दावोस से वापिस लौट आयेंगे ट्रम्प, पेरिस जाने का कार्यक्रम नहीं



श्रीगंगानगर। यूरोपीय देश स्वीजरलैण्ड के दावोस में आर्थिक मामलों से संबंधित एक बड़ी बैठक हो रही है और इसमें दुनिया भर के नेता जुट रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इसमें भाग लेने के लिए रवाना हो गये जबकि भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी शायद इसमें भाग नहीं ले रहे हैं। वहीं पाक पीएम दावोस पहुंच गये हैं। 

भारत आगामी 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इसमें यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सूला वॉन डेर लेन मुख्यातिथि के रूप में भाग लेंगी। 27 जनवरी को यूरोपीय संघ के शिखर नेता और भारत सरकार के बीच मुक्त व्यापार समझौता पर बैठक होनी है। 

इससे पहले दावोस में विश्व के शिखर नेता जुट रहे हैं। सर्द मौसम की परवाह नहीं करते हुए बर्फीली पहाडिय़ों से ढके दावोस में डोनाल्ड ट्रम्प भी पहुंच रहे हैं। वे एयरफोर्स वन से रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब हुए। 

ट्रम्प ने अपना एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए पत्रकारों के सवालों के उत्तर भी दिये। 


पेरिस नहीं जायेंगे ट्रम्प

ग्रीनलैण्ड के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रम्प और यूरोपियन नेता इमैनुअल मैक्रां के बीच विवाद गहराया हुआ है। मैक्रां ने दावोस के शिखर सम्मेलन उपरांत पेरिस में जी-7 देशों की आपात बैठक बुलायी है। 2026 के लिए इस समूह के अध्यक्ष की जिम्मेदारी फ्रांस के पास है और जून में वार्षिक बैठक का आयोजन होने की संभावना है। 

मैक्रां ने जी-7 की आपात बैठक की मेजबानी करते हुए ट्रम्प को भी आमंत्रित किया था किंतु अमेरिका ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया है। वाशिंगटन डीसी में पत्रकारों से कहा, वे पेरिस नहीं जा रहे हैं। 

अमेरिका इससे पहले कनाडा में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में भी स्वयं को अलग रख चुका है। मार्क रूबियो ने इस बैठक में जाने से इनकार कर दिया था। 

वहीं भारत की तरफ से देवोस में कौन जा रहा है, इस संबंध में जानकारी सामने नहीं आ पायी है। पाक पीएम शाहबाज शरीफ देवोस पहुंच गये हैं और डॉन ने उनकी फोटो के साथ समाचार को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया है। 


भारत में आईटी सैक्टर के दिग्गज, क्वांटम के लिए विदेशी सहयोग क्यों?

मेड इन इंडिया और विदेश वस्तुओं का बहिष्कार करने का आह्वान करने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करीबन 10 हजार करोड़ के सौदे आईटी सैक्टर के तहत फ्रांस से किये हुए हैं। इनमें क्वांटम कम्पयूटर है जिसे वैरी-वैरी सुपर कम्प्यूटर के नाम से भी जाना जाता है। क्या भारत के इंजीनियर्स पर विश्वास नहीं है? यह भी कहा जा सकता है कि भाषण और करनी में समानता नहीं है। 

सिंदूर ऑपरेशन के दौरान सोशल मीडिया पर यह जानकारी वायरल की गयी थी कि राफेल के लिए  फ्रांस ने कोड ट्रांसफर करने से इन्कार कर दिया था। अब उसी फ्रांस से 121 राफेल खरीद की चर्चा हो रही है। कुल मिलाकर करीबन चार लाख करोड़ रुपये का सौदा किया जा रहा है। इससे पहले यूरोपीयन नेताओं को भारत के गणतंत्र दिवस का मुख्य मेहमान बनाया जा रहा है। 


बात इमरान खान की!

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को न्यूयार्क में यूएन के वार्षिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था तो सउदी के शासक मोहम्मद बिन सलमान ने अपना हवाई जहाज दिया था। भारत की विदेश नीति के महानायक ने सउदी से वार्ता कर जहाज को खाली वापिस मंगवा लिया। इस तरह से इमरान खान को सार्वजनिक तौर पर अपमान का सामना करना पड़ा। 

अब उसी सउदी अरब ने पाकिस्तान के साथ ‘सम-नाटो’ समझौता किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इससे पहले सउदी गये थे और बताया गया कि सउदी की वायु सेना ने उनको एस्कोर्ट किया और शाही निवास पर ले जाया गया। उधर मेहमान नवाजी हो रही थी और उधर कश्मीर में आतंकवादी हमला हो गया। पीएम बिना भोजन के वहां से लौट आये। 

वक्त बड़ा बलवान होता है और यह एक बार पुन: प्रमाणित हुआ। अमेरिका और सउदी अरब के साथ रिश्ते खट्टे हो गये। सउदी ने तुरंत पाक के साथ सम नाटो समझौता कर लिया और इस तरह से दूरियां बढ़ गयी। 

अब यूएई के शासक मोहम्मद बिन जायेद अल नाहायन को दिल्ली आमंत्रित किया गया। उसी तरह की मेहमान नवाजी हुई जिस तरह की कुछ दिन पहले रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन की गयी थी या सउदी अरब के शासक मोहम्मद बिन सलमान की हुई थी। 

पुतिन भारत को बड़ा तोहफा नहीं दे गये। भारत जनरेशन 6 के हवाई जहाज मांग रहा था, जिस पर सहमति नहीं बन पायी। 

यूएई भी भारत को आश्वासन देकर चले गये हैं। देश को उम्मीद है कि ऊर्जा, स्मार्ट सिटी आदि में यूएई बड़ा निवेश करेगा, लेकिन यह भविष्य के गर्भ में है। 

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