सौलर ऊर्जा को मिलने वाली 80 हजार रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी? फ्रांस के राष्ट्रपति से पहले जर्मन चांसलर आज भारत आ रहे हैं
श्रीगंगानगर। अपाचे और चिनूक जैसे हैलीकॉप्टर के लिए करीबन पांच साल पहले भारत गणराज्य की सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ समझौता किया था। उस समय वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रम्प थे और भारत में नरेन्द्र मोदी।
व्हाइट हाउस में 21 जनवरी 2025 को एक भव्य कार्यक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रम्प दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने पहुंचे तो भारत गणराज्य की सरकार मान रही थी कि अपाचे और चिनूक हैलीकॉप्टर मिल जायेंगे, लेकिन इस बार साहब बदले-बदले से नजर आ रहे हैं और इसी कारण यह सौद आज एक साल बाद भी लम्बित है।
रूस भी इंडिया के साथ फाइटर जेट के बारे में समझौता नहीं कर सका क्योंकि राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने जो शर्त रखीं थीं, वह शायद पूरी नहीं हो पायी हैं। नये जेट पर बात नहीं बनी तो एक बार पुन: फ्रांस की ओर रुख करना पड़ा। फ्रांस के पास फिलहाल राफेल की जनरेशन 4 की टैक्रोलॉजी है। 5 को तैयार करने में वक्त लगेगा। इस कारण 4 के लिए ही समझौता हो रहा है और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां अगले माह फरवरी में नई दिल्ली आ रहे हैं।
वहीं जर्मन चांसलर कल सोमवार से भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। जर्मन के साथ भारत का 50 अरब डॉलर का प्रतिवर्ष व्यापार है और करीबन 2 हजार इस देश की कंपनियां विभिन्न स्थानों पर कार्यरत है।
जर्मन और भारत दोनों को ही यह माना जा सकता है कि यह भी अमेरिका की मार के मारे हुए हैं। दोनों देश यूएसए को दवाइयां भेजते हैं और जर्मन पहले व भारत दूसरे स्थान पर है।
इस समय पूरी दुनिया में वल्र्ड वॉर-3 की चर्चा हो रही है तो उस समय नाजी के देश से राष्ट्राध्यक्ष आ रहे हैं तो चर्चा होनी स्वभाविक है। प्रधानमंत्री ने उनको अपने गृह प्रदेश गुजरात की धरती पर बुलाया है। वहां वे सोमवार का दिन रहेंगे और इसके बाद चांसलर बंगलुरू चले जायेंगे तो नरेन्द्र मोदी वापिस प्रधानमंत्री कार्यालय अथवा निवास पर आ जायेंगे।
दवा निर्माण के अग्रणी देशों पर अमेरिका ने भारी भरकम टैरिफ लगाया है और कुल मिलाकर यूएसए टैरिफ से ही 18 ट्रिलियन डॉलर कमा चुका है।
अमेरिका और जर्मन की भी बात हो चुकी है और एक माह बाद ही चांसलर भारत की यात्रा पर आ गये हैं।
मोदी को ट्रम्प ने दिया जोर का झटका
इस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता अपने इतिहास में सबसे कमजोर चल रही है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मोदी को एक और झटका दे दिया है।
बाइडेन प्रशासन के समय भारत सरकार और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें फ्रांस भी शामिल था। इस तरह से यह एक समूह बन गया था। भारत के नेतृत्व वाले समूह को आईएसए का नाम दिया गया था। यह समूह भारत में सोलर पैनल के लिए सब्सिडी उपलब्ध करवाता था ताकि हरित ऊर्जा के नाम पर लोगों को साथ जोड़ा जा सके।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अब भारत और फ्रांस वाले संगठन से अपने को अलग कर लिया है। सौर ऊर्जा के लिए 80 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही थी जो अमेरिका से आ रही थी। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील ही नहीं हो पायी। अमेरिका के वित्त मंत्री बिसेंट का कहना है कि पीएम मोदी ने ट्रम्प से फोन पर वार्ता करना तक उचित नहीं समझा, इस कारण डील को एक बार रोक दिया गया है।
अब सवाल यह है कि 80 हजार रुपये की सब्सिडी देने वाली इस योजना का क्या होगा। अभी तक भारत सरकार ने यह खुलासा तो किया नहीं था कि वह अमेरिका से मिलने वाली सहायता के जरिये सब्सिडी दे रहा है।
सौर ऊर्जा पर सब्सिडी दिये जाने से लोगों में आकर्षण बढ़ा था और अब संभवत: भारत सरकार भी अपने हाथ पीछे खींच सकती है। औपचारिक रूप से इस योजना के बारे में सरकार की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गयी है।
