ऑस्ट्रेलिया-फ्रांस से भी ज्यादा अरबपति भारत में, क्यों? पूरी कहानी
श्रीगंगानगर। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बारे में यह बात कही जाती है कि वहां पर आवासीय भवनों के दाम ज्यादा होने के कारण खुद का घर बनाना आसान नहीं होता, हालांकि आवासीय ऋण आवश्यकता कुछ ही मिनिट्स में पूरी हो जाती है।
ऑस्ट्रेलिया में 6 हजार, कनाडा और फ्रांस में पांच हजार डॉलर से ज्यादा की आम व्यक्ति की आय है जिसको देश का प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है। भारत की बात करें तो औसत आय 15 हजार से अधिक आंकी जाती है।
भारत दुनिया की पांचवीं जीडीपी कहलाता है जो चार ट्रिलियन डॉलर के आसपास होने का दावा किया जाता है हालांकि भारत सरकार का मानना था कि 2022 तक देश की अर्थव्यवस्था पांच लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो जायेगी, लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद नहीं हो पाया और रुपया भी स्थायीत्व स्थापित नहीं कर पाया।
अगर हम अमेरिका की बात करते हैं तो वहां के कैलीफोर्निया की जीडीपी ही भारत सरकार के दावों से ज्यादा है। एक अमेरिकन राज्य भारत देश की जीडीपी से ज्यादा अंशदान रखता है। इसी राज्य में सैलीकॉन वैली, हॉलीवुड और भी बहुत कुछ है।
मुख्य बात यह है कि भारत के भीतर ही असमानता बढ़ती जा रही है। अगर हम फोब्र्स की सूची को देखें तो विश्व के प्रथम 200 अरबपति की सूची को देखते हैं तो कम से कम 13 भारतीय इसमें शामिल है। गौतम अडाणी, मुकेश अम्बानी, एयरटेल सहित अनेक कंपनी अधिकारी शामिल हैं।
वहीं ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के मात्र 3-3 ही अरबपति ऐसे हैं जो टॉप 200 में शामिल हैं। फ्रांस के 6 अरबपति इस सूची में शामिल है। वहीं अमेरिका के 14 अरबपति ही टॉप-15 में शामिल हैं। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि किस तरह के हालात हैं।
भारत में असमानता का स्तर बहुत अधिक होने का कारण है। देश में प्रति व्यक्ति आय 1.8 लाख रुपये है जबकि फ्रांस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा भारत से कहीं आगे प्रति व्यक्ति आय के मामले में आगे हैं। हम अपनी पीठ इसलिए थपथपा देते हैं कि हम विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था है जो ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ चुकी है और जब आम आदमी की आय का विश£ेषण किया जाता है तो वह इतनी कम है कि विश्वास ही नहीं होता कि भारत आर्थिक स्तर पर सौपान तय कर रहा है।
