मोदी सरकार संतों की सुरक्षा से चूक क्यों जाती है?
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य में सुरक्षा के लिए विभिन्न तरह की कैटगिरियां तैयार की गयी हैं और इन कैटगिरियों में सरकार के उच्चाधिकारियों तथा राजनेताओं को सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसी तरह से विभिन्न राज्यों में भी पुलिसकर्मियों को नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया जाता है।
मोदी सरकार ने संतों के लिए ऐसी कैटगिरी नहीं बनायी है, जिससे उनको स्थायी सुरक्षा प्राप्त हो सके। ऐसा नहीं है कि संतों का जीवन संकट में नहीं है। अनेक कट्टरपंथी ताकतें सक्रिय हैं।
भारत सरकार यह स्वयं मानती है कि अनेक ऐसे लोग हैं, जो अध्यात्म से जुड़े हैं, उनके जीवन को खतरा है। खतरा हर दिन बढ़ता जाता है लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किये जाते। बात पुरानी नहीं है, अनेक मंदिरों को निशाना बनाया गया है और कट्टरपंथी ताकतें वहां पर विस्फोट करने में भी कामयाब हो गयी।
स्वामी आत्मानंद बेपरवाह का कहना है कि उनके जीवन को अनेक बार ऐसी ताकतों का सामना करना पड़ा। वे बताते हैं कि उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार, जो हिन्दुत्व के मामलों पर राजनीति करते हुए सत्ता में आयी है, ने उनको तहसीलदार के रूप में संबोधित किया और सुरक्षा के मामले में हाथ पीछे खींच लिये।
इस तरह से उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। यह सत्य घटना बताती है कि सुरक्षा सिर्फ राजनेताओं के लिए ही है।
