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भाजपा को राजस्थान में एक सूत्र में कैसे परोसेंगे पीएम मोदी?

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श्रीगंगानगर। सोमवार से आरंभ हुए नये सप्ताह के 29 सितंबर की अगर शाम के प्रमुख समाचारों पर नजर डालें तो अमेरिका सरकार ने भारतीय फिल्म निर्माओं को भी एक बड़ा झटका दिया है। अब गैर अमेरिकी फिल्मों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जायेगा। वहीं कनाडा सरकार ने एक अभूतपूर्व निर्णय में लारेंस गिरोह को आतंकवादी संगठन करार दिया है। वहीं सबसे पहले राजस्थान भाजपा पर नजर डाली जाये तो सवाल उठता है कि एकसूत्र में पार्टी को बांधे रखना आसान कार्य नहीं है।  पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजस्थान के बांसवाड़ा क्षेत्र में थे जो आदिवासी बाहुल्य इलाका माना जाता है। मंच पर पीएम के अलावा पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी सहित कई अन्य चेहरे थे।  मंच पर पीएम मोदी सभी का आभार व्यक्त कर रहे थे। सभी नेता राइट साइड में थे और जब वे वसुंधरा राजे के नजदीक पहुंचे तो पूर्व मुख्यमंत्री ने अचानक उनके सामने आ गयी। हजारों कार्यकर्ता मंच से नीचे देख रहे थे और पीएम से वसुंधरा राजे ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और इशारों में बताया भी कि वे मौजूदा हालात में खुश नहीं हैं।  ...

केजरीवाल का पंजाब प्रशासन में हस्ताक्षेप पार्टी को कमजोर कर रहा है!

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श्रीगंगानगर। पंजाब इस समय भीषण तबाही के मंजर को देखने के उपरांत बहाली की ओर देख रहा है। राज्य सरकार 5 एकड़ वाले किसानों को मुफ्त में बीज देगी, लेकिन बड़े जमींदार का नुकसान नहीं हुआ? मार्च 2022 में पंजाब ने परिवर्तन का मानस बना रखा था और इस कारण दशकों पुरानी पार्टी कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को परास्त करते हुए 117 सीट में से 92 पर जीत हासिल कर आम आदमी पार्टी की सरकार का गठन किया। लोगों को उम्मीदें थी कि पलायन, बेरोजगारी और अन्य किसानों की समस्याओं का अंत होगा। नशा का नाश होगा।  मुख्यमंत्री के पद पर मशहूर कैमेडियन भगवंत मान को सीएम नियुक्त किया गया। प्रदेश पार्टी की कमान भी उनके पास थी जो हाल ही में नये प्रदेश अध्यक्ष को स्थानांतरित की है।  पंजाब में सरकार के गठन के साथ ही दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में सत्ता हाथ से निकल गयी। तीन बार सीएम बने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल बेरोजगार हो गये।  दिल्ली में शराब घोटाले के चलते अरविंद केजरीवाल को जेल जाना पड़ा। इसके बाद दिल्ली से सीएम की कुर्सी भी गयी। पार्टी की प्रदेश से सत्ता भी समाप्त हो गयी। अब एक राज्य पंजाब...

दुनिया भर में फैले अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को आपात बैठक के लिए बुलाया

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न्यूयार्क। दुनिया भर में अमेरिका की सेना अनेक देशों में तैनात है और अनेक बेस कैम्प भी हैं, इन सभी के कंट्रोलिंग अधिकारियों को रक्षा मंत्री (युद्ध मंत्री) पीट हेगसेथ ने आपात बैठक के लिए बुलाया है।  इस आपात बैठक की जानकारी जैसे ही बाहर आयी, सभी खुफिया एजेंसीज के कान खड़े हो गये।  जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने सैन्य अधिकारियों को भेजे गये तार में कहा गया है कि वे अगले सप्ताह अमेरिका पहुंचें। 2 से लेकर चार स्टारधारी अधिकारियों को बुलाया गया है।  हालांकि अभी यूएन सभा चल रही है और अमेरिकी प्रशासन उस तरफ ज्यादा व्यस्त है। इस बीच युद्ध मंत्री का अधिकारियों को तार भेजना, इस बात का संकेत है, कहीं न कहीं अमेरिका अब अपनी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है।  यह भी संभवत: पहली बार होगा कि पीट हेगसेथ पहली बार अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। ध्यान देने योग्य यह बात भी है कि पूर्व प्रशासन के अधीन कार्य करने वाले अनेक उच्चाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया गया था। 

वाशिंगटन जैसी सुपर परचेज पॉवर दुनिया में शायद नहीं है?

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वाशिंगटन। रूस-युक्रेन युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जिस तरह से डे-फस्र्ट से गतिशील थे, अब उस तरह से नहीं है, क्योंकि उनकी रूस के साथ चल रही बातचीत के बाद भी सार्थक परिणाम सामने नहीं आये हैं, हालांकि दोनों देश विदेश मंत्री स्तर पर वार्ताओं का दौर चलाये हुए हैं।  पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि वे युद्ध को समाप्त करवायें। प्रशासन बदला तो ट्रम्प ने भी पीएम को वाशिंगटन डीसी बुलाकर यही बात दोहराई। इसके बाद वे अपने स्तर पर भी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ अनेक बार वार्ता कर चुके हैं।  पुतिन ने शांति वार्ता के लिए विश्व के सामने कुछ शर्तें रखी हुई हैं और उनकी पालना करवाने के बाद ही वे युद्ध को समाप्त कर सकते हैं।  इन सबके बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन मोदी को भी देश के भीतर विरोधी दलों से सामना करना पड़ रहा है और तीन बड़े राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडू में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन तीन राज्यों के माध्यम से ही राज्यसभा में भी पकड़ बनाये रखी जा सकती है।...

