Tuesday, January 20, 2026
चादर पर दाग तो तब लगेगा जब जांच होगी, मोदी सरकार पर सवाल उठे लेकिन उसी तरह से दबा भी दिये गये
श्रीगंगानगर। वर्ष 1999 से पहले शायद नरेन्द्र मोदी को गुजरात के भी 10 प्रतिशत से अधिक लोग नहीं जानते थे और जब वे अचानक ही सीएम बनाये गये तो उसके बाद साबरमती एक्सप्रेस घटना ने उनको देश और दुनिया के पटल पर ला दिया। अमेरिका ने उनके वीजा को निलम्बित कर दिया। इस तरह से देश और दुनिया को मोदी के बारे में जानकारी प्राप्त हुई थी। अब वे पीएम बने हुए 10 साल से ज्यादा का वक्त गुजार चुके हैं। उस समय वे कहते हैं कि 22 साल की राजनीति में उनकी चादर पर कोई दाग नहीं है।
पहले कार्यकाल में 2016 की नोटबंदी और अन्य प्रकार के विवादित निर्णय लेने के कारण उनकी लोकप्रियता में काफी कमजोरी आ गयी थी। वे आसियान यात्रा के दौरान एक मस्जिद में भी चले गये। उनकी बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि उनको नहीं लग रहा किवे पुन: पीएम कार्यालय में पहुंचेंगे। उधर हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा का आदेश हो गया कि भाजपा को इस बार 300 से अधिक सीट हासिल होंगी और वही हुआ। इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कह चुके थे कि इस बार वोट मांगने भी नहीं जा सकते।
वे उस समय स्वयं को फकीर कहते थे और झोली उठाकर चलने का प्रवचन करते थे। मोदी यह भी कहा करते थे कि वे ‘अब्दुल’ की भी खबर लेंगे। आखिर यह अब्दुल कौन था, जिसकी खबर लेने की बात वे कर रहे थे।
अमिताभ बच्चन अभिनीत शान फिल्म का यह किरदार अब्दुल एक गीत के जरिये मशहूर हुआ था। उस गीत के बोल थे, अब्दुल है मेरा नाम, सबकी खबर रखता हूं...। अब यह एसीसोड को यहीं पूरा कर दिया जाये तो आगे देखते हैं कि मोदी 2.0 में भी ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ, जिसका जिक्र किया जाये। बुलेट ट्रेन नहीं आयी। 100 स्मार्ट सिटी नहीं बने।
लोकप्रियता का ग्राफ गिर रहा था और 2024 के चुनाव में बहुमत प्राप्त करने से दूर रह गये। अब भारत की राजनीति पर नजर डाली जाये तो सामने आता है, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडू आदि राज्य। यह स्विंग राज्य हैं। जिधर मतदाता जायेगा, वही सरकार बनेगी।
ऐसा नहीं है कि मोदी बहुत ज्यादा ईमानदार हैं। उनकी चादर पर कोई दाग नजर नहीं आता। वे स्वयं को ईमानदार होने का प्रमाण पत्र जारी करते हैं, एक बार नहीं सौ बार उनका बयान आया है।
अगर देखा जाये तो राफेल खरीद को ही गौर से नजर डाली जाये। इस खरीद से जुड़े अमित शाह, मोदी को छोडक़र अन्य कोई जीवित नहीं है। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, सीडीएस विपिन रावत, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी।
इन सभी का निधन कुछ ही समय के अंतराल में हुआ। हालांकि इन सभी का निधन बीमारी होने से बताया गया है लेकिन...?
अनिल अम्बानी को इसका ऑफसैट पार्टनर बनाया गया जिसके लिए उनकी रक्षा क्षेत्र की कंपनी भी स्थापित करवायी गयी। आज अनिल सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उनकी कंपनियां फेल हो चुकी हैं और सीबीआई, ईडी उनकी कंपनियों की जांच कर मुकदमा भी दायर कर चुकी हैं।
इस तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि मोदी एक बहुत ज्यादा ईमानदार नेता है। उनकी चादर पर दाग नहीं है। गौतम अडाणी को लेकर सवाल उठे। मामला उच्चस्तर पर भी गया किंतु जांच कौन करे?
जो लोग जांच कर सकते हैं उनको रिटायरमेंट के बाद भी जॉब पक्की है। तत्कालीन गृह सचिव को ही लिजिये, अजय भल्ला दो बार एक्सटेंशन के बाद अब मणिपुर के राज्यपाल हैं। कुछ दिनों बाद वे बिहार, राजस्थान या उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के भी गर्वनर बन सकते हैं।
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