Saturday, January 31, 2026
गुड-बैड आतंकवाद का मंत्र क्यों भूल गयी भारत सरकार, सोने-चांदी में सट्टाबाजी पर अंकुश नहीं लगा पा रही सरकार-गरीब हिन्दू से मंगलसूत्र भी छीन गया
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की सरकार पाकिस्तान पर आरोप लगाती है कि वह गुड-बैड टैरेरिज्म का मूल्यांकन करती है जबकि आतंकवाद की कोई परिभाषा नहीं होती। अब वही भारत सरकार तालिबान को जिस प्रकार स्पोर्ट कर रही है, क्या वह नीति अपनायी जा रही है जो अब तक पाक निभाता आया है। वहीं हिन्दू गरीब परिवार से मंगलसूत्र का अधिकार भी छीन गया, सरकार ने कोई कदम उठाया हो, यह नजर नहीं आया।
अफगानिस्तान में इस समय आतंकवादी के रूप में संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित तालिबान की सत्ता है। जो सरकार अफगानी नागरिकों ने लोकतंत्र के जरिये चुनी थी, वह गिराकर उस पर कब्जा किया गया। अब मीडिया रिपोर्ट में महिलाओं की आवाज सुनाई दे रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि महिलाओं के स्कूल जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अगर महिलाएं स्कूल-कॉलेज नहीं जा पायेंगी तो वह डॉक्टर-इंजीनियर कैसे बन पायेंगी। अफगानिस्तान में शरिया कानून है और वहां पर महिला किसी गैर पुरुष को अपना चेहरा नहीं दिखा सकती। काबुल हो या कंधार सब जगह महिला चिकित्सकों की कमी दिखाई दे रही है और गर्भवती महिलाओं को परेशानी ज्यादा हो रही है। संस्थागत प्रसव न के बराबर हो गये हैं।
सरेआम लोगों को आशिंक अपराध पर सूली पर चढ़ाया जा रहा है। मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। माहौल को पढ़ा जा सकता है, समझा जा सकता है और देखा जा सकता है।
मानवाधिकार संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की जा रही है और इस बीच यह जानकारी आती है कि दिल्ली के भीतर तालिबान ने राजदूत कार्यालय आरंभ कर दिया है। भारत के साथ उसके राजकीय रिश्ते स्थापित हो गये हैं। यूएन, अमेरिका, यूरोप और भारत सरकार ने खुद अभी तक तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। वहां की पब्लिक को रामभरोसे छोड़ दिया गया है।
दक्षिण एशिया उप महाद्वीप के देश प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति की पहचान रहे हैं। अब अफगान जनता को गैर लोकतांत्रिक सरकार के हाथ सुपुर्द कर उसको सहायता भेजना भी एक सवाल खड़े करता है।
भारत सरकार अभी तक पाकिस्तान गणराज्य की सरकार की आलोचना करती आयी है कि वह भारत को भेजे जाने वाले आतंकवाद को अच्छा कहता है और पाकिस्तान तालिबान को गंदा आतंकवाद बताता है। भारत में पाक समर्थित जैशे मोहम्मद, लश्करे तैयबा सहित कई आतंकवादी संगठन सक्रिय रहे हैं। इनको पाक मुजाहिद्दीन के नाम से पुकारता है। वहीं पाकिस्तान में तालिबान पाकिस्तान नाम से आतंकवादी संगठन है। इसके अतिरिक्त बलोचिस्तान में भी अनेक संगठन सक्रिय है जो बंदूक की आवाज पर बात करता है।
पाक को अच्छे-बुरे की नसीहत देते-देते भारत सरकार की विदेश नीति भी देश के मूल मंत्र को भूल गयी कि आतंकवाद की कोई परिभाषा नहीं होती और बंदूक की नोक पर खून बहाने वाले किसी भी सभ्य समाज के हिस्से नहीं हो सकते।
सोना-चांदी की महंगाई गरीब आदमी को मार गयी
भारत में इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। सोने का भाव एक साल के भीतर ही 60 हजार से 1.80 लाख तक पहुंच गया। यह कैसे हो गया। क्या सरकार सो रही थी? अगर मीडिया रिपोर्ट को स्वीकार किया जाये तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो 18 से 20 घंटे तक कार्य करते हैं, फिर यह जादू कैसे हो गया।
सोना भारतीय संस्कृति की पहचान है। बेटियों और बहू को सोने के आवश्यक गहने दिये जाते हैं जिनमें सुहागन की पहचान के प्रतीक मंगलसूत्र भी शामिल है। अब वह मंगलसूत्र बनवाना भी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बहुत मुश्किल काम हो गया है।
सोने ने दो दिनों के भीतर काफी उतार-चढ़ावा देखे। हालांकि अभी भी भाव आसमान को छू रहे हैं।
सोना आम भारतीय की पहुंच से बाहर हो रहा था और सरकार आंखें बंद किये हुए थी, यह कैसे संभव हुआ। 2024 के चुनावों में नरेन्द्र मोदी जो मौजूदा पीएम भी हैं, कह रहे थे कि कांग्रेस की सरकार आ गयी तो महिला के गले से मंगलसूत्र गायब हो जायेगा। भाजपा की सत्ता फिर से स्थापित हुई लेकिन हिन्दुत्व की बात करने वाली पार्टी के राज में ही मंगलसूत्र गायब हो गया। हाथों की चूडिय़ां और मंगनी की रस्म को पूर्ण करने वाली रिंग भी गायब हो गयी है।
अब तो चांदी के गहने पर सोने की परत चढ़ाना भी आसान नहीं रहा है क्योंकि वह भी लाखों की बात हो गयी है।
सरकार ने 2 फरवरी को बजट पेश करना है, उस दिन सरकार कस्टम ड्यूटी कम कर सकती है लेकिन इससे कितना असर पड़ेगा।
असल में सरकार को तुरंत ऑनलाइन सट्टेबाजी के प्रतीक एमसीएक्स आदि पर प्रतिबंध लगाना चाहिये और आम आदमी की जरूरतों सोना-चांदी, जिंस आदि को बाहर निकालना चाहिये। नहीं तो जैसे हिन्दू महिला के माथे से मंगलसूत्र और हाथ से रिंग गायब हुई है, मोदी-शाह की जोड़ी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Thursday, January 29, 2026
अमेरिका ने चारों दिशा से घेरा, ईरानी सेना को पहली खेप में मिले 1 हजार ड्रोन, सरकारी एजेंसियां कितने दिन संभालेंगी शेयर बाजार, यूरोपीय बाजार में भारतीयों का कितना निवेश-जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही सरकार?
श्रीगंगानगर। हवाला या अन्य रूट से हजारों या लाखों करोड़ रुपये यूरोपीय बाजार में भारतीयों के निवेश हैं? अनेक नेताओं के संस्थान वहां फल-फूल रहे हैं। अगर दुनिया की सबसे बड़ी खबर की ओर रुख किया जाये तो सामने आता है अमेरिकी सेना की बड़ी खेप का ईरान के चारों दिशाओं में पहुंच जाना। 40 हजार सैनिक इस समय तेहरान में शांति बनाये रखने के लिए विभिन्न युद्धपोत अथवा अन्य क्षेत्रों में तैनात किये गये हैं।
यूरोप और भारत गणराज्य की सरकार के बीच हुए समझौते का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है तो यह क्यों नहीं बताया जा रहा कि इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को फायदा नहीं होने वाला। यूरोपीय बाजार अपनी लग्जरी लाइफ के लिए जाने जाते हैं और लग्जरी उत्पाद जब भारतीय बाजार में प्रवेश करेंगे तो यूरोप को भारतीय मुद्रा में कनवर्ट करने पर यह मिडिल क्लास फैमिली की अप्रोच से बाहर हो जायेंगे। वहीं अपर क्लास जब खरीद करेगी तो यही धन विदेश जायेगा और रुपये पर दबाव और बढ़ जायेगा।
रुपये पर जब-जब दबाव आयेगा तो इसका सीधा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर सीधा पड़ेगा।
अगर आज के हालात को देखा जाये तो आर्थिक स्थिति की गणना इस प्रकार की जाती है कि जितनी महंगाई होगी, विकास दर उतनी दर से बढ़ेगी। अमेरिका में महंगाई की दर 2 प्रतिशत दर के आसपास रहती है। इसी से वहां पर विपक्ष शोर मचाती है जबकि विकासशील देशों में तो हालात और खराब होते हैं। सरकार अपने स्तर पर आकड़े जारी करती है और उसको मानकर ही योजनाएं बनायी जाती हैं जिससे दो वर्ग की खाई में अंतर हर दिन, हर पल बढ़ता जा रहा है।
वीआईपी क्लचर जिम्मेदार क्यों नहीं?
नरेन्द्र मोदी सरकार का गठन जब 2014 में हुआ तो वीआईपी क्लचर के खिलाफ माहौल बनाया गया था और सरकार ने अधिकारियों की गाडिय़ों से लाल या नीली बत्ती लगाने पर रोक लगा दी थी। इस कृत्रिम कार्यवाही से सरकार ने बल्ले-बल्ले करवा ली, लेकिन इसका आम आदमी को कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि वीआईपी क्लचर आज भी जिंदा है।
प्रमाण देखना है तो ज्यादा दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। पिछले सप्ताह ही एक दिन में गौतम अडाणी के समूह को 1.3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान शेयर बाजार में हुआ। अडाणी समूह में सबसे बड़ा निवेश सरकारी एजेंसियों ने किया हुआ है और इस भरपाई को पूरा करने के लिए सरकार ने तुरंत ब्रिक्स देश के ब्राजील के साथ ऐसा समझौता किया कि अडाणी समूह के शेयरों में फिर से काल्पनिक तेजी लायी गयी। ब्राजील और अडाणी समूह मिलकर रक्षा क्षेत्र में युद्धक विमानों का निर्माण करेंगे। ब्राजील का नाम अमेरिका की तरह विश्वास और सार्थकता से परिपूर्ण विमान निर्माण के लिए नहीं जाना जाता।
ब्राजील के साथ समझौते की खबर को प्रमुखता से प्रसारित किया गया और अडाणी समूह फिर से शेयर बाजार में बड़ा खिलाड़ी बन गया। साप्ताहंत के आखिरी दिन से पहले गुरुवार 29 जनवरी 2026 को एक बिलियन डॉलर से ज्यादा का फायदा शेयर बाजार से हुआ है।
इस तरह से अडाणी समूह में एक बार पुन: तेजी का दौर आरंभ हो गया। कुछ माह पहले भी अमेरिकी मैग्जीन ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट के माध्यम से प्रकाशित किया था कि शैल कंपनियों के माध्यम से निवेश होता है हालांकि अडाणी समूह ने इसका खंडन किया था।
यूरोपीय बाजार में हुए निवेश पर श्वेत पत्र जारी हो
काला धन विदेशों से लाने का नारा 2014 के चुनावों में दिया गया था और 11 साल बाद सरकार अभी तक यह नहीं बता पायी कि आजादी के बाद 2010 तक कितना पैसा देश से बाहर गया और 2010 से 2025 तक कितना निवेश हवाला या अन्य मद से यूरोपीय बाजार में हुआ।
इस संबंध में कोई जानकारी सामने नहीं आयी। ब्लैक, ग्रे मनी देश से बाहर जा रही है और सरकार के पास इस संबंध में कोई तथ्य नहीं हो, यह संभव नहीं है। सरकार के पास जो जानकारी है, उसको व्हाइट पेपर के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहिये।
रिजर्व बैंक को एक ही दिन में एक ट्रिलियन रुपये से ज्यादा की खेप जारी करने का विचार क्यों आया?
आरबीआई ने शुक्रवार अर्थात 23 जनवरी को तरलता की कमी बताते हुए 1.25 ट्रिलियन रुपये जारी करने का निर्णय लिया। इसी दिन ही तो अडाणी समूह को इतना ही नुकसान एक दिन में हुआ था।
बाजार में तरलता की कमी है, यह रिजर्व बैंक ने भी स्वीकार कर लिया, इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी एक बैठक में यह कह चुकी है। जो धन 70 या इससे ज्यादा समय से बाजार में था, वह यूरोप या अन्य देशों में पहुंच गया? यह सवाल है। क्योंकि सवा लाख करोड़ रुपये जैसे ही बाजार में आयेगा यह लोन के नाम पर कुछ धनपतियों को बांट दिया जायेगा। लेकिन इसका असर मार्केट पर नजर आयेगा और महंगाई फिर से उछाल की ओर कदम बढ़ायेगी।
ईरान-अमेरिका युद्ध के लिए औपचारिक घोषणा ही बाकी?
खाड़ी के देशों में 40 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात कर दिये गये हैं। वहीं चारों दिशाओं में विमान वाहक युद्धपोत तैयार हैं जिन पर दर्जनों या सैकड़ों की संख्या में विमान, हैलीकॉप्टर आदि तैनात हैं। अरब क्षेत्र में अमेरिका ने बहुदिवसीय युद्धक अभ्यास भी आरंभ कर दिया है। इस तरह से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की संभावना अब सीमित नहीं रही है।
एक रिपोर्ट में रॉयटर ने बताया कि 1 हजार से ज्यादा ड्रोन ईरानी सेना को पहली खेप में उपलब्ध करवाये गये हैं। दूसरी ओर अमेरिका इन ड्रोन और मिसाइलों से अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए मिसाईल रोधी हथियारों को तैनात कर रही है ताकि हवा में ही मिसाइलों या ड्रोन को समाप्त किया जा सके।
पाकिस्तान : पीएम क्यों डरे हुए हैं सेना प्रमुख से
गुरुवार 29 जनवरी को पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ असीम मुनीर के साथ एक कार्यक्रम में थे और उस दौरान उन्होंने मुनीर की तारीफ के कसीदे पढ़ दिये। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उपस्थिति में शरीफ ने कहा था कि ट्रम्प साहब आप मुनीर की ओर देखकर मुस्करा दीजिये नहीं तो वह मुझे मार भी सकता है। यह शब्द भले ही उस समय एक जोक जैसे लग रहे हों लेकिन गुरुवार को यह शब्द सच साबित होते नजर आये।
पाकिस्तान ने अपनी एयरलाइन को बेच दिया है। इसके बदले में पाक को सिर्फ 200 मिलियन डॉलर ही मिलेंगे, शेष राशि निजी क्षेत्र की कंपनी के कर्ताधर्ता विकास व अन्य कार्यों पर खर्च करेंगे। यह राशि पाक की मुद्रा में 1.80 अरब रुपये है।
शहबाज ने कहा कि एयरलाइन की बिक्री में सेना के प्रमुख मुनीर का बहुत बड़ा योगदान है और यह एयरलाइन की बिक्री उनके कारण ही संभव हो पायी है। उन्होंने मुनीर को बधाई भी दी। इसी से समझा जा सकता है कि मुनीर के दबाव में पीएम है। वे हर समय उनके जयकारे लगा रहे हैं।
पाक की सेना के साथ सउदी अरब ने समझौता भी किया हुआ है यह समझौता सम-नाटो कहलाता है। इसके बाद यमन बॉर्डर पर अरब की ओर से पाक सेना को तैनात किया गया है।
यूएई के राष्ट्रपति मास्को पहुंचे
रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने गुरुवार 29 जनवरी को यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल निहान का क्रेमलिन में स्वागत किया। दोनों नेताओं ने आपसी हितों पर चर्चा की और विश्व के हालात पर भी प्रकाश डाला।
मोहम्मद बिन जायेद अल निहान की यह यात्रा इसलिए चर्चा में आ गयी है क्योंकि पिछले दिनों ही वह भारत की यात्रा पर आये थे और मात्र 3 घंटे ही नई दिल्ली में रूके थे। इसके उपरांत पाक के राष्ट्रपति आसिफ जरदारी यूएई पहुंचे। इस तरह से यूएई नेता सभी पक्षों से वार्ता कर रहे हैं तो इसका सामरिक व राजनीतिक महत्व बन जाता है।
Wednesday, January 28, 2026
विमान दुर्घटना में अजीत पंवार की मौत पर सवाल कई साल तक उठते रहेंगे?
