डिजीटल मीडिया पर उस तरह की कवरेज नहीं है। जिस तरह का स्वागत किया गया और माहौल बनाने की कोशिश की गयी वैसी ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, सउदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, साउथ कोरिया के राष्ट्रपति आदि की भी हुई है। इनमें अनेक नेताओं को पीएम एयरपोर्ट पर लेने के लिए भी गये हैं। साउथ कोरिया नेता को गंगा की आरती के लिए वाराणसी भी ले जाया गया। भारत में और भी बड़े नेता आये, जिनको अपना करीबी बताया गया। राष्ट्रपति ट्रम्प का स्वागत नरेन्द्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद में किया गया और एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटायी गयी। 

इनमें अब कितने नेता नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े हैं, यह देखने वाला है और भारत सरकार की नीतियों का समर्थन कर रहे हैं। मैक्रां को अपने उत्तराधिकारी के लिए अगले साल चुनाव करवाना है, उनके दो साल का टर्म पूरा हो रहा है। फ्रांस में बहुत कुछ हुआ है जिससे वहां पर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रकाशित होने वाली सूची में पेरिस के  प्रति विश्वास लोगों में कम हुआ है। 

आबे की पहली यात्रा भी एतिहासिक थी और जापान के पीएम को गुवाहटी में भी शानदार स्वागत के लिए बुलाया जा रहा था किंतु उन्होंने अपनी यात्रा को रद्द कर दिया और कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। 


बराक की यात्रा को क्यों भूल जाते हैं लोग

बराक हुसैन ओबामा भी भारत की यात्रा पर आये थे और उनको रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम के लिए भी आमंत्रित किया गया। गणतंत्र दिवस का मुख्यातिथि बनाया गया और जब वे जा रहे थे तो उन्होंने भारत सरकार के खिलाफ बयान दिया था कि अब सहिष्णुता कम हो जायेगी। 

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