‘अमेरिका फस्र्ट’ में ग्रीनलैण्ड को हासिल करना जरूरी! पंजाब केसरी के रूतबे को समाप्त क्यों करना चाहती है पंजाब की आप सरकार, चीन सागर से युद्धपोत ईरान की ओर रवाना
श्रीगंगानगर। ग्रीनलैण्ड में यूरोपियन यूनियन के कुछ देश एकजुट होकर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं तो दूसरी ओर अमेरिकी युद्धपोत, हजारों सैनिक मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशांत महासागर में युद्ध जैसे हालात नजर आने लगे हैं।
दूसरी ओर देखें तो भारत में स्वतंत्र आवाज को दबाने की कोशिशें हो रही हैं। पंजाब में सरकारी एजेंसियां पंजाब केसरी समाचार पत्र के प्रेस और उनके व्यवसायिक संस्थाओं की जांच के नाम पर उनको परेशान कर रही हैं। वहीं राजस्थान में पत्रकार सतीश बेरी के जीवन, आजादी और प्रतिष्ठा को समाप्त करने के लिए राजस्थान पुलिस लगातार प्रयासरत है।
अगर पहले भारत की बात की जाये तो इस समय पंजाब पर नजर डाली जाये जहां पंजाब केसरी अखबार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिशें सरकारी स्तर पर हो रही हैं। उनके व्यवसायिक संस्थान पर एक के बाद एक अनेक एजेंसियां जांच करने के लिए पहुंच गयीं। इस तरह से एक दशकों पुराने समाचार पत्र की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की कोशिशें सरकारी स्तर पर हो रही हैं।
इस तरह की घटना की निंदा अनेक पत्रकार, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने की है। इस बीच यह भी नजर आ रहा है कि श्रीगंगानगर में पत्रकार सतीश बेरी के खिलाफ लगातार साजिश रची जा रही हैं और वह भी सरकारी नेताओं, माफिया, प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के कारण।
दुनिया के हालात पर नजर
अगर विश्व के हालात पर नजर डाली जाये तो सामने आ रहा है कि इस समय दुनिया के चारों ओर युद्ध के आसार नजर आ रहे हैं। ठंडी हवाओं के बीच युद्धक विमानों की खबरों से गर्मी आ गयी है। ऐसा लग रहा है कि प्रत्येक देश अपनी गरीबी, सामाजिक योजनाओं को भुलाकर हथियार खरीदना चाहता है।
मध्य एशिया में हालात यह हो गये हैं कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिका ने अपने सैनिकों को प्रशांत महासागर में निर्धारित बिंदु पर पहुंचने के आदेश जारी कर दिये हैं। कम से कम पांच युद्ध चीन सी सागर में तैनात थे जो अब मूव कर रहे हैं और रविवार को उनके मध्य एशिया में ईरान के पास पहुंच जाने की संभावना न्यूज एजेंसी ने दी है।
पांच हजार से ज्यादा सैनिक इन युद्धपोत पर तैनात थे जो अब ईरान में किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। इस तरह से कोरियाई द्वीप, दक्षिण एशिया के हालात को भी सामान्य नहीं कहा जा सकता है।
ग्रीनलैण्ड मुख्य मुद्दा बन गया
अमेरिका के लिए रणनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैण्ड को हासिल करना अब मुख्य मुद्दा बन गया है। इस साल नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं और रेड ईगल चाहता है कि पूरे यूएसए में उसका डंका बजे ताकि वह दो तिहाई बहुमत को हासिल कर सके। ब्ल्यू सिटी के राज्यों में वह डेमोक्रेट्स के कब्जे को भी कमजोर करना चाहता है।
ग्रीनलैण्ड की बात अब अमेरिका में आम आदमी करने लगा है और उसको वह जानकारी समझ में आ गयी है कि क्यों डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका फस्र्ट नीति के तहत ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करना चाहते हैं।
इस तरह से यूरोपीय देश भले ही सैन्य अभ्यास कर रहे हों लेकिन उनके पास उतना बारूद नहीं है कि वह अमेरिका के खिलाफ ही खर्च कर दें। उधर रूस भी यूरोपीय संघ के दबदबे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है।