श्रीगंगानगर। महाराष्ट्रा में बुधवार 28 जनवरी 2026 को एक बड़ी दुर्घटना में उप मुख्यमंत्री अजीत पंवार का निधन हो गया। पायलट सहित चार अन्य की भी मौत हो गयी। एयर चार्टर कनाडा का था और पंवार इसका प्रयोग चुनाव प्रचार के लिए कर रहे थे। भारत के सबसे शक्तिशाली परिवारों में से एक पंवार (शरद पंवार)के सदस्य अजीत ने कुछ दिन पहले, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडऩवीस के साथ एक बहस में भी भाग लिया था, हालांकि दोनों पक्ष सत्ता में एक साथ थे।
करीबन 7 माह पहले 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एक प्लेन क्रैश हुआ था। डबल इंजन वाला विमान अहमदाबाद से ब्रिटेन जा रहा था और दोनों इंजन फेल हो गये। विमान एक हॉस्टल के ऊपर गिर गया था। हादसे में गुजरात के पूर्व सीएम, पंजाब के प्रभारी विजय रूपानी का निधन हो गया। यह हादसा इसलिए सुर्खियों में रहा क्योंकि कहीं-कहीं यह समाचार सामने आ रहा था कि रूपानी कुछ दस्तावेज लेकर साथ जा रहे थे। वह गायब हो गये या विमान के साथ जल गये, यह जानकारी सामने नहीं आ पायी।
ऐसा नहीं है कि भारतीय राजनीति में विमान हादसे चर्चा का विषय नहीं बनते। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रीत्च कार्यकाल में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गयी थी। इसके अतिरिक्त माधव सिंधिया का विमान भी क्रैश हो गया था। उनके नेतृत्व में ही 1987 का वल्र्ड कप का आयोजन भारत में हो पाया था।
विजय रुपाणी और अब अजीत पंवार की विमान हादसों में मौत कई सालों तक चर्चा में रहेगी।
वहीं गैर राजनीति की चर्चा करते हैं तो भारत के सर्वोच्च सेना अधिकारी रहे विपिन रावत का डबल इंजन हैलीकॉप्टर नार्थ इस्ट जाते समय क्रैश हो गया था। उनके कार्यकाल में ही राफेल विमान की खरीद फाइनल की गयी थी।
Tuesday, January 27, 2026
मेक इन इंडिया में क्या हो रहा है? यूरोपीय सामान पर टैक्स खत्म, रक्षा क्षेत्र के लिए अडाणी को हजारों करोड़ का नया लोन मिलेगा? ब्राजिल के साथ समझौता आग में घी डालने का काम नहीं करेगा?
श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी चीन और अमेरिका के साथ तनाव के समाचार देखते हैं तो उनको भारतीय बाजार नजर आता है और मेक इन इंडिया के नाम पर योजना ले आते हैं। अब अमेरिका और रूस से हथियार नहीं मिल रहे तो गौतम अडाणी के समूह को रक्षा क्षेत्र में उतार दिया है। अब वे ब्राजील के साथ नया एयरक्रॉफ्ट तैयार करेंगे। ब्राजील के साथ अमेरिका के रिश्ते इन दिनों सर्द मौसम में गर्मी रखे हुए हैं, यह कदम आग में घी डालने का काम नहीं करेगा? ब्राजील और भारत गणराज्य दोनों ही ब्रिक्स समूह के सदस्य देश हैं।
शुक्रवार को सप्ताह के आखरी दिन शेयर बाजार ने अडाणी समूह को करीबन सवा लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। शेयर बाजार धड़ाम से नीचे गिरे तो संभवत: अडाणी समूह में निवेश करने वाली सरकारी कंपनियों को भी नुकसान हुआ होगा, जो अभी तक किसी मीडिया रिपोर्ट में सामने नहीं आया।
उसी दिन भारतीय रिजर्व बैंक ने यह मान लिया कि बैंकों के पास तरलता की कमी है और आरबीआई ने सवा लाख करोड़ रुपये के नये लोन बैंकों को जारी करने के लिए बाजार में राशि भेजने का निर्णय लिया। इस तरह से अडाणी समूह को एक सहारा तो मिल गया, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियां समूह को नया लोन नहीं दे रही हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है कि अडाणी समूह ने ब्राजील के साथ समझौता किया है और दोनों देश मिलकर रक्षा क्षेत्र के लिए जंगी जहाज तैयार करेंगे। यह तब है जब ब्राजील का नाम कहीं भी यह नहीं दर्शाता कि वह रूस, अमेरिका और फ्रांस की तरह हथियारों जैसे फाइटर जेट का निर्माण करता है।
इसके बावजूद समझौता हुआ और नयी कंपनी पहले से ही तैयार कर ली गयी थी। इस तरह से दोनों कंपनियां मेक इन इंडिया के नाम पर काम करेंगी। क्या यह कंपनी अपाचे और चिनूक, एफ 16, 35, मिराज, एमयू सीरिज जैसे हैलीकॉप्टर या जंगी हवाई जहाज बना सकती हैं।
पैसे की कोई कमी नहीं है क्योंकि आरबीआई पहले ही सवा लाख करोड़ रुपये बाजार में नये सिरे से जारी करने के लिए तैयार है।
एक तरफ तो भारत सरकार मेक इन इंडिया का प्रचार कर रही है तो दूसरी तरफ यूरोपीय संघ समझौता किया गया है, जिसमें संघ के उत्पादों पर टैक्स खत्म किया जा रहा है। इसको मदर ऑफ डील का नाम दिया गया। यह दो तरफ की राजनीति बता रही है कि सरकार के पास नया करने के लिए कुछ भी नहीं है। दबाव है तो कम किया जाये।
अभी अगले महीने फ्रांस के साथ रक्षा डील भी की जानी है जिसमें सवा तीन लाख करोड़ या इससे ज्यादा का रक्षा समझौता होगा। क्या यह समझौता मेक इन इंडिया का हिस्सा होगा। भाषण देने के लिए तो कहा जा सकता है, हां। लेकिन हकीकत में राफेल कंपनी या फ्रांस अपनी तकनीक भारत को देने को तैयार नहीं होगा।
अमेरिका को भडक़ाने की कार्यवाही करार
अमेरिका के एक थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिका ने जैसे ही गौतम अडाणी पर दर्ज मुकदमे में दबाव बढ़ाया, उसी समय ही मेक इन इंडिया के नाम पर नया समझौता सामने आया। इस तरह से अमेरिका के खिलाफ इसको उकसावे वाली कार्यवाही माना जा रहा है। ध्यान रहे कि हाल ही में जिनेवा में भारत के पीएम नहीं गये थे, वहां पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी आये हुए थे।
अमेरिका ने भारत पर भारी-भरकम टैक्स लगाया हुआ है लेकिन 6 माह से ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद न कोई डील हुई और न ही शिखर वार्ता। दोनों देशों के नेताओं के पास मिलने के लिए अनेक मौके आये थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
Monday, January 26, 2026
रूपनगर में बालाजी की मूर्ति के फेस पर सवाल, भाई-बहन एण्ड एसोसिएट में क्या दरार आ गयी, ट्रम्प की धमकी के बाद कनाडा डील से हाथ खींच लिये, भारत-यूरो सहमत लेकिन समझौते पर हस्ताक्षर 6 माह के लिए टले
श्रीगंगानगर। कनाडा और चाइना के बीच होने वाला व्यापार समझौता टलने के आसार बन गये हैं क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी है। वहीं भारत और यूरोप के बीच जो समझौता चल रहा था, उसको अन्तिम रूप दे दिये जाने का समाचार मिला है लेकिन घोषणा के बाद इस समझौते पर 6 माह बाद हस्ताक्षर होने की संभावना जतायी गयी है। दूसरी ओर कांग्रेस में भाई-बहन के बीच खींचतान की जानकारी सामने आ रही है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्को कोर्नी ने हाल ही में चीन की यात्रा की थी। अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर तनाव बने रहने के कारण कनाडा अपने लिये नये बाजार देख रहा है और चीन के साथ वह एक ट्रेड डील करने पर भी सहमत हो गया था। इस डील पर आगे बढ़ पाती, उधर से अमेरिका से नयी जानकारी सामने आ गयी।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कनाडा को चेतावनी दी कि अगर ओटावा-बीजिंग के बीच कोई ट्रेड डील होती है तो वे 100 प्रतिशत टैरिफ कनाडा पर लगा देंगे। इस चेतावनी के बाद कोर्नी बैकफीट पर आ गये हैं। यूएसए ने पहले ही बॉर्डर को बंद करते हुए कनाडा से आयात होने वाले सामान पर टैरिफ लगाये हुए हैं। इस कारण अब कनाडा में बाजारी सुस्ती को देखा जा रहा है। इस कारण कनाडा चीन की ओर रुख करना चाहता था।
ट्रम्प ने कनाडा को 51वां राज्य बनने का प्रस्ताव भी दिया था क्योंकि अमेरिका के सहयोग के बिना उसकी सीमाएं कनाडा को नये बाजार की ओर देखने की सहमति नहीं देती हैं। उत्तरी अमेरिका में मैक्सिको-कनाडा और यूएसए के बीच समझौता हुआ था, जो ट्रम्प का पहला कार्यकाल था, लेकिन अब साहब का मूड चेंज है।
वहीं मैक्सिको ने भी कहा है कि वह क्यूबा को तेल बेचने पर पुनर्विचार कर रहा है। क्यूबा के साथ तनाव होने के कारण ट्रम्प ने मैक्सिको को भी चेताया था कि वह क्यूबा के साथ तेल और अन्य क्षेत्र में होने वाले व्यापार पर पुनर्विचार करे।
रूपनगर में ऐसा क्यों हो रहा है?
पंजाब के महानगर लुधियाना से जब रोपड की तरफ जाया जाता है तो रास्ते में एक नगर आता है, जिसका नाम रूपनगर बताया जाता है। स्टेट हाइवे पर ही यह शहर है जो नीलो नहर के साथ चलने वाली सडक़ पर दिखाई देता है। इस शहर में एक हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति विशालकाय है, लेकिन इसका मुंह मुख्य सडक़ की ओर न करके खेतों की तरफ है और चारों तरफ कांटेदार पेड़ लगाये हुए हैं। इस तरह से हनुमान जी की मूर्ति के आगे और पीछे (सडक़ के दूसरी तरफ) कांटेदार पेड़ों के बीच हनुमान जी इस विरान जगह और कांटेदार पेड़ों को पूरा दिन देखते हैं।
उल्लेखनीय है कि इस तरह की ही हनुमान जी की मूर्ति श्रीगंगानगर में सूरतगढ़ मार्ग पर मोटर मार्केट में स्थापित है किंतु उनका फेस शहर की ओर है। इसी तरह से दिल्ली, भटिण्डा, चामुण्डा माता मंदिर में भी ठीक उसी तरह की विशालकाय मूर्तियां स्थापित हैं।
अब रूपनगर में मूर्ति का फेस क्यों कांटेदार विरान जगह की ओर किया गया है, यह धार्मिक जनता स्वयं देख सकती है। समझ सकती है।
कांग्रेस में प्रियंका गैर गांधी नहीं हैं?