मैक्रां के साथ थ्रिलर ड्रामा था?

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वाशिंगटन। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां के साथ जो घटनाक्रम मंगलवार को न्यूयार्क में यूएन की सभा में जाते समय हुआ, वह एक थ्रिलर मूवी से कम नहीं था। हालांकि वे पैदल ही यूएन की सभा में पहुंच गये किंतु एक राष्ट्रपति को पैदल चलते देखकर वीवीआईपी मूवमेंट से होने वाली परेशानियों की जानकारी भी सामने आती है।  मैक्रां और डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्ते इस समय सहज नहीं है। यूरोपियन यूनियन भी दो तरफ चल रही है और नाटो में भी एकता नहीं दिखाई दे रही। यहां बता दें कि फ्रेंच राष्ट्राध्यक्ष का काफिला यूएन की ओर मूव कर रहा था कि उनको पुलिस कार्मिकों ने रोक दिया, क्योंकि उस समय ही राष्ट्रपति ट्रम्प का काफिला निकल रहा था। मैक्रां ने पुलिस कार्मिक को बताया कि वे फ्रेंच प्रेजीडेंट हैं, पुलिसकर्मी ने उनको बताया कि वे उनको पहचानते हैं, लेकिन वे उनको वाहनों के साथ नहीं जाने दे सकते। इस पर मैक्रां ने ट्रम्प को फोन मिलाया और अपने साथ घटना की जानकारी दी तो ट्रम्प ने कह दिया कि अमेरिका में किसी की सिफारिश नहीं चलती।  गाजा को मान्यता देने को लेकर नाटो, जी-7, यूरोपियन यूनियन में मतभेद सामने आ गये। ब्रिटेन, कन...

एच 1 बी वीजा में बदलाव के लिए मोदी की नीतियां जिम्मेदार नहीं?

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श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच 1 बी वीजा धारकों को प्रतिवर्ष 1 लाख डॉलर अदा करने का आदेश जारी किया। इससे यूएसए की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी टेक कंपनियों में हडक़म्प मच गया। उधर भारत सरकार में भी इसी तरह का हाल था। आखिर में देर रात को ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया या बैकफुट पर आकर एक लाख डॉलर की राशि को एकमुश्त बताया अर्थात हर साल पैसे नहीं देने होंगे। इसके बाद भारत और अमेरिका में माहौल शांत हुआ।  अमेरिका सरकार ने जो फैसला किया, उसके लिए किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? असल में यह भारतीय शासक नरेन्द्र मोदी की अहम की लड़ाई बन गयी है। वे भारतीयों के बीच अपनी पैठ बनाये रखने के लिए जन्मदिन को एक पखवाड़ा तक मनाते हैं। फ्रांस, जापान, जर्मनी आदि विकसित राज्यों या बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे गरीब स्टेट में शासनाध्यक्ष इस तरह का माहौल नहीं बनाते हैं।  अब अगर फैक्ट को चैक किया जाये तो सामने आता है कि ट्रम्प से अपनी मित्रता का गुणगान स्वयं पीएम मोदी करते थे। अमेरिका की टेक और अन्य बड़ी कंपनियों के मालिकों के साथ विशेष बैठक किया करते थे। अब व...

व्यापारी नेताओं को अमेरिका ने कहा-नो एंट्री, चाबहार बंदरगाह पर लगेंगे प्रतिबंध

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श्रीगंगानगर। रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका-भारत के बीच तनाव बना हुआ है और यह हर दिन बढ़ता जा रहा है। भले ही भारत गणराज्य के शासक मोदी अपने जन्मदिन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बधाई को स्वीकार करते हुए दुनिया का वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हों।  टैक्स आतंकवाद पर चारों तरफ से मिल रही आलोचनाओं के बाद जीएसटी में बदलाव किया गया और टैक्स को कम किया गया। अपने ही टैक्स में परिवर्तन को भारत गणराज्य की सरकार ने वाहवाही लूटने का प्रयास किया। पांच साल से भी ज्यादा समय तक ज्यादा टैक्स वसूलने को अपनी गलती के रूप में स्वीकार नहीं किया।  वहीं अब जो बड़ी खबर आ रही है, उसमें बताया गया है कि अमेरिका ने भारत के व्यापारी नेताओं और कंपनियों के अधिकारियों का वीजा समाप्त कर दिया गया है और नये वीजा पर भी नो एंट्री कही जा रही है। अमेरिकन समाचार सेवा की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है।  इससे पहले भारत गणतंत्र को पाकिस्तान के समकक्ष मानते हुए ड्रग तस्करी वाली सूची में डाल दिया। इसमें 23 देश शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने सन फार्मा की गुजरात इकाई का निरीक्षण करते हुए उस...