बिहार चुनाव : एक हैं तो सेफ हैं, मुद्दा क्यों नहीं!
श्रीगंगानगर। महाराष्ट्रा विधानसभा चुनावों का जब जिक्र होता है तो उस समय पीएम नरेन्द्र मोदी का यह नारा कामयाब होता दिखा कि ‘एक हैं तो सेफ हैं।’
एक हैं तो सेफ हैं के माध्यम से महाराष्ट्रा विधानसभा चुनाव जीत गये किंतु बिहार में यह चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया। इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं।
नरेन्द्र मोदी गुजरात से नई दिल्ली आये थे, तो उनके पास मुद्दे थे। उन्होंने देश के विकास और रुपया, पेट्रोल के नियंत्रण के संबंध में बहुत कुछ कहा था।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का भी उनका उस समय का एक नारा था, जिसने हरियाणा विधानसभा के चुनाव का मिजाज बदल दिया।
बेटियों की शिक्षा पर केन्द्र सरकार उसी तरह से कुछ नहीं कर पायी, जिस तरह से 100 स्मार्ट सिटी बनाये जाने थे।
इन सबको भूल कर ताजा मुद्दों की चर्चा करें तो एक है तो सेफ हैं, यह सिर्फ नारा ही बनकर क्यों रह गया।
जिसको वे अपने माथे का चंदन बताते हैं, उस चंदन को वे सम्मान नहीं दिला पाये।
चंदन को दिल से अपनाने के स्थान पर एक चुनावी मुद्दा बनाये रखा। जब-जब चुनाव हुए उन्होंने हिन्दूवाद की ओट ली और विजय हासिल की।
उन्होंने हिंदू जागरण मंच का संचालन किया,लेकिन इन हिन्दुओं के घरों में परिवार के सदस्य भी हैं। जिनको पढ़ाना, लिखाना, शादी करना आदि जो हिन्दू रिती रिवाज दिये गये हैं, उनको पूरा करने के लिए सशक्त क्यों नहीं किया गया।
कुछ राज्यों में शासन व्यवस्था के लिए जातिगत व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है।
