‘स्वर्ण नगरी के राजा’ शाह के घर पहुंची ईडी
श्रीगंगानगर। अवैध धन शोधन के खिलाफ कार्यवाही करने वाली एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर रिद्धि-सिद्धि के डवल्पर मुकेश शाह संस्थानों पर रेड की है। मुकेश ने हाल ही में नया मकान बनाया था, जिसका नामकरण ‘स्वर्ण नगरी’ रखा गया।
स्वर्ण नगरी की पहले बातचीत की जाये तो रावण की लंका नगरी ‘स्वर्ण नगरी’ कहलाती थी। इसके उपरांत वर्तमान में जैसलमेर को गोल्डन सिटी कहा जाता है और इसी जिले में बाबा रामदेव का पूजनीय समाधिस्थल है। मुकेश शाह ने कुछ दिन पूर्व ही अपने नये घर का निर्माण करते हुए उसे स्वर्ण नगरी नाम दिया था।
कोलकाता से आयी है ईडी की टीम
श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर स्वर्ण नगरी के राजा और अनेक कॉलोनियों के डवल्पर मुकेश शाह ने रिद्धि-सिद्धि सीरिज के तहत अनेक कॉलोनियों का निर्माण किया था। अनेक विवादित स्थल खरीदे गये थे और वहां पर कॉलोनियां डवल्प की गयीं।
कहा जा रहा है कि कोलकाता में ईडी को शिकायत हुई थी, इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम श्रीगंगानगर पहुंची। मुख्य कार्यालय और घर पर अधिकारियों की टीम दस्तावेज आदि की जांच कर रही है।
एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोलकाता की एक कंपनी के नाम पर व्यापार किया जा रहा था। इस कंपनी के जांच करते हुए ईडी श्रीगंगानगर तक पहुंची है। इसमें सुनील गोयल भी डायरेक्टर है, जो मुकेश शाह का प्रबंधक है।
फिल्मी कलाकार सोहम उर्फ सुरेश शाह के भाई हैं मुकेश
मुकेश शाह और सुरेश शाह उर्फ सोहम भाई हैं और श्रीगंगानगर में रिद्धि-सिद्धि सीरिज का विस्तार करते हुए अनेक कॉलोनियों का निर्माण किया है। हालांकि तय समय के अनुसार कॉलोनी के पूरी विकसित नहीं होने के कारण रेरा ने नोटिस भी जारी किये हैं।
ईडी की भनक के साथ ही प्रोपर्टी डीलर गायब
रिद्धि-सिद्धि 1 से लेकर 9 और और अन्य सहायक कॉलोनियों में मकान को बेचकर करोड़ों रुपये हर साल कमाने वाले प्रोपर्टी डीलर ईडी की कार्यवाही के बाद गायब हो गये हैं। इनकम टैक्स तो केवल आयकर चोरी के मामले में जांच करता है और उसकी विजीलैंस टीम इसको अंजाम देती है। कुछ समय पूर्व विजीलैंस की टीम ने भी कार्यवाही की थी। अब अवैध धन शोधन के मामले में कोलकाता से जांच करते हुए टीम श्रीगंगानगर तक पहुंची है। रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी का शुभारंभ करते हुए ही रियल इस्टेट के बड़े निवेशक ही पूरी कॉलोनी का सौदा कर लेते थे और फिर सट्टा बाजार की तरह प्लाट का रेट दो गुणा, चार गुणा करते हुए उसको बेचते थे। धानमंडी का एक बड़ा ब्रोकर भी चपेट में आ सकता है।