सानाए ताकाईची : भारी जनादेश का जैपनि’ज को क्या लाभ मिलेगा? गाजा पर पीस बोर्ड की बैठक 19 को


श्रीगंगानगर। ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ के नारे के साथ नरेन्द्र मोदी ने भारत की राष्ट्रीय राजनीति में आगाज किया था। वह अच्छे दिन की तलाश जारी है और इस बीच जापान में 2014 वाला इतिहास दोहराया गया है और नया जनादेश हासिल करने के लिए जापानी पीएम सानाए ताकाईची ने 8 फरवरी को अचानक चुनाव कॉल कर लिये थे। उनको भारी बहुमत हासिल हुआ। गठबंधन के साथ वे दो तिहाई बहुमत हासिल करने में भी कामयाब रहीं। 

प्रधानमंत्री शिंजो आबे की तरह सानाए ताकाईची भी काफी लोकप्रिय रहीं खासकर युवाओं में। इसी मनोबल के साथ उन्होंने समयपूर्व ही चुनाव को कॉल कर लिया। वे विजय भी रहीं। अब उनको अपने वायदे पूरे करने हैं। 

शिंजो आबे ने जैपनिज के अधिकारों को महत्व दिया, इस कारण वे काफी लोकप्रिय रहे और लम्बे समय तक पीएम रहे। हालांकि जापान में 66 प्रधानमंत्री बने हैं और इनमें 20 को एक साल का कार्यकाल का भी वक्त पूरा करने का मौका नहीं मिल पाया। हालांकि आबे हमारे बीच नहीं हैं। 

चीन के साथ जापान के तनावपूर्ण संबंध रहे हैं और इसी कारण प्रशांत महासागर की सुरक्षा के लिए वह अमेरिका का क्वाड में प्रमुख सहयोगी रहा है। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। 

अब डिप्लोमैटिक देश चीन के साथ जापान के साथ किस तरह के रिश्ते रहते हैं, यह देखने वाला होगा। वहां पर मानवाधिकारों की वे सुध लेने में कामयाब हो पायेंगी?


आठ अरब देशों के साथ इजरायल भी शामिल

विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेहनत की बदौलत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक मंच पर अरब और इजरायल को लाने में कामयाब होते दिख रहे हैं। हालांकि 19 फरवरी को पीस बोर्ड की पहली बैठक होने वाली है और इसमें अनेक राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। 20 से ज्यादा सदस्य देश हैं। इनमें कितने शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं यह देखने वाला होगा। 

वाशिंगटन की यात्रा से नेतनयाहू प्रसन्न नहीं?

एक बड़ा सवाल यह है कि एक वर्ष के भीतर इजरायल के प्रधानमंत्री 6 बार अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं अर्थात हर दो माह बाद वे वाशिंगटन आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी यहूदी देश के  प्रवास पर रहे। यहूदी नेता का वाशिंगटन डीसी में स्वागत तो जबरदस्त हुआ, लेकिन उनको वार्ता का लाभ नहीं मिल पाया। वे विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मिले। कोई संयुक्त घोषणा पत्र नहीं आया। पत्रकार वार्ता भी नहीं हो पायी। इस तरह से ईरान में वहां के लोगों के चल रहे आंदोलन को कितना समर्थन दोनों देश देते हैं, यह भी देखने वाला होगा। हालांकि नौसेना के कई जहाज वहां पर जमा हैं और हिंद महासागर तथा अरब की खाड़ी में अमेरिका ने सैनिक तैनात किये हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है। वहीं ईरान ने कहा है कि 24 घंटे में वह आवश्यकतानुसार हथियार तैयार कर सकता है। अमेरिका को चेतावनी भी दी गयी है कि वह युद्ध और वार्ता दोनों के लिए तैयार है। 

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