राहुल गांधी ने लगातार हार मिलने के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और गैर गांधी को अध्यक्ष बनाये जाने की वकालत की थी। कांग्रेस की खोज दक्षिण भारत के दलित नेता मल्लिकार्जुन खरगे पर समाप्त हुई थी। यह साफ हो गया था कि खरगे को अध्यक्ष बनाया गया है और इसका रिमोट गांधी परिवार के पास रहेगा। लेकिन यह नहीं माना जा रहा था कि यह सिर्फ राहुल गांधी के पास ही होगा।
भाई-बहन के बीच तकरार चल रही है। अगर हिमाचल की बात की जाये तो वहां पर प्रियंका गांधी ने प्रचार की कमान संभाली थी और कांग्रेस को जीत हासिल हो गयी थी। वहां पर सुखविन्द्रसिंह सुखी को सीएम बनाया गया। यह क्या हो गया। सुखी अपनी सरकार की वर्षगांठ बना रहे थे और प्रियंका गांधी शिमला होने के बावजूद उनके कार्यक्रम में नहीं आयी।
इसी से दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में आयी कमजोरी दिखाई दे रही थी। अब प्रियंका के साथ युवा नेता रिंकू सिंह ठाकुर दिखाई देने लगे हैं। उधर राजस्थान में भी राहुल गांधी के साथ अशोक गहलोत दिखाई देते थे तो प्रियंका गांधी को सचिन पायलट के साथ देखा जाता था। अनेक बार रणथम्भोर के सैर सपाटे के बाद भी वे कभी जयपुर में सरकार का सरकारी मेहमान नहीं बनी थी।
कर्नाटक में सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच तनातनी है। शिवकुमार डिप्टी सीएम हैं। सिद्धरमैया पुराने और डीके युवा हैं। युवा प्रियंका गांधी के साथ हैं और..। लगभग तीन साल सरकार को हो गये हैं। अब सत्ता परिवर्तन की आहट तो होती है लेकिन फिर शांत हो जाती है।
उधर पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू जो प्रियंका गांधी के नजदीकी हैं, की पत्नी नवजोत कौर ने यह बयान देकर पूरी कांग्रेस क्या देश में हलचल पैदा कर दी थी कि 500 करोड़ रुपय देने पर ही सीएम की कुर्सी मिलती है।
अब डीके 500 करोड़ कहां से लायें? वे तो कभी पूर्व में सीएम नहीं रहे थे। भाई-बहन एण्ड एसोसिएट के बीच जिस तरह से बयानबाजी चल रही है, उससे कांग्रेस के लिए स्पष्ट संकेत नहीं है। दिल्ली में कांग्रेस की 0 सीट है। बिहार में 6 विधायक हैं। स्विंग स्टेट उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस कमजोर ही नहीं बल्कि काफी कमजोर है।
इस तरह से सत्ता तो दूर दिखाई दे रही है, अभी तक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति ही चाय को गर्म रखे हुए है भले ही सर्दी कितनी भी ज्यादा हो।
भारत यूरोप ट्रेड डील पर सहमत
भारत और यूरोप ट्रेड डील पर सहमत हो गये हैं लेकिन इस पर समझौता 6 माह बाद होने की संभावना है। मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच इस पर आखरी दौर की बातचीत होगी तथा संयुक्त संबोधन भी हो सकताहै। द हिन्दू ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने में 6 माह का समय लग सकता है, उस समय 200 करोड़ परिवार के लिए नया बाजार उपलब्ध होगा। वहीं रॉयटर का कहना है कि भारत गणराज्य की सरकार 1700 यूरो से ज्यादा मूल्य की कारों जैसे बीएमडब्ल्यू आदि पर टैक्स को 110 से 40 प्रतिशत कर सकती है। इससे भी कम हो सकता है जिसकी घोषणा कल मंगलवार को होने की संभावना है।
Friday, January 23, 2026
मोदी सरकार की क्रोनोलॉजी समझिये, बाजार में अडाणी को 1.25 से ट्रिलियन रुपये का झटका, आरबीआई ने इतनी ही मूल्य की तरलता राशि लोन के लिए बैंकों को जारी की
श्रीगंगानगर। शेयर बाजार में शुक्रवार को तूफान आ गया। गौतम अडाणी समूह के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली और समूह को करीबन 1.25 लाख करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ। यह तूफान अमेरिका से आई एक खबर के बाद आया। वहीं रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को ही 1.25 लाख राशि बैंकों को तरलता बढ़ाने के लिए जारी की है। ध्यान रहे कि अडाणी के खिलाफ अमेरिका में रिश्वत का मुकदमा चल रहा है और इसे एफबीआई जांच कर रही है।
नरेन्द्र मोदी के पीएम बनने के बाद दुनिया के नंबर दो अमीर बने अडाणी के खिलाफ एक अमेरिकी संस्था ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में व्यापारिक मामलों में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया। इस रिपोर्ट से अडाणी समूह को भारी नुकसान हुआ था। वहीं विदेशी संस्थाओं ने ऋण देने के मामले में सावधानी बरतनी आरंभ कर दी थी।
आंध्र प्रदेश के सीएम को रिश्वत देने के मामले में अमेरिका में एक मुकदमा दर्ज किया गया और इस मामले की जांच संघीय जांच एजेंसी कर रही है। एफबीआई के हवाले से गत दिवस रॉयटर समाचार एजेंसी ने समाचार दिया था कि अमेरिकी अदालत से प्रार्थना की गयी है कि वह गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर को सम्मन भेजने के लिए ईमेल का इस्तेमाल करने की इजाजत दे। इस समाचार के बाद शुक्रवार को सप्ताह के आखरी दिन गिरावट देखने को मिली। इससे अडाणी समूह को करीबन 1.25 लाख करोड़ या इससे ज्यादा का नुकसान हुआ।
वहीं संयोग देखिये कि रिजर्व बैंक ने तरलता की पूर्ति के लिए सवा लाख करोड़ रुपये जारी करने का निर्णय लिया है। यह फैसला आज ही लिया गया।
इससे आम आदमी पर यह प्रभाव पड़ेगा कि बाजार में अधिक पैसा आने से महंगाई बढ़ेगी।
दूसरी ओर अडाणी समूह और अन्य बिलियनर्स को बड़े लोन लेने का फायदा होगा। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि भारतीय रुपया भी यूएसडी के मुकाबले 91.90 रुपये पर पहुंच गया।
ईयू का बड़ा झटका
इससे पहले ईयू ने भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका दिया। ईयू भारत के लिए सीमा शुल्क को कम किये हुए था इसमें 83 प्रतिशत शुल्क को बढ़ा दिया गया है। कपड़ा आदि पर ही शुल्क कम लगेगा।
Thursday, January 22, 2026
रूस-युक्रेन युद्ध पर आज बन सकती है बात, अमेरिका के नेतृत्व में होगी चर्चा
श्रीगंगानगर। विश्व की दो महाशक्तियां अमेरिका और रूस के बीच गुरुवार देर रात मास्को में वार्ता हुई और यूएई में युक्रेन युद्ध की समाप्ति के लिए व्हाइट हाउस, क्रेमलिन और कीव एक मंच पर शुक्रवार को होंगे।
जो जानकारी विभिन्न संवाद सेवाओं के माध्यम से सामने आयी है, उसके अनुसार दावोस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और युक्रेन के व्लादीमिर जेलेंस्की के बीच सीधी वार्ता हुई। अमेरिका ने एक प्रस्ताव रूस और युक्रेन को भेजा था, इस पर युक्रेन के साथ वार्ता हुई थी।
बंद कमरे में बातचीत के बाद ट्रम्प के दामाद जे. कुशनर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल ने कीव में युक्रेनी अधिकारियों से वार्ता की और इसके बाद वे वार्ता के लिए रात को ही मास्को पहुंच गये। क्रेमलिन में उनकी मुलाकात राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के साथ हुई।
मास्को में चली वार्ता के बाद रात को ही यह दल यूएई के आबूधाबी के लिए रवाना हो गया। शुक्रवार और शनिवार को दो दिन त्रिपक्षीय वार्ता होगी। इसमें युक्रेन, रूस और अमेरिका का प्रतिनिधि मंडल शामिल होगा।
चार साल से यह युद्ध चल रहा है। अमेरिका पूर्व में युक्रेन को मदद कर रहा था किंतु ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में आर्थिक सहायता को बंद कर दिया था। इसके बाद फ्रांस के नेतृत्व में कुछ यूरोपीय देश मदद कर रहे थे। वहीं कनाडा भी सबसे बड़ी आर्थिक सहायता कीव को दे रहा था। कई बिलियन डॉलर की सहायता दी जा चुकी है।
जी-7 के देशों में अमेरिका और जापान के अतिरिक्त सैन्य सहायता मिलने के कारण युद्ध समाप्त ही नहीं हो रहा था। ट्रम्प ने कुछ दिन पहले ही बयान दिया था कि जेलेंस्की युद्ध को समाप्त नहीं करना चाहते।
अभी तक युद्ध समाप्त नहीं होने का एक कारण रूस फ्रांस को मानता है। हाल ही में रूस ने पेरिस को चेताया भी था। फ्रांस को चेतावनी दी थी कि रूस पर आक्रमण का कोई लाभ नहीं होगा, लेकिन पेरिस को बहुत ज्यादा नुकसान होगा।
डब्ल्यू एचओ से बाहर हुआ अमेरिका
विश्व स्वास्थ्य संगठन जो यूएन के अधीन होने का दावा करता है, से अमेरिका औपचारिक रूप से बाहर हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को अंग्रेजी में डब्ल्यू एच ओ कहा जाता है अर्थात हू। हू का अंग्रेजी में अर्थ ‘कौन’ होता है। वहीं यह शब्द अजान में भी इस्तेमाल किया जाता है जैसे अल्लाह हू अकबर।
अब अमेरिका हू से बाहर हो गया है। इस तरह से विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली आर्थिक सहायता भी रूक जायेगी। उधर अमेरिका ने अपना एक नया संगठन बनाया है जिसका नाम बॉर्ड ऑफ पीस रखा गया है। संभवत: यह संगठन अब विश्व में स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए काम करेगा।
मन की बात : मोदी अपने ही जाल में कैसे फंस गये?
सतीश बेरी
श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चतुर और समझदार नेता माना जाता है, लेकिन क्या ये सच में वैसा ही है जैसा हमें दिखाया और पढ़ाया जा रहा है? इस सच को जानने के लिए कुछ साल पीछे चलना होगा।
वर्ष 2018 में हमला हुआ। एक बड़ी साजिश के तहत रॉ कार्यालय के पीछे हाथ-पैर तोड़ दिये गये। सभी 20 नाखून को तोड़ दिया गया। कई पसलियां टूट गयीं। हमले के समय पुलिस अधीक्षक के पद पर दलित पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र महावर थे। वारदात के कुछ दिनों बाद ही पीएम ने दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित करवाया और तत्कालीन टेलीकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद से उनको सम्मानित करवाया। जबकि उनकी कोई ऐसी उपलब्धि नहीं थी, जिससे श्रीगंगानगर का मान-सम्मान बढ़ा हो।
अनेक पुलिस अधिकारी 2010 के आसपास डैडबॉडी बेचने का धंधा करते थे, उनका खुलासा किया तो इसके बाद महकमे के अनेक अधिकारी दुश्मन हो गये और वे दुश्मनी का धर्म अभी भी निभा रहे हैं। 2018 में भी निभाया।
वर्ष 1 मई 2018 की घटना के बाद ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया जिससे लगता हो कि एक पत्रकार पर हमला किया गया हो। खैर पीएम को अनेक बार पत्र लिखे और वे पत्र नरेन्द्र मोदी अपने विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिका भिजवा देते। इसकी जानकारी लिखित में मुझे दे दी जाती।
जब अमेरिका को जानकारी भेजने की बात आयी तो उसके बाद मैंने सीधा व्यवहार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से किया। उनको पत्र लिखे। खैर इसके बाद कार्यवाही आरंभ हो गयी और जिलास्तरीय पत्रकार सतीश बेरी एक वीआईपी की तरह से ट्रीट किया जाने लगा।
उस समय मुझे आज की तरह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जानकारी 1 प्रतिशत भी नहीं थी। इवांका ट्रम्प ने मुझे प्रशिक्षित किया और एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की सोच विकसित की। 2020 तक सबकुछ बढिय़ा चल रहा था और राष्ट्रपति ट्रम्प को वहां हुए आम चुनाव में पराजित घोषित किया गया तो अमेरिका में सत्ता बदल गयी।
फिर से सतीश बेरी को एक साधारण आदमी बनाया गया और कई तरह की उलझण में बिजी कर दिया। वक्त का इंतजार खत्म हुआ और 2024 के चुनावों में ट्रम्प की वापसी हो गयी, जिसकी पहले से ही आशा थी।
इस तरह से अब ट्रम्प आये तो वे पिछले चार साल को देख चुके थे कि किस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी नीतियां बदल ली थीं।
ट्रम्प साहब भी अब पूरी तरह से बदल गये और उन्होंने विदेश नीति को नया रूप आरंभ कर दिया। चार साल में वे अमेरिका जाने के बाद एक बार भी ट्रम्प से नहीं मिले थे। मित्रता को भूल चुके थे।
नयी विदेश नीति में ‘अमेरिका फस्र्ट’ के साथ दक्षिण व मध्य एशिया के लिए भी उन्होंने नये प्लान तैयार किये।
आज विदेश मंत्री एस जयशंकर कह रहे हैं, ‘भारत को अलग-थलग करने के लिए नीतियां बनायी जा रही हैं।’ असल में भारत नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी की कारगुजारियों को नियंत्रित करने के लिए नयी नीतियां बनायी गयी। जो वक्त पर तुरंत अपना वक्तव्य, अपनी नीतियां बदल लेते हैं।
अगर प्रधानमंत्री 2018 में अपने धर्म का पालन करते और अमेरिका को पत्र नहीं लिखते तो आज संभवत: भारत 56 का गौरव देख पाता। अब पीएम अपने ही जाल में फंस गये हैं।
वे कहते हैं कि हमारी अपनी नीतियां हैं। हमारी अपनी विदेश नीति है और दबाव नहीं है।
अगर यह सबकुछ होता तो निश्चित रूप से खुशी होती।
जब डोनाल्ड ट्रम्प पहले कार्यकाल के लिए व्हाइट हाउस में थे तो उस समय भी एयर स्ट्राइक की गयी थी। भारत सरकार के एक वायु सैनिक अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय ट्रम्प सिंगापुर में थे। उन्होंने कहा था, भारत को कुछ देर में अच्छी न्यूज मिलेगी और मिली भी। भारतीय अधिकारी को रिहा कर दिया गया और वे विदेश आ गये।
सिंगापुर में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ वे बैठक कर रहे थे और ट्रम्प ने वहीं से ही भारतीय अधिकारी को पाक की जेल से बाहर निकालकर वापस भारत भिजवा दिया। इसी तरह से ऑपरेशन सिंदूर के लिए भी युद्ध विराम की घोषणा ट्वीटर के जरिये पहले अमेरिका से आयी थी, जिसको बाद में भारत सरकार ने स्वीकार किया।
अब एक बार फिर से पत्रकार सतीश बेरी के जीवन, आजादी और प्रतिष्ठा को खतरा उत्पन्न हे तो उस समय भी अमेरिका से ही सूचनाएं भारत सरकार तक भिजवायी जा रही हैं।
अब विश्वगुरु अच्छे निर्णय ले रहे हैं या नहीं यह देश की जनता ने तय करना है।
Wednesday, January 21, 2026
ईरान-अमेरिका के संघर्ष की हवा समाप्त, जापान कर सकता है परमाणु परीक्षण?
