कलयुग की ‘लंका’ है मादुरो का देश, कई हजार टन सोने की खदान और करंसी फिर भी रसातल में, 300 रुपये में मिलता है एक यूएसडी एक ही रात में राजा से रंक बन गया निकोलस



श्रीगंगानगर। अगर हम आज के समाचारों को पढऩे से पहले 20 साल पहले की बात करें तो उस समय हमारे पास इंटरनेट के नाम पर वेब 1.0 थी। उस समय सिर्फ समाचारों को पढ़ा जा सकता था और उनमें अपने सुझाव देने की जगह नहीं होती थी। समय बदला और वेब 2.0 आ गया और यह फेसबुक, ट्वीटर और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के कारण लोकप्रिय हो गया और आखिर में एप्पल, सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों ने मोबाइल को स्मार्ट बना दिया और इस तरह से 2010 से लेकर अब तक मोबाइल या इंटरनेट में क्रांति आ चुकी है। मोबाइल पर हर वह सुविधा उपलब्ध है जो आपको किसी भी समय पर महसूस हो सकती है। वर्चुअल फ्रेंड भी मिलेंगे जो हजारों या लाखों अथवा उससे भी कहीं ज्यादा संख्या हो सकती है। वक्त बदला है तो अब वेब 3.0 आ गया है अर्थात 2.0 के साथ एआई जुड़ गया है और ट्वीटर अब एक्स के मालिक एलन मस्क, जो दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं, ने एक साक्षात्कार में बताया है कि अगले पांच साल के भीतर मोबाइल की डेमोग्राफी भी बदल जायेगी अर्थात जो आज है, वह उस समय नहीं होगा। इस तरह से प्रकृति कहती है कि निरंतर बदलाव के साथ स्वयं को बनाये रखना हितकर होता है। 

उसी तरह से हम अगर सतयुग की बात करें जिसका वर्णन महादेवी दुर्गा पुराण में किया गया है, उसमें राजा हरीशचंद्र के बारे में बताया गया है कि किस तरह से वे अपने वचन को पूरा करने के लिए राजा से रंक बन गये थे। उनका महल, उनका परिवार उनसे अलग हो गया था। इसी तरह से त्रेता युग में रावण का जिक्र सामने आता है, जिन्होंने एक परस्त्री को प्राप्त करने के लिए स्वयं का ही नहीं अपितु परिवार और देश का नाश कर लिया था। 

इसी तरह से अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो की हालत कर दी है। वे कलयुग के रावण बन गये हैं और इसका असर अकेले वेनेजुएला में ही नहीं अपितु भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी देखने को मिल सकता है। 

निकोलस मादुरो की चुनावी जीत को पश्चिमी देश नहीं मान रहे थे और 2023 के बाद 2024 में भी चुनाव हुए। राष्ट्रपति के पास सेना और देश के सभी तरह की शक्तियां थीं और वे पॉवरफुल थे। 

मादुरो जिस देश का प्रतिनिधित्व करते थे, उसको आज के जमाने की ‘सोने की लंका’ कहा जा सकता है। उनके पास कई हजार टन सोने की खदाने और दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार था। देखा जाये तो वेनेजुएला के पास एक सशक्त सरकार थी जो पिछले 11 या 12 सालों से चल रही थी किंतु जनता आर्थिक संकट का सामना कर रही थी। इतने ज्यादा संसाधन होने के बावजूद उसकी मुद्रा 304 रुपये में सिर्फ एक डॉलर की खरीद कर पाती थी। इतना बड़ा देश और आर्थिक संकट के कारण बेहाल था और इसी कारण अन्य देश उसको ऋण देकर सस्ती दरों पर तेल खरीद रहे थे। वेनेजुएला की बर्बादी की कहानी यही बताती है। 


आधा घंटा में ही अमेरिकी सैनिक उठा ले गये

राष्ट्रपति रहने के बावजूद जब अमेरिका ने सर्जिकल स्ट्राइक की तो वहां की सेना भी कुछ नहीं कर पायी और मात्र आधे घंटे में ही उनको सरकारी आवास से उठा लिया गया और समुन्द्र ले जाया गया, वहां से वे न्यूयार्क पहुंच गये। इस तरह से उनको न्यूयार्क की अदालत में पेश किया गया, जहां उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। निकोलस अब न्यूयार्क की जेल में है। 


राजा से रंक बनने की कहानी

निकोलस को एक खुले हुए वाहन में जेल से अदालत तक ले जाया गया और इस तरह से दुनिया को दिखाया गया कि कल तक जो राजा था आज एक रंक बन चुका है। 

भारत सरकार जैसे आरोप लगाती है कि पाकिस्तान के बॉर्डर से तस्करी की जा रही है। इस तस्करी में हथियार और नशीले पदार्थ जैसे हेरोइन आदि होते हैं। उसी तरह से अमेरिका की खुफिया एजेंसियां का आरोप था कि निकोलस मादुरो के आशीर्वाद से ही नशे का कारोबार समुन्द्री सीमा के माध्यम से अमेरिका तक हो रहा था। वाशिंगटन ने अपने कार्यालय का नाम रक्षा से बदलकर वॉर कर चेतावनी दे दी थी कि अब यह नहीं चलेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं फोन पर मादुरो से बात भी की किंतु इसके बावजूद हालात नहीं बदले। यूएसए सेना ने अनेक बार उन बोट को निशाना बनाकर बम बरसाये जो रात को काराकस से अमेरिकी सीमा की ओर बढ़ती थीं। कई लोग मारे गये। बार-बार चेतावनी के बावजूद यह सब चल रहा था। 

आखिर में वक्त को बदलना पड़ा। निकोलस को एक बंदी बनाया गया और अब वह अगले कई साल तक न्यूयार्क की जेल में रह सकते हैं। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद निश्चित रूप से अब वहां की अर्थव्यवस्था में बदलाव होगा। लोगों को रोजगार मिलेगा क्योंकि जो तेल का उत्पादन होगा, उससे व्यापार के नये रास्ते खुलेंगे। अमेरिका की कई कंपनियां अब अरबों डॉलर काराकस आदि में निवेश करेंगी। 

बाजार में जब रुपया आता है तो उस समय रोजगार भी मिलता है। इससे पहले अमेरिका को अपने प्रतिबंधों को हटाना होगा। उस समय तक सोने और तेल की रखवाली भी करनी होगी और स्थानीय प्रशासन को भी मजबूत करना होगा। क्योंकि अमेरिकी जहाजों की संख्या और उनके तेवर देखकर लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। 

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