राजस्थान में आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची दिल्ली से आयी थी!
श्रीगंगानगर। राजस्थान में गत दिवस ही 30 से ज्यादा आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची को जारी किया। सोशल मीडिया हो या अन्य मीडिया, सभी ने तबादला सूची पर सवाल उठाये थे और जनता को जागृत करने का भी प्रयास किया।
अगर तबादला सूची को देखा जाये तो सामने आता है वीके सिंह, विकास कुमार, दिनेश एमएन आदि को उनके पदों से अन्य पर स्थानांतरण किया जाना।
एडीजी वीके सिंह एसओजी में नियुक्त थे। उन्होंने ही एसआई भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की जांच की थी और इस जांच के आधार पर राजस्थान हाइकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। इसी तरह से दिनेश एमएन के बारे में ज्यादा लिखने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे राजस्थान पुलिस के दबंग अधिकारी के रूप में पहचान रखते हैं।
वहीं विकास कुमार नशे के खिलाफ एक बड़े अभियान को आगे बढ़ा रहे थे। उनको भी हटा दिया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जो अधिकारी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, उनको कैसे हटाया गया? और हटाने का कारण क्या था। उनके तबादले की आवश्यकता क्यों हुई।
तबादला सूची पर भले ही राजस्थान के राज्यपाल के हस्ताक्षर हों, लेकिन इस सूची को लोक कल्याण मार्ग पर तैयार किये जाने की जानकारी है।
लोक कल्याण मार्ग जो प्रधानमंत्री निवास के रूप में भी याद किया जाता है।
पीएम ने एक चि_ी भेजी और जिसमें अधिकारियों को हटाने और उनके स्थान पर नये चेहरों का नाम था। इस तरह से नई दिल्ली से आयी चि_ी को राज्य सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन के रूप में स्वीकार करते हुए सीएमओ, कार्मिक और राज्यपाल भवन कार्यालय से पारित करवाया गया।
सवाल यह है कि पीएम, जिनके पास इस समय दुनिया भर की प्रमुख समस्याएं हैं। अमेरिका के साथ ट्रेड डील हो पाने के कारण उनके गुजरात राज्य में ही मंदी का शिकार व्यापारी लोग हो रहे हैं। उसका समाधान करने और वैश्विक नेताओं के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत करने का समय नहीं है। वे राजस्थान के अंदर आईपीएस की तबादला सूची को जारी कर रहे हैं।
एक-दो अधिकारियों, जिनको पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीक माना जाता था, उनको मुख्य धारा वाले पदों पर नियुक्त कर यह संदेशदेने की कोशिश की कि यह राजे की सहमति से तैयार की गयी राज्य सरकार की सूची है।