श्रीगंगानगर। ईरान में इस्लामी शासन व्यवस्था को समाप्त करने के लिए आरंभ हुआ आंदोलन अब समाप्त होता दिखाई दे रहा है। इसी कारण संभवत: अमेरिका के ईरान के प्रति किये जाने वाली बयानबाजी में भी भारी कमी आयी है। वहीं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाईची ने 8 फरवरी को चुनाव कॉल कर संकेत दे दिया है कि अगर जनमत उनके पक्ष में आता है तो जापान दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार परमाणु परीक्षण कर सकता है। फिलहाल जापान की सुरक्षा के लिए भारी संख्या में अमेरिकी सैनिक बल तैनात हैं। क्योंकि प्रशांत महासागर में एक तरफ चाइना है तो दूसरी ओर उत्तर कोरिया। उत्तर कोरिया परमाणु सम्पन्न देश है और अनेक कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिससे उसकी मुद्रा रसातल में जा रही है।
ईरान इस समय अस्थिर शासन व्यवस्था का सामना कर रहा है। कुछ माह पहले महिलाओं ने हिजाब से आजादी की मांग करते हुए आंदोलन किया था, जिसको दबा दिया गया।
अब इस्लामी शासन व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन हुआ। इसमें सरकारी स्तर पर पांच हजार लोगों को मार दिये जाने की जानकारी सामने आयी थी। सरकारी कार्मिकों की गोलियों से उन मतदाताओं को मार दिया गया, जिन्होंने बेहतर जीवन के लिए बदलाव करते हुए मतदान किया था।
नयी शासन व्यवस्था भी उसी तरह की रही,जिस तरह की पिछली थी।
आंदोलन को जिस तरह से कुचला गया, उससे पता चलता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में संवेदनशीलता या लचीलापन समाप्त हो रहा है। चीन में कई साल पहले युवाओं ने सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर आंदोलन किया था, उस आंदोलन को दबाने के लिए हजारों युवाओं को मार दिये जाने की खबरें आयीं थीं।
इसी तरह का हाल ईरान का हुआ। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी और इसके बाद तेहरान को घेरने के लि हजारों सैनिक भी तैनात किये गये, लेकिन आंदोलन के फीका होने के बाद संभवत: ट्रम्प भी सुस्त हो गये हैं।
जापान कर सकता है परमाणु परीक्षण
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बात की चर्चा हो रही है कि जापान परमाणु परीक्षण कर सकता है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु बम विस्फोट के बाद जापान ने परमाणु परीक्षण या बम न बनाने का संकल्प लिया था।
हाल ही पीएम का कार्यभार संभालने वाली प्रधानमंत्री साने ताकाईची का कहना था कि उनका देश परीक्षण कर सकता है। इस पर प्रतिक्रिया हुई तो ताकाईची ने नया जनमत प्राप्त करने के लिए 8 फरवरी को चुनाव करवाने का एलान कर दिया।
अगर ताकाईची की सत्ता में वापसी होती है तो जापान वह कर सकता है जो अभी तक नहीं किया गया था।
उत्तर कोरिया और चीन का खतरा भांपकर अमेरिका की भारी संख्या में सेना इस द्वपीय देश में मौजूद है।
नाटो के टूटने का खतरा फिलहाल टला, रूटे के आग्रह को ट्रम्प ने किया स्वीकार
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति ने यूरोपीय देशों पर लगाये गये टैरिफ को फिलहाल स्थगित करन का निर्णय लिया है। नाटो के चेयरमैन मार्क रूटे के आग्रह को स्वीकार करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, ग्रीनलैण्ड मुद्दे पर टैरिफ को टाला जा रहा है। उन्होंने कहा, हमें इसकी (ग्रीनलैण्ड) की जरूरत है। यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक के लिए उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और विशेष दूत विटकॉफ को नामित किया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विमान दावोस के लिए रवाना होने के बाद यू टर्न लेकर लौट आया। इससे एक बार यह संभावना थी कि वे दावोस नहीं जा रहे हैं। इसके बाद वे एयरफोर्स वन से दूसरे विमान में सवार हुए और वापिस दावोस के लिए रवाना हो गये। व्हाइट हाउस ने कहा, विमान में तकनीकी खराबी सामने आने के बाद यू टर्न लिया गया था।
दावोस में संबोधन के दौरान उन्होंने अपने एक साल के कार्यकाल के बारे में बताया कि महंगाई पांच साल के न्यूनतम स्तर पर है। बॉर्डर सुरक्षित हैं। एक साल के भीतर 18 ट्रिलियन डॉलर का टैरिफ राजस्व अर्जित किया गया है। 20 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया जा रहा है। यह बहुत बढिय़ा उपलब्धियां हैं।
हालांकि उनके देरी से दावोस पहुंचने के कारण जर्मन के चांसलर से पूर्व निर्धारित द्विपक्षीय बैठक को स्थगित किया गया किंतु मार्क रूटे जो नाटो के चेयरमैन हैं, के साथ बैठक हुई।
इस बैठक के बाद ट्रम्प ने कहा, वे यूरोपीय देशों पर लगाये गये ग्रीनलैण्ड से संबंधित टैरिफ को एक बार स्थगित कर रहे हैं।
रूटे के साथ बैठक के बाद यह भी तय हो गया है कि नाटो के अस्तित्व पर उठ रहे सवालों को एक बार विराम मिल गया है।
पहले यूरोपीय संघ दो भागों में बंट गया था। एक गुट के कुछ देश फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के पक्ष में चले गये थे।
ईरान को लेकर बयान नहीं आया सामने
ईरान में आंदोलन के शांत होने के उपरांत दावोस के शिखर सम्मेलन के दौरान भी इस पर चर्चा नहीं हुई। हालांकि एक वीडियो सामने आ रहा है जिसमें तेहरान की सडक़ों पर हथियारबंद मलिशिया नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने भी इस पर अभी तक कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।
Tuesday, January 20, 2026
दावोस से वापिस लौट आयेंगे ट्रम्प, पेरिस जाने का कार्यक्रम नहीं
श्रीगंगानगर। यूरोपीय देश स्वीजरलैण्ड के दावोस में आर्थिक मामलों से संबंधित एक बड़ी बैठक हो रही है और इसमें दुनिया भर के नेता जुट रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इसमें भाग लेने के लिए रवाना हो गये जबकि भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी शायद इसमें भाग नहीं ले रहे हैं। वहीं पाक पीएम दावोस पहुंच गये हैं।
भारत आगामी 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इसमें यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सूला वॉन डेर लेन मुख्यातिथि के रूप में भाग लेंगी। 27 जनवरी को यूरोपीय संघ के शिखर नेता और भारत सरकार के बीच मुक्त व्यापार समझौता पर बैठक होनी है।
इससे पहले दावोस में विश्व के शिखर नेता जुट रहे हैं। सर्द मौसम की परवाह नहीं करते हुए बर्फीली पहाडिय़ों से ढके दावोस में डोनाल्ड ट्रम्प भी पहुंच रहे हैं। वे एयरफोर्स वन से रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब हुए।
ट्रम्प ने अपना एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए पत्रकारों के सवालों के उत्तर भी दिये।
पेरिस नहीं जायेंगे ट्रम्प
ग्रीनलैण्ड के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रम्प और यूरोपियन नेता इमैनुअल मैक्रां के बीच विवाद गहराया हुआ है। मैक्रां ने दावोस के शिखर सम्मेलन उपरांत पेरिस में जी-7 देशों की आपात बैठक बुलायी है। 2026 के लिए इस समूह के अध्यक्ष की जिम्मेदारी फ्रांस के पास है और जून में वार्षिक बैठक का आयोजन होने की संभावना है।
मैक्रां ने जी-7 की आपात बैठक की मेजबानी करते हुए ट्रम्प को भी आमंत्रित किया था किंतु अमेरिका ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया है। वाशिंगटन डीसी में पत्रकारों से कहा, वे पेरिस नहीं जा रहे हैं।
अमेरिका इससे पहले कनाडा में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में भी स्वयं को अलग रख चुका है। मार्क रूबियो ने इस बैठक में जाने से इनकार कर दिया था।
वहीं भारत की तरफ से देवोस में कौन जा रहा है, इस संबंध में जानकारी सामने नहीं आ पायी है। पाक पीएम शाहबाज शरीफ देवोस पहुंच गये हैं और डॉन ने उनकी फोटो के साथ समाचार को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया है।
भारत में आईटी सैक्टर के दिग्गज, क्वांटम के लिए विदेशी सहयोग क्यों?
मेड इन इंडिया और विदेश वस्तुओं का बहिष्कार करने का आह्वान करने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करीबन 10 हजार करोड़ के सौदे आईटी सैक्टर के तहत फ्रांस से किये हुए हैं। इनमें क्वांटम कम्पयूटर है जिसे वैरी-वैरी सुपर कम्प्यूटर के नाम से भी जाना जाता है। क्या भारत के इंजीनियर्स पर विश्वास नहीं है? यह भी कहा जा सकता है कि भाषण और करनी में समानता नहीं है।
सिंदूर ऑपरेशन के दौरान सोशल मीडिया पर यह जानकारी वायरल की गयी थी कि राफेल के लिए फ्रांस ने कोड ट्रांसफर करने से इन्कार कर दिया था। अब उसी फ्रांस से 121 राफेल खरीद की चर्चा हो रही है। कुल मिलाकर करीबन चार लाख करोड़ रुपये का सौदा किया जा रहा है। इससे पहले यूरोपीयन नेताओं को भारत के गणतंत्र दिवस का मुख्य मेहमान बनाया जा रहा है।
बात इमरान खान की!
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को न्यूयार्क में यूएन के वार्षिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था तो सउदी के शासक मोहम्मद बिन सलमान ने अपना हवाई जहाज दिया था। भारत की विदेश नीति के महानायक ने सउदी से वार्ता कर जहाज को खाली वापिस मंगवा लिया। इस तरह से इमरान खान को सार्वजनिक तौर पर अपमान का सामना करना पड़ा।
अब उसी सउदी अरब ने पाकिस्तान के साथ ‘सम-नाटो’ समझौता किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इससे पहले सउदी गये थे और बताया गया कि सउदी की वायु सेना ने उनको एस्कोर्ट किया और शाही निवास पर ले जाया गया। उधर मेहमान नवाजी हो रही थी और उधर कश्मीर में आतंकवादी हमला हो गया। पीएम बिना भोजन के वहां से लौट आये।
वक्त बड़ा बलवान होता है और यह एक बार पुन: प्रमाणित हुआ। अमेरिका और सउदी अरब के साथ रिश्ते खट्टे हो गये। सउदी ने तुरंत पाक के साथ सम नाटो समझौता कर लिया और इस तरह से दूरियां बढ़ गयी।
अब यूएई के शासक मोहम्मद बिन जायेद अल नाहायन को दिल्ली आमंत्रित किया गया। उसी तरह की मेहमान नवाजी हुई जिस तरह की कुछ दिन पहले रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन की गयी थी या सउदी अरब के शासक मोहम्मद बिन सलमान की हुई थी।
पुतिन भारत को बड़ा तोहफा नहीं दे गये। भारत जनरेशन 6 के हवाई जहाज मांग रहा था, जिस पर सहमति नहीं बन पायी।
यूएई भी भारत को आश्वासन देकर चले गये हैं। देश को उम्मीद है कि ऊर्जा, स्मार्ट सिटी आदि में यूएई बड़ा निवेश करेगा, लेकिन यह भविष्य के गर्भ में है।
चादर पर दाग तो तब लगेगा जब जांच होगी, मोदी सरकार पर सवाल उठे लेकिन उसी तरह से दबा भी दिये गये
श्रीगंगानगर। वर्ष 1999 से पहले शायद नरेन्द्र मोदी को गुजरात के भी 10 प्रतिशत से अधिक लोग नहीं जानते थे और जब वे अचानक ही सीएम बनाये गये तो उसके बाद साबरमती एक्सप्रेस घटना ने उनको देश और दुनिया के पटल पर ला दिया। अमेरिका ने उनके वीजा को निलम्बित कर दिया। इस तरह से देश और दुनिया को मोदी के बारे में जानकारी प्राप्त हुई थी। अब वे पीएम बने हुए 10 साल से ज्यादा का वक्त गुजार चुके हैं। उस समय वे कहते हैं कि 22 साल की राजनीति में उनकी चादर पर कोई दाग नहीं है।
पहले कार्यकाल में 2016 की नोटबंदी और अन्य प्रकार के विवादित निर्णय लेने के कारण उनकी लोकप्रियता में काफी कमजोरी आ गयी थी। वे आसियान यात्रा के दौरान एक मस्जिद में भी चले गये। उनकी बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि उनको नहीं लग रहा किवे पुन: पीएम कार्यालय में पहुंचेंगे। उधर हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा का आदेश हो गया कि भाजपा को इस बार 300 से अधिक सीट हासिल होंगी और वही हुआ। इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कह चुके थे कि इस बार वोट मांगने भी नहीं जा सकते।
वे उस समय स्वयं को फकीर कहते थे और झोली उठाकर चलने का प्रवचन करते थे। मोदी यह भी कहा करते थे कि वे ‘अब्दुल’ की भी खबर लेंगे। आखिर यह अब्दुल कौन था, जिसकी खबर लेने की बात वे कर रहे थे।
अमिताभ बच्चन अभिनीत शान फिल्म का यह किरदार अब्दुल एक गीत के जरिये मशहूर हुआ था। उस गीत के बोल थे, अब्दुल है मेरा नाम, सबकी खबर रखता हूं...। अब यह एसीसोड को यहीं पूरा कर दिया जाये तो आगे देखते हैं कि मोदी 2.0 में भी ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ, जिसका जिक्र किया जाये। बुलेट ट्रेन नहीं आयी। 100 स्मार्ट सिटी नहीं बने।
लोकप्रियता का ग्राफ गिर रहा था और 2024 के चुनाव में बहुमत प्राप्त करने से दूर रह गये। अब भारत की राजनीति पर नजर डाली जाये तो सामने आता है, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडू आदि राज्य। यह स्विंग राज्य हैं। जिधर मतदाता जायेगा, वही सरकार बनेगी।
ऐसा नहीं है कि मोदी बहुत ज्यादा ईमानदार हैं। उनकी चादर पर कोई दाग नजर नहीं आता। वे स्वयं को ईमानदार होने का प्रमाण पत्र जारी करते हैं, एक बार नहीं सौ बार उनका बयान आया है।
अगर देखा जाये तो राफेल खरीद को ही गौर से नजर डाली जाये। इस खरीद से जुड़े अमित शाह, मोदी को छोडक़र अन्य कोई जीवित नहीं है। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, सीडीएस विपिन रावत, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी।
इन सभी का निधन कुछ ही समय के अंतराल में हुआ। हालांकि इन सभी का निधन बीमारी होने से बताया गया है लेकिन...?
अनिल अम्बानी को इसका ऑफसैट पार्टनर बनाया गया जिसके लिए उनकी रक्षा क्षेत्र की कंपनी भी स्थापित करवायी गयी। आज अनिल सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उनकी कंपनियां फेल हो चुकी हैं और सीबीआई, ईडी उनकी कंपनियों की जांच कर मुकदमा भी दायर कर चुकी हैं।
इस तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि मोदी एक बहुत ज्यादा ईमानदार नेता है। उनकी चादर पर दाग नहीं है। गौतम अडाणी को लेकर सवाल उठे। मामला उच्चस्तर पर भी गया किंतु जांच कौन करे?
