अरुणाचल का चीन पर दावा, नई दिल्ली तिब्बत को क्यों भूल जाती है!
वाशिंगटन। नई दिल्ली और बीजिंग के बीच तिब्बत को लेकर विवाद दशकों पुराना है और दलाई लामा को भारत में शरण दिये जाने का दावा किया जाता है किंतु भारत सरकार इस मामले को ड्रैगन के समक्ष उठाने से बचने का प्रयास करती रही है। अब चीन ने अरुण आचल को लेकर दावा किया है। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से इसका जवाब भी दिया गया।
बीजिंग कुछ समय पहले तक सिक्किम को अपना देश का हिस्सा दर्शाते हुए नक्शा जारी करता था और अब अरुणाचल को लेकर उसने दावा किया है। चीन के साथ सीमा विवाद लेह-लद्दाख में भी है और दोनों देश कम से कम दो बार युद्ध भी कर चुके हैं।
भारत तिब्बत के धर्म गुरु दलाई लामा को अपने देश में शरण देने का दावा करता है किंतु तिब्बत को लेकर चीन के साथ कभी वार्ता नहीं की। इसका क्या कारण हो सकता है? यह सरकारी स्तर पर कभी बताया नहीं गया।
अरुण गोविल क्या अगला चुनाव लड़ेंगे
राम मंदिर आंदोलन से पहले रामायण नाम से एक सीरियल बनाया गया था जो आज तक के इतिहास का सबसे ज्यादा देखे जाने वाला चलचित्र है। इसमें राम की भूमिका अरुण गोविल ने निभायी थी और इस समय वे उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। अभी उन्होंने एक बयान में अपनी ही पार्टी की सरकार के बारे में विचार रखे थे। इस कारण सवाल खड़ा हो रहा है कि वे अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। वे राजनीति आने से पहले श्रीगंगानगर मूल के एक उपदेशक के साथ दिखाई देते थे।
रूस-युक्रेन युद्ध का कभी अंत होगा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति समझौता करवाया था। इसके बाद गाजा में शांति रहती है किंतु कभी-कभी मिसाइलों की आवाज को भी सुना जाता है।
वहीं सबसे बड़ा सवाल इस समय दुनिया के सामने तीन साल से भी ज्यादा समय से चल रहे युक्रेन-रूस युद्ध को लेकर है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने दोनों देशों के बीच शांति समझौता को लेकर एक मसौदा भी पेश किया है।
पूर्वी युरोपीय देश युक्रेन इस समय यूरोप और अमेरिका के साथ लगातार सम्पर्क बनाये हुए है और फ्रांस से राफेल खरीद का एक समझौता भी किया है।
कीव के राष्ट्रपति ब्लादीमिर जेलेंस्की और क्रेमलिन के शिखर नेता ब्लादीमिर पुतिन के बीच सीधी बातचीत नहीं हो पायी है। ट्रम्प इस पर मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए पुतिन के साथ अनेक बार टेलीफोनिक और एक बार आमने-सामने की वार्ता कर चुके हैं। रूस की सीमा के निकट अलास्का प्रांत में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष मिले थे।
फिर से मिलने का वादा हुआ था और शांति वार्ता का कार्यक्रम भी तय हो गया था, जिसमें दोनों नेता हंगरी में मिल सकते थे। सर्गेई लावरोव और मार्को रूबियो के बीच बातचीत के बाद यह मुलाकात स्थगित हो गयी थी।
अब पुतिन सरकार प्रयास कर रही है कि शांति समझौते के मसौदे पर विचार किया जाये।
