शाहबाज शरीफ पुतिन से क्यों मिलना चाहते थे?
वाशिंगटन। एक बड़ा सवाल दुनिया के सामने है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ करीबन 40 मिनिट तक एक कुर्सी पर बैठे रहे और उनके साथ वाली कुर्सी जो रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के लिए खाली थी, पुतिन के साथ आपसी बातचीत होनी थी।
दुनिया में इस समय वल्र्ड वॉर 3 की झलक मिल रही है। सभी देश हथियारों की खरीद को बढ़ावा दे रहे हैं। यूरोपीय देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक फटकार के बाद ही अपने रक्षा बजट को जीडीपी का पांच प्रतिशत तक ले जाने में कामयाब हो गये। सउदी अरब में हथियारों के जखीरे का बड़ा कार्यक्रम हो रहा है। क्राउन प्रिंस ने अमेरिका से नये आधुनिक हथियार और विमान खरीद के लिए भी समझोता किया है।
यह तथ्य बता रहे हैं कि कुछ तो गड़बड़ है दया! एसीपी प्रदूमण का यह श£ोक यहां उचित हो जाता है।
सवाल यह है कि तुर्कमेनिस्तान के अशगाबात में भारत गणराज्य की सरकार को आमंत्रित क्यों नहीं किया गया? पाकिस्तान था, रूस था, तुर्की और अन्य देश थे किंतु भारत नहीं था जबकि दुनिया में दूसरी मुस्लिम आबादी भारत में ही निवास करती है।
2027 तक की जनगणना में यह भी संभव है कि इंडोनेशिया से भारत के मुसलमान भाई यह खिताब अपने नाम कर लें। भारत में जनसंख्या नियंत्रण अधिनियम नहीं है जबकि चीन में है।
पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को पुतिन से ऐसी क्या बात करनी थी जो वे 40 मिनिट्स तक इंतजार करते रहे और पुतिन नहीं आये। अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की बातों पर यकीन किया जाये तो पाकिस्तान चुपके-चुपके भारत के साथ युद्ध की तैयारी कर रहा है जबकि भारत का भी कहना है कि हमने सिंदूर 2.0 को आरंभ करने के लिए तैयारी की हुई है। ध्यान रहे कि पुतिन पिछले दिनों ही दिल्ली की यात्रा पर थे।
क्रेमलिन और दिल्ली का राजभवन मिल्ट्री हथियारों की खरीद या तकनीक हस्तांतरण पर समझौता नहीं कर पाया। जिसकी चर्चा जोरों पर थी।
इसी कारण शाहबाज शरीफ को लग रहा था कि रूस को अपने पक्ष में करने का यह उचित अवसर है। वो कहावत है कि यही समय है, सही समय है। इस मंत्र को देखकर ही वे पुतिन से मिलना चाहते हों। बैठक पूर्व में निर्धारित थी।
पाकिस्तान इस बात के लिए पहले ही आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान के माध्यम से भारत की एजेंसियां उनके देश में आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं। दूसरी ओर वह कश्मीर की स्थिति में धारा 370ए हटाये जाने के बाद से ही उसकी स्वायत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सवाल उठाता रहा है। पाक में कभी भी एक सरकार दूसरा कार्यकाल नहीं ला पायी है। शाहबाज को लग रहा है कि वे यह कर सकते हैं अगर भारत के साथ युद्ध किया जाये। उन्होंने सेना का नियंत्रण भी राष्ट्रपति से छीनकर आसिफ मुनीर को दे दिया है।