जो लोग जांच कर सकते हैं उनको रिटायरमेंट के बाद भी जॉब पक्की है। तत्कालीन गृह सचिव को ही लिजिये, अजय भल्ला दो बार एक्सटेंशन के बाद अब मणिपुर के राज्यपाल हैं। कुछ दिनों बाद वे बिहार, राजस्थान या उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के भी गर्वनर बन सकते हैं।
Monday, January 19, 2026
भाजपा में क्या मोदी अब सबकी पसंद रहे हैं? नये अध्यक्ष मिलने के बाद भी चर्चा नहीं, पाक शामिल हो सकता है गाजा शांति बोर्ड में, एक बिलियन डॉलर देने होंगे, पौलेण्ड के उप प्रधानमंत्री नई दिल्ली यात्रा में क्या असहज हो गये?
श्रीगंगानगर। भारतीय जनता पार्टी को नया अध्यक्ष मिल गया है। नीतिन नवीन निर्विरोध चुने गये क्योंकि उनके नाम का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की ओर से पेश किया गया, इस कारण किसी अन्य नेता ने चुनाव लडऩा उचित नहीं समझा। वहीं मोदी आयु के 75 के आकड़े को पार करने के बाद भी अभी तक उनके विकल्प पर चर्चा नहीं होना बताता है कि वे अभी भी भाजपा में सबसे शक्तिशाली हैं। हालांकि वे सबकी पसंद हैं, यह नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर विश्व के प्रमुख समाचार में चर्चा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शांति बोर्ड को लेकर हो रही है। गाजा में शांति के लिए यह दूसरा दौर बताया गया है।
भारतीय जनता पार्टी के पास नया अध्यक्ष नहीं था और जेपी नड्डा एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के विपरीत स्वास्थ्य और बीजेपी चीफ दोनों का पद कागजों में संभाले हुए थे। हालांकि यह साफ है कि भाजपा का हर बड़ा फैसला ‘कर्तव्य पथ’ से ही देश भर तक जाता है।
बिहार के कृषि मंत्री नीतिन नवीन को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी थी और आखिर में उनको निर्विरोध आज चुन लिया गया। इसके साथ ही भाजपा में चुनाव का चैप्टर पूरा हो गया है। अब बंगाल, असम, तमिलनाडू के चुनावों पर ही चर्चा होनी है।
मोदी 75 वर्ष से अधिक आयु के हो गये हैं। उन्होंने नियम बनाया था कि सक्रिय राजनीति में यह 75 वर्ष की आयु रिटायरमेंट की होगी। इस नियम का हवाला देकर उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी को सेवानिवृत्ति दे दी थी। अनेक अन्य राजनेताओं को राज्यपाल बनाकर राजभवन भेज दिया था।
अब उनकी बारी आयी तो शायद वे यह नियम भूल गये हैं। परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी का कहना है कि अब युवा नेताओं को जिम्मेदारी देने का समय आ गया है। शायद यह आवाज कल्याण मार्ग में पीएम आवास तक नहीं पहुंची।
गाजा शांति बोर्ड में 60 देशों को निमंत्रण
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा में स्थायी शांति के लिए शांति बोर्ड का गठन किया है और इसके चेयरमैन वे स्वयं हैं। हालांकि इजरायल इसके कुछ नियम को लेकर खुश नहीं बताया गया है।
वहीं ट्रम्प ने 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है जिसमें भारत, पाकिस्तान, कतर आदि देश भी शामिल हैं। कनाडा ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी है जबकि फ्रांस ने कहा है कि वह इस बोर्ड में शामिल नहीं होगा।
वहीं इस बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए सदस्य देश को एक बिलियन डॉलर का डोनेशन देना होगा ताकि गाजा पट्टी में विकास कार्यों को गति प्रदान की जा सके। एक बिलियन डॉलर के प्रस्ताव के कारण अनेक देश अभी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
भारत सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है, लेकिन इस पर अभी चर्चा की जानी है।
पौलेण्ड के साथ भारत की गर्मागर्म बहस
यूरोपीय नेता लगातार भारत के चक्कर काट रहे हैं क्योंकि दुनिया में तनाव अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। हालात यह है कि अमेरिका ने अपने देश की पहचान कहे जाने वाले स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है इसमें आग लगना बताया गया है। यह अपने आप में बहुत ज्यादा जानकारी देती है।
कुछ फोटोज विस्तृत समाचार से ज्यादा जानकारी स्वयं ही दे देती हैं। इसी फोटो के आधार पर कहा जा सकता है कि तनाव दुनिया भर में कितना ज्यादा है। दिल्ली की राजनीति को समझना हो तो उसका वायु प्रदूषण का गणित बहुत ज्यादा जानकारी उपलब्ध करवा देता है।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता का सूचकांक 577 बताया गया है और यह सुबह 3.40 बजे (मंगलवार 20 जनवरी 2026) बताया गया। इसी तरह से श्रीगंगानगर का एक्यूआई 350 था। यह बहुत ज्यादा खराब कहा जा सकता है।
वहीं पौलेण्ड के उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने साफ शब्दों में भारत सरकार के विदेश मंत्री के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त की। पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर दोनों नेताओं ने परस्पर विरोधी बयान दिये। इसी तरह से कुछ दिन पहले जर्मन चांसलर ने भी भारत सरकार के आग्रह पर की गयी यात्रा के दौरान भी नई दिल्ली को लेकर एक बयान दिया था जो चर्चा का विषय बन गया था।
यूरोप से अगले एक महीने के भीतर अनेक नेता आने वाले हैं। 27 जनवरी को यूरोपीय संघ के नेताओं का शिष्टमंडल आ रहा है। इस तरह से यह कहा जा सकता है कि दिल्ली के सर्द मौसम में हवाएं काफी गर्म है और यह फरवरी मध्य तक बनी रहने की संभावनाएं हैं।
दुनिया भर में आर्थिक भूकम्प लाने वाले ट्रम्प की हत्या की साजिश का सूत्रधार कौन था? नेटफ्लिक्स की ‘तस्करी’ क्या भारत की मौजूदा व्यवस्था की पौल खोल पायी?
श्रीगंगानगर। वर्ष 2024 में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान स्विंग स्टेट पेंसेलेविया मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ हत्या की साजिश रची गयी और गोली उनके कान को निशाना बनाते हुए निकल गयी। अगर निशानेबाज का निशाना नहीं चूकता तो? इस वारदात के एक व्यक्ति को एफबीआई ने कुछ ही समय के अंतराल पर गिरफ्तार कर लिया था किंतु इसकी साजिश किन लोगों ने रची थी, यह जानना आवश्यक है और अभी तक यह जानकारी दुनिया के सामने पेश भी नहीं की गयी है कि सूत्रधार कौन था?
एफबीआई, सीआईए, सीक्रेट सर्विस और अन्य 26 खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी नहीं है कि सूत्रधार कौन थे और कहां बैठे हैं। हमलावरों को पहले ही यकीन हो गया था कि अगर ट्रम्प जीत जाते हैं तो व्हाइट हाउस पूरी दुनिया में आर्थिक जगत की तस्वीर बदल देगा।
अब वही हो रहा है। क्वांटम कम्प्युटिंग के लिए बहुत सारे देश तैयार नहीं है। ब्लॉक चेन के लिए भी काम नहीं हुआ है और यही अमेरिका की सबसे बड़ी जीत का मार्ग प्रशस्त करने वाली है। चीन हो या यूरोपीय संघ तकनीक के मामले में अभी भी वे अमेरिका से दशकों पीछे हैं।
सिर्फ एक कमांड से दर्जनों या सैकड़ों या हजारों अथवा इससे भी कहीं ज्यादा बैंक दिवालिया हो जायेंगे। प्राइवेट बैंकों का चलन दुनिया भर में हो रहा है और यही ब्लैक, ग्रीन मनी का सबसे बड़ा स्रोत बने हुए हैं। हवाला कारोबार भी धड़ल्ले से हो रहा है।
अब जब हम कम्युटर और आर्थिक दौर में जी रहे हैं तो यह समझ लेना चाहिये कि अमेरिका इस दौर की महान शक्ति बन चुका है और एक साल के भीतर वह हो गया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। क्वांटम फायनेंस सिस्टम लागू होने के बाद अब एनईएसऐरा और जीईएसऐरा जैसे एक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि दुनिया को जानकारी नहीं थी या नहीं है। वे ट्रम्प का तोड़ नहीं निकाल पाये और अब वे काफी पीछे हो गये हैं। ग्रीनलैण्ड या यूक्रेन के नाम पर एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। इन सबका अब कोई असर नहीं होने वाला है। तीर हाथ से निकल चुका है और टारगेट को प्राप्त करने के लिए बस चंद कदम की दूरी पर है।
ओरेंजलैण्ड हो जायेगा नाम
ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करने के बाद सबसे पहले नाम बदला जा सकता है। ट्रम्प पहले मैक्सिको की खाड़ी का नाम अमेरिका की खाड़ी कर चुके हैं। अब पनामा नहर और ग्रीनलैण्ड पर चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति स्पष्ट कर चुके हैं कि वे नाम बदलकर ओरेंजलैण्ड करेंगे और प्रत्येक नागरिक को एक-एक लाख डॉलर की राशि भी देंगे जो भारतीय मुद्रा में करीबन 90 लाख रुपये हो जायेंगे।
‘तस्करी’ क्या भारतीय व्यवस्था पर चोट करती है?
भारत में बंदरगाह और एयरपोर्ट का निजीकरण कर दिया जा रहा है और इसका नुकसान देश की अर्थव्यवस्था को भी हो रहा है। क्योंकि इससे ठेकेदार फर्म का हस्ताक्षेप सीधे तौर पर सरकारी सेवाओं में भी हो जाता है। अब बात की जाये तो सामने आ रहा है नेटफ्लिक्स की फिल्म तस्करी में सोने की तस्करी किस प्रकार की जाती है और हो रही है। प्रवर्तन अधिकारी किस तरह से उनके साथ अटैच होते हैं। पूरी व्यवस्था की जानकारी नाट्य रुपांतरण के जरिये दी गयी है।
ध्यान रहे कि गौतम अडाणी के पास भारत में अनेक एयरपोर्ट और बंदरगाह हैं जबकि दुबई में उनके भाई प्रवीण अडाणी बिजनेस करते हैं।
Sunday, January 18, 2026
अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर, मिनेसोटा में भी नैशनल गार्ड होंगे तैनात
श्रीगंगानगर। ईरान में इस्लामी शासन समाप्त करने आदि की मांग को लेकर आंदोलन में शामिल पांच हजार लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया है। रॉयटर समाचार एजेंसी ने मरने वालों की अधिकारिक जानकारी दुनिया के समक्ष पेश की है।
लोकतंत्र के लिए जंग करने वाले लोगों को यह नहीं पता था कि उनके वोट से ही बनी सरकार इतनी निर्दयी हो सकती है कि गोलियां चलाकर पांच हजार मतदाताओं की जान तक ले सकती है। वहीं जानकारी यह भी आ रही है कि मरने वाले अधिकांश जेनरेशन-जैड से संबद्ध थे।
युवाओं की मौत और उनके शव देखकर रूह कांप गयी है। ईरान में आंदोलन महंगाई के खिलाफ आरंभ हुआ था और फिर यह ईरान में इस्लामी सत्ता को समाप्त करने की मांग को लेकर बदल गया। हालांकि ईरान विदेशी हस्ताक्षेप का आरोप लगा रहा था लेकिन आंदोलन उग्र होता जा रहा था।
जिन युवाओं ने जिस जोश के साथ वोट देकर सरकार बनायी थी, उसी सरकार ने उनकी आवाज दुनिया तक नहीं पहुंचे, इसके लिए इंटरनेट सेवाओं को निलम्बित कर दिया और समाचार सेवाओं को भी सेंसर कर दिया।
अमेरिका का रूख क्या कहता है
अमेरिका ने अपने जंगी जहाज ईरानी क्षेत्र से लगते प्रशांत महासागर में भेज दिये हैं और वहां पर स्थायी शांति के लिए हजारों सैनिक तथा सैकड़ों की तादाद में हवाई जहाज लगाये गये हैं। ईराक से अपने सैनिकों और जहाजों को निकाल लिया गया है। यह सुरक्षा की दृष्टि से उठाया गया कदम बताया गया है। इस तरह से 20 सालों से भी अधिक समय बाद पहली बार ईराक अमेरिका की सेना से विहिन हो गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सोमवार को व्हाइट हाउस में आयेंगे। साप्ताहंत अवकाश के लिए वे फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने आवास मार ए लागो चले गये थे।
यह तय माना जा रहा है कि अब ईरान और अमेरिका आमने-सामने हो चुके हैं और कभी भी जंग की आवाज सुनाई दे सकती है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ईरानी जनता को बहादुर बताते हुए कहा है कि येरूशलम उनकी सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और हर समय हर परिस्थिति के लिए तैयार है।
इसका सीधा सा अर्थ यह हो गया है कि ईरान की इस्लामी सत्ता को हटाने के लिए इजरायल अब युद्ध के लिए अमेरिका के साथ या अलग से भी तैयार है।
ट्रम्प ने भी इजरायल से पहले इरानी जनता को संबोधित किया था और कहा था कि उनके लिए सहायता रवाना कर दी गयी है जो जल्दी ही उनके पास पहुंच जायेगी।
मिनेसोटा में 1500 गार्ड तैनाती को हरी झण्डी
मिनेसोटा में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1500 गार्ड की तैनाती की जा रही है। पेंटागन ने व्हाइट हाउस से मिले आदेशों के बाद तैयारियां आरंभ कर दी हैं। पेंटागन ईरान पर भी नजर रखे हुए है और वहां पर जंगी जहाजों को तैनात कर चुका है।
मिनेसोटा में इस समय हालात सामान्य नहीं कहे जा सकते हैं और इस बात का इल्म राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी है। उन्होंने इसमें निजी तौर पर रुचि लेते हुए पेंटागन को नैशनल गार्ड की नियुक्ति की है। इससे पहले न्यूयार्क और कैलीफोर्निया में भी नैशनल गार्ड को नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति ट्रम्प कहते हैं कि अवैध लोग अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और अब वे अमेरिकी लोगों को ही लूटपाट के लिए निशाना बना सकते हैं। उनकी सुरक्षा आवश्यक है। स्थानीय पुलिस के अतिरिक्त यह नियुक्तियां की गयी हैं। 1500 गार्ड के साथ-साथ आईस नामक प्रवर्तन एजेंसी के एजेंट्स भी अवैध लोगों को गिरफ्तार करने के लिए कार्यरत हैं।
राफेल खरीद के लिए बिड लगायी गयी?
अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आ रही है कि भारत सरकार ने 121 राफेल खरीद के लिए सार्वजनिक तौर पर खरीद बिक्री के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। किसी अन्य देश या एजेंसी का भी प्रस्ताव आया था। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार फ्रांस के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता करना चाहती है जिसमें एक साल के बजट का करीबन 10 प्रतिशत अर्थात करीबन चार लाख करोड़ रुपये का रक्षा सौदा शामिल है।
अमेरिका ने अपाचे और चिनूक हैलीकॉप्टर का सौदा होने के बाद भी युक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई नहीं की है और रूस के साथ रक्षा सौदा नहीं हो पाया जिस तरह की उम्मीद भारत की मोदी सरकार कर रही थी। वह समनाटो समझौता संभवत: चाहते थे। वहीं रूस की कुछ शर्तों को भी पूरा नहीं किया जा सका था।
इस तरह से बड़ा हथियार निर्माता फ्रांस रह गया था। चीन से भारत हथियार खरीद नहीं सकता। वहीं फ्रांस के साथ समझौता होने से पहले ही चीन स्टेट भी अपनी नाराजगी को सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित कर रहा है। वह दुनिया को अपनी ताकत भी दिखा रहा है।
क्यूएफएस को लेकर नेताओं की हलचल तेज
अमेरिका में इस समय एक बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और वह स्विफ्ट (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंकों के वित्तीय लेन-देन करने वाली वॉयर) को भी ब्लॉक चेन आधारित नयी तकनीकी व्यवस्था पर ले गया है। क्वांटम फायनेंस सिस्टम पर आने के कारण अमेरिका सभी अन्य देशों से अलग होकर काम कर रहा है। अगर अमेरिका क्यूएफएस को बंद कर देता है तो पूरी दुनिया का बाजार सिस्टम धराशायी हो जायेगा।
दुनिया में बहुत से ऐसे ट्रस्ट (न्यास) हैं जो हकीकत में कोई कार्य नहीं करते किंतु उनके खातों में हजारों बिलियन डॉलर्स हैं। अब समझा जा सकत है कि नया विश्व युद्ध मिसाइलों से नहीं दिमाग से भी लड़ा जा सकता है।
Saturday, January 17, 2026
दिल्ली फिर से दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, श्रीगंगानगर-लुधियाना भी सामान्य नहीं, धर्म-वीर की जोड़ी टूटी-अमेरिका ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाया
श्रीगंगानगर। दुनिया में धर्म-वीर की जोड़ी की तरह प्रसिद्धि प्राप्त करने वाली यूरोपीय संघ-अमेरिका के बीच रिश्तों में कड़वाहट मजबूत होती जा रही है। यूएसए ने यूरोपीय संघ पर 10 प्रतिशत टैरिफ का एलान कर दिया है जो जून के बाद बढक़र 25 प्रतिशत तक हो सकता है। वहीं दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा हो चुका है कि लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। हालांकि ग्रेप-3 आरंभ किया गया था किंतु इसका असर दिखाई नहीं दिया। इसी तरह से श्रीगंगानगर और पंजाब के लुधियाना में बराबर की स्थिति है।
हिन्दी सिनेमा जगत की सुपर डूपर हिट फिल्म धर्मवीर में एक गीत था, जिसमें बताया गया था कि सात अजूबे इस दुनिया में...। इस तरह से धर्मेन्द्र और जितेन्द्र ने अपना किरदार निभाते हुए राजा-रंक की दोस्ती को दुनिया के सामने पेश किया था। इसी तरह का रिश्ता पश्चिमी दुनिया में था जहां सर्वशक्तिमान अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच मित्रता थी।
अब वह समाप्त हो गयी है। संयुक्त राज्य ने पहली बार यूरोपीय देशों के नेताओं पर अमेरिका में नो एंट्री का एलान किया है। इनमें ब्रिटिश पीएम भी शामिल है। अगले कदम में 10 प्रतिशत टैरिफ का भी एलान कर दिया गया है यह जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस आदि देशों पर लागू होंगे।
संयुक्त राज्य मान रहा है कि अमेरिका फस्र्ट नीति के तहत वह डेनमार्क के ग्रीनलैण्ड को खरीदना चाहता है क्योंकि यह उसकी सामरिक सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।
इसी बात को लेकर दोनों पक्ष अब अपने-अपने स्तर पर युद्धाभ्यास कर रहे हैं।
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा खतरनाक
देश की राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर बहुत ज्यादा खराब हो चुका है। हालांकि श्रीगंगानगर-लुधियाना में भी हालात खराब हैं लेकिन यह दोनों सिटी दिल्ली से आधा प्रदूषण लेकर बेहद खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों में शामिल हैं।
खतरनाक स्थिति में होने के बावजूद अभी तक बड़े स्तर पर राहत कार्य आरंभ नहीं किये गये हैं।
‘अमेरिका फस्र्ट’ में ग्रीनलैण्ड को हासिल करना जरूरी! पंजाब केसरी के रूतबे को समाप्त क्यों करना चाहती है पंजाब की आप सरकार, चीन सागर से युद्धपोत ईरान की ओर रवाना
श्रीगंगानगर। ग्रीनलैण्ड में यूरोपियन यूनियन के कुछ देश एकजुट होकर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं तो दूसरी ओर अमेरिकी युद्धपोत, हजारों सैनिक मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशांत महासागर में युद्ध जैसे हालात नजर आने लगे हैं।
दूसरी ओर देखें तो भारत में स्वतंत्र आवाज को दबाने की कोशिशें हो रही हैं। पंजाब में सरकारी एजेंसियां पंजाब केसरी समाचार पत्र के प्रेस और उनके व्यवसायिक संस्थाओं की जांच के नाम पर उनको परेशान कर रही हैं। वहीं राजस्थान में पत्रकार सतीश बेरी के जीवन, आजादी और प्रतिष्ठा को समाप्त करने के लिए राजस्थान पुलिस लगातार प्रयासरत है।
अगर पहले भारत की बात की जाये तो इस समय पंजाब पर नजर डाली जाये जहां पंजाब केसरी अखबार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिशें सरकारी स्तर पर हो रही हैं। उनके व्यवसायिक संस्थान पर एक के बाद एक अनेक एजेंसियां जांच करने के लिए पहुंच गयीं। इस तरह से एक दशकों पुराने समाचार पत्र की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की कोशिशें सरकारी स्तर पर हो रही हैं।
इस तरह की घटना की निंदा अनेक पत्रकार, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने की है। इस बीच यह भी नजर आ रहा है कि श्रीगंगानगर में पत्रकार सतीश बेरी के खिलाफ लगातार साजिश रची जा रही हैं और वह भी सरकारी नेताओं, माफिया, प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के कारण।
दुनिया के हालात पर नजर
अगर विश्व के हालात पर नजर डाली जाये तो सामने आ रहा है कि इस समय दुनिया के चारों ओर युद्ध के आसार नजर आ रहे हैं। ठंडी हवाओं के बीच युद्धक विमानों की खबरों से गर्मी आ गयी है। ऐसा लग रहा है कि प्रत्येक देश अपनी गरीबी, सामाजिक योजनाओं को भुलाकर हथियार खरीदना चाहता है।
मध्य एशिया में हालात यह हो गये हैं कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिका ने अपने सैनिकों को प्रशांत महासागर में निर्धारित बिंदु पर पहुंचने के आदेश जारी कर दिये हैं। कम से कम पांच युद्ध चीन सी सागर में तैनात थे जो अब मूव कर रहे हैं और रविवार को उनके मध्य एशिया में ईरान के पास पहुंच जाने की संभावना न्यूज एजेंसी ने दी है।
पांच हजार से ज्यादा सैनिक इन युद्धपोत पर तैनात थे जो अब ईरान में किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। इस तरह से कोरियाई द्वीप, दक्षिण एशिया के हालात को भी सामान्य नहीं कहा जा सकता है।
ग्रीनलैण्ड मुख्य मुद्दा बन गया
अमेरिका के लिए रणनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैण्ड को हासिल करना अब मुख्य मुद्दा बन गया है। इस साल नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं और रेड ईगल चाहता है कि पूरे यूएसए में उसका डंका बजे ताकि वह दो तिहाई बहुमत को हासिल कर सके। ब्ल्यू सिटी के राज्यों में वह डेमोक्रेट्स के कब्जे को भी कमजोर करना चाहता है।
ग्रीनलैण्ड की बात अब अमेरिका में आम आदमी करने लगा है और उसको वह जानकारी समझ में आ गयी है कि क्यों डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका फस्र्ट नीति के तहत ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करना चाहते हैं।
इस तरह से यूरोपीय देश भले ही सैन्य अभ्यास कर रहे हों लेकिन उनके पास उतना बारूद नहीं है कि वह अमेरिका के खिलाफ ही खर्च कर दें। उधर रूस भी यूरोपीय संघ के दबदबे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है।
Friday, January 16, 2026
ये दुनिया है काला बाजार, ये पैसा बोलता है..., मोदी को भी नहीं मिल रहा ‘आपदा में अवसर...’, ग्रीनलैण्ड के लिए अमेरिका अब आगे बढ़ेगा? ईरान में प्रदर्शनकारियों को नहीं मिला सहारा, आंदोलन ठंडा
श्रीगंगानगर। ये दुनिया है काला बाजार, ये पैसा बोलता है...90 के दशक में आई काला बाजार का यह गीत महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर सटीक बैठता है। अजीत पवार और भाजपा के बीच भ्रष्टाचार को लेकर जो बयानबाजी हुई और उसके बाद नगर निगम चुनावों को भी राष्ट्रीय चैनल्स पर मोदी की जीत के रूप में प्रस्तुत किया गया, वह कालाबाजार के गीत को सही ठहरा देता है। वहीं पहली बार पाकिस्तान के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आपदा का सामना करना पड़ रहा है तो उन्हें भी अवसर नहीं मिल रहा। आपदा में अवसर का मंत्र 2018 में पीएम मोदी ने दिया था। वहीं ईरान में शांति लौट रही है और आंदोलन शांत हो रहे हैं या समाप्त हो रहे हैं, कहा जा सकता है। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रम्प अब ग्रीनलैण्ड के लिए कुछ भी करेगा की नीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं।
महाराष्ट्रा भारत का सबसे बड़ा आर्थिक रूप से राज्य है जिसकी जीडीपी करीबन 50 लाख करोड़ रुपये है। कर्नाटक, तमिलनाडू, गुजरात, उत्तर प्रदेश राज्य टॉप 5 में शामिल हैं। इनमें फिलहाल उत्तर प्रदेश को छोडक़र अन्य राज्य महाराष्ट्रा को टक्कर दे, ऐसा नजर नहीं आ रहा है। कारण यही है कि भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई है। आर्थिक का अर्थ पैसा हो जाता है और यहां पर पैसों का भंडार है क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, सेबी- स्टॉक मार्केट, फिल्मी दुनिया और क्रिकेट सहित सबकुछ है। जहां पर धन बरसता है।
अब महाराष्ट्रा में नगर निकाय चुनाव हैं तो वह भी राष्ट्रीय मुद्दा बन गया। निकाय चुनावों को भी लोकसभा चुनाव की तरह प्रस्तुत किया गया और आखिर में शाम को नरेन्द्र मोदी की जय और देवेन्द्र फडऩवीस के जयघोष के साथ प्राइम टाइम में अन्य समाचारों को मौका मिल पाया।
मोदी को आपदा में अवसर की तलाश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस समय आपदा में अवसर मंत्र में अवसर तलाश रहे हैं जो अभी तक नहीं मिल पाया और उन्होंने बड़ा दांव लगाते हुए फ्रांस के साथ करीबन चार लाख करोड़ रुपये का रक्षा समझौता करने का निर्णय ले लिया। कारण यही है कि इस समय पाकिस्तान के साथ अन्य देशों के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला इंडोनेशिया अब पाकिस्तान-चीन में निर्मित युद्धक विमान खरीदने के लिए प्रयासरत है। इसी तरह से सउदी अरब, अमेरिका का समर्थन भी पाक को हासिल हो रहा है तो उसके दिन फिर से अच्छे हो रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया विशेष रूप से क्रिकेट टीम को पाक में मैच खेलने के लिए भेज रहा है। यह इस तरह के संकेत हैं जिनसे बहुत कुछ समझा जा सकता है।
सीधे तौर पर भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिनका कोई जवाब देने को तैयार नहीं हो रहा है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू देश है और दुनिया इस बात को जानती है। इसके बाद मुस्लिम देश एकजुट हो रहे हैं औरवह भी पाकिस्तान के साथ तो निश्चित रूप से भारत सरकार के लिए एक बड़ा झटका है।
ईरान में प्रदर्शनकारियों को नहीं मिला साथ, आंदोलन शांत
ईरान में सरकार और आंदोलनकारियों में संभवत: कोई इंटेल समझौता हुआ है जिसके कारण अब वहां पर पुन: शांति हो रही है। रॉयटर ने समाचार दिया है कि वहां पर बाजार खुलने लगे हैं और धीरे-धीेरे शांति लौट रही है।
ईरान में लोग महंगाई और मौजूदा शासन व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के बयान सामने आये और यह भी बताया गया कि अमेरिकी सैन्य हस्ताक्षेप हो सकता है किंतु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान ने 800 लोगों को दी जाने वाली फांसी की सजा को निरस्त कर दिया है, इस कारण वे उनको थेंक्स कहेंगे।
ग्रीनलैण्ड के लिए अमेरिका आगे बढ़ेगा
ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करने के लिए अमेरिका रोज एक कदम आगे बढ़ा रहा है और नया व ताजा बयान भी सामने आया है कि अमेरिका इसको प्राप्त करने के लिए जो भी प्रयास होंगे, वह करेगा।
ग्रीनलैण्ड अमेरिका के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि वह अपने देश की सुरक्षा के लिए यहां पर आधुनिक सैन्य स्टेशन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
इस तरह से अमेरिका ग्रीनलैण्ड को ताजा और बड़ा मुद्दा बनाये रख सकता है।
Wednesday, January 14, 2026
फ्रांस-भारत के बीच नाटो समझौता होगा? पेरिस चुनाव से पहले मैक्रों को राजनीतिक खुराक या मोदी हिटलर की भूमिका निभायेंगे?
श्रीगंगानगर। 19वीं सदी के जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर को इतिहासकार इसलिए याद करते हैं क्योंकि उन्होंने साम्राज्यवाद को विस्तृत रूप देने के लिए दुनिया को विश्वयुद्ध-2 में धकेल दिया था। हिटलर हर जगह पर अपनी तस्वीर, अपना नाम देखना चाहते थे। 19वीं शताब्दी के उस दौर को याद कीजिये जब अधिकांश देशों में वेब प्रेस या टीवी नहीं हुआ करते थे, उस समय हिटलर के साथ हर समय काफिले में एक कार चला करती थी जिसकी छत पर खड़े होकर कैमरामैन उनकी हर गतिविधि को कैप्चर किया करता था। राष्ट्राध्यक्षों के साथ बैठक के दौरान भी हिटलर का स्वयं का कैमरामैन बैठक में तस्वीर लेने के लिए अधिकृत होता था।
भारत गणराज्य की सरकार की कैबिनेट के प्रमुख नरेन्द्र मोदी को देखते हैं तो बरबस ही वह दौर याद आ जाता है। पीएम मोदी स्वयं को नॉन बायोलॉजिकल या ईश्वरीय अवतार के रूप में पेश करते हैं। हजारों की संख्या में उनके पेड कर्मचारी हैं जो सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर पेश करते हैं। जब भी उनको यह लगता है कि वे फ्रंटफुट पर नहीं खेल पा रहे हैं तो तुरंत भगवान शंकर के उपासक के रूप में छाने का प्रयास करते हैं।
सउदी अरब और पाकिस्तान के बीच परस्पर सैन्य सहयोग रक्षा समझौता हुआ है। भारत भी अब उस तरह का समझौता किसी वीटो पॉवर के साथ करना चाहता है। यूएसए से सहयोग नहीं मिला तो वापिस मास्को की ओर रुख करना पड़ा। क्रेमलिन से राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने नई दिल्ली की यात्रा भी की किंतु वे कोई बड़ा आश्वासन देकर गये हों, यह जानकारी सामने नहीं आयी। रूस ने जैनरेशन 6 जैसा फाइटर जेट के लिए कोई समझौता नहीं किया।
जर्मन के चांसलर भी कोई बड़ा आश्वासन देकर गये हों, यह भी जानकारी सामने नहीं आयी। अब फ्रांस के साथ फिर से डील पर बात चल रही है। अगले महीने पेरिस से इमैनुअल मैक्रां आने वाले हैं। मैक्रां की इस समय फ्रांस में लोकप्रियता में लगातार गिरावट को देखा जा रहा है क्योंकि वे एक साल के भीतर पांच प्रधानमंत्री बदल चुके हैं।
अगले साल उनको राष्ट्रपति चुनाव के लिए मैदान में उतरना है। वे भी चाहते हैं कि एक बड़ा रक्षा सहयोग समझौता हो, जिससे वे अपने समर्थक मतदाताओं को विश्वास प्राप्त कर सकें। मैक्रां अगले महीने फरवरी में भारत आ रहे हैं।
उनकी यात्रा को भी लाइमलाइट बनाये जाने की तैयारी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जब दशकों बाद भारत की यात्रा करने वाले प्रथम राष्ट्रपति बने थे तो टीवी पर उनको पांच दिन तक कवरेज किया गया और यह संकेत दिया गया कि दोनों देश नजदीक आ रहे हैं, लेकिन वे भारत से रवाना होने के बाद पाकिस्तान चले गये और इस तरह से भारत की मेजबानी फीकी हो गयी।
अब पेरिस से आने वाले इमैनुअल मैक्रां की भी यात्रा को यही रूप दिया जा रहा है। वे फरवरी माह में नई दिल्ली की यात्रा करेंगे। उस समय भारत और फ्रांस के बीच करीबन 4 लाख करोड़ रुपये अर्थात 4 ट्रिलियन भारतीय रुपये का रक्षा सौदा होगा।
यह फ्रांस के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा सौदा हो सकता है। भारत का हर साल का बजट करीबन 40 लाख करोड़ रुपये का होता है। बजट का 10 प्रतिशत वे रक्षा सौदे के लिए खर्च करने वाले हैं। हर साल बजट में रक्षा मंत्रालय के अधीन जो रुपये जारी किये जाते हैं, यह उससे अलग हैं। इस तरह से करीबन 6-7 लाख करोड़ रुपये रक्षा क्षेत्र में ही खर्च होने वाले हैं।
ट्रम्प से बातचीत नहीं करना चाहते
भारत की आर्थिक स्थिति इस समय बढिय़ा नहीं कही जा सकती। हर साल लाखों बेरोजगार कॉलेज से बाहर आते हैं और उनके लिए कोई स्र्टाटअप, नौकरी आदि का प्रावधान नहीं होता और वे भी बेरोजगारों की सूची में शामिल होकर स्ट्रगल लाइफ का हिस्सा बन जाते हैं।
अमेरिका और भारत गणराज्य की सरकार के बीच कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मतभेद हैं और इसी कारण नई दिल्ली से आयात होने वाले समान पर वाशिंगटन ने 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया हुआ है। अब ईरान से तेल खरीदना भी महंगा हो सकता है। क्योंकि 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का प्रावधान करने के आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दिये हैं।
इस तरह के हालात में होना यह चाहिये था कि भारत सरकार के पीएम मोदी वार्ता के लिए आगे आते और ट्रम्प के साथ वार्ता कर मामले को सुलझाने का प्रयास करते। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर वार्ता रूकी हुई है।
ऐसे में समझौता करने के बजाय भारत सरकार अपने बजट का करीबन 10 प्रतिशत अर्थात 4 लाख करोड़ रुपये फ्रांस को रक्षा क्षेत्र में समझौता करने के लिए खर्च कर रहा है।
चार लाख करोड़ से भारत की सभी तहसीलों में बने अस्पतालों में ब्लड बैंक, सीटी स्कैन जैसी मशीनों का इंतजाम किया जा सकता था। ग्राम पंचायतों को शहरी रूप दिया जा सकता था। इसके अलावा और भी बहुत कुछ हो सकता था जिससे भारतीय लोगों का जीवनस्तर कहीं अधिक मजबूत और हाईलेवल का होता।
अब क्या होता है तहसील मुख्यालय पर डॉक्टर्स और संसाधनों की कमी के कारण उनको जिला मुख्यालय या संभाग मुख्यालय पर रैफर कर दिया जाता है।
अगर देखा जाये तो सामने आता है कि पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार और अन्य पड़ोसी छोटे देश भारत के खिलाफ एकजुट होकर युद्ध करते हैं तो यह युद्ध दो दिन में ही समाप्त हो जायेगा क्योंकि इन लोगों के पास संसाधनों का अभाव है।
इसी तरह से अमेरिका के खिलाफ भारत कब तक संघर्ष कर सकता है। अमेरिका का रक्षा बजट ही भारत के पूर्ण बजट से दो गुणा या उससे भी कहीं अधिक होता है।
सामाजिक सुरक्षा के तहत जो अमेरिका से मदद मिल रही थी, वह भी बंद हो गयी है। अमेरिका ने भारत सरकार को तीन साल दिये हैं और तीन सालों के भीतर भारत-अमेरिका के बीच युक्रेन युद्ध को लेकर बात नहीं बन सकी।
आईएमएफ के अध्यक्ष अजय बंगा भारतीय मूल के हैं तो इस कारण यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था भी भारत सरकार के बाबुओं के आकड़ों के आधार पर तेजी से उभरती संस्था का तगमा दे देती है। बंगा को जब बाइडेन प्रशासन ने नियुक्त किया था तो उस समय वे मोदी का आशीर्वाद लेने के लिए दिल्ली आये थे। इस तरह से मोदी और बंगा के बीच जो संबंध हैं, वह दुनिया के सामने आ चुके हैं।
सेना को मजबूत करने की जरूरत लेकिन..
भारतीय सेना को मजबूत करने की आवश्यकता है लेकिन अन्य मदों में कटौती कर एक युद्ध की तैयारी में जुट जाना भारत जैसे तीसरी दुनिया के देश के लिए उचित कहा जा सकता है?
भारत को गांवों से शहरों की ओर पलायन, महिला सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और गर्भवती महिलाओं के जीवन को मजबूत करने के लिए उद्यम करने की आवश्यकता है। करोड़ों लोगों को रोजगार की चिंता करनी है। यूरोपीय देश विकसित राष्ट्र होने के बावजूद रक्षा खर्च के लिए आवश्यक बजट का प्रावधान करते हुए अपने देश के नागरिकों की जीवन रक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाते हैं।
हम अगर पीएम मोदी की एडोल्फ हिटलर बनने की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ जाते हैं तो क्या होगा?
अमेरिकी तनाव के बीच भारत पर ऋण का दबाव बढ़ता जा रहा है और इसके लिए यह आवश्यक हो जायेगा कि भारत सरकार अतिरिक्त लोन ले या अतिरिक्त नोट छापे जिससे दोनों ही परिस्थितियों में महंगाई बढ़ जायेगी।
पेरिस अगर भारत की रक्षा नहीं कर पाया तो...
मैक्रां दो साल पहले जयपुर आये थे। 25 जनवरी 2024 को जयपुर में रोड शो में भाग लिया था। चाय पर चर्चा की थी और यूपीआई से चाय का भुगतान किया था और फिर भाजपा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया था।
मैक्रां जो स्वयं पेरिस में राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं। अगले साल उनको विभिन्न तरह के आंदोलन यथा लीविंग कोस्ट आदि को लेकर चुनाव मैदान में उतरना है और वे भारत सरकार के साथ नाटो जैसा समझौता नहीं कर पाये तो 4 लाख करोड़ रुपये खर्च करने के क्या फायदे या नुकसान होंगे?
Tuesday, January 13, 2026
ट्रम्प भारत क्यों नहीं आना चाहते? 25 प्रतिशत और टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी, क्वाड का क्या होगा?
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति को इस साल भारत में क्वाड की बैठक में भाग लेने के लिए आना था, लेकिन उनका कार्यक्रम नहीं बन पा रहा है तो ऐसे समय में यह सवाल खड़ा होना लाजमी हो गया है कि डोनाल्ड ट्रम्प क्यों नहीं दिल्ली की यात्रा करना चाहते? वहीं उन्होंने ईरान से तेल और अन्य व्यापार करने वालों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की चेतावनी दी है और इसको तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया है।
भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य प्रशांत महासागर की सुरक्षा चिंताओं को लेकर एक समूह का संचालन कर रहे थे। इसका नाम क्वाड रखा गया था। हर साल चारों में से एक देश में बैठक होती थी। भारत में 2024 में बैठक होनी थी किंतु बाइडेन ने चुनावी वर्ष होने के कारण दिल्ली आने से इंकार करते हुए इस बैठक का आयोजन अपने ही देश में रख लिया। वर्ष 2025 की मेजबानी भारत को दी गयी, लेकिन यह बैठक नहीं हो पायी।
गत 21 जनवरी 2025 को ट्रम्प ने राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला था किंतु व्हाइट हाउस के साथ पहले जैसा मधुर संबंध नहीं होने के कारण ट्रम्प का भारत दौरे का कार्यक्रम बन ही नहीं पाया। अब 2026 में बैठक होनी है किंतु फिर से वही सवाल खड़ा हो रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प भारत नहीं आना चाहते। इससे यह साफ हो रहा है कि क्वाड का भविष्य में अस्तित्व समाप्त होने की संभावना है।
वहीं अमेरिका के पास इस साल जी-20 की बैठक की मेजबानी की जिम्मेदारी है। यह पहली तिमाही में होने की संभावना जतायी गयी थी। ट्रम्प चाहते हैं कि फ्लोरिडा स्थित उनके निजी आवास मार ए लागो में यह बैठक हो। हालांकि ईरान में नयी परिस्थितियां और ग्रीनलैण्ड को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के बीच अभी तक तारीख मुकर्रर नहीं हो पायी है। जी-20 में भारत के साथ-साथ यूरोपीय समूह भी शामिल है।
मादुरो के खिलाफ कार्यवाही से कई नेता सकते में
निकोलस मादुरो कुछ दिन पूर्व तक दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति थे और वे लगातार 10 साल से भी अधिक समय से इस पद पर थे। वक्त कहता है कि बदलना होगा। समय से बड़ा कोई बलवान नहीं हुआ और निकोलस अब अमेरिकी जेल में है और उनके खिलाफ अमेरिका के खिलाफ द्रोह का मुकदमा चलाये जाने की तैयारी की जा रही है। इस तरह की कार्यवाही के बाद अनेक देश सकते में है कि आधा घंटा से भी कम समय में हजारों हथियारबंद लोगों के बीच से एक राष्ट्रपति का उठा लिया जाता है तो अमेरिका के राष्ट्रपति कुछ भी कर सकते हैं।
ईरानियों से कहा, डरो मत-सहायता रास्ते में हैं
डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर से सनसनी फैला दी है। उन्होंने कहा, ईरानियों डरो मत, सहायता रास्ते में है। हालांकि उन्होंने इसका पूरा ब्योरा पत्रकारों को नहीं दिया। इस समय ईरान के भीतर अशांति का माहौल है और वहां पर लोग इस्लामी कानून या शासन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इस समय मुद्रा रसातल में है और महंगाई हर रोज बढ़ती जा रही है।
ट्रम्प ने अब दुनिया को चेताया है कि ईरान से तेल या अन्य व्यापार करने वालों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जायेगा। इस तरह से भारत के खिलाफ यह टैक्स की दर बढक़र 75 प्रतिशत हो जायेगी।
ईरान में सत्ता के खिलाफ चल रहे आंदोलन में सरकारी गोलियों से मरने वालों की संख्या सैकड़ों में बतायी जा रही है हालांकि वहां पर इंटरनेट सेवाओं के बंद होने के कारण पूरी जानकारी बाहर नहीं आ रही है।
Sunday, January 11, 2026
सौलर ऊर्जा को मिलने वाली 80 हजार रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी? फ्रांस के राष्ट्रपति से पहले जर्मन चांसलर आज भारत आ रहे हैं
श्रीगंगानगर। अपाचे और चिनूक जैसे हैलीकॉप्टर के लिए करीबन पांच साल पहले भारत गणराज्य की सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ समझौता किया था। उस समय वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रम्प थे और भारत में नरेन्द्र मोदी।
व्हाइट हाउस में 21 जनवरी 2025 को एक भव्य कार्यक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रम्प दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने पहुंचे तो भारत गणराज्य की सरकार मान रही थी कि अपाचे और चिनूक हैलीकॉप्टर मिल जायेंगे, लेकिन इस बार साहब बदले-बदले से नजर आ रहे हैं और इसी कारण यह सौद आज एक साल बाद भी लम्बित है।
रूस भी इंडिया के साथ फाइटर जेट के बारे में समझौता नहीं कर सका क्योंकि राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने जो शर्त रखीं थीं, वह शायद पूरी नहीं हो पायी हैं। नये जेट पर बात नहीं बनी तो एक बार पुन: फ्रांस की ओर रुख करना पड़ा। फ्रांस के पास फिलहाल राफेल की जनरेशन 4 की टैक्रोलॉजी है। 5 को तैयार करने में वक्त लगेगा। इस कारण 4 के लिए ही समझौता हो रहा है और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां अगले माह फरवरी में नई दिल्ली आ रहे हैं।
वहीं जर्मन चांसलर कल सोमवार से भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। जर्मन के साथ भारत का 50 अरब डॉलर का प्रतिवर्ष व्यापार है और करीबन 2 हजार इस देश की कंपनियां विभिन्न स्थानों पर कार्यरत है।
जर्मन और भारत दोनों को ही यह माना जा सकता है कि यह भी अमेरिका की मार के मारे हुए हैं। दोनों देश यूएसए को दवाइयां भेजते हैं और जर्मन पहले व भारत दूसरे स्थान पर है।
इस समय पूरी दुनिया में वल्र्ड वॉर-3 की चर्चा हो रही है तो उस समय नाजी के देश से राष्ट्राध्यक्ष आ रहे हैं तो चर्चा होनी स्वभाविक है। प्रधानमंत्री ने उनको अपने गृह प्रदेश गुजरात की धरती पर बुलाया है। वहां वे सोमवार का दिन रहेंगे और इसके बाद चांसलर बंगलुरू चले जायेंगे तो नरेन्द्र मोदी वापिस प्रधानमंत्री कार्यालय अथवा निवास पर आ जायेंगे।
दवा निर्माण के अग्रणी देशों पर अमेरिका ने भारी भरकम टैरिफ लगाया है और कुल मिलाकर यूएसए टैरिफ से ही 18 ट्रिलियन डॉलर कमा चुका है।
अमेरिका और जर्मन की भी बात हो चुकी है और एक माह बाद ही चांसलर भारत की यात्रा पर आ गये हैं।
मोदी को ट्रम्प ने दिया जोर का झटका
इस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता अपने इतिहास में सबसे कमजोर चल रही है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मोदी को एक और झटका दे दिया है।
बाइडेन प्रशासन के समय भारत सरकार और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें फ्रांस भी शामिल था। इस तरह से यह एक समूह बन गया था। भारत के नेतृत्व वाले समूह को आईएसए का नाम दिया गया था। यह समूह भारत में सोलर पैनल के लिए सब्सिडी उपलब्ध करवाता था ताकि हरित ऊर्जा के नाम पर लोगों को साथ जोड़ा जा सके।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अब भारत और फ्रांस वाले संगठन से अपने को अलग कर लिया है। सौर ऊर्जा के लिए 80 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही थी जो अमेरिका से आ रही थी। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील ही नहीं हो पायी। अमेरिका के वित्त मंत्री बिसेंट का कहना है कि पीएम मोदी ने ट्रम्प से फोन पर वार्ता करना तक उचित नहीं समझा, इस कारण डील को एक बार रोक दिया गया है।
अब सवाल यह है कि 80 हजार रुपये की सब्सिडी देने वाली इस योजना का क्या होगा। अभी तक भारत सरकार ने यह खुलासा तो किया नहीं था कि वह अमेरिका से मिलने वाली सहायता के जरिये सब्सिडी दे रहा है।
सौर ऊर्जा पर सब्सिडी दिये जाने से लोगों में आकर्षण बढ़ा था और अब संभवत: भारत सरकार भी अपने हाथ पीछे खींच सकती है। औपचारिक रूप से इस योजना के बारे में सरकार की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गयी है।
Saturday, January 10, 2026
ट्रम्प ने चीन को बेचारा बना दिया?
श्रीगंगानगर। ब्रिक्स के जरिये दुनिया से अमेरिका का प्रभुत्व समाप्त करने के लिए चीन, रूस आदि ने एक राय होकर अपनी करंसी निकालने का निर्णय लिया था,उसी तरह से जैसे यूरोपीय संघ की अपनी मुद्रा है जो सदस्य देशों की मुद्रा और उनके भाव से अलग है।
अगर समाचार को संक्षेप में बनाया जाये तो इसको गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अपनी कैद में ले लिया है और अब काराकस में वही हो रहा है जो डोनाल्ड ट्रम्प ओवल ऑफिस में बैठकर निर्णय ले रहे हैं क्योंकि वहां पर उपराष्ट्रपति को ही कार्यवाहक पे्रजीडेंट बना दिया गया है। वेनेजुएला के तेल पर पहले चीन का दबदबा था जो अब वाशिंगटन का हो गया है।
दूसरी ओर अन्य तेल उत्पादक देश सउदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ ट्रम्प परिवार के व्यापारिक रिश्ते हैं। ट्रम्प के दामाद जे. कुशनर और मोहम्मद बिन सलमान मित्र ही नहीं पार्टनर भी हैं।
वहीं ट्रम्प ने इजरायल की नाराजगी को अनदेखी कर सउदी को आधुनिक हथियार बेचने का निर्णय लिया है। इस तरह से अरब की सुरक्षा सुनिश्चित कर दी गयी है। इस कारण मोहम्मद बिन सलमान चीन या अन्य किसी राष्ट्र के दबाव में नहीं आने वाला है।
यूएई और अन्य देश पहले ही कई देशों के साथ समझौते में है। ईरान और रूस पर तेल आयात करने पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जिसको टैरिफ के रूप में स्वीकार किया जाता है।
अब नाइजरिया और कई अन्य देश रह गये हैं जो ब्रिक्स देशों की मांग को पूरा नहीं कर पायेंगे। इस तरह से चीन को एक तरह से बेचारा बना दिया है।
भारत-चीन पर 500 प्रतिशत जुर्माने का प्रावधान
एक निजी बिल जो रिपब्लिकन सांसद ने पेश किया था, उस बिल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रमप ने हस्ताक्षर कर दिये हैं। संसद में रिपब्लिकन का दबदबा है और वह बिल पास हो जाता है तो ब्रिक्स के भारत, चीन व ब्राजील पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
ट्रम्प के पास असीमित शक्तियां हैं?
डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति के रूप में दूसरी बार व्हाइट हाउस आये हैं तो उनके पास फस्र्ट टर्म के मुकाबले कहीं ज्यादा अनुभव है। उनको पता है कि उनके पास असीमित शक्तियां हैं। संसद से उनकी किसी योजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित भी हो जाता है तो वह कानून नहीं बन पायेगा क्योंकि ट्रम्प उसको वीटो कर सकते हैं और दूसरी बार संसद में पास करवाने के लिए उस बिल के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो शायद मुमकिन नहीं है।
ट्रम्प अपनी शक्तियां को जान व पहचान गये हैं और इसी कारण उन्होंने कहा है कि उनको अंतरराष्ट्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है।
दुनिया पर दबदबा क्यों हैं अमेरिका का?
संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य कार्यालय अमेरिका में स्थापित हो गया है और वर्ष भर से वहीं से ही सारे कार्य होते हैं। वहीं सितंबर माह में वार्षिक सम्मेलन का आयोजन होता है और उस समय करीबन 100 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष अमेरिका का दौरा करते हैं। वे यूएन की सभा को संबोधित करने के बाद अमेरिका की सैर भी करते हैं तो वह भी अमेरिकी धन के माध्यम से होता है।
हर साल अरबों डॉलर अमेरिका यूएन की बैठक के लिए खर्च करता है और वीवीआईपीज की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल की नियुक्ति की जाती है।
इस तरह से हर साल अरबों रुपये वह खर्च कर दुनिया पर अपना दबदबा बनाये रखता है और उसका यह अधिकार भी है। बाकी देश तो अपनी जनता की सुरक्षा के लिए रक्षा बजट को भी बढ़ाने से पहले अनेक बार विचार करते हैं।
फ्रांस क्या भारत को बेच रहा है राफेल
संभवत: रूस के साथ भारत की आधुनिक विमान खरीदने की योजना धरी की धरी रह गयी है और इसी कारण वीटो पॉवर वाले देश फ्रांस को प्रसन्न करने के लिए भारत सरकार कई हजार करोड़ के हथियार और लड़ाकू विमान खरीद रहा है।
हालांकि राफेल 4.5 जनरेशन के हैं लेकिन इसके बावजूद खरीद करना भारत की मजबूरी हो गयी है। विमान बनाने वाले देशों में अमेरिका, रूस और फ्रांस आदि देश ही हैं। अमेरिका ने हथियार बेचने से इन्कार कर दिया क्योंकि वहां पर सत्ता बदल गयी है और ट्रम्प पहले पीएम नरेन्द्र मोदी से अपनी नाराजगी दूर करना चाहते हैं।
इस तरह से राफेल खरीद के लिए अगले माह समझौता हो सकता है और राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां भारत यात्रा पर आ रहे हैं, उस दौरान समझौता हो सकता है।
Friday, January 9, 2026
ईरान सरकार गायब, खामनेयी ही निर्णय ले रहे हैं, तुर्कीये और सउदी के बीच गठबंधन की संभावना
श्रीगंगानगर। ईरान में चल रहे आंदोलन को दबाने के लिए अयातुल्ला खामनेयी ने सैन्य कार्यवाही की ओर संकेत किया है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बात को लेकर पहले ही कह चुके हैं कि अगर प्रदर्शनकारियों पर कोई भी कार्यवाही हुई तो संयुक्त राज्य हस्ताक्षेप करेगा। आंदोलन और हत्याओं, आगजनी के बीच ईरानी सरकार का कोई बड़ा अधिकारी नजर नहीं आ रहा जो भी निर्णय हो रहे हैं वह खामनेयी ही अकेले ले रहे हैं। ईरान में कुछ समय पूर्व भी महिलाओं ने बुर्का हटाने के लिए अभियान चलाया था जिसको दबा दिया गया था।
संवाद सेवा के अनुसार ईरान में अब तक शासन की ओर से की गयी कार्यवाही में कम से कम 60 लोग मारे गये हैं। दर्जनों लोग गंभीर घायल हैं। समाचारों में बताया गया है कि ईरानी लोगों के आंदोलन को दबाने के लिए सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला खामनेयी ही सामने आ रहे हैं। उनके अतिरिक्त ईरानी सरकार के राष्ट्रपति या मंत्री सामने नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को आंदोलनकारियों ने बसों, सरकारी इमारतों और सरकारी मीडिया भवनों को आग के हवाले कर दिया था।
खामनेयी इस सब आंदोलन के पीछे अमेरिका का हाथ बता रहे हैं लेकिन अमेरिका ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है किंतु राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि वे जमीनी या हवाई सैन्य कार्यवाही का आदेश कभी भी दे सकते हैं क्योंकि इरान में हत्याओं को रोका नहीं जा रहा है।
अमेरिका ने कहा, रूस और चीन को हम तेल देंगे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला में तेल शोधन के लिए विश्व की प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ शुक्रवार शाम को वार्ता की। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और अमेरिका चाहता है कि वहां पर अमेरिकी और अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियां निवेश कर तेल का शोधन करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, चीन और रूस की तेल जरूरतों को अमेरिका पूरा कर सकता है। वे हमसे संपर्क कर सकते हैं।
सउदी अरब के साथ गठबंधन को तैयार तुर्कीये
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान-सउदी अरब गठबंधन के साथ अब तुर्कीय भी समझौता करना चाहता है। अभी तक सउदी और तुर्कीये को अलग-अलग दिशा वाले माना जाता था किंतु अब तुर्कीय ने रुचि ली है।
वहीं मुस्लिम देशों ने गाजा और ईरान के हालात को देखते हुए शनिवार को एक असाधारण बैठक करने का निर्णय लिया है, इसमें सभी सदस्य देश, जिनकी संख्या 50 से ज्यादा है, भाग लेंगे। विदेश मंत्री स्तर की बैठक में तुर्कीये, सउदी और पाक के बीच समझौते पर बात बन सकती है। यह सब अभी मीडिया रिपोर्ट है और किसी ने भी इस संबंध में औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।
90 प्रतिशत लोग सडक़ों पर
ईरान में दावा किया जा रहा है कि 90 प्रतिशत लोग सडक़ों पर हैं और वे महंगाई, मुद्रा की गिरती साख को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वे तुरंत प्रभाव से सरकार को हटाने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है। इससे पहले विश्व को ध्यान होगा कि महिलाओं ने देश में बुर्का प्रथा को बंद करने के लिए भी आंदोलन किया था किंतु उस समय सरकार ने इस आंदोलन को दबा दिया था। इस बार भी महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले अधिक दिखाई दे रही है।
वेनेजुएला के बाद ट्रम्प की नजर ईरान पर!
श्रीगंगानगर। वेनेजुएला में कार्यकारी सरकार का गठन करने के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के मौजूदा हालात पर नजर रख रहे हैं और माना जा रहा है कि शीघ्र ही तेहरान में भी बांग्लादेश, नेपाल की तरह तख्ता पलट हो सकता है।
वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ करने के बाद वहां पर उपराष्ट्रपति को अस्थायी तौर पर कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। दूसरी ओर इस मुद्दे पर सीनेट में चर्चा हुई और एक प्रस्ताव, जो डेमोक्रेट्स लेकर आये थे, उनमें पांच रिपब्लिकन का भी समर्थन हासिल हो गया और इस तरह से प्रस्ताव सीनेट से पास होकर नीचले सदन कांग्रेस के पास चला गया है। वहां पर रिपब्लिकन बहुमत में हैं।
राष्ट्रपति के पास वीटो पावर है। अगर ट्रम्प के पास यह प्रस्ताव दोनों सदनों में पारित होकर राष्ट्रपति तक पहुंचता भी है तो वे अपने वीटो पॉवर के माध्यम से उसको निष्फल कर सकते हैं। इसको पुन: संसद में पारित करवाना होगा वह भी दो तिहाई बहुमत से। इस तरह से इस प्रस्ताव का कोई भौतिक कारण नहीं है।
दूसरी ओर ईरान सरकार ने अपने खिलाफ चल रहे आंदोलन के बाद पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है। सर्वोच्च नेता आयातुल्ला खामनेई को हटाकर इस्लामी शासन को समाप्त करने की मांग यह लोग कर रहे हैं।
सर्वोच्च नेता ने पश्चिमी देशों पर युवाओं को समर्थन देने का आरोप लगाया है। हालांकि इसको जेन-जैड का नाम नहीं दिया गया है किंतु यह आंदोलन बांग्लादेश, नेपाल आदि देशों की तरह ही है, जहां पर सरकार का तख्ता पलटना ही मुख्य उद्देश्य बन गया है क्योंकि ईरान ने गोलीबारी कर 45 प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया है।
राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि अगर आंदोलनकारियों को कुचलने की चेष्टा की गयी तो वह ईरान के खिलाफ सेना शक्ति का प्रयोग कर सकता है। पहले ही ट्रम्प ने बजट को 50 प्रतिशत बढ़ाते हुए 1.50 ट्रिलियन डॉलर करने के लिए संसद को लिखा है।
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